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Journal articles on the topic 'उद्यमिता'

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1

शुक्ला, प्रगति. "महिला उद्यमिता एवं नेतृत्व". Humanities and Development 19, № 02 (2024): 54–58. https://doi.org/10.61410/had.v19i2.190.

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Abstract:
हमारी सनातन परंपरा में भारतीय नारी को शक्ति स्वरूपा व शक्ति का पुंज माना गया है। अतः स्त्री की शक्ति को चिन्हित करके ही भारत में सदा स्त्रियों को नमन किया गया और महिलाओं को आर्थिक, शैक्षिक तथा भावनात्मक रूप से सजग व स्थिर बनाने का प्रयास सदैव किया गया। सन् 1991 में महिला उद्यमिता विकास कार्यक्रमों में महिलाओं को प्रशिक्षण व प्रोत्साहन देने का कार्य बहुत तेजी से बढ़ा, जबकि 1974 से 1978 में अन्तर्राष्ट्रीय महिला वर्ष घोषित किया जा चुका था। हालांकि भारत में अभी भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं की उद्यम क्षेत्र में सहभागिता कम है। कारण आज भी पितृसत्तात्मक समाज, उत्पादन लागत उच्च, आर्थिक समस्याएं, या
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2

Gadhavi, Manaliben H. "प्राचीन भारत में महिला उद्यमिता : एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य". Journal of Research & Development 17, № 4 (2025): 173–75. https://doi.org/10.5281/zenodo.15553283.

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Abstract:
<strong><em>Abstract:</em></strong> <em>प्राचीन भारत में इस घटना की जड़ों का पता लगाना आवश्यक है। लोकप्रिय धारणा के विपरीत, प्राचीन भारत में महिलाएँ केवल घरेलू कामों तक ही सीमित नहीं थीं, उन्होंने व्यापार, शिल्प और व्यवसाय सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। यह लेख प्राचीन भारत में महिला उद्यमिता के इतिहास पर प्रकाश डालता है, उनके योगदान, चुनौतियों और सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश डालता है, जो ऐतिहासिक ग्रंथों और विद्वानों के शोध के संदर्भों द्वारा समर्थित है। </em>
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3

परिहार, डॉ ललिता. "उद्यमी की नवप्रवर्तक के रूप में भूमिका". International Journal of Advance and Applied Research 11, № 2 (2023): 345–50. https://doi.org/10.5281/zenodo.14676823.

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Abstract:
<strong>&nbsp; शोध सार</strong> &nbsp; &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; किसी भी व्यवसाय में जोखिम वहन करना, नवसृजन करना, अनिश्चितताओं का सामना करना&nbsp; और साहसिक कार्य करना उद्यमिता कहलाता है ।जिस व्यक्ति में उद्यमिता की भावना होती है वह उद्यमी कहलाता है उद्यमी अपने जीवन और व्यवसाय में जोखिम नवप्रवर्तन,साहस, उत्कृष्ट नेतृत्व, उपलब्धि तथा परिवर्तन के लिए सदेव कार्य करता रहता है ।उद्यमिता स्वरोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन है उद्यमी राष्ट्र एवं मानव मात्र की कल्पनाओं को साकार करने वाला&nbsp; समाज के वातावरण &nbsp;व्यक्तित्व एवं राष्ट्र के ढांचे में बदलाव लाता है। नवप्रवर्तन
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4

गही, रवि कुमार, та विवेक बाजपेयी. "औद्योगिक विकास में सी.एस.आई.डी.सी. की उपलब्धियां". Sahitya Samhita 10, № 9 (2024): 1–8. https://doi.org/10.5281/zenodo.13961863.

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Abstract:
छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी), छत्तीसगढ़ शासन, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन उपक्रम (कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत पंजीकृत) है और राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने हेतु नोडल एजेंसी है। सीएसआईडीसी मुख्य रूप से औद्योगिक &nbsp;निवेश प्रोत्साहन एवं निर्यात संवर्धन, औद्योगिक क्षमता सर्वेक्षण, उद्योगों को भूमि आवंटन, उद्यमिता विकास एवं प्रशिक्षण, सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी और औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, रखरखाव और उन्नयन का कार्य करता है ।
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5

कुमारी, अपराजिता. "महिला उद्यमिता के लिए सरकारी नीतियाँ और कौशल विकास कार्यक्रम: एक समग्र विश्लेषण". International Journal of Financial Management and Economics 7, № 2 (2024): 474–79. https://doi.org/10.33545/26179210.2024.v7.i2.401.

