To see the other types of publications on this topic, follow the link: परूब बाज.

Journal articles on the topic 'परूब बाज'

Create a spot-on reference in APA, MLA, Chicago, Harvard, and other styles

Select a source type:

Consult the top 50 journal articles for your research on the topic 'परूब बाज.'

Next to every source in the list of references, there is an 'Add to bibliography' button. Press on it, and we will generate automatically the bibliographic reference to the chosen work in the citation style you need: APA, MLA, Harvard, Chicago, Vancouver, etc.

You can also download the full text of the academic publication as pdf and read online its abstract whenever available in the metadata.

Browse journal articles on a wide variety of disciplines and organise your bibliography correctly.

1

डॅा., आषा गायकवाड. "इन्द्रधनुष का सतर ंगी स्वरुप". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.891770.

Full text
Abstract:
हमारी प्रकृति अनेक रंग¨ से सजी र्ह ुइ है। प्रकृति में फ ैल्¨ हुए सभी रंग इन्द्रधनुष अपने में समेटे ह ुए है। हर रंग का अपना अलग प्रभाव ह¨ता है। अपने मनपसंद रंग से किसी व्यंिक्त विष्¨ष की मानसिकता की जानकारी हम पूर्ण रुप से प्राप्त कर सकते ह ैं । प्रकाष का वर्ण विक्ष्¨पण -इन्द्रधनुष में विभिन्न रंग हमे क्य¨ ं प्राप्त ह¨ते है इस तथ्य की ख¨ज सन 1665 में न्यूटन द्वारा की गई थी। उन्ह¨ने ष्व ेत प्रकाष क¨ प्रिज्म से गुजारने पर उसके सात अवयवी रंग¨ क¨ परदे पर प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की थी। सूर्य के प्रकाष क¨ प्रिज्म में से गुजारने पर निर्गत किरण¨ं द्वारा परदे पर बनाये सात रंग¨ क े समूह क¨ ष्वेत प
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
2

डा, ॅ. श्रीमती प्रतिभा श्रीवास्तव. "र ंग, स ेहत, सब्जियाँ - एक दृष्टिका ेण". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–5. https://doi.org/10.5281/zenodo.890493.

Full text
Abstract:
रंगा ें का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। इनके द्वारा हमें अपने चारों ओर की स्थितिया ें का ज्ञान होता ह ै आ ैर रंगा ें का प्रभाव ज्ञात हा ेता है। रंग मनुष्य की आँख में वर्णक्रम से मिलने पर छाया संब ंधी गतिविधियों से उत्पन्न होते ह ै। मूलरूप से इन्द्रधनुष क े सात रंगा ें का े ही रंगा ें का जनक माना जाता है। ये सात रंग लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला व ब ैंगनी ह ै। मानवीय गुण धर्म में आभासी बोध के अनुसार लाल, नीला व हरा रंग हा ेता है। रंगा ें स े विभिन्न प ्रकार से वस्तु प ्रकाष स्त्रोत एवं श्रेणियां इत्यादि आती ह ै। प ्रकाष स्त्रोता ें के भा ैतिक, गुणधर्म जैसे प्रकाष विलियन, समावेषन, परावर्
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
3

मुक, ुन्द कुमार. "वस्त्र अलंकरण म ें र ंगा ें की पुरातन भ ूमिका". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.888816.

