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Journal articles on the topic 'धरोहर'

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रामेश्वरी, कुमारी 1. परमेश्वरी 2. "जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों में कला, संस्कृति और इतिहास का संगम". International Educational Applied Research Journal 09, № 05 (2025): 35–56. https://doi.org/10.5281/zenodo.15390151.

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Abstract:
यह समीक्षा पत्र जोधपुर, राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और कला परंपराओं की व्यापक चर्चा करता है। जोधपुर, जिसे ‘ब्लू सिटी’ के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान का एक प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र है। इस शहर का इतिहास और वास्तुकला राजपूतों के गौरव और उनकी कला के अद्वितीय योगदान से भरा हुआ है। जोधपुर के शाही किलों, महलों, और हावेलियों की वास्तुकला ने न केवल राज्य की ऐतिहासिकता को परिभाषित किया है, बल्कि यह भारतीय और मुग़ल वास्तुकला के संगम का प्रतीक भी है। मेहरानगढ़ किला, उम्मेद भवन पैलेस, और जसवंत थड़ा जैसे स्थापत्य उदाहरण जोधपुर के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। पत्र में ज
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Arya, Vivek Kumar, Sanjay Singh Chauhan, and Arender Singh Suryavanshi. "Tribal Culture and Environment: An Analysis of Betul Region." International Journal for Research in Applied Science and Engineering Technology 12, no. 7 (2024): 894–901. http://dx.doi.org/10.22214/ijraset.2024.63686.

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Abstract:
सारांश: यह अÚययन मÚय Ĥदेश के बैतूल ¢ेğ कȧ जनजातीय संèकृ Ǔत और पया[वरण के बीच के जǑटल संबंधɉ का ͪवæलेषण करता है। बैतूल ¢ेğ कȧ जनजातीय जनसंÉया एक समृɮध सांèकृ Ǔतक धरोहर को संजोए हु एहै, िजसमɅउनकȧ जीवनशैलȣ, रȣǓत-ǐरवाज, और धाͧम[क माÛयताएं शाͧमल हɇ। यह सांèकृ Ǔतक धरोहर èथानीय पया[वरण के साथ गहराई सेजुड़ी हु ईहै, जो जनजाǓतयɉ के जीवन के ͪवͧभÛन पहलुओं पर Ĥभाव डालती है। अÚययन मɅपाया गया हैͩक बैतूल कȧ जनजातीय संèकृ Ǔत èथानीय पया[वरणीय संसाधनɉ के सतत उपयोग पर आधाǐरत है। वन, जल İोत, और कृ ͪष भूͧम जैसी Ĥाकृ Ǔतक संसाधनɉ का समुͬचत उपयोग जनजाǓतयɉ कȧ दैǓनक जीवनचया[ और सांèकृ Ǔतक परंपराओं मɅ अͧभÛन Ǿप सेशाͧमल है।
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परमेश्वरी та कुमारी रामेश्वरी. "राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर: जोधपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों की सांस्कृतिक यात्रा". International Educational Scientific Research Journal 11, № 5 (2025): 53–57. https://doi.org/10.5281/zenodo.15388880.

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Abstract:
<strong>इस शोध का उद्देश्य राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर, विशेष रूप से जोधपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों की सांस्कृतिक यात्रा पर आधारित महत्वपूर्ण पहलुओं का विश्लेषण करना है। जोधपुर, जो "सूर्य नगरी" और "नीली नगरी" के नाम से प्रसिद्ध है, अपनी वास्तुकला, किलों, महलों, मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहर के कारण एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल बन चुका है। इस शहर का ऐतिहासिक महत्व राव जोधा द्वारा 1459 में स्थापित किए गए मेहरानगढ़ किले से जुड़ा हुआ है, जो जोधपुर का प्रमुख आकर्षण है।</strong> <strong>राजस्थान की वास्तुकला में राजपूत और मुग़ल शैलियों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जिसे जोधपुर के प्रमुख स्थलों जैसे
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Verma, Jitendra, та Alok Pandey. "भारतीय ज्ञान परम्परा एवं संस्कृति: परम्परा और धरोहर का गौरव". Divyayatan - A Journal of Lakulish Yoga University 1, № 1 (2024): 18–21. http://dx.doi.org/10.69919/7ermvf60.

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Abstract:
हम अक्सर शिकायत करते हैं कि हमारी भारतीय संस्कृति और परम्पराओं का ह्रास हो रहा है। लेकिन ये ह्रास क्यों हो रहा है, इस बारे में हम कुछ सोचते नहीं और ना ही अपने प्रयासों को लेकर अपने भीतर झांकते है। हमारा इतिहास भी इस बारे में हमें कुछ ज्यादा जानकारी नहीं देता और जो जानकारी हमें इतिहास से मिलती है वह उस समय के शासनकर्ताओं तथा उनके इतिहासकारों द्वारा तोड़ी मरोड़ी हुई होती है। इसलिए हमें अपने इतिहास का पुनर्विश्लेषण करने की आवश्यकता है। कंबोडिया का अंगकोर वाट मंदिर जो कि विश्व की सबसे बड़ी धार्मिक इमारत मानी जाती है, का निर्माण तमिल राजा और उसके तमिल कलाकारों द्वारा किया गया था। वैसे ये तो केवल झा
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Divya, Singh. "भानपुरा क्षेत्र के प्रमुख शैलचित्र स्थल तथा यहाँ की कलात्मक धरोहर". International Journal of Research - Granthaalayah 5, № 11 (2017): 295–306. https://doi.org/10.5281/zenodo.1098393.

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Abstract:
सारांश:- शैलचित्रों से तात्पर्य है शैलाश्रयों, गुफाओं, नदी नालों की दीवारों, छतों तथा खुली चट्टानों परपुरा मानव द्वारा &nbsp;किये गये चित्रण को शैल चित्र कहते हैं। शैलचित्र वह कला है जिसमें मानव के अभ्युदय होने के प्रमाण मिलते है जो उस समय के मानव के कलात्मक विकास और तीव्र इच्द्दा शक्ति की सोच को दर्शाता है।&nbsp; शैलचित्रों के अतिरिक्त मानव इतिहास के विभिन्न कालखण्डों में गीत, संगीत, नृत्य व अन्य विधाओं को भी मानव ने अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया होगा, परन्तु शैलचित्रों के अतिरिक्त अन्य माध्यम में की गयी अभिव्यक्ति काल के थपेड़ों में सुरक्षित नहीं रह सकीं। अतः शैलचित्र मानव की सर्वा
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डॉ., रामरतन विट्ठलराव शिंदे. "भारतीय संस्कृति में लोकगीतों की भूमिका". International Journal of Arts, Social Sciences and Humanities 02, № 04 (2024): 22–24. https://doi.org/10.5281/zenodo.14905953.

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Abstract:
भारतीय संस्कृति विविधता और समृद्धि का अद्वितीय संगम है। इसमें लोकगीतों की एक विशेष भूमिका है जो न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का कार्य करते हैं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना को भी व्यक्त करते हैं। लोकगीत, समाज की भावनाओं, परंपराओं, रीति-रिवाजों और जीवनशैली को प्रतिबिंबित करते हैं। ये गीत पीढ़ी दर पीढ़ी चले आ रहे हैं और आज भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए हैं।
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कुमार, महेन्द्र, та जूबैदा मिर्जा. "बिलाड़ा की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर: संरक्षण, पर्यटन और विकास की संभावनाएँ". International Journal of Advanced Academic Studies 7, № 6 (2025): 14–18. https://doi.org/10.33545/27068919.2025.v7.i6a.1496.

