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Kumar, Satayendra, L. B. Rawal, and Saudan Singh. "GEOGRAPHICAL ANALYSIS OF SIZE AND PATTERN OF VILLAGES IN RAMPUR DISTRICT." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 8, no. 7 (2020): 46–49. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v8.i7.2020.577.

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Abstract:
Habitat geography is the new sprout branch of human geography. Both rural domicile and urban domicile are the two main strands of geography. Habitat geography studies the effect of physical and cultural considerations on man-made habitats, just as human geography describes the environment and human interactions. Human occupancy is the focal center within and around which man builds his culture. Human occupancy refers to all the natural elements and man-made structures that the process of habitat establishes, habitat boundaries that separate them from each other, spatial relationships that link
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पाठेकर, रवि आर. "सारस – एक चिकित्सक अभ्यास". Journal of Research & Development 17, № 3 (2025): 147–53. https://doi.org/10.5281/zenodo.15294698.

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Abstract:
<strong><em>गोषवारा:-</em></strong> <em>जगातील हवेत उडणारा सर्वात उंच पक्षी म्हणून गौरविल्या जाणार्या सारस पक्ष्याचा महाराष्ट्रातील अधिवास हा धोक्यात आलेला आहे. महाराष्ट्राच्या पूर्व टोकास असलेल्या गोंदिया जिल्ह्यात ३० तर भंडारा जिल्ह्यात २ सारस पक्षी उरलेले आहेत. व्यग्र संवर्धन व वन उपज उत्पन्नावर लक्ष केंद्रित असलेल्या वनविभागाचे सारस पक्ष्याकडे दुर्लक्ष होणारी ओरड नेहमीच होते. याची मुंबई उच्च न्यायालयाच्या नागपूर खंडपीठाने दाखल घेत सरकारला जाब विचारला. या नंतर विविध सरकारी यंत्रणा कामाला लागल्या. आता सारस पक्षी व त्याचा अधिवास वाचविण्यासाठी मोठे प्रयत्न सुरु झालेले आहेत. पण सारस पक्षी वाचवि
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माने, पार्वती विनायक. "हैदराबाद विद्यापीठातील ४०० एकर जंगलतोड: वन्यजीव संरक्षण आणि अधिवास नाशाच्या संदर्भातील संघर्ष". Journal of Research & Development 17, № 4 (2025): 157–60. https://doi.org/10.5281/zenodo.15545141.

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Abstract:
<strong><em>सारांश</em></strong> <em>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;हैदराबाद विद्यापीठातील ४०० एकर जंगलतोड हा भौगोलिक दृष्ट्या योग्य नाही. यामुळे जंगलतोड झाल्याने अनेक वन्यजीव बेघर होणार होते. तसेच शहरातील वातावरण देखील स्वच्छ हवे अभावी दुषित होणार होते. त्यामुळे असे औद्योगिक प्रकल्प जेणेकरून जंगल नसलेल्या ठिकाणी जर उभे केले तर त्याचा फायदा पर्यावरण संरक्षणासाठी होणार आहे. या ठिकाणी जर प्राध्यापक व विद्यार्थी, तसेच सामाजिक संघटना यांनी एकत्रित येवून आंदोलन केले नसते तर संपूर्ण जंगल नष्ट होवून अनेक प्राणी व पक्षी यांचे भवितव्य धोक्यात आले असते. प्
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माने, पार्वती विनायक. "हैदराबाद विद्यापीठातील ४०० एकर जंगलतोड: वन्यजीव संरक्षण आणि अधिवास नाशाच्या संदर्भातील संघर्ष". Journal of Research & Development 17, № 4 (2025): 147–51. https://doi.org/10.5281/zenodo.15561366.

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Abstract:
<strong><em>सारांश</em></strong> <em>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; हैदराबाद विद्यापीठातील ४०० एकर जंगलतोड हा भौगोलिक दृष्ट्या योग्य नाही. यामुळे जंगलतोड झाल्याने अनेक वन्यजीव बेघर होणार होते. तसेच शहरातील वातावरण देखील स्वच्छ हवे अभावी दुषित होणार होते. त्यामुळे असे औद्योगिक प्रकल्प जेणेकरून जंगल नसलेल्या ठिकाणी जर उभे केले तर त्याचा फायदा पर्यावरण संरक्षणासाठी होणार आहे. या ठिकाणी जर प्राध्यापक व विद्यार्थी, तसेच सामाजिक संघटना यांनी एकत्रित येवून आंदोलन केले नसते तर संपूर्ण जंगल नष्ट होवून अनेक प्राणी व पक्षी यांचे भवितव्य धोक्यात आले असते. प्
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राजेश, यादव, та केशव प्रसाद यादव प्रो०. "कैमूर जिला के दुर्गावती प्रखण्‍ड का ग्रामीण विकास की सामाजिक-आर्थिक सुविधाएँ". International Journal of Advance and Applied Research 10, № 2 (2022): 136–45. https://doi.org/10.5281/zenodo.7476689.

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Abstract:
किसी भी क्षेत्र के ग्रामीण विकास में समेकित ग्रमीण विकास प्रक्रिया को तेज गति देने हेतु सामाजिक एवं आर्थिक सेवाओं की नियोजन एक प्राथमिक आवश्यकता है। ह्वाइट महोदय के अनुसार &lsquo;&lsquo;मानव द्वारा प्राकृतिक एवं जैविक संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग हेतु अपनी ऐतिहासिक परम्पराओं के अनुरूप सदियों से विकसित अधिवास एवं भूमि उपयोग प्रारूप अधिवासों की पदानुक्रमिक व्यवस्था तथा उसके अनुरूप सेवाओं एवं सुविधाओं का वितरण इत्यादि का अध्ययन करता है तथा ग्राम्य जीवन में कई तरह के दशाओं में सुधार करता है जो सामाजिक परिवेश से जुड़े होते हैं। समेकित ग्राम्य विकास के अन्तर्गत समुदायिक विकास एक गत्यात्मक प्रक्रिया है
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गुप्ता, विशाल कुमार, та सुशील कुमार गुप्ता. "जौनपुर जिले के स्नातकोत्तर स्तर कला वर्ग के छात्रों एवं छात्राओं का अधिवास (ग्रामीण एवं नगरीय) के आधार पर आधुनिकता के प्रति अभिवृत्ति का तुलनात्मक अध्ययन". International Journal of Science and Social Science Research 2, № 3 (2024): 157–64. https://doi.org/10.5281/zenodo.14227497.

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Abstract:
आधुनिक समाज में शिक्षित छात्र एवं छात्राओं की भूमिका पिछड़ी जाति का प्रश्न अब स्पष्ट हो जाता है क्योंकि देश के विकास कार्यक्रमों का भार अब इन पर ही है। राष्ट्र के युवक और युवतियों को शिक्षित करके ही हम राष्ट्र के कल्याणकारी, प्रजातांत्रिक, समाजवादी मूल्य का विकास कर सकते हैं क्योंकि यही युवक और युवतियाँ बच्चों में अच्छी आदतों का निर्माण, स्वस्थ मानसिक विकास तथा उनमें लोकतांत्रिक नागरिक गुणों का विकास कर सकते हैं। इन्हीं गुणों से ही बालक का सर्वांगीण विकास होगा। परम्परागत समाज में पिछड़ापन, रूढ़िवादिता, प्राचीन मूल्य तथा जीवन शैलियों का प्रचलन रहा है। भारत जैसे विशालकाय विकासशील राष्ट्र में परम
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मुक, ुन्द कुमार. "वस्त्र अलंकरण म ें र ंगा ें की पुरातन भ ूमिका". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.888816.