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6

Kishor, Kumar. "भदोही जनपद के कालीन उद्योग में महिलाओं की स्थिति विभिन्न समस्याएँ एवं समाधान ;एक संक्षिप्त अध्ययन". VAAK SUDHA 35, № 9 (2023): 148–55. https://doi.org/10.5281/zenodo.15411259.

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Abstract:
यह शोध पत्रा कालीन उद्योग में संलग्न महिलाओं कीविभिन्न समस्याओं और उनके समाधान की दिशा में कियेगये प्रयासों पर आधारित है। इस शोध पत्रा में भदोहीजनपद और आस-पास के क्षेत्रों में कालीन उद्योग मेंसंलग्न महिला उद्यमियों के सन्दर्भ में अध्ययन किया गयाहै। इस शोध पत्रा में कालीन के क्षेत्रा में महिला सशक्तिकरणतथा महिलाओं के उत्थान के लिए सरकार द्वारा चलाए जारहे योजनाओं व कार्यक्रमों का अध्ययन किया गया है।भदोही जनपद में उद्यमिता का क्या स्थान है, विशेषकरमहिला उद्यमियों का, जो उनकी गरीबी कम करने में कहाँतक सहायक हो सकती है, का अध्ययन किया गया है।इस अध्ययन में कालीन क्षेत्रा में संलग्न महिलाओं कीसमस्याओं
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7

उपमन्यु, विभाकर. "प्राथमिक शिक्षा एवं ग्रामीण स्कूल का वर्तमान परिदृश्य". International Journal For Multidisciplinary Research 04, № 04 (2022): 139–46. http://dx.doi.org/10.36948/ijfmr.2022.v04i04.013.

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Abstract:
प्रस्तुत शोध लेख विभिन्न साहित्य की समीक्षा के आधार पर प्रस्तुत किया गया है इस शोधपत्र में प्राथमिक शिक्षा की वर्तमान स्थिति का वर्णन किया गया है। प्रजातंत्रात्मक शासन व्यवस्था में शिक्षा राष्ट्र की आधारशिला का कार्य करती है। विगत दशकों से भारत में प्राथमिक शिक्षा के पुनर्गठन और पुनरुद्धार के लिए सक्रियता बढ़ी है। किंतु दुर्भाग्यवश शिक्षा के मात्रात्मक प्रसार एवं प्रचार में उल्लेखनीय प्रगति के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर निम्न होता जा रहा है। देश के ज्यादातर शिक्षाविदों व बुद्धिजीवियों ने प्राथमिक शिक्षा प्रणाली में तत्काल सुधार की आवश्यकता बल दिया, जो नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा दे सक
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कुमार नायर, अनिल, та सोनल चौधरी. "ग्रामीण उद्यमिता विकास संबंधी आर्थिक योजनाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन (मध्यप्रदेश के विशेष संदर्भ मे)". International Journal of Advances in Social Sciences, 22 вересня 2023, 181–84. http://dx.doi.org/10.52711/2454-2679.2023.00027.

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Abstract:
उद्यमिता एक कौशल दृष्टिकोण एवं कार्यपद्धति है। साधारणतया उद्यमी को उसके कार्यों से ही परिभाषित किया जाता है। उद्यमी वह व्यक्ति है जो कुछ विशेष कार्य (उद्योगों, व्यवसाय, व्यापार सेवा) करने के लिये विचारों को जन्म देता है और उन विचारों केा क्रियान्वित करने के लिये अपनी तरफ से निश्चित तौर पर पहल और आत्मबल दिखाता है। जिससे यह विचार एक उद्यमशील कार्य का रूप धारण कर सके। राष्ट्र के आर्थिक विकास को बढ़ाने हेतु ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिये ग्रामीण उद्यमिता के अंतर्गत अनेक वर्ग पेशेवर संस्थाएं नियोजक वर्ग प्रवर्तक मिलकर उद्यमी का कार्य करते हैं।
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रोशनी, डॉ: दीपांशु. "महिला उद्यमिता और आर्थिक विकास में उनकी भूमिका". 7 березня 2025. https://doi.org/10.5281/zenodo.14988235.