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कनिका та प्रवीन फोजिया. "संयुक्त राष्ट्र संगठन विकास एवं उदय". RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES (ISSN 2348–3318) 10, № 2 (2023): 32–38. https://doi.org/10.5281/zenodo.8151592.

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Abstract:
संयुक्त राष्ट्र संघ एक अंतराष्ट्रीय संगठन है, प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध के उपरांत बनाए गए इस संगठन का उद्देश्य विश्व शांति बनाए रखना था। इसके अतिरिक्ति यह संगठन जन-कल्याण, ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा व आतंकवाद जैसे बङे मुद्दों पर भी कार्य करता है। इस संघ का अपना चार्टर है, जिसके अनुसार यह कार्य करता है एंव इसके 6 अंग है। संयुक्त राष्ट्र संघ एक सफल अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी कहलाता है। इसमें शामिल होने वाले देशों की संख्या 193 है, व 2011 अंतिम देश जो इसमे शामिल हुआ में दक्षिण सुडान था।
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Ms. Tulshiram Raut. "21वीं सदी में भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) का समावेश". International Journal of Scientific Research in Humanities and Social Sciences 2, № 2 (2025): 174–82. https://doi.org/10.32628/ijsrhss252232.

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Abstract:
आईकेएस (IKS) या 'इंडिजिनस नॉलेज सिस्टम' का अर्थ है अंतर्निहित ज्ञान प्रणाली, जो विशेष रूप से एक क्षेत्र, समुदाय, या संस्कृति के द्वारा विकसित किया गया ज्ञान है। यह प्रणाली हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे कृषि, स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण होती है। प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली में, विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग किए जाने वाले ज्ञान और प्रथाओं का समावेश किया गया है। यह ज्ञान पीढ़ियों से संचालित होता आया है और इसमें स्थानीय परंपराएँ, भौगोलिक विशेषताएँ, और सांस्कृतिक धरोहर का समावेश होता है।
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प्रा., डॉ. प्रशांत झि. बागडे. "मराठी संगीत- काल, आज आणि उद्या". International Journal of Advance and Applied Research S6, № 18 (2025): 288–91. https://doi.org/10.5281/zenodo.15250581.

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Abstract:
&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; बंदिश का ललित कला से संबंध होने के कारण सृजनशीलता इसका मुख्य आधार है। जो हर पल इसमे नवीनता बनाये रखने की कसोटी होती है। यदि ऐसा नही होता तो संगीत में विविध कला शैलीया हि न पनप पाती, न नये राग का निर्माण होता, और न हीं नित्य नई नई रचनाए प्रकाश मे आती।&nbsp; शास्त्रीय रागसंगीत कब का समाप्त हो चुका होता। भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि एवं ऐतिहासिक धरोहर है- राग पद्धति।&nbsp; रागो का विस्तार असीम सागर की भांति अथाह एवं अपरंपार है। भारतीय संगीत के महान विभूतियों, नायको एवं वाग्येयकारोने सौंदर्य को उद्घाटीत करनेवाली उत्कृष्ट कल
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श्रीमती., कुमिदिनी जोशी रामचंद्र याडाराम. "पारंपारिक ज्ञान आणि आदिवासी वारसा पेटंट केल्याने निर्माण होणारी आव्हाने". International Journal of Advance and Applied Research S6, № 12A (2025): 181–82. https://doi.org/10.5281/zenodo.14905330.

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Abstract:
पारंपारिक ज्ञान आणि आदिवासी वारसा हे दोन अत्यंत महत्त्वाचे घटक आहेत, जे आपल्या समाजाच्या सांस्कृतिक आणि भौगोलिक परंपरेचा एक महत्त्वपूर्ण भाग आहेत. पारंपारिक ज्ञान म्हणजे हे ज्ञान, कौशल्य, कल्पना आणि विश्वासांचा संच आहे, जो पिढ्यानपिढ्या पुढे जातो आणि समाजात रुळलेला असतो. आदिवासी वारसा हे म्हणजे त्या आदिवासी लोकांच्या विशिष्ट परंपरा, संस्कृती, आणि जीवनशैलीचे सांस्कृतिक धरोहर. पारंपारिक ज्ञान आणि आदिवासी वारसा पेटंट केल्याने अनेक आव्हाने आणि समस्यांचा सामना करावा लागतो. पारंपारिक ज्ञान हे अनेक पिढ्यांपासून एकत्रित केलेले आणि सामाजिक समुदायांमध्ये सामायिक केलेले असते. याला पेटंट केल्याने काही गंभ
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डॉ., नीलिमा गुप्ता. "व्यवसायिकता की ओर उन्मुख छत्तीसगढ़ की आदिवासी एवं लोक कला संस्कृति". International Journal of Research - Granthaalayah 7, № 11(SE) (2019): 291–96. https://doi.org/10.5281/zenodo.3592674.

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Abstract:
सृष्टि के प्रारम्भ से सभ्यता के विभिन्न सोपानों से गुजरती हुई कला वर्तमान तक निरन्तर आगे बढ़ती जा रही है। छत्तीसगढ़ एक आदिवासी बहुल राज्य है। आदिवासी जीवन अर्थात ऐसा रस जो ऊपर से निर्विकार किन्तु भीतर से संवेदी, उतावली, निर्झर के समान छलछलाता, उज्जवल एवं निष्पाप। यहाँ के निवासी आदिकाल से ही संघर्षमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इस क्षेत्र में अनेक संस्कृतियाँ जन्मीं, पुष्पित-पल्लवित हुयीं। यहाँ के पुरातात्विक स्थलों में इस क्षेत्र की कला एवं संस्कृति की धरोहर सुरक्षित हैं। रामायण में यहाँ के लिये &#39;महारण्य&#39; शब्द का प्रयोग किया गया है। सिंघनपुर, कबरा, बानी, बसनाझर, ओगना, कर्मागढ़, बेनीपाट तथा
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डॉ., विकास सिन्हा. "भारतीय सांस्कृतिक विरासत: विविधता, मौलिकता और संरक्षण". International Journal of Arts, Social Sciences and Humanities 01, № 03 (2023): 32–39. https://doi.org/10.5281/zenodo.10365948.

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Abstract:
"भारतीय सांस्कृतिक विरासत, जो समृद्ध और विविधतापूर्ण है, विश्व के लिए एक महत्त्वपूर्ण संपत्ति का संज्ञान कराती है। इस निबंध में, हम भारतीय सांस्कृतिक विरासत के विविध आयामों को विशेष रूप से देखेंगे, जैसे कि इसकी विभिन्नता, मौलिकता, और संरक्षण के माध्यम से इसका महत्त्व और महत्त्वाकांक्षा।हम इस निबंध में भारतीय संस्कृति के विविध पहलुओं को अन्वेषण करेंगे और उसके मौलिक तत्त्वों को समझेंगे, जैसे कि भाषा, साहित्य, कला, संगीत, धर्म, और समाज। इसके साथ ही, हम इसे संरक्षित करने और संरक्षित रखने के लिए उपायों और कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।इस शोध-निबंध में हम भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति हमा
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कुमार, नवीन, та सन्तोष कुमार सिंह. "जनजातियों पर वैश्वीकरण के प्रभाव का समाजशास्त्रीय अध्ययन". Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 21, № 5 (2024): 263–70. http://dx.doi.org/10.29070/ywvbsm94.