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Abstract:
रंग वस्त्र आकल्पन (अलंकरण) का मूलाधार है। वस्त्र्ा के अनुरूप रंग द्रव्य¨ ं ;कलमेद्ध का चयन आ ैर उनक े प्रय¨ग की तकनीक, कलाकार अथवा रंगरेज के निजी दृष्टिक¨ण एवं उनक े अनुभव पर आधारित ह¨ती है। रंग¨ ं का, व्यक्ति की मन¨भावनाअ¨ ं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इन्हीं पहल ुअ¨ं का अध्ययन करके वस्त्र्ा¨ं क े विविध प्रकार क े अनुसार रंगद्रव्य का सफलताप ूर्वक प्रय¨ग किया जाता ह ै। वस्त्र्ा रंर्गाइ की कला अतिप्राचीन ह ै। भारतवर्ष में र्कइ ऐसे प्रमाण मिलते ह ैं जिनमें वस्त्र्ा ब ुर्नाइ एवं वस्त्र्ा-रंर्गाइ के विषय र्में इ सा प ूर्व एवं उत्तरार्ध में मनुष्य¨ ं क¨ ज्ञान था। वस्त्र्ा ब ुनाई अ©र रंर्गाइ के इतिहास
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Rimal, C. P. "सिंहदरबारको अधिकार गाउँगाउँमा". Intellectual Journal of Academic Research (IJAR) 2, № 1 (2024): 111–25. https://doi.org/10.5281/zenodo.13513140.

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Abstract:
नेपालको राजनैतिक इतिहास, राणाकाल , पंचायती शासन व्यवस्था, बहुदलीय ब्यवस्था र गणतन्त्र प्राप्त पछि नयाँ संबिधान २०७२ प्राप्त भएपछि &nbsp;तीन तहको राज्यको पुर्न संरचनाले गाउँलाई स्थानीय निकायबाट स्थानीयतहमा परिवर्तन गरीदिएको छ । ७ सय ५३ स्थानीय तहमा तत्काल विभिन्न तहका गरी ३६ हजार कर्मचारी आवश्यक भए पनि ती निकायमा मुस्किलले करिव २२ हजार कर्मचारी मात्रै कार्यरत छन् । निर्वाचन मार्फत स्थानीय तहमा जनप्रतिनीधि &nbsp;दोश्रो पटक समेत आइसके पनि स्थानीय तहले प्रभावकारी ढंगले काम गर्न नसक्दा सिंहदरबारको अधिकार गाउँगाउँमा पुगेको जनताले महसुस गर्न पाएका छैनन् । अझै केन्द्रीकृत शासन प्रणाली कायमै रहेको सरका
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Rimal, C. P. "सिंहदरबारको अधिकार गाउँगाउँमा". Intellectual Journal of Academic Research (IJAR) 2, № 1 (2024): 111–25. https://doi.org/10.5281/zenodo.13513140.

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Abstract:
नेपालको राजनैतिक इतिहास, राणाकाल , पंचायती शासन व्यवस्था, बहुदलीय ब्यवस्था र गणतन्त्र प्राप्त पछि नयाँ संबिधान २०७२ प्राप्त भएपछि &nbsp;तीन तहको राज्यको पुर्न संरचनाले गाउँलाई स्थानीय निकायबाट स्थानीयतहमा परिवर्तन गरीदिएको छ । ७ सय ५३ स्थानीय तहमा तत्काल विभिन्न तहका गरी ३६ हजार कर्मचारी आवश्यक भए पनि ती निकायमा मुस्किलले करिव २२ हजार कर्मचारी मात्रै कार्यरत छन् । निर्वाचन मार्फत स्थानीय तहमा जनप्रतिनीधि &nbsp;दोश्रो पटक समेत आइसके पनि स्थानीय तहले प्रभावकारी ढंगले काम गर्न नसक्दा सिंहदरबारको अधिकार गाउँगाउँमा पुगेको जनताले महसुस गर्न पाएका छैनन् । अझै केन्द्रीकृत शासन प्रणाली कायमै रहेको सरका
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बबली, प्रदीप पण्ड़ाग्रे. "बौद्विक संपदा अधिकार". International Journal of Advance and Applied Research S6, № 12B (2025): 176–79. https://doi.org/10.5281/zenodo.14909940.

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Abstract:
<em>विशिष्ट कानूनी अधिकार उस व्यक्ति को दिया जाता है जो किसी विशेष क्षेत्र में रचनात्मक कार्य या आविष्कार करता है। ये कानूनी अधिकार लेखक को अपनी रचना या आविष्कार का दुरुपयोग होने से रोकता है। ये अधिकार लेखक की रचना का दोहराव या वितरण करने से भी रोकता है। इन अधिकारो के मिलने से लेखक को अपने उत्पादन के फलस्वरुप प्रोत्साहन मिलता है। ये अधिकार न मिलने से आविष्कार का दुरुपयोग संभव है। हमारे समाज में कुछ असामाजिक तत्व है</em><em>, जो इन आविष्कारों का गलत उपयोग करते है। इनसे बचाव के लिए ही ये अधिकार मिलना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। इन अधिकारो के रहते कोई इन्हे चुरा नहीं सकता और ना ही अपने नाम से प्र
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डॉ., जयश्री जैन. "बौद्धिकसंपदा अधिकार: डिजिटलमार्केटिंगकेविशेषसंदर्भमें". International Journal of Advance and Applied Research S6, № 13 (2025): 202–4. https://doi.org/10.5281/zenodo.14912947.

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Abstract:
<em>बौद्धिक संपदा से आशय अमूर्त परिसंपत्तियों जैसे आविष्कार</em><em>, डिजाइन, साहित्यिक कार्य और प्रतिको आदि से लगाया जाता है, जो रचनात्मक सोच से उत्पन्न होते हैं। इसे कानूनी अधिकारों द्वारा संरक्षित किया जा सकता है, जो रचनाकारों को उनके काम से लाभ उठाने की अनुमति प्रदान करता है। और दूसरों को बिना अनुमति के इसका उपयोग करने से रोकता है। डिजिटल मार्केटिंग एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां पर उपभोक्ता अथवा ग्राहक घर बैठे बैठे अपनी विषय वस्तु को मंगवा सकता है। समय के साथ जितनी तेजी से अर्थव्यवस्था में बदलाव आया है, उतनी ही तेजी से डिजिटल मार्केटिंग का फैलाव बढ़ता गया है। जैसे-जैसे इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक
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Rimal, C. P. "सिंहदरबारको अधिकार गाउँगाउँमा". Intellectual Journal of Academic Research (IJAR) 2, № 1 (2024): 111–25. https://doi.org/10.5281/zenodo.13513140.