Full text
Abstract:
रंग वस्त्र आकल्पन (अलंकरण) का मूलाधार है। वस्त्र्ा के अनुरूप रंग द्रव्य¨ ं ;कलमेद्ध का चयन आ ैर उनक े प्रय¨ग की तकनीक, कलाकार अथवा रंगरेज के निजी दृष्टिक¨ण एवं उनक े अनुभव पर आधारित ह¨ती है। रंग¨ ं का, व्यक्ति की मन¨भावनाअ¨ ं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इन्हीं पहल ुअ¨ं का अध्ययन करके वस्त्र्ा¨ं क े विविध प्रकार क े अनुसार रंगद्रव्य का सफलताप ूर्वक प्रय¨ग किया जाता ह ै। वस्त्र्ा रंर्गाइ की कला अतिप्राचीन ह ै। भारतवर्ष में र्कइ ऐसे प्रमाण मिलते ह ैं जिनमें वस्त्र्ा ब ुर्नाइ एवं वस्त्र्ा-रंर्गाइ के विषय र्में इ सा प ूर्व एवं उत्तरार्ध में मनुष्य¨ ं क¨ ज्ञान था। वस्त्र्ा ब ुनाई अ©र रंर्गाइ के इतिहास
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
4

डॉ., व. ंदना चराटे. "र ंग चिकित्सा". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.889267.

Full text
Abstract:
रंग मानवीय जीवन में विविध अनुभूतिय¨ ं एव ं संव ेदनाअ¨ं का पर्याय ह ै। मनुष्य की दुनिया भी विविध रंग¨ ं से बनी है। इसीलिये भारतीय संस्कृति में भी विविध संस्कार¨ं का स्वरूप रंग¨ ं क¢ इर्दगिर्द ही समाया हुआ ह ै। ज¨ उत्साह, निराशा, सुख और दुख की अनुभूति करवाते है ं। इसी तरह मनुष्य का शरीर भी विविध रंग¨ ं से निर्मित है, ज¨ उसकी मानसिक आ ैर शारीरिक स्थिति का द्य¨तक है, रंग¨ ं का यह संतुलन प्रकृति अर्थात् ईश्वर प्रदŸा ह¨ता ह ै। इसमें गडबडी या असंतुलन ह¨ने पर मनुष्य अस्वस्थ ह¨ जाता ह ै, तब विविध उपचार या चिकित्सा पद्धति क¢ माध्यम से इन रंग¨ ं क¨ संतुलित कर मनुष्य क¨ स्वस्थ बनाने का प्रयास किया जाता है
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
5

बी.एस., निगवाले. "''राजीव गाँधी जल प ्रबधंन मिषन का ग्रामीण क्षेत्रा ें म ें आर्थिक योगदान''". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–5. https://doi.org/10.5281/zenodo.803446.

Full text
Abstract:
भारतीय क ृषि मानसून का ज ुआं ह ै और यह ज ुआं भारतीय अर्थ षास्त्र और भारतीय जनता सनातन काल स े अपन े कंध े पर रखे ह ुए षून्य में ताक रही ह ै। वस्त ु स्थिति यह है कि जल के अभाव मे भारतीय कृषि ही क्या भारत के उद्योग धंधें, कल-कारखान े, और समूची अर्थव्यवस्था ही ठप हो जाती ह ै। पानी के अभाव मे ं गहराता विद्युत संकट, स ूख े पड ़े खेत आ ैर ब ंद पड ़े कल-कारखानों न े एक ओर हमार े राष्ट ªीय उत्पाद को प ्रभावित किया है वहीं द ूसरी तरफ हमारा अंतर्राष्ट ªीय निर्यात भी गड ़बड ़ाया है। फलतः एक आ ेर विद ेषी मुद ्रा की कमी की आप ूर्ति और द ूसरी ओर वर्त मान समस्याओं से निपटन े के लिए भारी वित्तीय प ्रब ंधन। ”ज
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
6

डा, ॅ. स्मिता खानवलकर. "न ेतत्व, सहया ेग, प्रबन्धन एवं नवाचार में स ंगीत-एक रूपकालंकार". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.887006.