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Abstract:
यह शोध पत्र भारत की जनजातियों पर वैश्वीकरण के सामाजिक प्रभावों का समाजशास्त्रीय अध्ययन प्रस्तुत करता है। वैश्वीकरण ने जहां आर्थिक विकास और आधुनिक सुविधाओं तक पहुँच को सुलभ बनाया है, वहीं इसके परिणामस्वरूप जनजातीय पहचान और पारंपरिक प्रथाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं। इस अध्ययन में गुणात्मक और मात्रात्मक विश्लेषण के संयोजन से जनजातीय आजीविका, प्रवासन पैटर्न, शिक्षा, और स्वास्थ्य देखभाल में आए परिवर्तनों का विश्लेषण किया गया है। निष्कर्षों से यह स्पष्ट होता है कि वैश्वीकरण के लाभों और जनजातीय धरोहर के ह्रास के बीच एक जटिल संबंध है, जिससे यह आवश्यक हो जाता है कि विकास की ऐ
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नीतिका, डेविड. "पारिवारिक संबंधों का किशोर बालक-बालिकाओं के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व एवं शैक्षिक उपलब्धि पर प्रभाव का अध्ययन". RECENT EDUCATIONAL & PSYCHOLOGICAL RESEARCHES (ISSN: 2278-5949) 11, № 3 (2022): 32–37. https://doi.org/10.5281/zenodo.7370852.

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Abstract:
कैशोर्य जो मानवता की अमूल्य धरोहर, राष्ट्र के स्वर्णिम स्वप्नों के आधार है, लेकिन विघटन की कगार पर पहुॅंचने के बाद वे घर, परिवार, समाज, राष्ट्र के लिए विकराल समस्या बन जाते हैं जिसका प्रमुख कारण पारिवारिक संबंधों में&nbsp;गिरावट का आना है, जिसका उनकी निर्माणकारी अवस्था के दौरान प्रतिकूल प्रभाव होता है। अभिभावकगण द्वारा उनके स्वीकृत या अस्वीकृत किये जाने से उनके जीवन की पुस्तक के हर पृष्ठ पर माता-पिता परिवारजनों के व्यवहारों के&nbsp;प्रतिमान प्रतिदिन अंकित होता रहता है। स्वीकृत एवं अस्वीकृत छात्र/छात्राओं पर पारिवारिक संबंधों का प्रभाव तथा उनके आत्मविष्वास, व्यक्तित्व एवं षैक्षिक उपलब्धि पर प्र
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पाटिल, विजय. "उज़्बेकिस्तान में हिंदी : दशा और दिशा". Oriental Renaissance: Innovative, educational, natural and social sciences 4, № 22 (2024): 57–61. https://doi.org/10.5281/zenodo.13765056.

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Abstract:
उज्बेकिस्तान में 1940 से 1960 के मध्य हिंदी साहित्यकार प्रेमचंद कृष्णचंद्र,मोहम्मद इकबाल,मिर्ज़ा ग़ालिब अली सरदार, जाफरी अमृता प्रीतम की रचनाएं प्रकाशित की गई ।वर्ष 1960 से 1980 के मध्य 25 भारतीय लेखको की रचनाओं का अनुवाद उज्बेकी में किया जा चुका था। प्रसिद्ध उज़्बेक कवि गफूर गुलाम हमीद गुलाम,असद मुख्तार,हामिद अलीम जान,मिर्तेमीर, शाहिद जूनूनोवा, जैसे कई साहित्यकारों ने भारत के साहित्य पर कविता लेख निबंध रेखाचित्र लिखे। गफूर गुलाम ने रविंद्र नाथ टैगोर, प्रेमचंद, कृष्ण चंद्रर पर निबंध उनकी कविता का अनुवाद किया।उज्बेकिस्तान में हिंदी साहित्य का अध्ययन का प्रारंभ 1947 से माना जाता है। हिंदी साहित्
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शर्मा, चन्दन मल शर्मा, та गौरव कुमार जैन. "सीमान्त कृषकों की स्थिति का भूगोलिक अध्ययन : दौसा जिले की महुवा तहसील के संदर्भ में". Prakriti - The International Multidisciplinary Research Journal 2, № 1 (2025): 100–107. https://doi.org/10.48165/pimrj.2025.2.1.13.

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Abstract:
भारत में कृषि एक जीवन पद्धति और प्रमुख रोजगार देने वाले क्षेत्र, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास की धरोहर से संबद्ध है। भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि से जुड़ा वर्ग एक ऐसी श्रेणी है जो समाज के आर्थिक और सामाजिक विकास के अवलंब के रूप में कार्य करता है। किन्तु सीमांत कृषक वर्ग अपनी आर्थिक अस्थिरता के कारण अनेक प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त है। सीमांत कृषकों की समस्याओं के अध्ययन से ज्ञात होता है कि इन कृषकों की उत्पादकता कम होती है। सीमांत कृषकों के पास जोत की भूमि कम होने के कारण कृषि से पर्याप्त आय अर्जित करना कठिन होता है। कई बार पारंपरिक कृषि तकनीकों पर निर्भरता भी उत्पादन को सीमित कर
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Sharma, Mamta. "हिंदी साहित्य के एक महान, विचारक और साहित्यकार कवि: सुमित्रानंदन पंत". ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 5, № 6 (2024): 892–94. https://doi.org/10.29121/shodhkosh.v5.i6.2024.4165.

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Abstract:
यह अध्ययन हिंदी साहित्य में छायावाद (सिंबोलिज़म) आंदोलन के प्रमुख कवि सुमित्रानंदन पंत के जीवन और साहित्यिक योगदान पर आधारित है। 1900 में उत्तराखंड के कौसानी गाँव में जन्मे पंत की काव्य-यात्रा लगभग छह दशकों तक फैली रही (1916-1977)। उनके काव्य-विकास को तीन प्रमुख चरणों में विभाजित किया जा सकता है: पहला चरण छायावादी काव्य का था, दूसरा चरण मार्क्सवाद और फ्रायडवाद से प्रभावित प्रगतिवादी काव्य का, और तीसरा चरण अध्यात्मिकता और दार्शनिक विचारों से प्रेरित था। पंत के प्रमुख काव्य-संग्रहों में वीणा, पल्लव, युगांतर, चिदंबरा, और रजत शिखर शामिल हैं। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार और ज्ञानपीठ पुरस्कार जैस
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Singh, Gurpal,. "Trade, Taxation and the State: Interrelationships between Economic Networks and State Power in Ancient India." Shodhaamrit 02, no. 01 (2025): 36–42. https://doi.org/10.71037/shodhaamrit.v2i1.04.