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Abstract:
नेपालको राजनैतिक इतिहास, राणाकाल , पंचायती शासन व्यवस्था, बहुदलीय ब्यवस्था र गणतन्त्र प्राप्त पछि नयाँ संबिधान २०७२ प्राप्त भएपछि &nbsp;तीन तहको राज्यको पुर्न संरचनाले गाउँलाई स्थानीय निकायबाट स्थानीयतहमा परिवर्तन गरीदिएको छ । ७ सय ५३ स्थानीय तहमा तत्काल विभिन्न तहका गरी ३६ हजार कर्मचारी आवश्यक भए पनि ती निकायमा मुस्किलले करिव २२ हजार कर्मचारी मात्रै कार्यरत छन् । निर्वाचन मार्फत स्थानीय तहमा जनप्रतिनीधि &nbsp;दोश्रो पटक समेत आइसके पनि स्थानीय तहले प्रभावकारी ढंगले काम गर्न नसक्दा सिंहदरबारको अधिकार गाउँगाउँमा पुगेको जनताले महसुस गर्न पाएका छैनन् । अझै केन्द्रीकृत शासन प्रणाली कायमै रहेको सरका
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Rimal, C. P. "सिंहदरबारको अधिकार गाउँगाउँमा". Intellectual Journal of Academic Research (IJAR) 2, № 1 (2024): 111–25. https://doi.org/10.5281/zenodo.13513140.

Full text
Abstract:
नेपालको राजनैतिक इतिहास, राणाकाल , पंचायती शासन व्यवस्था, बहुदलीय ब्यवस्था र गणतन्त्र प्राप्त पछि नयाँ संबिधान २०७२ प्राप्त भएपछि &nbsp;तीन तहको राज्यको पुर्न संरचनाले गाउँलाई स्थानीय निकायबाट स्थानीयतहमा परिवर्तन गरीदिएको छ । ७ सय ५३ स्थानीय तहमा तत्काल विभिन्न तहका गरी ३६ हजार कर्मचारी आवश्यक भए पनि ती निकायमा मुस्किलले करिव २२ हजार कर्मचारी मात्रै कार्यरत छन् । निर्वाचन मार्फत स्थानीय तहमा जनप्रतिनीधि &nbsp;दोश्रो पटक समेत आइसके पनि स्थानीय तहले प्रभावकारी ढंगले काम गर्न नसक्दा सिंहदरबारको अधिकार गाउँगाउँमा पुगेको जनताले महसुस गर्न पाएका छैनन् । अझै केन्द्रीकृत शासन प्रणाली कायमै रहेको सरका
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संतोष, कुमार सिंह. "मानव अधिकार संरक्षण के लिए भारत में मानव अधिकार संस्थाएं". RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES (ISSN 2348–3318) 10, № 2 (2023): 23–31. https://doi.org/10.5281/zenodo.8151590.

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Abstract:
मानव अधिकार एक सभ्य और सुसंस्कृत समाज का अपरिहार्य शर्त है जो आज के मानव समाज के अस्तित्व की आधारशिला है। वैदिक काल (1500-500 ई.पू.) में मानवाधिकार के संरक्षण और संवर्द्धन की झलक देखने को मिलती है। ऋगवेद की ऋचा &rsquo;सर्वे भवन्तु सुखिनः&rsquo; इसी बात का प्रतिपादन करती है। वर्ष 1993 में मानव अधिकार विश्व सम्मेलन (वियना) ने ऐसी संस्था या आयोग के महत्व को समझते हुए अनेक राष्ट्रों ने अपने यहां मानवाधिकार आयोग का गठन किया। सरकारें (लोकतांत्रिक सरकारें भी) मानवाधिकार का सरेआम उल्लंघन करती हैं। इस बात के होते हुए भी कि देश में, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, जन-संचार माध्यम, प्रेस आदि हैं। मान
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बालाजी, विलासराव महाळंकर. "भारत में बाल अधिकार". International Journal of Arts, Social Sciences and Humanities ०१, № ०१ (2023): ३७—४०. https://doi.org/10.5281/zenodo.8211215.

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Abstract:
20 नवंबर 2007 को विश्व भर में वैश्विक बाल दिवस (अंतरराष्ट्रीय बालअधिकार दिवस) के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि 1959 में बाल अधिकारों की घोषणा हुई थी जो 20 नवंबर को स्वीकृति प्राप्त की गई थी। बाल अधिकार के अंतर्गत बच्चों के जीवन, पहचान, भोजन, पोषण, स्वास्थ्य, विकास, शिक्षा, मनोरंजन, नाम और राष्ट्रीयता, परिवार और पारिवारिक पर्यावरण, उपेक्षा से सुरक्षा, बदसलूकी, दुर्व्यवहार, बाल श्रम, गैर-कानूनी बच्चों का व्यापार आदि शामिल है। लोगों को बाल अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए संगठन, सरकारी विभाग, नागरिक, समाज समूह, एनजीओ आदि द्वारा कई सारे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। बाल अधिकार उन अधिकारों
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Dr., Madhu Shree. "भारत में ट्रांसजेंडर के अधिकार". International Journal of Scientific Development and Research 8, № 8 (2023): 461–66. https://doi.org/10.5281/zenodo.8373776.

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Abstract:
सारांश - जिन्हें आमतौर पर हिजड़े के रूप में जाना जाता है, वे अपने बुनियादी मानवाधिकारों के लिए बहुत पहले से लड़ रहे हैं। भारतीय समाज विशेष रूप से प्राचीन काल से ट्रांसजेंडरों के साथ होने वाले कष्टों, अपमानों और भेदभावपूर्ण व्यवहार का गवाह रहा है। जहाँ मानव बिरादरी का एक वर्ग जीवन की सभी सुविधाओं से लैस है और चाँद पर अपना अगला घर बनाने की योजना बना रहा है, वहीं दूसरी ओर हिजड़ा समुदाय अभी भी एक सामान्य इंसान के रूप में अपनी पहचान के लिए रो रहा है। पूरे विश्व का तेजी से आर्थिक और सांस्कृतिक विकास दुनिया भर में ट्रांसजेंडर की स्थिति में कोई अंतर नहीं ला सका और यहां तक कि समकालीन समय में भी वे सामा
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प्रा., डॉ. एन. एस. गेडाम प्रा. डॉ. एन. एस. गेडाम. "महिलांचे अधिकार आणि महिला सबलीकरण". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 30 (2023): 145–48. https://doi.org/10.5281/zenodo.8394773.