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Abstract:
(महिला उद्यमिता और आर्थिक विकास में उनकी भूमिका विषय पर यह अध्ययन महिलाओं की उद्यमशीलता गतिविधियों के प्रभाव, उनके आर्थिक योगदान, और समाज में उनकी स्थिति को मजबूत करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण करता है। इस शोध में महिला उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं, जैसे सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, सरकारी नीतियाँ, व्यावसायिक कौशल, और तकनीकी नवाचारों का गहन अध्ययन किया गया है। अध्ययन दर्शाता है कि महिलाओं की बढ़ती उद्यमशीलता न केवल रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में सहायक है, बल्कि सामाजिक प्रगति, लैंगिक समानता, और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देती है।
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अहमद, रहीस, та विश्वनाथ पांडे. "एक व्यावसायिक विकल्प के रूप में उद्यमिता". International Journal of Reviews and Research in Social Sciences, 30 червня 2024, 117–24. http://dx.doi.org/10.52711/2454-2687.2024.00020.

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Abstract:
इस लेख का उद्देश्य उद्यमिता को एक व्यावसायिक विकल्प के रूप में मानना और व्यवसायों के विभिन्न रूपों के बीच प्रवाह को समझना है। पेशेवर रूप से सक्रिय लोग पेशेवर व्यवसाय के विकल्प के रूप में अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने या वेतन पर रोजगार ढूंढने का निर्णय ले सकते हैं। मुख्य अंतर यह है कि एक उद्यमी विफलता के जोखिम के साथ उद्यमशीलता लाभ कमाता है, जबकि एक नियोजित व्यक्ति प्राप्त करता है। जोखिम मुक्त पारिश्रमिक पेशेवर गतिविधि के रूप का चुनाव दोनों रूपों के आकर्षण की धारणा पर निर्भर करता है, जो लोग उद्यमशीलता के मुनाफे को श्रमिकों के वेतन से अधिक फायदेमंद मानते हैं। वे वेतनभोगी कर्मचारियों की तुलना में
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सिंह गुरुपंच, कुबेर. "सतत विकास के लिए उद्यमिता की भूमिका". International Journal of Reviews and Research in Social Sciences, 30 вересня 2024, 156–58. http://dx.doi.org/10.52711/2454-2687.2024.00026.

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Abstract:
प्रस्तुत अध्ययन का उद्येष्य सतत विकास के लिए उद्यमिता की भूमिका का विष्लेषण करना है, यह द्वितीयक आंकड़ों पर आधारित है।सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) संयुक्त राष्ट्र के एजेंडा 2030 का एक मूलभूत हिस्सा हैं और वैश्विक विकास के संदर्भ में 21वीं सदी की शुरुआत को आकार देंगे। एसडीजी तीन विषयगत स्तंभों, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण पर आधारित हैं, जिसमें इन उद्देश्यों की दिशा में प्रगति को मापने के लिए 17 लक्ष्य और 169 संकेतक शामिल हैं एसडीजी की परस्पर संबद्धता के लिए उनके कार्यान्वयन के लिए एक वैश्विक रणनीति की आवश्यकता होती है, क्योंकि सभी लक्ष्य परस्पर जुड़े हुए हैं और उन्हें अलगाव में हासिल नहीं किया जा सक
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सिंह, सुचेता. "सतना जिले में महिला उद्यमिता का विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Reviews and Research in Social Sciences, 31 березня 2024, 43–49. http://dx.doi.org/10.52711/2454-2687.2024.00009.