Full text
Abstract:
सम्पूर्ण विष्व में विषेषकर पाष्चात्य देषा ें म ें अधिकांष कार्यकारी समूहा ें में उनक े कार्यनिष्पादन में सकारात्मक वृद्धि ह ेतु विभिन्न प्रकार का संगीत प्रयुक्त किया जाता ह ै। जिनमें गूगल, ओरॅकल, रोल्स रायस, सीमेन्स, लाॅरियाल, डचब ैंक, बीबीसी, नोकिया, सेन्डा ेज, मोर्ग न स्टेनले आदि र्कइ ं संस्थाना ें क े नाम प्रमुखता से लिये जा सकते ह ैं। ये सभी संस्थान अपने क्षेत्र में वर्चस्व स्थापित कर चुके है ं एव ं प्रबन्धन क े क्ष ेत्र का प्रत्येक व्यक्ति इनके नाम से अछूता नहीं ह ै। इन संस्थाना ें में उनके वरिष्ठ नेतृत्व का े प्रषिक्षित करने क े लिये उन्हंे प्रकारान्तर से (ब ैन्ड एव ं वाद्यवृन्द क े माध्
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
7

यशस्वी, गुप्ता. "आधुनिक युग म ें मंच की तकनीक". International Journal of Research – Granthaalayah Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.885051.

Full text
Abstract:
किसी भी कला अथवा विशिष्ट विचारा ें की प्रस्तुति के लिए कलाकार जिस विशिष्ट स्थान पर विराजमान हा ेते ह ैं उसे मंच कहा जाता है। रंजकता इसका प ्रमुख विषय होने क े कारण इसी का े रंगमंच भी कहते ह ै ं। पाश्चात्य देशा ें अथवा अ ंग्र ेजी भाषा में इसे स्टेज कहा जाता है। ऐसा प ्रतीत हा ेता ह ै कि मानव के उद्भव से पूर्व भी रंगमंच देवी देवताओं में प ्रचलित था। ज ेसे भगवान शिव का कैलाश पर्व, माता वागीश्वरी का हस्त में वीणा लेकर मयूर पर ब ैठना तथा इन्द्र क े दरबार में गा ंधर्व , किन्नर, एवं अप्सराओं का े नृत्य आदि मंच क े अस्तित्व की ओर ही संकेत करते ह ै ं। भारतीय संगीत एवं नाट्य परम्परा के अनुसार सर्व प ्रथ
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
8

डा, ॅ. साधना चा ैहान. "आ ंतरिक एव ं बाह ्य सज्जा में र ंग स ंयोजन". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.890365.

Full text
Abstract:
रंग हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा ह ै, जितनी ख ुबसुरत हमारी यह रंगीन दुनिया है, उतनी ही विलक्षण इन रंगा े की दुनिया ह ै। बचपन में हमे सिर्फ तीन प्राथमिक रंगा े के नाम सिखाये जाते है:- पीला, नीला और लाल, परन्तु सच तो यह है कि, किसी संख्या में रंगा े को सीमित नही कर सकते। रंगा े की का ेई गिनती नही होती, क्या ेंकि इस दुनिया में असंख्य रंग ह ै। इसका कारण यह ह ै कि किन्ही भी दो रंगा े का े मिलाकर हम एक तीसरे रंग का निर्माण कर सकते ह ै आ ैर उन दो रंगा े की मात्रा में फ ेरबदल करके हम अनेक हल्के आ ैर गहरे रंगा े का निर्मा ण कर सकते ह ै। इस तरह हम अलग अलग सामंजस्य (ब्वउइपदंजपवदे) से असंख्य रंगा े का न
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
9

वन्दना, अग्निहोत्री. "नदिया ें म ें प्रद ूषण और हम". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–4. https://doi.org/10.5281/zenodo.883519.