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Abstract:
&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; महिला सबलीकरण म्हणजे कायदे व महिला कल्याण कार्यक्रमाच्या माध्यमातून आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक व राजकीय&nbsp; सर्व क्षेत्रांमध्ये महिलांना पुरुषांच्या बरोबरीने हक्क व दर्जा प्रदान करणे होय. महिलांना विकासाची संधी उपलब्ध करून स्त्री-पुरुष असमानता नष्ट करणे होय. भारतीय संविधानात महिला-पुरुष, श्रीमंत-गरीब आणि साक्षर-निरक्षर यांना समान संरक्षण प्रदान करण्यात आले आहे. कायद्यापुढे समानतेसाठी व शोषणमुक्त समाजाच्या स्थापनेसाठी कटिबद्ध असलेल्या आपल्या संविधानाच्या निर्मात्यांनी सर्वांना सामाजिक-आर्थिक आणि राजकीय न्याय देण्याची ग्वाही देतानाच संविधानापुढे स्त्री-पुरुष
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प्रा., डॉ. एन. एस. गेडाम. "महिलांचे अधिकार आणि महिला सबलीकरण". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 30 (2023): 144–46. https://doi.org/10.5281/zenodo.8394803.

Full text
Abstract:
<strong>प्रस्तावना</strong><strong>:&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; </strong> &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; महिला सबलीकरण म्हणजे कायदे व महिला कल्याण कार्यक्रमाच्या माध्यमातून आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक व राजकीय&nbsp; सर्व क्षेत्रांमध्ये महिलांना पुरुषांच्या बरोबरीने हक्क व दर्जा प्रदान करणे होय. महिलांना विकासाची संधी उपलब्ध करून स्त्री-पुरुष असमानता नष्ट करणे होय. भारतीय संविधानात महिला-पुरुष, श्रीमंत-गरीब आणि साक्षर-निरक्षर यांना समान संरक्षण प्रदान करण्यात आले आहे. कायद्यापुढे समानतेसाठी व शोषणमुक्त समाजाच्या स्थापनेसाठी कटिबद्ध असलेल्या आपल्या संविधानाच्
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प्रा., डॉ. एन. एस. गेडाम. "महिलांचे अधिकार आणि महिला सबलीकरण". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 30 (2023): 144–46. https://doi.org/10.5281/zenodo.8394835.

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Abstract:
<strong>प्रस्तावना</strong><strong>:&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; </strong> &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; महिला सबलीकरण म्हणजे कायदे व महिला कल्याण कार्यक्रमाच्या माध्यमातून आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक व राजकीय&nbsp; सर्व क्षेत्रांमध्ये महिलांना पुरुषांच्या बरोबरीने हक्क व दर्जा प्रदान करणे होय. महिलांना विकासाची संधी उपलब्ध करून स्त्री-पुरुष असमानता नष्ट करणे होय. भारतीय संविधानात महिला-पुरुष, श्रीमंत-गरीब आणि साक्षर-निरक्षर यांना समान संरक्षण प्रदान करण्यात आले आहे. कायद्यापुढे समानतेसाठी व शोषणमुक्त समाजाच्या स्था
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प्रा., डॉ. एन. एस. गेडाम. "महिलांचे अधिकार आणि महिला सबलीकरण". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 30 (2023): 144–46. https://doi.org/10.5281/zenodo.8394874.

Full text
Abstract:
<strong>प्रस्तावना:&nbsp; &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</strong> &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; महिला सबलीकरण म्हणजे कायदे व महिला कल्याण कार्यक्रमाच्या माध्यमातून आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक व राजकीय &nbsp;सर्व क्षेत्रांमध्ये महिलांना पुरुषांच्या बरोबरीने हक्क व दर्जा प्रदान करणे होय. महिलांना विकासाची संधी उपलब्ध करून स्त्री-पुरुष असमानता नष्ट करणे होय. भारतीय संविधानात महिला-पुरुष, श्रीमंत-गरीब आणि साक्षर-निरक्षर यांना समान संरक्षण प्रदान करण्यात आले आहे. कायद्यापुढे समानतेसाठी व शोषणमुक्त समाजाच्या स्थापनेसाठी कटिबद्ध अ
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अभिषेक, यादव. "निजता के अधिकार: एक विवेचनात्मक अध्ययन". International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary 3, № 1 (2024): 168–74. https://doi.org/10.5281/zenodo.10686091.

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Abstract:
अंशक: निजता एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य अधिकार है जो व्यक्ति को उनकी व्यक्तिगत और सांविदिक जीवन की सुरक्षा और स्वतंत्रता प्रदान करता है। इस अधिकार के महत्व को समझते हुए, यह अध्ययन निजता के अधिकार के विभिन्न पहलुओं को विश्लेषण करता है, उनके उत्थान, पतन, और विकास की प्रक्रिया को समझते हुए। यह अध्ययन अन्याय, सरकारी उपाय, और न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से निजता के अधिकार के मुद्दों की प्रकृति और महत्व को उजागर करता है । यह अध्ययन निजता के अधिकार की परिभाषा और प्रमाणीकरण के साथ-साथ, निजता के अधिकार के लिए विभिन्न मानकों और नियमों की अवधारणा पर ध्यान केंद्रित करता है। इसके साथ ही, यह अध्ययन निजता के
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डॉ.रमेश, म. नगराळे. "महिला सबलीकरण आणि भारतीय संसद मधील महिला सहभाग– (कालखंड–2014 ते 2024)". International Journal of Advance and Applied Research S6, № 18 (2025): 106–11. https://doi.org/10.5281/zenodo.15240978.

Full text
Abstract:
<em>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; महिला सक्षमीकरण हे पुरुष व महिला यांना समान अधिकार संधी देणे म्हणजे महिलांचे सबलीकरण होय. महिला ही सर्व&nbsp; कार्य करण्यात सक्षम आहेत. त्यांना त्यासाठी अधिकार संधी देणे म्हणजे सबलीकरण काही संधी अधिकारांपासून वंचित असलेल्या महिलांना त्या संधी अधिक देऊन सक्षम बनवणे विकास घडवून आणणे वंचित राहिलेला घटक म्हणजे महिला यांना विकासाच्या प्रवाहात&nbsp; आणणे म्हणजेच सबलीकरण होईल पूर्ण विकास पूर्ण अधिकार प्राप्त करण्यासाठी&nbsp; भारतात महिला अधिकार. संधी व अधिकार पासून वंचित होत्या त्यांना संविधानाने अधिकार बहाल केला
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उपाध्याय, सुधीर कुमार, та नरेंद्र त्रिपाठी. "महिलाओं द्वारा सूचना का अधिकार का उपयोग: एक दशक का अध्ययन". Journal of Ravishankar University (PART-A) 27, № 1 (2021): 34–38. http://dx.doi.org/10.52228/jrua.2021-27-1-4.

Full text
Abstract:
महिलाओं द्वारा सूचना का अधिकार का उपयोग विषय कोलेकर शोध कार्य किया गया है। एक दशक के अध्ययन के लिए वर्ष 2010 से लेकर 2019 तक के आंकड़ों का उपयोग किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य को आधार मानकर यह अध्ययन किया गया है। अध्ययन का निर्धारित उद्देश्य यह जानना है कि महिलाओं द्वारा सूचना का अधिकार का उपयोग किया जा रहा है या नहीं एव ंमहिलाएं सूचना का अधिकार को लेकर कितनी जागरूक हैं। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के वार्षिक प्रतिवेदन से प्राप्त आंकड़ों की व्याख्या की गई है। अध्ययन के लिए अंतर्वस्तु विश्लेषण प्रविधि का उपयोग किया गया। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि महिलाएं सूचना का अधिकार का उपयोग कर रह
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रम्तेल Ramtel, परशुराम Parshuram. "मानव अधिकार र दलित अधिकारको अन्तरसम्बन्ध". Political Science Journal 2, № 1 (2024): 109–19. https://doi.org/10.3126/psj.v2i1.75169.