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Abstract:
यह शोध पत्र प्राचीन भारतीय राज्यों के निर्माण और विस्तार में व्यापार, कराधान और क्षेत्रीय नियंत्रण के बीच के आपसी संबंधों का अध्ययन करता है। यह जांचता है कि कैसे आंतरिक और बाह्य व्यापार नेटवर्कों ने मौर्य और गुप्त साम्राज्यों जैसे प्रमुख साम्राज्यों के विकास को बढ़ावा दिया, और कैसे कराधान प्रणालियाँ राज्य प्रशासन और सैन्य अभियानों का समर्थन करती थीं। यह पत्र राजस्थान की भूमिका पर भी ध्यान केंद्रित करता है, जो क्षेत्रीय व्यापार का एक केंद्रीय हब था, और इसके स्थानीय राजपूत राज्यों पर प्रभाव और क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए अपनाई गई आर्थिक रणनीतियों का विश्लेषण करता है। राज्य सत्ता की आर्थिक नींव की
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प्रा., डॉ. जितेंद्र वामन बनसोडे. "२१वीं सदी के हिंदी उपन्यासों में चित्रित हाशिए का समाज (आदिवासी समाज के विशेष संदर्भ में)". International Journal of Humanities, Social Science, Business Management & Commerce 08, № 01 (2024): 144–48. https://doi.org/10.5281/zenodo.10484171.

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Abstract:
हमारे भारत देश में आज भी आदिवासी समाज एक हाशिए का समाज हैं। हिंदी साहित्य बहुआयामी तथा सामाजिक जीवन से जुड़ा हुआ है। आधुनिक युग में उपन्यास एक लोकप्रिय विधा है। कभी कबार मानव मन का रंजन करने वाला उपन्यास सामाजिक जीवन का दर्पण बन गया है। हिंदी उपन्यासों में आदिवासियों के जीवन को चित्रित करने वाले साहित्यकारों में प्रमुखता से मैत्रेयी पुष्या, संजीव, तेजिंदर सिंह, भगवानदास मोरवाल, प्रकाश मिश्र आदि का योगदान महत्वपूर्ण हैं। कबूतरा, थारू, उराँव, कंचन, मुण्डा, असुर और मिजो आदि कई आदिवासी जनजातियों हैं। ये जनजातियाँ भारत माँ की आदि संताने हैं। इन जनजातियों के पनाह में ही हमारी विरासत की गौरव गरिमा अब
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Rani, Seema, Shivani Sharma, and Rajesh Kr Sharma. "Social impact of biopic in Hindi cinema – social change and cultural practice." RESEARCH REVIEW International Journal of Multidisciplinary 8, no. 11 (2023): 146–50. http://dx.doi.org/10.31305/rrijm.2023.v08.n11.022.

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Abstract:
Biopic films in Hindi cinema are an important medium to present the life stories of individuals of personal and social importance, which have a significant impact towards social change and cultural practice. Through these films, society gets a true perspective of the contributions of those great individuals who take steps towards significant change in their fields. Biopics help reveal processes of social change. These films highlight various social issues, such as women's rights, racism, and personal freedom. He features stories of individuals who have inspired him to turn toward prosperity, s
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दाहाल, घनश्याम. "अलिखित उपन्यासमा प्रयोगशील नवीनता". Dristikon: A Multidisciplinary Journal 11, № 1 (2021): 249–58. http://dx.doi.org/10.3126/dristikon.v11i1.39167.

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Abstract:
नेपाली साहित्यका विशिष्ट स्रष्टा र धरोहर उपन्यासकार ध्रुवचन्द्र गौतमको औपन्यासिक जगत्मा उल्लेखनीय योगदान र विशिष्ट पहिचान रहेको छ । उपन्यास साहित्यका क्षेत्रमा उनले गरेको योगदान अनुकरणीय मानिन्छ । उनका औपन्यासिक संरचनाले नेपाली साहित्यको भण्डारलाई वैभवशाली र सम्पन्नशाली बनाएको छ । नेपाली आधुनिक उपन्यासको विकासको यात्रामा प्रयोगवादी धाराको प्रतिनिधित्व गर्दै औपन्यासिक जगत्लाई उचाइमा पु¥याउन उनले गरेको योगदान अविस्मरणीय मानिन्छ । ‘अलिखित’ वि.सं. २०४० सालमा प्रकाशित भई मदन पुरस्कार प्राप्त गरेको आञ्चलिकतालाई मुख्यरूपमा आफ्नो दस्तावेज बनाएको विशिष्ट प्रयोगधर्मी उपन्यास हो । यसमा तराईको भूभाग वीरगञ
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अधिकारी, तेजविलास. "‘सहिदको सालिक’ कथाको विषय". DMC Journal 9, № 8 (2024): 15–22. https://doi.org/10.3126/dmcj.v9i8.74875.

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Abstract:
प्रस्तुत लेखमा घनश्याम ढकालद्वारा लेखिएको ‘सहिदको सालिक’ (२०६६) कथासङ्ग्रहभित्र सङ्कलित सहिदको सालिक कथाको विषयस्रोतको खोजी गरिएको छ।मार्क्सवादका दृष्टिमा कथाको मूलस्रोत भनेकै मानव श्रम हो।मानव जातिको उत्थान र विकास श्रम प्रक्रियाबाट भएको हुँदा समाजमा रहेका विषयवस्तु नै कुनै न कुनै रूपले लेखकले टिप्ने गर्दछ।श्रमप्रतिको आकर्षण र समर्पणभावबाट नै सिङ्गो मानवजाति अग्रगामी दिशातर्फ अगाडि बढेको छ।मान्छेको कल्पना शक्तिकै परिणाम स्वरूप पौराणिक कथा, किवदन्ती, आख्यान जस्ता मौलिक साहित्यको सिर्जना भएका छन्।यसैगरी कलासाहित्यको सम्बन्धले आर्थिक सामाजिक क्रियाकलापका साथै समाजमा निरन्तर जारी रहने सङ्घर्षको क
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Gautam, Shreedhar. "वैज्ञानिक समाजवाद र संस्कृति". Samaj Anweshan समाज अन्वेषण 3, № 1 (2025): 174–85. https://doi.org/10.3126/anweshan.v3i1.81979.

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Abstract:
पुँजीवादी व्यवस्थाले सामन्तवादको जरालाई उखेलेर उदारवादी प्रजातन्त्र ल्याउनु प्रगतिशील घटना भए पनि यसको आफ्नैै वर्गीय सङ्कीर्ण स्वार्थका कारणले गर्दा विज्ञान र प्रविधिले ल्याएको क्रान्तिपछि उत्पन्न परिस्थितिमा पनि संसारभरमै बहुसत्र्यक जनता आधारभूत आवश्यकताबाट वञ्चित भएका छन् । यही तथ्यको विश्लेषण गरेर मार्क्स र एङ्केल्स अहिलेसम्मको इतिहास हुनेखाने वर्ग र हुँदा खाने वर्गको सङ्घर्षको गाथा भएकोे निष्कर्षमा पुगे । उनीहरूले प्रतिपादन गरेको साम्यवादी घोषणापत्रले वर्गीय व्यवस्थाको अन्त्य गरेर मात्र विद्यमान सामाजिक, आर्थिक असमानता हटाउन सकिन्छ भन्ने देखाएको छ । यो लेखमा विद्यमान सामाजिक र आर्थिक संरचन
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कैथवास, वैभव, та लाला राम. "भारतीय परिवेश में लोक संगीत का स्थान". Shodh Manjusha: An International Multidisciplinary Journal 2, № 01 (2025): 126–34. https://doi.org/10.70388/sm240125.