Full text
Abstract:
जल को बचाए रखना सभी की चिन्ता का विषय ह ै, व ैज्ञानिक राजन ेता, ब ुद्धिजीवी, रचनाकार सभी की चिन्ता है, जल कैस े बचे ? द ुनियाँ को अर्थात पृथ्वी को वृक्षों को, जंगलो को, पहाड ़ों को, हवा को, पानी को बचाना है। पानी का े बचाया जाना बह ुत जरूरी ह ै। पृथ्वी बच सकती ह ै, वृक्ष ज ंगल, पहाड ़ और मन ुष्य, पषु, पक्षी सब बच सकत े ह ै, यदि पानी को बचा लिया गया और पानी प ृथ्वी पर है ही कितना? पृथ्वी पर उपलब्ध सार े पानी का 97ण्4ः पानी सम ुद ्र का खारा जल है, जो पीन े लायक नही ह ै, 1ण्8ः जल ध ु्रवा ें पर बर्फ के रूप म ें विद्यमान है और पीन े लायक मीठा पानी क ेवल 0ण्8ः ह ै जो निर ंतर प्रद ूषित हा ेता जा रहा
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
10

श्रीमति, स्वप्ना मराठे. "वर्तमान समयानुसार संगीत पाठ्यक्रम¨ ं म ें बदलाव की आवष्यकता". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.886835.

Full text
Abstract:
युग परिवर्तन सृष्टि का सम्बन्धित नियम है, जिसक¢ अन्तर्गत सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक वातावरण भी बदलते रहते हैं। अतः युगानुकूल संगीत षिक्षा की पद्धति में भी परिवर्तन ह¨ना आष्चर्यजनक घटना नहीं है। भारतीय संस्कृति विष्व की उन संस्कृतिय¨ ं में से एक है जिसने सम्पूर्ण विष्व क¨ नई दिषा एवं सृजनात्मकता दी। ये व¨ धर¨हर ह ै जिसक¨ सुरक्षित रखने क¢ लिये हमारे संस्कृति प्रेमिय¨ ं ने अपने सम्पूर्ण जीवन की आहूति दी। संगीत मानव समाज की एक कलात्मक उपलब्धि ह ै। यह लयकारी सांस्कृतिक परम्पराअ¨ं का एक मूर्तिमान प्रतीक ह ै अ©र भावना की उत्कृष्ट कृति ह ै। अमूर्त भावनाअ¨ ं क¨ मूर्त रूप देने का माध्यम ही संगीत ह ै
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
11

लोक, ेश वाहने. "सिन े संगीत म ें शास्त्रीय प्रयोग". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–4. https://doi.org/10.5281/zenodo.884972.

Full text
Abstract:
संगीत का सम्बन्ध मध ुर ध्वनि से ह ै जिसमें नियमित आ ंदा ेलन होते ह ै, वह ध्वनि जा े संगीत में प ्रया ेग की जाती ह ै ’’नाद’’ कहलाती ह ै। कहने का अर्थ यह ह ुआ कि संगीतोपया ेगी ध्वनि को नाद कहते है ं। नाद ही संगीत का आधार ह ै। संगीत एक उत्कृष्ट ललित कला ह ै जिसका मुख्य आधार नाद अथवा आवाज ह ै इसी कारण रस कला का े नाद ब ्रह्म पुकारा गया ह ै। इस कला को हम स्वरांे का ए ेसा सम्मिश्रण कह सकते ह ै ं जा े कलाकार की हृदयगत भावनाओं का े मध ुर बनाकर दूसरा ें क े सामने प ्रकट करता ह ै इसलिए संगीत को हृदय की भाषा तथा हृदयगत भावनाओं का े प ्रकट करने की भाषा माना जाता हैं अ ंग्र ेज विद्वान रस्किन कहते ह ै, ’’अन
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
12

डा, ॅ. अर्चना रानी. "वर्ण-सौन्दर्य द्वारा दर्शक स े संवाद करती भारतीय कला". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–4. https://doi.org/10.5281/zenodo.888762.