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Abstract:
मानिसले मान्छे भएर बाँच्न पाउनुपर्ने जति सबै अधिकारको उपभोग गर्नपाउनुलाई मानवअधिकार भन्ने गरिन्छ । दक्षिण एसियाको पनि मुख्यतः हिन्दु धर्म मान्ने देशहरु भारत, नेपाललगायतका केही देशहरुमा दलित समुदायलाई सदियौं वर्षदेखि वर्णाश्रम व्यवस्थाद्धारा अछूतबनाएर अमान्छेको व्यवहार गर्दै जातपातछुवाछूत जस्तो असाध्यै अमानवीय र निकृष्ट खालकोविभेदजन्य व्यवहार गरिँदै आएको अवस्था छ । अहिलेको एक्काइसौं शताव्दीको विज्ञान रप्रविधिको युगमा पनि यस्ता विभेदकारी मनोविज्ञान र व्यवहार अझैपनि विद्यमान छ । वास्तवमादलित समुदायलाई विगत लामो समयदेखि नै राज्यको विभेदकारी नीति, नियमको कारणनेपाली समाजका हरेक क्षेत्रमा यो समुदायमा
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कुमार, दुर्गेश. "शिक्षा के अधिकार अधिनियम का कार्यान्वयन". International Journal of Political Science and Governance 1, № 2 (2019): 10–12. http://dx.doi.org/10.33545/26646021.2019.v1.i2a.13.

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Singh, Dipendra Bahadur. "मानव अधिकार रक्षकको पहिचान र सुरक्षा". Sambahak: Human Rights Journal 24 (31 грудня 2024): 29–56. https://doi.org/10.3126/sambahak.v24i1.78868.

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Pokharel, Tika Ram. "सीमान्तकृत समुदायका सवाल र मानव अधिकार". Samaj Anweshan समाज अन्वेषण 3, № 1 (2025): 54–64. https://doi.org/10.3126/anweshan.v3i1.81956.

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Abstract:
प्रस्तुत शोधमूलक लेख सीमान्तकृत समुदायका समसामयिक सवालमाथिको विश्लेषणमा आधारित छ । सीमान्तकृत समुदाय भनेको राज्यको मूलधारबाट वञ्चित गराइएकाहरूको समूह हो । सीमान्तकृत समुदायका सवाललाई सम्बोधन नगरी देशको पूर्ण विकास सम्भव छैन । सीमान्तकृत समुदायका समसामयिक सवालहरूमा समावेशीकरण, सशक्तीकरण, न्यायमा पहुँच, सामाजिक सुरक्षा, अन्तर्राष्ट्रिय कानुनी प्रावधानहरूको कार्यान्वयन, मौलिक हक र अन्य संवैधानिक र कानुनी व्यवस्थाहरूको कार्यान्वयन, मानव अधिकारको सुनिश्चितता र आर्थिक सवलीकरण प्रमुख हुन् । राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय कानुनमा उनीहरूका सवाल सम्बोधन गर्न थुप्रै व्यवस्था गरिएको भए पनि व्यवहारमा भने रा
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उपाध्याय, सुधीर कुमार, та नरेंद्र त्रिपाठी. "सूचना का अधिकार के उपयोग में अनुसूचित जनजातियों की भागीदारी रूएक अध्ययन". Journal of Ravishankar University (PART-A) 28, № 1 (2022): 76–79. http://dx.doi.org/10.52228/jrua.2022-28-1-9.

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Abstract:
सूचना का अधिकार के अपयोग में अनुसूचित जनजातियों की भागीदारी विषय को लेकर यह अध्ययन किया गया है। इस शोध के लिए छत्तीसगढ़ के शासकीय विभागों को प्राप्त हुए सूचना का अधिकार आवेदनों को आधार बनाया गया है। एक दशक के अध्ययन के लिए वर्ष 2010 से 2019 तक के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। इस शोध का उद्देश्य यह जानना है कि सूचना का अधिकार के उपयोग के प्रति अनुसूचित जनजातियों में कितनी जागरूकता है। इस वर्ग के लोग अधिनियम का उपयोग कर रहे हैं या नहीं। अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के वार्षिक प्रतिवेदन से मिले आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। व्याख्या के लिए अंतर्वस्तु विश्लेषण प्रविधि का इस्तेमाल किय
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सतीश, शामराव डोंगरे. "माहितीचा अधिकार कायद्याच्या अंमलबजावणीबाबत राज्य सार्वजनिक माहिती अधिकाऱ्यांचे दृष्टिकोनाचे मूल्यमापन". International Journal of Advance and Applied Research S6, № 18 (2025): 203–7. https://doi.org/10.5281/zenodo.15245347.

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Abstract:
<em>लोकशाही</em><em> शासनव्यवस्थेत नागरिकांना माहितीचा अधिकार</em><em> (Right to Information) असला पाहिजे ही मागणी अलीकडील काळात प्रकर्षाने पुढे आली आहे. माहितीचा अधिकार म्हणजे 'राज्यातील कोणत्याही नागरिकाचा त्यास हवी असलेली माहिती मिळविण्याचा किंवा ती प्राप्त करण्याचा अधिकार होय. माहितीचा अधिकार अधिनियम २००५ हा लोकशाही व्यवस्थेतील पारदर्शकता आणि उत्तरदायित्व वाढविण्यासाठी एक प्रभावी साधन ठरला आहे. परंतु, या कायद्याच्या अंमलबजावणीमध्ये राज्य सार्वजनिक माहिती अधिकाऱ्यांना&nbsp; विविध अडचणींचा सामना करावा लागतो. या संशोधनात च्या&nbsp; राज्य जण माहिती अधिकारी दृष्टिकोनाचा अभ्यास करून, RTI कायद्या
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कुमार, डाॅ समीर. "भारत में अल्पसंख्यक वर्ग एवं मानव अधिकार". International Journal of Advanced Academic Studies 1, № 1 (2019): 120–23. http://dx.doi.org/10.33545/27068919.2019.v1.i1a.291.

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Dr., Poornima Devendra Bairagi. "महिला अधिकार एवं संवैधानिक प्रावधान :एक अध्ययन". 'Journal of Research & Development' 15, № 13 (2023): 205–7. https://doi.org/10.5281/zenodo.8149712.