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Abstract:
भारत भौगोलिक दृष्टि से विविधतापूर्ण राष्ट्र है और यह विविधता भारतीय संस्कृति में भी प्रतिबिम्बत है। हमारे प्रत्येक राज्य में संगीत का अपना ही रूप है। यह उनके सांस्कृतिक प्रतिज्ञान का आधार है। जहां नाट्यशास्त्र में दिए गए नियमों का पालन किया जाता है और गुरु-शिष्य (छात्र-गुरु) परंपरा का पोषण किया जाता है वहीं लोक संगीत लोगों का संगीत है और इसका कोई कठोर नियम नहीं हैं। लोक संगीत विविध विषयों पर आधारित होते हैं और संगीत की लय से भरपूर होते हैं। यह तालों पर भी टिके हो सकते हैं। राज्य विशेष से जुड़े कई प्रकार के लोक संगीत होते हैं।1 लोक संगीत किसी स्थान विशेष की धरोहर न होकर आज खुले प्रांगण में गाया
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कमलेश सिंह та डॉ० बाबूलाल तिवारी. "योग शिक्षा को बढ़ावा देने में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की भूमिका: 2017 से 2023 तक". Naveen International Journal of Multidisciplinary Sciences (NIJMS) 1, № 4 (2025): 125–37. https://doi.org/10.71126/nijms.v1i4.43.

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Abstract:
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा 21 जून को वैश्विक स्तर पर योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। यह प्रस्ताव 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तुत किया गया था, जिसे 177 सदस्य देशों के समर्थन से 11 दिसंबर 2014 को पारित किया गया ।यह दिवस न केवल योग के शारीरिक और मानसिक लाभों को जनसामान्य तक पहुँचाने का माध्यम बना है, बल्कि योग शिक्षा को संगठित और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करने का भी सशक्त मंच सिद्ध हुआ है। प्रस्तुत शोधपत्र 2017 से 2023 तक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों, जनभागीदारी, प्रचार माध्यमों, और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका का विश्लेषण करता है।
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मनीषा, मीना, та कपिल मीना डॉ. "राजस्थान के आर्थिक विकास पर पर्यटन का प्रभाव". INTERNATIONAL JOURNAL OF INNOVATIVE RESEARCH AND CREATIVE TECHNOLOGY 11, № 2 (2025): 1–4. https://doi.org/10.5281/zenodo.14990363.

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Abstract:
राजस्थान का पर्यटन उद्योग राज्य की आर्थिक स्थिति में एक अहम बदलाव का कारण बन चुका है। राज्य में पर्यटन का विकास न केवल सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में सहायक है, बल्कि यह राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विकास और समृद्धि का स्रोत भी बना है। इस समीक्षा पत्र का उद्देश्य यह अध्ययन करना है कि पर्यटन ने राजस्थान की अर्थव्यवस्था में किस प्रकार योगदान दिया है, और यह किस प्रकार राज्य के सामाजिक और आर्थिक संरचना पर प्रभाव डालता है.इस अध्ययन में विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जैसे पर्यटन के द्वारा रोजगार के अवसरों की सृजन, स्थानीय व्यवसायों का विकास, और राज्य की बुनियादी ढांचे में सुधार। इसक
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Masurkar, Shilpa. "INNOVATION IN MUSIC FUSION MUSIC." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 3, no. 1SE (2015): 1–3. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i1se.2015.3428.

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Abstract:
The country of India is considered a symbol of art and culture. Indian music has been in the highest position since time immemorial as an invaluable heritage of our India. Music must have come into existence at the same time as the creation of the creation, it is believed that, but if we look at the music, the music resides in the nature, the currents of rivers, the sound of tomorrow, the sound of wind. Music can also be seen, heard, understood and felt in the sound of the wind hitting the leaves and the sound of the drops of rain falling on the leaves, birds chirping etc. Music is the only me
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श्रीवास्तव, रेखा. "भारतीय सांस्कृति का विदेशों पर प्रभाव". Humanities and Development 19, № 01 (2024): 32–38. https://doi.org/10.61410/had.v19i1.171.

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Abstract:
प्रत्येक राष्ट्र की पहचान उसकी सांस्कृतिक धरोहर तथा सामाजिक मूल्यों से होती है भारतीय संस्कृति का स्वरूप निःसंदेह रूप से समन्वयवादी तथा लोक कल्याणकारी रहा है। संस्कृति मानव-चेतना की स्वस्तिपरक ऊर्जा का ऐसा उद्धमुखी सौन्दर्यमयी प्रवाह है जो व्यक्ति के मन, बुद्धि और आत्मा के सूक्ष्म व्यापारों की रमणीयता से होता हुआ समष्टि-कर्म की सुष्ठुता में साकार होता है। संस्कृति का एक रूप देश-काल सापेक्ष है तो दूसरा देश-काल निरपेक्ष। सचमुच भारत एक महासागर है। भारतीय संस्कृति महासागर है। विश्व की तमाम संस्कृतियों आकर इसमें समाहित हो गई है। आज जिसे आर्य संस्कृति, हिन्दू संस्कृति आदि नामों से जाना जाता है, वस्त
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Gupta, Neelima. "TRIBAL AND FOLK ART CULTURE OF CHHATTISGARH ORIENTED TOWARDS PROFESSIONALISM." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 7, no. 11 (2019): 291–96. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v7.i11.2019.3756.

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Abstract:
English: From the beginning of the creation, the art passing through different stages of civilization is continuously moving forward till the present. Chhattisgarh is a tribal dominated state. Tribal life means such a juice which is sensuous from above but sensible from within, rapturous, dejected like a deer, bright and sinless. The residents of this place have been leading a struggling life since time immemorial. Many cultures were born, flourished and flourished in this region. The heritage of the art and culture of this region is preserved in the archaeological sites here. The word 'Mahara
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Neeleshwari, Ku, and Sanjay Singh Chauhan. "Biodiversity of Seoni District: Challenges of Conservation and Efforts towards Sustainable Development." International Journal for Research in Applied Science and Engineering Technology 12, no. 9 (2024): 319–25. http://dx.doi.org/10.22214/ijraset.2024.64179.

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Abstract:
िसवनी िजला, मȯ Ůदेश का एक समृȠ जैव-िविवधता वाला Ɨेũ है, िजसमŐिविभɄ Ůकार के वɊजीव, वन˙ितयाँ, और पाįरİ̾थितक तंũ शािमल हœ। यह Ɨेũ न के वल पाįरİ̾थितकी तंũ सेवाओंमŐमहȕपूणŊभूिमका िनभाता है, बİʋ ̾थानीय समुदायो ंकी आजीिवका और सांˋृ ितक धरोहर का भी अिभɄ िहˣा है। हालांिक, िपछलेकु छ दशको ंमŐमानवजिनत गितिविधयो ं, जैसेवनो ंकी कटाई, अवैध िशकार, और कृ िष िवˑार, नेइस Ɨेũ की जैव-िविवधता को गंभीर खतरेमŐडाल िदया है। िसवनी िजलेमŐ1990 से 2020 के बीच वनो ंकी कु ल 15% कटौती Šई है, िजससेवɊजीवो ंके Ůाकृ ितक आवासो ं मŐभारी कमी आई है। इस शोध मŐिसवनी िजलेकी जैव-िविवधता के संरƗण के िलए िकए गए Ůयासो ंका िवʶेषण िकया गया है।
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डॉ0, इन्दु जोशी, та किशोर कश्यप कमल. "राजस्थान के समकालीन कलाकारों पर लघु चित्रकला का प्रभाव". International Journal of Research - Granthaalayah 7, № 11(SE) (2019): 204–6. https://doi.org/10.5281/zenodo.3591481.