Full text
Abstract:
कला और सौन्दर्य-ये दा े शब्द कला जगत में एक ज ैसे होते हुए भी बह ुत विस्तृत ह ैं। स्थूल तैार पर हम कला आ ैर सा ैन्दर्य में का ेई अन्तर नहीं कर पाते। सा ैन्दर्य एक मानसिक अवस्था ह ै आ ैर वह देश-काल से मर्या दित है। इस सा ैन्दर्य रूपी व ृक्ष की दो शाखायें ह ैं-एक प्रकृति तथा दूसरी कला। कलागत सौन्दर्य पर दा े दृष्टियों से विचार किया जा सकता है। पहली दृष्टि यह है जिसमें हम कलाकार को क ेन्द्र में रखकर विचार करते ह ै ं अर्थात् कलाकार की कल्पना में किस प ्रकार कोई कलाकृति आकार ग्रहण करती ह ै आ ैर वह किस रूप में दर्श कों क े सम्मुख प्रकट हा ेती ह ै। दूसरी दृष्टि में दर्श क का े क ेन्द्र में रखा जाता ह
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
13

चा ैहान, ज. ुवान सि ंह. "प ्रवासी जनजातीय श्रमिका ें की प ्रवास स्थल पर काय र् एव ं दशाआ ें का समाज शास्त्रीय अध्ययन". Mind and Society 8, № 03-04 (2019): 38–44. http://dx.doi.org/10.56011/mind-mri-83-4-20196.

Full text
Abstract:
भारत म ें प ्रवास की प ्रक्रिया काफी लम्ब े समय स े किसी न किसी व्यवसाय या रा ेजगार की प ्राप्ति ह ेत ु गतिशील रही ह ै आ ैर यह प ्रक्रिया आज भी ग ्रामीण जनजातीय सम ुदाय म ें गतिशील दिखाइ र् द े रही ं ह ै। प ्रवास की इस गतिशीलता का े रा ेकन े क े लिए क ेन्द ्र तथा राज्य सरकार न े मनर ेगा क े तहत ् प ्रधानम ंत्री सड ़क या ेजना, स्वण र् ग ्राम स्वरा ेजगार या ेजना ज ैसी सरकारी या ेजनाआ े ं का े लाग ू किया ह ै, ल ेकिन फिर ग ्रामीण जनजातीय ला ेगा े ं क े आथि र्क विकास म े ं उसका असर नही ं दिखाइ र् द े रहा ह ै। ग ्रामीण जनजातीय सम ुदाया ें म े ं निवास करन े वाल े अधिका ंश अशिक्षित हा ेन े क े कारण शा
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
14

डा, ॅ. निषा जैन. "जन जातीय रंग कला एव ं सामाजिक जीवन". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.889253.

Full text
Abstract:
जनजातीय समाज सभ्य एव ं विकसित समाज की तुलना में भिन्न प ्रकृति के हा ेते ह ैं। उनकी अपनी विषिष्ट संस्कृति हा ेती है। प ्रत्येक जनजाति को स्वयं की संस्कृति उन्ह ें दूसरी जनजातियों से भिन्न बनाती ह ै। परम्परागत रूप से विरासत में प ्राप्त र्ह ुइ संस्कृति उनके जीवन का आधार ह ै। इस विषिष्ट संस्कृति कें कारण वे अपनी बहुत सी आवष्यकताए ं प ूर्ण करते ह ैं। विभिन्न सामाजिक उत्सवों रीति रिवाजा ें में जनजातीय कला की झलक दिखलाई देती ह ै।प ्रत्येक जनजाती क े सदस्य कला एवं रंगा ें के माध्यम से जीवन की ख ुषियां मनाते ह ैं जो उनक े परम्परागत वस्त्रा ें, रंग बिरंगे आभूषणों एवं श्र ृंगार से दिखलाई देता ह ै। इस क
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
15

डा, ॅ. भारती जोशी विभागाध्यक्ष. "र ंगा ें का मना ेवैज्ञानिक प्रभाव एवं र ंग चिकित्सा". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.888766.