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Abstract:
&ldquo;नारी&nbsp; तू नारायणी, से लेकर .....&nbsp; &ldquo;यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः तक&rdquo;&nbsp; । &nbsp;&ldquo;शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम्&rdquo;&nbsp; ....से लेकर &hellip; &ldquo;जामयो यानि गेहानि शपन्त्यप्रतिपूजिताः। &nbsp;तानि कृत्याहतानीव विनश्यन्ति समन्ततः॥ तक&nbsp; &ldquo;तस्मादेताः सदा पूज्या भूषणाच्छादनाशनैः । &nbsp; भूतिकामैर्नरैर्नित्यं सत्कारेषूत्सवेषु च&rdquo;॥ से लेकर , &ldquo;सन्तुष्टो भार्यया भर्ता भर्त्रा भार्या तथैव च । यस्मिन्नेव कुले नित्यं कल्याणं तत्र वै ध्रुवम्&rdquo; ।। तक &nbsp; मनुस्मृति के अध्याय 3 के उपरोक्त&nbsp; श्लोक&nbsp;&nbsp; म
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Talekar, P. R. "डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांचा सामाजिक न्याय मुलभूत अधिकार". International Journal of Advance and Applied Research 5, № 17 (2024): 291–92. https://doi.org/10.5281/zenodo.12200117.

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Abstract:
gtkjks o&rdquo;kZ vKku] vU;k;] ekugkuh] ykpkjh o vR;kpkj ;kauk cGh iMysY;k vLi`&rsquo;; cka/kokP;k eukr vkRefo&rsquo;oklkph Hkkouk fuek.kZ d:u vkiY;k gDdklkBh la?kVhri.ks y&lt;k ns.;kl R;kauk izo`Rr dj.kkjs- Hkkjrh; lektkr lkekftd U;k; izLrkfir dj.;klkBh vkiys thou loZLo ospukjs folkO;k &lsquo;krdkP;k iwokZ/kkZrhy ,d egku usr`Ro Eg.kts egkekuo MkW- vkacsMdj- MkW- vkacsMdj gs xk&lt;s fon~oku gksrs- lektkrhy fo&rdquo;kers fo:/n o ikjaikjhd lkekftd vU;k;kfo:/n lkrR;kus &gt;xM.kkjs] nfyrkaP;k thoukyk vFkZ izkIr d:u ns.kkjs &gt;qatkj usrs o lkekftd &Oslash;karhps iwjLdrsZ Eg.kwu MkW- vkacsMdjkps ek
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चौधरी, प्रियंका. "भारत में महिला कैदी एवं उनके अधिकार". International Journal of Arts, Humanities and Social Studies 7, № 1 (2025): 598–601. https://doi.org/10.33545/26648652.2025.v7.i1h.239.

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क्षीरसागर, अस्मिता विठ्ठलराव. "स्त्रीवादी चळवळ : काळाची गरज एक ऐतिहासिक विश्लेषण". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 36 (2023): 133–42. https://doi.org/10.5281/zenodo.10337022.

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Abstract:
<strong>स्त्रीवाद म्हणजे काय&nbsp;</strong>स्त्रीवादी चळवळीने पाश्चात्य समाजात महिलांच्या मताधिकारासह बदल घडवून आणला आहे; शिक्षणासाठी अधिक प्रवेश, पुरुषांसोबत अधिक न्याय्य वेतन; घटस्फोटाची कार्यवाही सुरु करण्याचा&nbsp; अधिकार: गर्भधारणेसंबंधी वैयत्तिक&nbsp;निर्णय घेण्याचा महिलाचा अधिकार ('गर्भनिरोधक आणि गर्भपाताच्या प्रवेशासह) आणि मालमत्तेचा अधिकार 'हॉर्वर्ड मानसशास्त्राचे प्राध्यापक स्टीफन पिंकर यांनी असा युक्तीवाद केला आहे की, स्त्री- वादामुळे पुरुषांवरील घरगुती हिंसाचार कमी झाला आहे कारण त्यांच्या जिवलग जोडीदाराकडून मारले जाण्याची शक्यता सहा पटीने कमी झाली आहे तथापि चौथ्या-लाटेतील स्त्रीवाद
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Gitanjali Bharti. "मानवाधिकार (Human Rights)". Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 21, № 4 (2024): 12–16. https://doi.org/10.29070/4qgyte61.

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Abstract:
मानवाधिकार केवल कोर संकल्पना नहीं है , बल्कि यह मानव जीवन से जुड़ी वह मूलभूत आवश्यकता है जिसकी पूर्ति किये बिना गरिमापूर्ण जीवन का उद्देश्य प्राप्त नहीं किया जा सकता । व्यक्ति के सर्वागीण विकास के लिये जिन अनुकूल परिस्थतियों की जरुरत है, उनकी समग्रता का ही नाम मानवाधिकार है । मानव अधिकार मूल रूप से वे अधिकार है, जो प्रत्येक व्यक्ति को मनुष्य होने के कारण मिलते है । राष्ट्रीयता, लिंग, राष्ट्रीय या जातीय मूल, रंग, धर्म, भाषा या किसी अन्य स्थिति की परवाह किये बिना हम सभी के लिये सार्वभौमिक अधिकार है । इनमें सबसे, मौलिक जीवन के अधिकार से लेकर वे अधिकार शामिल है जो जीवन को जीने लायक बनाते हैं , जैसे
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SUMIT, GANGWAR. "बी. एड. प्रशिक्षणार्थियों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के प्रति जागरूकता का अध्ययन". Scholarly Research Journal for Interdisciplinary Studies 4, № 35 (2017): 6275–81. https://doi.org/10.5281/zenodo.5558442.

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Abstract:
प्रस्तुत शोध अध्ययन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश राज्य के महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली से सम्बद्ध जनपद पीलीभीत के बी.एड. महाविद्यालयों में अध्ययनरत सत्र 2015-17 के बी.एड. प्रशिक्षणार्थियों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के प्रति जागरूकता का अध्ययन करना था। शोध अध्ययन हेतु प्रतिदर्श के रूप में जनपद पीलीभीत में संचालित सभी तीन बी.एड. महाविद्यालयों में से 110 प्रशिक्षणार्थियों (50 छात्राध्यापक तथा 60 छात्राध्यापिकाओं) का चयन यादृच्छिक प्रतिदर्शन द्वारा किया गया प्रशिक्षणार्थियों की शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के प्रति जागरूकता के मापन हेतु स्वनिर्मित शिक्षा का अधिकार अधिन
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Mahavar, Dulhe Ram. "From the Demand for Information to the Right to Information: A Study." RESEARCH REVIEW International Journal of Multidisciplinary 10, no. 1 (2025): 56–59. https://doi.org/10.31305/rrijm.2025.v10.n1.007.

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Abstract:
Rights provide direction for the upliftment of human social life, and in their absence, individuals cannot achieve complete development. Therefore, rights play a crucial role in the holistic development of human life. The right to access information is a fundamental right of every individual. However, its full realization has only been achieved in societies that are fully aware and vigilant. Today, popular sovereignty exists in all states across the world, where the ultimate power rests with the citizens. Citizens exercise this power through voting. Since the authority to govern has been entru
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अनुराग, शर्मा, कुमार संदीप та कुमार संजय. "राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020ः ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं भविष्य की चुनौतियाँ". RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES 11, № 3 (2024): 34–39. https://doi.org/10.5281/zenodo.13997565.