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Abstract:
समकालीन कला जो नित नवीन रूपों का सृजन कर एक अकल्पनीय संसार के सृजन में विश्वास रखती है जिसने अभिव्यक्ति के अनेक साधनों के मिश्रण से अपपनी अनुभूति को एक आकार प्रदान करने के साथ अन्य प्रयोगधर्मी विषयों से कला की दूरी को कम करने का भी कार्य किया है जिसका परिणाम है कि एक कलाकृति का निर्माण आज संगीत की धुन, इत्र की सुगंध एवं अन्य कई प्रकार के वातावरण का सृजन कर मनुष्य के मनोवैज्ञानिक प्रभावों को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का नवीन मार्ग प्रशस्थ हुआ। मनुष्य के जीवन में कोई भी प्रयोग या कार्य के पीछे हमेशा से ही किसी चीज का प्रभाव या प्रेरणा कार्य करती आयी है उसी प्रकार से अनेक समकालीन कलाकार
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डॉ., अनिल डॉ. अनिल. "हिंदी साहित्य में समाजवादी चिंतन : प्रमुख लेखकों का एक समग्र अध्ययन". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 33 (2023): 140–43. https://doi.org/10.5281/zenodo.10154238.

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Abstract:
<strong>प्रस्तावना:</strong>हिंदी साहित्य, भारतीय साहित्य के महत्त्वपूर्ण अंश का हिस्सा है और जिसका महत्त्व भारतीय साहित्य और संस्कृति के विकास में हमेशा से रहा है। साहित्य के माध्यम से ही लेखक अपने समय की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और मानविकी मुद्दों को छूने का प्रयास करते हैं और यही कारण है कि साहित्यकारों का योगदान समाज में महत्त्वपूर्ण होता है। इस शोध पत्र का उद्देश्य है "हिंदी साहित्य में समाजवादी चिंतन- प्रमुख लेखकों के साथ एक अध्ययन" के शीर्षक के तहत एक व्यापक और विस्तारित अध्ययन प्रस्तुत करना। इस अध्ययन के माध्यम से हम हिंदी साहित्य में समाजवादी चिंतन के अहम प्रधान और प्रमुख लेखकों के स
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Khanal, Dhurbaraj. "मष्टो परम्पराले समाजमा पारेको प्रभाव". Samaj Anweshan समाज अन्वेषण 3, № 1 (2025): 84–93. https://doi.org/10.3126/anweshan.v3i1.81962.

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Abstract:
प्राकृतिक सम्पदा सांस्कृतिक धरोहर मौलिक कला संस्वृmतिको उद्गम स्थलका रूपमा रहेको नेपाल, त्यसमा पनि कर्णाली र सुदूरपश्चिम क्षेत्र नेपाली कला, संस्कृति, चाडपर्व, रीतिरिवाज र मौलिक संस्कृतिका दृष्टिकोणमा अझैँ उर्भरभूमिका रूपमा रहेका छन् । नेपाल विविध धर्म र संस्कृतिको सङ्गमस्थल हो । क्षेत्रफलका हिसाबले सानो राष्ट्र भए पनि नेपालमा १२४ ओटा भाषा र १४२ ओटा जातजातिहरूको बसोबास रहेको छ । नेपालको संस्कृतिको मुख्य आधारशिला सहिष्णुता, सहअस्तित्व र पारस्पारिक सम्मान हो । विविध संस्वृmतिको भूमि नेपालको कर्णाली र सुदूरपश्चिम क्षेत्रमा रहेको मष्टो एउटा विशिष्ट सांस्कृतिक परम्परा हो । मध्यएसियाबाट नेपाल आउने क
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हाण्डा, चारू. "वेदों में संगीत की वैज्ञानिकता". Dev Sanskriti Interdisciplinary International Journal 8 (31 липня 2016): 14–20. http://dx.doi.org/10.36018/dsiij.v8i0.83.

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Abstract:
भारतीय संगीत की परंपरा युगों-युगों से बहती आ रही है। इतने युग बीत जाने पर भी भारतीय संगीत की लोकप्रियता में कोई अंतर नहीं आया है। कारण यही है कि भारतीय संगीत हमारी अनुपम विरासत है, जिसमें वैदिक युगीन तप व ऋषि मुनियों की साधना का वह अथाह समुद्र निरंतर गतिशील है जिसने संगीत व नृत्य को दिव्य कला का दर्जा दिया है और यह दिव्यता वर्तमान में भी इतनी वैज्ञानिक है कि सम्पूर्ण विश्व भारतीय संगीत से अचम्भित एवं प्रभावित है। वैदिक युग भारत के सांस्कृतिक इतिहास में प्राचीनतम माना जाता है। भारतीय वेद हमारी सभ्यता व संस्कृति के अमूल्य धरोहर हैं, हमारी भारतीय संगीत की सार्वभौमिकता व ज्ञान का अतुल्य भण्डार हैं
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आभा श्री та प्रो . संध्या रानी शाक्य. "हिंदी सिनेमा में तंत्रवाद्यों का योगदान". Naveen International Journal of Multidisciplinary Sciences (NIJMS) 1, № 2 (2024): 42–45. https://doi.org/10.71126/nijms.v1i2.14.

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Abstract:
भारतीय सिनेमा, कला और संस्कृति का अद्भुत मेल है, जिसकी शुरुआत 1913 में दादा साहब फाल्के की फिल्म "राजा हरिश्चंद्र" से हुई। भारतीय फिल्मों का सबसे खास हिस्सा उनका संगीत है, जो न केवल मनोरंजन करता है बल्कि दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में भी मदद करता है। भारतीय शास्त्रीय संगीत, जैसे हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत, ने फिल्मी गानों की नींव रखी और इन्हें गहराई और अलग पहचान दी। फिल्मी संगीत में तंत्र वाद्यों, जैसे सितार, सरोद, सारंगी, संतूर और गिटार का बड़ा योगदान है। इन वाद्यों ने न केवल गानों को खूबसूरत बनाया, बल्कि फिल्मों की भावनाओं को भी उभारा। "मुगल-ए-आज़म", "पाकीज़ा" और "कश्मीर की कली" जै
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मण्डल, अरुंधति. "डॉ. नरेन्द्र कोहली रामकथा आधारित उपन्यासों के पात्रों का चरित्र-चित्रण". Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 21, № 6 (2024): 113–19. https://doi.org/10.29070/jxa6pn84.

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Abstract:
डॉ. नरेन्द्र कोहली ने भारतीय साहित्य में रामकथा को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है, जिसमें उन्होंने इसके पात्रों का गहन और मनोवैज्ञानिक चरित्र-चित्रण किया है। उनके उपन्यासों में राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, और रावण जैसे पात्र पारंपरिक धार्मिक कथाओं के सीमित दायरे से बाहर आकर मानवता, नैतिकता, और समाज की जटिलताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। कोहली ने इन पात्रों के मानसिक संघर्ष, उनके आदर्शों, और उनके निर्णयों की जटिलता को अत्यंत संवेदनशीलता और गहराई से प्रस्तुत किया है। राम का आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में, सीता का साहस और स्वाभिमान, लक्ष्मण का भाई के प्रति अटूट समर्पण, हनुमान की भक्ति, और
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Kumar, Narender. "आधुनिक युग में भक्तियोग: श्रीमद्भगवद्गीता के परिपेक्ष्य में". Shodh Manjusha: An International Multidisciplinary Journal 2, № 1 (2024): 20–28. https://doi.org/10.70388/sm240116.