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Abstract:
किसी भी राष्ट्र के विकास के लिये उद्यमिता अतिआवश्यक तत्व है। यह सर्वमान्य तथ्य है कि कोई भी देश उपलब्ध मानव संसाधनों का पूर्ण उपयोग करके ही आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। चूकिं मानव का आधा भाग महिलाएं होती है। इसलिये कोई राष्ट्र महिलाओं की सहभागिता के बिना आर्थिक विकास का सपना पूरा नही कर सकता है। इसलिये प्रत्येक राष्ट में आर्थिक विकास की गति को प्रोत्साहित करने में महिलाओं की भूमिका बढ़ती जा रही है। जहां तक भारत का प्रश्न है यहां पर आदिकाल से महिलाएं उपेक्षित रही है उनका कार्यक्रम का दायरा घर परिवार तक ही सीमित रहा है। सत्यता यह है कि महिलाओं के अपने घर परिवार तक सीमित रहने के द
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Sirola, Sagar, та Gagan Deep Singh. "श्री गुरु नानक देव जी के आर्थिक एवं नैतिक आदर्शों का शैक्षिक आचरण, वाणिज्यिक नैतिकता एवं युवा उद्यमिता के विकास पर प्रभाव का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विशेष सन्दर्भ में". International Journal For Multidisciplinary Research 7, № 3 (2025). https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i03.47412.

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Abstract:
यह शोध प्रपत्र श्री गुरु नानक देव जी के आर्थिक एवं नैतिक आदर्शों का शैक्षिक आचरण, वाणिज्यिक नैतिकता एवं युवा उद्यमिता के विकास पर प्रभाव का विश्लेषण राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में प्रस्तुत करता है। गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ—“नाम जपो”, “कीरत करो”, “वंड छको”—न केवल आध्यात्मिक साधना का मार्गदर्शन करती हैं, अपितु शिक्षा, व्यवसाय एवं समाज में नैतिकता, सेवा तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का ठोस आधार भी स्थापित करती हैं। इस सन्दर्भ में प्रस्तुत शोध अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह विश्लेषित करना है कि श्री गुरु नानक देव के आर्थिक एवं नैतिक आदर्श वर्तमान समय में शिक्षक, शिक्षार्थियों एवं युवा उद्यमियो
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चैधरी, उमा. "परंपरागत शिल्प और कौशल में उद्यमिता और व्यावसायिक शिक्षा". Gurukul International Multidisciplinary Research Journal, 20 грудня 2024. https://doi.org/10.69758/gimrj/2412iv02v12p0019.

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Abstract:
भारत की सांस्कृतिक धरोहर में परंपरागत शिल्प और कौशल का अत्यधिक महत्व है। ये शिल्प न केवल भारतीय समाज के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा रहे हैं, बल्कि ये कला, संस्कृति और आर्थिक जीवनशैली के महत्वपूर्ण घटक भी हैं। हालांकि, बदलते समय के साथ इन शिल्पों की प्रासंगिकता को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस समस्या से निपटने और इन शिल्पों को पुनर्जीवित करने के लिए उद्यमिता और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। इस परिप्रेक्ष्य में, शिल्पों में न केवल नए डिजाइनों और तकनीकों का समावेश किया जा सकता है, बल्कि इन शिल्पों को आर्थिक दृष्टिकोण से भी सशक्त किया जा सकता है।
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सोंधिया, आरती. "कौशल विकास योजना का रोजगार के अवसरों के सृजन में योगदान (रीवा जिले के विशेष संदर्भ में)". International Journal of Reviews and Research in Social Sciences, 18 грудня 2023, 241–48. http://dx.doi.org/10.52711/2454-2687.2023.00041.

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Abstract:
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) (2016-2020) कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई), भारत सरकार (भारत सरकार) का एक प्रमुख और अनुदान और परिणाम आधारित कौशल प्रशिक्षण योजना है। इसे राष्ट्रीय कौशल विकास निगम ¼NSDC½ द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। देश की सबसे बड़ी कौशल प्रमाणन योजना के रूप में, पीएमकेवीवाई ने बड़े पैमाने पर गति और उच्च मानकों के साथ भारत को कौशल द्वारा दृष्टि को साकार करने की परिकल्पना की है। PMKVY ¼2016&amp;2020½ केंद्र और राज्यों द्वारा केंद्र-संचालित केंद्र ¼CSCM½ और केंद्र-प्रायोजित राज्य-प्रबंधित ¼CSSM½ मोड के तहत संचालित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कौशल विकास
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Satyendra, Mr, та Shantanu Paul. "छत्तीसगढ़ में उद्यानिकी विकासः योजनाओं एवं उनके क्रियान्वयन का अध्ययन". International Journal For Multidisciplinary Research 7, № 4 (2025). https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i04.51869.