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Abstract:
शिक्षा के द्वारा व्यक्ति को जीवन का आधार प्राप्त होता है तथा वह व्यक्तिगत, पारिवारिक एवं सासारिक ज्ञान का सृजन करता है। शिक्षा समाज को उन्नत करने का कार्य करती है तथा नैतिक एवं अनैतिक का अंतर स्पष्ट करने के साथ साथ अज्ञान एवं अंधविश्वास को भी समाप्त करती है। भारतीय ज्ञान परम्परा का मौलिक उद्देश्य प्रज्ञा अथवा बुद्धि को जागृत एवं विकसित करना होता है। भारतीय ज्ञान परंपरा को ऋग्वेद में भी परिभाषित किया गया है तथा व्यक्ति को पहले मानव तत्पश्चात महामानव तथा उसके बाद देवत्व की बात कही गई है। भारत की गुरूकुल पद्धति में बहुविषयक शिक्षा तथा सर्वकल्याण की शिक्षा प्राचीन समय से ही प्रदान की जाती रही है।
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शिंदे, काळुराम दामु. "'राईट टू रिकॉल: लोकशाहीच्या यशासाठी प्रभावी हत्यार'". International Journal of Advance and Applied Research 3, № 6 (2022): 7–11. https://doi.org/10.5281/zenodo.7404611.

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Abstract:
निवडणुका हा लोकशाहीचा आत्मा समजले जाते. भारतामध्ये लोकसभा, विधानसभा, स्थानिक स्वशासन इ. च्या निवडणुका दर पाच वर्षांनी आयोजित केल्या जातात. यामध्ये उमेदवार विविध आश्वासने देऊन निवडूनही येतात. मात्र निवडून आल्यानंतर मतदारांना दिलेल्या आश्वासनांची पूर्तता करण्यात ते अपयशी ठरतात, किंवा जाणून बुजून आपले कर्तव्य पार पाडण्यात ते कसूर करतात.अशा घटना म्हणजे एक प्रकारे मतदारांची केलेली फसवणूकच होय! त्यामुळे प्रगत राजकीय व्यवस्थेत अशी मागणी केली जात आहे की, ज्या मतदारांनी अशा अकार्यक्षम उमेदवारांना निवडून दिलेले आहे, त्यांना माघारी बोलाविण्याचा (त्यांची निवड रद्द करण्याचा) अधिकार त्याच मतदारांना असावा. य
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शिंदे, काळुराम दामु. "राईट टू रिकॉल: लोकशाहीच्या यशासाठी प्रभावी हत्यार". International Journal of Advance and Applied Research 3, № 7 (2022): 7–11. https://doi.org/10.5281/zenodo.7426239.

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Abstract:
निवडणुका हा लोकशाहीचा आत्मा समजले जाते. भारतामध्ये लोकसभा, विधानसभा, स्थानिक स्वशासन इ. च्या निवडणुका दर पाच वर्षांनी आयोजित केल्या जातात. यामध्ये उमेदवार विविध आश्वासने देऊन निवडूनही येतात. मात्र निवडून आल्यानंतर मतदारांना दिलेल्या आश्वासनांची पूर्तता करण्यात ते अपयशी ठरतात, किंवा जाणून बुजून आपले कर्तव्य पार पाडण्यात ते कसूर करतात.अशा घटना म्हणजे एक प्रकारे मतदारांची केलेली फसवणूकच होय! त्यामुळे प्रगत राजकीय व्यवस्थेत अशी मागणी केली जात आहे की, ज्या मतदारांनी अशा अकार्यक्षम उमेदवारांना निवडून दिलेले आहे, त्यांना माघारी बोलाविण्याचा (त्यांची निवड रद्द करण्याचा) अधिकार त्याच मतदारांना असावा. य
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मौ0, शुऐव, та त्यागी सुकृति. "भारत में डाटा संरक्षण सम्बन्धी विधियाँः एक विधिक विश्लेषण". RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES 12, № 1 (2025): 83–86. https://doi.org/10.5281/zenodo.15289364.

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Abstract:
जब विज्ञान और प्रौद्योगिकी में तेजी से विकास और उन्नति होने लगी तो सभी देषों को सम्बन्धित कानून बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम ऐसे कानूनों में से एक है। यह व्यक्ति के निजता के अधिकार की संरक्षता हेतु लाया गया। निजता के अधिकार में व्यक्ति के व्यक्तिगत डाटा का संरक्षण का अधिकार भी शामिल हैं। व्यक्ति की डाटा सुरक्षा वर्तमान में महत्वपूर्ण चिंता का विषय बना हुआ है। डाटा सुरक्षातन्त्र डाटा के अनाधिकृत पहुंच तथा दुर्भावनापूर्ण लोगों से बचाने की बात करता है। भारतीय संविधान अन्य संविधानों के मुकाबले कर्तव्यों से ज्यादा मूलाधिकार की बात करता है। संविधान के अनुच्छेद 19, 21,
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श्रेष्ठ, अमृतकुमार, та चक्रराज दाहाल. "नेपालको संविधानमा स्वास्थ्यसम्बन्धी अधिकार तथा कोभिड - १९ महामारी". Dristikon: A Multidisciplinary Journal 11, № 1 (2021): 195–209. http://dx.doi.org/10.3126/dristikon.v11i1.39160.

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Abstract:
करिब एकसय वर्षपछि पृथ्वीमा अर्को नयाँ महामारीका रूपमा कोरोना भाइरसको सङ्क्रमण देखिएको छ जसले संसारको सबै क्षेत्र र देशलाई प्रभावित गरेको छ । नेपाल पनि यस महामारीबाट अछुतो रहन सकेन । लाखौं नेपालीहरू कोभिड–१९ बाट सङ्क्रमित भए भने हजारौं नेपालीको यही कारणले दुःखद् निधन समेत हुनपुग्यो । चिकित्सा विज्ञानमा गहिरो अनुसन्धान गरेका र धेरै सफलता प्राप्त गरेका विकसित भनिएका देशहरूलाई समेत कोरोना ठूलो चुनौतीका रूपमा देखापर्यो । अझै पनि यस महामारीका विरूद्ध सारा विश्व मानव समुदाय युद्धस्तरमा लडिरहेको छ । यस महामारीले संसारको जीवनशैली नै परिवर्तन गरिदिएको मात्र होइन जीवन बचाउन नै हम्मेहम्मे पारिरहेको छ । ने
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Jain, Dr Vinay Kumari. "महिलाओं के संवैधानिक एवं विधिक अधिकार और सशक्तिकरण". International Journal of Arts, Humanities and Social Studies 6, № 2 (2024): 154–63. http://dx.doi.org/10.33545/26648652.2024.v6.i2a.113.

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संतोष, कुमार सिंह. "मानव अधिकार एवं जनजातीय समाज: एक विश्लेषनात्मक अध्ययन". Recent Researches in Social Sciences & Humanities (ISSN: 2348 – 3318) 10, № 01 (Jan.-Feb.Mar.) (2023): 49–57. https://doi.org/10.5281/zenodo.7944553.