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Abstract:
पुरातन समय में श्रीमद्भगवद्गीता का विशेष स्थान रहा है | जिस प्रकार मानव के जीवन में वेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद,महाकाव्य आदि सभी ग्रंथो का अपना विशेष महत्व रहा है | उसी प्रकार इस संसार में आज भी सभी ग्रन्थों में सर्वत्र गीता का आदर है | यह किसी भी विशेष धर्म–सम्प्रदाय का साहित्य नहीं बन सकी, क्योंकि यह तो भारत में प्रकट हुई समस्त विश्व की धरोहर है |जो कि आज भी मानव इसे सबसे ज्यादा महत्व देता है, आज के समय में मानव अपने कर्मो को भूल गया है | वह अपने कर्मो से दूर भागता है ,क्योंकि आज का मानव स्वार्थी हो गया है | वह अच्छे कर्म न करके बुरे कर्मो की तरफ दौड़ता है | इसका कारण यह है कि मनुष्य ईश्वर
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Ghritlahare, Shiva. "सुआ गीत : एक मौन् परंपरा की मुखर क्रांति". INTERNATIONAL JOURNAL OF SCIENTIFIC RESEARCH IN ENGINEERING AND MANAGEMENT 09, № 06 (2025): 1–9. https://doi.org/10.55041/ijsrem49830.

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Abstract:
सारांश :- छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध प्रदेश है। वर्ष के बारह महिनों तक कोई- न -कोई तीज् त्योहार मनाए जाते है। इसका संबंध देवी ,देवताओं व प्रकृति की पूजा से होता है , ताकि लोगों के जीवन में सुख-शांति बनी रहे । ऐसे ही मौलिक सुख की प्राप्ति यदि समूह में हो तो अत्यन्त सुखदायी होती है। “सर्वहिताय सर्व् सुखाय” कि भावना व्यक्त होती है। हमारे छत्तीसगढ़ के लोकगीतों की विशेष बात यह है की यहां पर ज्यादातर लोकगीत एकल ना होकर सामूहिक रूप से होते हैं। इसमे एक गायक दल के साथ वादक् दल या सामूहिक दल का विशेष योगदान होता है। छत्तीसगढ़ की लोकगीतों में न केवल भावनावो की अभिव्यक्ति होती है, बल्कि समाज क
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सचित्र, मिश्रा. "महाकुंभ मेला और मीडिया: सांस्कृतिक पहचान के निर्माण में एक प्रभावशाली भूमिका". INTERNATIONAL EDUCATION AND RESEARCH JOURNAL - IERJ 11, № 3 (2025): 76–80. https://doi.org/10.5281/zenodo.15583380.

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Abstract:
महाकुंभ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है जो परंपरा और आधुनिकता के संगम का प्रतीक है। यह केवल आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण तक ही सीमित नहीं है बल्कि समाजए राजनीति और अर्थव्यवस्था के व्यापक परिप्रेक्ष्य को भी दर्शाता है। इस संदर्भ में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह महाकुंभ से जुड़ी सार्वजनिक धारणाओं और सांस्कृतिक आख्यानों के निर्माण और प्रसार में सक्रिय भागीदारी निभाता है। मीडिया द्वारा महाकुंभ मेले का चित्रण केवल इसकी वृहदता और भव्यता को उजागर करने तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक पहचान को एक नई दिशा देने और उसे वैश्विक मंच पर स
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पराजुली Parajuli, सन्ध्या Sandhya खनाल Khanal. "काठमाडौं उपत्यकाका ऐतिहासिक राजकुलो Kathmandu Upatyakako Aaitihasik Rajkulo". Nepalese Culture 13 (2 грудня 2019): 29–42. http://dx.doi.org/10.3126/nc.v13i0.27499.

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Abstract:
मानव जीवनमा अपरिहार्य तत्वको रूपमा रहेको पानीको सहज आपूर्तिका निम्ति प्राचीन सभ्यता नदी किनारमा बसेका थिए । तर बेला बेलामा नदीमा आउने प्राकृतिक प्रकोपका कारण सुरक्षित बासस्थानमा बसी पानीको सहज आपूर्ति गर्नु चुनौती थियो, जसको परिपूर्तिका निम्ति मानिसले आफ्नै बासस्थानमा कुलो मार्पmत पानी ल्याउने काम गरे । काठमाडौं उपत्यकामा विभिन्न कालखण्डका शासकहरूद्वारा यहाँका जनतालाई खानेपानी, सिचाइँ, मत्स्यपालन आदिका निम्ति कुलोको निर्माण गरे, जुन राजकुलोको नामले प्रसिद्ध भयो । किराँतकालमै कुलो निर्माणको इतिहास शुरु भई लिच्छविकालमा तिलमक नामले विस्तार हुँदै मध्यकाल र पछिल्लाकालमा समेत राजकुलो निर्माण भइरहे ।
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पराजुली Parajuli, सन्ध्या Sandhya खनाल Khanal. "काठमाडौं उपत्यकाका ऐतिहासिक राजकुलो Kathmandu Upatyakako Aaitihasik Rajkulo". Nepalese Culture 8 (2 грудня 2019): 29–42. http://dx.doi.org/10.3126/nc.v8i0.27499.

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Abstract:
मानव जीवनमा अपरिहार्य तत्वको रूपमा रहेको पानीको सहज आपूर्तिका निम्ति प्राचीन सभ्यता नदी किनारमा बसेका थिए । तर बेला बेलामा नदीमा आउने प्राकृतिक प्रकोपका कारण सुरक्षित बासस्थानमा बसी पानीको सहज आपूर्ति गर्नु चुनौती थियो, जसको परिपूर्तिका निम्ति मानिसले आफ्नै बासस्थानमा कुलो मार्पmत पानी ल्याउने काम गरे । काठमाडौं उपत्यकामा विभिन्न कालखण्डका शासकहरूद्वारा यहाँका जनतालाई खानेपानी, सिचाइँ, मत्स्यपालन आदिका निम्ति कुलोको निर्माण गरे, जुन राजकुलोको नामले प्रसिद्ध भयो । किराँतकालमै कुलो निर्माणको इतिहास शुरु भई लिच्छविकालमा तिलमक नामले विस्तार हुँदै मध्यकाल र पछिल्लाकालमा समेत राजकुलो निर्माण भइरहे ।
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सुश्री, मालिनी काले. "भारतीय सांस्कृतिक विरासत- राजस्थानी ला ेक स ंगीत". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.886833.

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Abstract:
भारतीय स ंगीत का मूलाधार संगीत ह ै। संगीत से ही भारतीय जीवन शैली अनुप्रेरित ह ै। सृष्टि क े निर्माण से मानव क े ग्र ंथ का का ेई भी पृष्ठ ऐसा नहीं ह ै जो संगीत से शून्य हा े। जन्म लेते ही जा े गीत सुने उसका संगीत जीवन पर्यन्त रग रग में रचता गया आ ैर अन्ततः इसी संगीत के अ ंतिम काल तक उसका सान्निध्य रहा। यह संगीत मानव शरीर की सŸाा का स्वरूप ह ै। क्षिति, जल, पावक, गगन समीरा’ प ंच रचित यह अधम सरीरा। यही पंच तत्व जिसका कण-कण बूंद-ब ूंद लहर-लहर प्रकृति संगीत ह ै जिसमें क्रम है, लयबद्धता ह ै, विषालता ह ै, मधुरता सा ैंधी ख ुषबू ह ै। व ैज्ञानिका ें ने भी इस बात की प ुष्टि की ह ै कि इन पांच तत्वों मे ं न
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न, ेहा भट्ट. "मानसिक विकृतियों द्वारा समाज मे ं उत्पन्न कुरीतियों क े निवारण एवं जनकल्याण ह ेतु स ंगीत का योगदान". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.886962.