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Abstract:
यह शोध-पत्र छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित प्रमुख उद्यानिकी योजनाओं, यथा राज्य पोषित तथा केंद्र प्रवर्तित कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य इन योजनाओं के उद्देश्यों तथा कार्यान्वयन प्रक्रिया का समग्र मूल्यांकन करना है। इसके अंतर्गत राज्य में उद्यानिकी फसलों के क्षेत्रफल, उत्पादन तथा उत्पादकता का विश्लेषण भी किया जाएगा, ताकि इन योजनाओं से प्राप्त वास्तविक प्रभावों को स्पष्ट रूप से समझा जा सके। द्वितीयक आंकड़ों एवं पूर्ववर्ती अध्ययनों के आधार पर यह प्रतीत होता है कि इन योजनाओं ने राज्य में उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में वृद्धि, कृषको
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सिंह, सुचेता. "भारतीय अर्थव्यवस्था पर स्टार्टअप्स योजना का प्रभाव". International Journal of Advances in Social Sciences, 31 березня 2024, 21–29. http://dx.doi.org/10.52711/2454-2679.2024.00006.

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Abstract:
भारत को सालाना 10 करोड़ से अधिक नौकरियों की जरूरत है और जो नौकरियां पैदा होती हैं वे ज्यादातर स्टार्टअप से होती हैं न कि बड़े उद्यमों से। स्टार्टअप उद्यमिता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कारोबारी माहौल और उद्यमों में नए नवाचार, नई नौकरियां और प्रतिस्पर्धी गतिशीलता भी लाती है। आज की दुनिया में आर्थिक समृद्धि में स्टार्टअप्स की भूमिका बढ़ रही है। स्टार्टअप के मुख्य लाभों में से एक यह है कि यह नई नौकरियां पैदा करता है। वैश्विक डेटा से पता चलता है कि बड़ी कंपनियों या उद्यमों की तुलना में स्टार्टअप हमारे देश में अधिक रोजगार पैदा कर रहे हैं। अब तक, कई स्टार्टअप ने नवीनतम तकनीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और रोबो
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डॉ., ओम सिंह, та चंद्र कांत शर्मा डॉ. "सतत विकास लक्ष्य:- पारिवारिक सत्ता संरचनाओं की भूमिका". 7 червня 2025. https://doi.org/10.5281/zenodo.15502652.

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Abstract:
पारिवारिक सत्ता संरचनाएं और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में उनकी भूमिका एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसमें परिवारों के भीतर शक्ति के वितरण और इसके सतत विकास पर प्रभाव का अध्ययन किया जाता है। सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित 17 लक्ष्य हैं, जिनका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों को संबोधित करना है। पारिवारिक सत्ता संरचनाएं इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं: &nbsp;1. निर्णय लेने की प्रक्रिया: परिवारों में शक्ति के वितरण का प्रभाव निर्णय लेने पर पड़ता है, जो सतत विकास लक
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सिंह गुरुपंच, कुबेर. "भारत के संपोषित कृषि एवं ग्रामीण विकास - मुद्दे एवं चुनौतियाँ". International Journal of Reviews and Research in Social Sciences, 30 вересня 2024, 159–66. http://dx.doi.org/10.52711/2454-2687.2024.00027.

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Abstract:
प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य भारत के संपोषित कृषि विकास दृ मुद्दे एवं चुनौतियाँ पर आधारित है कृषि ग्रामीण समुदायों की रीढ़ है जो स्थानीय लोगो के लिए आय और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराती है यह भोजन का भी एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है ग्रामीण किसान अपने स्थानीय समुदायों में उपभोग किये जाने वाले अधिकांश भोजन का उत्पादन करते है अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य कृषि के क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान करते है बेरोजगारी को काम करना है इसके साथ ही स्वच्छ जल, शिक्षा सुविधा बिजली और उचित संचार प्रदान करना है इसके मुख्य घटक शिक्षा उद्यमता, भौतिक बुनियादी ढांचा और सामाजिक बुनियादी ढांचा है। ग्रामीण विकास की विशेषता स्था
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