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Abstract:
एक राष्ट्र के जीवन लिए आजादी ही मायने नहीं रखती बल्कि उसमें अनवरत रूप से लोकतांत्रिक व्यवस्था का कायम रहना भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। हमने एक राष्ट्र का सपना संजोया था जिसमें भय, भूख, और हर प्रकार के शोषण से मुक्ति मिल सके। दूसरी ओर आज भारत की आजादी के 75 वर्षो से अधिक का समय बीत जाने के पष्चात् भी जनजातीय समाज की अधिकांष आबादी गरीबी, तनाव, शोषण, हिंसा, अलगाव, निरक्षरता, लैंगिक विषमता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन, सामाजिक न्याय पर कुठाराघात, प्रजातीय भेदभाव, अधिकारों की वंचना आदि अनेक समस्याओं के बीच अपना जीवन व्यतीत करने को विवष है। इन सभी समस्याओं का निराकरण मानवाधिकारों की प्राप्ति से ही संभ
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कुमारी, सरिता. "कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकार और कानूनी प्रावधान". International Journal of Sociology and Humanities 7, № 1 (2025): 39–42. https://doi.org/10.33545/26648679.2025.v7.i1a.122.

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कोटुरवार, डॉ. दीपक द., та राजकुमार रामरावजी वाघ. "माहिती अधिकार कायदा प्रशासकीय व्यवस्थेत पारदर्शकता आणण्याचे साधन - एक चिकित्सक अभ्यास". International Journal of Advance and Applied Research 6, № 25(D) (2025): 60–63. https://doi.org/10.5281/zenodo.15332418.

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Abstract:
<strong>सारांश (ABSTRACT):</strong> &nbsp; &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;या शोधनिबंधामध्ये माहिती अधिकार कायद्याच्या यशस्वीतेसाठी व पारदर्शकतेसाठी &nbsp;काही सूचना व उपाययोजना सांगितलेल्या आहेत. वर्धा जिल्ह्यातील आर्वी आष्टी कारंजा या ३ (तीन) तालुक्यात माहिती अधिकार कायद्यात आणखी पारदर्शकता आनण्याच्या दृष्टीने या कायद्याच्या मार्गातील अडथळे व समस्यांचा शोध घेऊन त्यावर प्रभावी उपाययोजना करणे हा या अभ्यासाचा उद्देश आहे. त्या दृष्टीने विविध बाबींचा शोध व चिकित्सक विश्लेषण करून माहिती अधिकार कायद्यात आणखी पारदर्शकतेच्या संदर्भात काही सूचना देण्यात आलेल्या आहेत. &nbsp
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Regmi, Bhairab Raj. "नेपाली किसानका समस्याको समाजशास्त्रीय अध्ययन". Samaj Anweshan समाज अन्वेषण 3, № 1 (2025): 113–23. https://doi.org/10.3126/anweshan.v3i1.81970.

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Abstract:
मानवअधिकारले व्यापक अर्थ समेट्छ । त्यसभित्र किसानको अधिकार पनि पर्छ । किसान अधिकार भनेको उनीहरूको सबै अधिकार हो अर्थात् जमिन, जल, जङ्गल, त्यसमार्फत किसानको कृषि उत्पादन र कृषि उत्पादनको वितरण (बजारीकरण) माथि कृषि उत्पादन गर्ने किसानको सम्पूर्ण अधिकार हो । मानवअधिकारले व्यक्तिको निजी अधिकारको मात्र परिभाषा गर्दछ† तर किसान अधिकारले यसको उत्पादनदेखि वितरणसम्म मुख्यतः कृषिश्रमको अधिकारसमेत समेट्नुपर्छ । मानवअधिकारको परिभाषाले मात्र किसानलाई प्राथमिकतामा राख्दैन, त्यसको समस्या र समाधानको विषय उठान गर्नु, चर्चा गर्नु, किसानको जीवन, कृषि उत्पादनसँगको सम्बन्ध (दुःख, पीडा, सुख आदि) का विषयमा लेख्नु, वि
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सचिन, कुमार. "राजनैतिक मानवधिकारों के क्षेत्र में डाॅ. भीमराव अम्बेडकर का योगदान". International Journal of Advance Research in Multidisciplinary 3, № 1 (2025): 24–27. https://doi.org/10.5281/zenodo.14748916.

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Abstract:
मेरा यह शोध.पत्र राजनैतिक मानव अधिकारों के क्षेत्र में महान योगदान करने बाले डाॅण् भीमराव अम्बेडकर को समर्पित है। उनके जन्म के समय भारत ब्रिटिश साम्राज्य की गुलामी में जकड़ा हुआ था। अंग्रेजों ने भारतीयों को मानवाधिकारों से वंचित कर दिया था। डाॅण् भीमराव अम्बेडकर का व्यक्तिगत जीवन हमेशा मानव अधिकारों के उल्लंघन से प्रभावित रहा। उन्होने अमेरिकाए ब्रिटेश एवं जर्मनी में बैरिस्टर एवं पीएचण्डी की उच्चतर डिग्रियाॅं हासिल की। भारत वापस आने के बाद वे बम्बई विधान परिषद एवं विधानसभा के सदस्य बने। वे बायसराय की कार्यकारिणी में श्रम मंत्री भी रहे। वे भारतीय संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के चैयरमैन भी रहे। इस
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Seema. "Human Rights and Women: A Study." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 12, no. 1 (2025): 01–03. https://doi.org/10.53573/rhimrj.2025.v12n1.001.

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Abstract:
Human life involves certain conditions without which an individual cannot achieve overall development. Therefore, nature grants certain rights to all individuals, known as human rights. The protection of human rights was provided by the United Nations General Assembly on December 10, 1948. Since women represent half of the world's population, they should undoubtedly be granted rights. Abstract in Hindi Language: मानव जीवन की वे स्थितियां जिनके अभाव में सामान्य रूप से कोई भी व्यक्ति अपना सर्वांगीण विकास नहीं कर सकता, इसलिए प्रकृति द्वारा सभी व्यक्तियों को कुछ अधिकार प्रदान किए जाते हैं, जिन्हें
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त्रिपाठी, योगेन्द्र प्रसाद, та मीना कुमारी*. "ग्रामीण सामाजिक संरचना में अनुसूचित जातियों की सामाजिक प्रस्थिति एवं उत्तरदायित्व". Humanities and Development 16, № 1-2 (2021): 75–80. http://dx.doi.org/10.61410/had.v16i1-2.16.

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Abstract:
भारतीय सामाजिक व्यवस्था में जहाँ चारों वर्णों की भूमिका महत्वपूर्ण थी, किन्तु सबसे निम्न वर्ण अपनी सामाजिक भूमिका के निवर्हन के कारण ही समाज में अछूत समझा जाता था। शिक्षा से वंचित होकर वह स्वयं ही पशुवत जीवन निवर्हन करता रहा, संविधान निर्माताओं द्वारा उनकी पीड़ा उन पर सामाजिक धार्मिक अत्याचार का संज्ञान लेते हुए ही उन्हें समाज में समानता, एवं शिक्षा का अधिकार प्रदान किया जिससे आगे आने वाली उनकी पीढ़ी समाज में बराबरी का स्थान प्राप्त कर सकें। संविधान द्वारा तो समाज के निम्न, कमजोर वर्ग हेतु अनेकानेक प्रावधान किये है, किन्तु इन प्रावधानों के बावजूद सख्त कानून यथा-अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार अधिन
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