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Abstract:
सम्पूर्ण विष्व आज उत्तर आधुनिकता के संक्रमणकाल क े दौर से बड़ी तेज रफ्तार से बदल रहा ह ै। विज्ञान ने आज विभिन्न अविष्कारों क े माध्यम से व्यक्ति पर अपना पूर्ण तः आधिपत्य जमा लिया ह ै। जीवन के प ्रत्येक क्षेत्र में यंत्र क े प ्रया ेग ने मानव का े स्वयं एक यंत्र बना दिया है। इन समस्त परिवर्तनों ने मानव की जीवन पद्धति को बदल दिया ह ै। जिस कारण व्यक्ति के अ ंदर मानसिक विकृतियों ने जन्म लिया ह ै आ ैर समाज मे कुरीतियाँ उत्पन्न हुई। अतः संगीत ही एक ऐसा माध्यम ह ै जो समाज में उत्पन्न कुरीतियों का े जड ़ से नष्ट करने में सक्षम ह ै। “कलायें जा े मानव मन की स ंवेदनाओं, अनुभूतिया ें का े अभिव्यक्त करती ह
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Rathore, Shipra, and Rupam Soni. "Freedom of Expression in Various Political Systems in today’s Digital Age: A Comparative Case Study." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 12, no. 4 (2025): 17–23. https://doi.org/10.53573/rhimrj.2025.v12n4.003.

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Abstract:
This research paper is an attempt to conduct a comparative analysis of the status of freedom of expression in the current global scenario, focusing on the governance systems of India, the United States of America, Russia, and China. Freedom of expression is a fundamental pillar of democracy, empowering citizens to express their views freely and ensure governmental accountability. This study employs the theoretical frameworks of liberalism, authoritarianism, and deliberative democracy to understand how different political systems and cultural heritages influence this right. The comparative anal
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Sumit, Verma, та Kiran Tripathi Dr. ""युद्ध आधारित हिंदी सिनेमा में राष्ट्रीय पहचान और राष्ट्रवाद का विमर्श: एक ऐतिहासिक एवं आलोचनात्मक अध्ययन"". INTERNATIONAL EDUCATION AND RESEARCH JOURNAL - IERJ 11, № 2 (2025): 38–41. https://doi.org/10.5281/zenodo.15583439.

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Abstract:
युद्ध फिल्मों का सिनेमा में विशेष स्थान रहा है, क्योंकि ये न केवल युद्ध की घटनाओं का चित्रण करती हैं, बल्कि राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय पहचान के विचारों को भी प्रस्तुत करती हैं। हिंदी सिनेमा में युद्ध-आधारित फिल्मों का विकास स्वतंत्रता के पूर्व और पश्चात विभिन्न रूपों में हुआ है। यह शोध पत्र युद्ध फिल्मों के माध्यम से हिंदी सिनेमा में राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय पहचान के चित्रण का ऐतिहासिक व आलोचनात्मक अध्ययन करता है। इसमें विशेष रूप से यह देखा जाएगा कि इन फिल्मों में किस प्रकार से राष्ट्रीयता, सैनिक बलिदान, सांस्कृतिक धरोहर और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, यह अध्ययन यह भी विश
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आस्था, त्रिपाठी. "गायन विभिन्न सांगितिक विद्याआ ें म ें नवाचार ध्रुवपद षैली म े नवाचार". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.887027.

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Abstract:
भारत मे मुस्लिम सत्ता स्थापित होने क े पहले एक ही संगीत पदधति प ्रचार में थी । पूरे भारत वर्ष में प्रबन्धगान ही था, भारतीय सामाजिक जीवन, सांस्कृतिक पहचान दैनिक क्रियाकलाप आदि प ्रब ंधो क े इर्द गिर्द ही बने रह े, प ्रायःसभी लोकजीवन का े अपने में आत्मसात कर लेने क े कारण भारतीय संगीत ने बाहरी संस्कृतिया े का े भी अपना लिया तथा उनक े लिये आकर्ष ण का केन्द्र भी बना रहा । जिस ष ैली ने सम्पूर्ण कला जगत का े एक सांगितिक सा ैंदर्य, सा ंगितिक कल्पना, सांगितिक भाषा व आकर्षण में षताब्दिया ें तक बांध े रखा उसी देषी प ्रबन्ध का बदला हुआ रूप ही ध्रुवपद है । ध्र ुवपद गायकी के लिये बनाये गये नियम व उसका अनुष
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Rajnish. "Urbanization of Kurukshetra in the 20th Century and Its Socio-Economic Impact." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 11, no. 1 (2024): 149–55. https://doi.org/10.53573/rhimrj.2024.v11n1.025.

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Abstract:
Kurukshetra, renowned for its historical and cultural heritage, underwent significant urbanization in the 20th century, leading to substantial socio-economic transformations. This review examines the process in depth, highlighting infrastructure development, changes in social structures, and economic dynamics. Key developments included road construction, railway expansion, and establishment of trade centers, enhancing accessibility and commercial importance. Urbanization gradually shifted traditional rural structures towards urban lifestyles, improving access to education and healthcare. Emplo
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Chouhan, Manish. "CHANGING NATURE OF TRADITIONAL KUTTI ART OF WESTERN RAJASTHAN." ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 3, no. 1 (2022): 134–48. http://dx.doi.org/10.29121/shodhkosh.v3.i1.2022.99.

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Abstract:
English: The ever-flowing stream of folk art is a unique heritage of tradition, these forms and handicrafts associated with the spontaneous joy of creation and social life, being beautiful, with their positive energy, vibrate the mind, mind and consciousness of man as well as the courtyard of the house. The credit for keeping these forms and handicrafts with importance of social life alive through traditions goes to the people of rural areas here. From the development of civilizations to the modern times, human beings have edited many types of arts. In all these types of arts edited by humans,
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Chouhan, Bindu. "Kirtilata ka punarpath." HARIDRA 1, no. 04 (2020): 07–12. http://dx.doi.org/10.54903/haridra.v1i04.7760.

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Abstract:
भारतीय वाङ्ग्मय में राजप्रशस्ति काव्यों की अविछिन्न परंपरा रही है। चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में पाणिनी के ‘पातालविजय’ और ‘जम्बावतीविजय’ से लेकर वामन, उदभट्ट, धनंजय के ‘दसरूपक’ से होते हुए तेरहवी शताब्दी में विद्याधर, सत्रहवी शताब्दी में पंडित जगन्नाथ कृत ‘रसगंगाधर’ तक अपने आश्रयदाता की प्रशस्ति में रचित काव्यों की समृद्ध परंपरा मौजूद है। भारतवर्ष में राजप्रशस्ति काव्य की परंपरा और उसकी निर्मिति के कारकों की पड़ताल शोध का दिलचस्प विषय रहा है। आचार्य हजारी प्रसाद दिवेदी ने आदिकालीन साहित्य की सामग्रियों के परिरक्षण में जिन तीन सूत्रों का उल्लेख किया उनमे ‘राजाश्रय’ को सबसे प्रबल और प्रमुख कारक माना
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