Full text
Abstract:
रंग हमारे दिमाग और शरीर पर अत्यधिक प्रभाव डालता ह ै।सूर्य से प ्राप्त उर्जा रंगा ें में समाहित हा ेती ह ै।प ्रकृति का सा ैन्दर्य हर घण्टे, हर दिन, हर वर्ष परिवर्तित होता रहता ह ै। प ्रकृति का हर रंग प ्राणी का मित्र ह ै बस आवश्यकता ह ै धैर्यपूर्वक प्रकृति की मूक भाषा का े सीखने, समझने, आ ैर आत्मसात करने की । ख ुली जगह में देख ें, प ्रकृति ने कैसे रंगा ें का ताना बाना बुना ह ै रंगा ें क े एक शेड का े दूसरे श ेड से कितनी सुन्दरता क े साथ मिलाया ह ै । आसमान का नीलापन कितना शान्तिदायक है आ ैर कितने प ्रशस्त होने की भावना से ओत प ्रोत ह ै। प ृथ्वी की हरीतिमा कैसी शीतल और तुष्टि प ्रदायनी ह ै। सुर्य
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
16

मनीषा, भट्ट. "उत्तराखण्ड की सामाजिक पृष्ठभ ूमि आ ैर लोकसंगीत का सम्बन्ध". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.886966.

Full text
Abstract:
समाज शब्द का प्रयोग हम बहुधा दैनिक बोलचाल की भाषा में करते ह ैं, समाजशास्त्र की भाषा में कह ें तो व्यक्तिया ें क े समूह का े ही समाज नहीं कहा जा सकता, व्यक्तिया ें में पाये जाने वाले पारस्परिक सम्बन्धो ं की व्याख्या का े ही समाज कहा जाता ह ै। ‘मैकाइवर एवं प ेज ने इस संदर्भ में उचित ही कहा है कि ‘‘समाज सामाजिक सम्बन्धा ें का जाल है।’’ सामाजिक सम्बन्धों क े लिए तीन बातें आवश्यक है - 1. व्यक्तिया ें का े एक-दूसरे का आभास (जानकारी) होना। 2. उनमें अर्थ पूर्ण व्यवहार होना, तथा 3. उनका एक-दूसरे क े व्यवहार से प्रभावित होना। विश्व मानव समाज की वृहत्तम इर्काइ है और इसका महत्वपूर्ण अ ंग ह ै, समाज। लोक स
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
17

सृष्टि, जैन. "सचित्र जैन पाण्डुलिपियों म ें र ंग की भ ूमिका (आदिपुराण क े सन्दर्भ म ें)". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.890551.

Full text
Abstract:
्रथम- पिचुमंद नामक झाड़ी का गा ेंद आ ैर ब ेल को तिल के तेल में जलाकर काजल बनाया जाय तत्पश्चात् उसे लाख के जल के साथ लोहे क े बर्तन में भली भाँति भृ ंगराज तथा भल्लात्तक के रस क े साथ घोंटने पर स्याही बनती ह ै। द्वितीय- काजल की आधी मात्रा में गा ेंद तथा गोंद की आधी मात्रा में बेल लेकर ताँब े के बर्तन में लाख के रस क े साथ घा ेंटें। तृतीय- ब ेल तथा उसस े दा े गुना गा ेंद से दा े गुना काजल लेकर (लगभग) 6 घण्टा ें तक घा ेंटन े पर व ्रज के समान पक्की स्याही बन जाती है इसप ्रकार आदिपुराण में लिखने के लिये स्याही का प्रया ेग ह ुआ है। आदिपुराण के चित्रा ें में से कुछ चित्रा ें के माध्यम से मैने रंगा ें
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
18

हरीश, वर्मा. "सिन े संगीत म ें शास्त्रीय प्रयोग". International Journal of Research – Granthaalayah Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–4. https://doi.org/10.5281/zenodo.884616.

Full text
Abstract:
संगीत क े बिना भारतीय फिल्मों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। भारतीय सिनेमा की पहचान उसका सषक्त संगीत ही ह ै। भारतीय फिल्में चाह े व े किसी भी भाषा (अर्था त् हिन्दी, तमिल, ब ंगाली, मराठी, तेलुगु, कन्नड़ या मलयालम) की हों, संगीत उनमें प ्रमुख होता ह ै। क्षेत्रीय बोलिया ें जैसे भोजप ुरी, राजस्थानी, ब ंुदेली, छत्तीसगढ़ी आदि में बनने वाली फिल्मों में तो संगीत ही उनका मूल तत्व होता ह ै। भारत में सर्वा धिक फिल्में हिन्दी भाषा में बनती हैं जा े विश्व भर में लोकप्रिय हा ेती हैं। अतः आगे हम भारतीय फिल्मों की चर्चा हिन्दी फिल्मों का े केन्द्र में रखकर ही करेंगे। भारतीय संगीत का आधार शास्त्रीय संगीत ही ह ै
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
19

उसर ेठ, राम क. ुमार. "बैगा जनजाति की वनोपज संग्रह की स्थिति का अध्ययन". Mind and Society 9, № 03-04 (2020): 44–46. http://dx.doi.org/10.56011/mind-mri-93-4-20216.

Full text
Abstract:
ैगा जनजाति एक आदिम जनजाति ह ै। जा े सदा स े ही वना ें क े मध्य निवास करती आयी ह ै। वन ही इनक े जीवन का प ्रम ुख आधार रह े ह ै। इस जनजाति क े सामाजिक, सा ंस्कृतिक, धार्मि क एव ं आर्थि क पक्ष वना ें पर ही निर्भ र रह े ह ै। वर्त मान म ें वना ें क े राष्ट ªीय उद्यान एव ं वन विभाग क े निय ंत्रण म ें आ जान े स े इस जनजाति क े र्कइ परिवारा ें का े वन क्ष ेत्र स े बाहर विस्थापित किया गया ह ै। र्कइ क्ष ेत्रा ें म ें वना ें क े अधिक कटाव एव ं द ूसर े क्ष ेत्रा ें क े ला ेगा ें का लगातार इन क्ष ेत्रा ें म ें आकर बसन े स े ब ैगा जनजाति की वना ें पर निर्भ रता प ्रभावित र्ह ुइ ह ै। ब ैगा जनजाति क े आर्थि क
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
20

डा, ॅ. बी. वर्षा. "सिन े संगीत म ें शास्त्रीय स ंगीत की प्रास ंगिकता". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.886838.

Full text
Abstract:
भारतीय विद्वानों ने संगीत र्का े इ ष्वरीय वाणी माना है। यह समस्त सृष्टि, नाद क े अधीन ह ै तथा नाद का े ब ्रह्म कहा गया ह ै, क्या ेंकि नाद सर्व त्र व्याप्त ह ै। यह सम्प ूर्ण ब ्रह्माण्ड ही नादमय ह ै। नाद से ब ्रह्म, ब ्रह्म से शब्द, शब्द से वाक्य तथा वाक्य से गीत बनता है, अतः यह कहा जा सकता है कि नाद संगीत का प्राण है। हर्ष, उल्लास, उमंग, यह व्यक्ति क े जीवन का श्रृंगार ह ै, जब व्यक्ति सामाजिक बंधनों अथवा समस्याओं मे ं उलझकर कमजा ेर होने लगता ह ै, तब उसमें प ुनः शक्ति तथा जोष भरने का कार्य जिन कलाओं में ह ै, उन्हें ललित कलायें कहा जाता है और ललित कलाओं में संगीत का स्थान सर्वोच्च माना जाता ह ै।
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
21

डा, ॅ. साधना चा ैहान. "र ंगा े का समाज पर प्रभाव". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.890579.

Full text
Abstract:
प ्रकृति आ ैर मनुष्य का रिश्ता चिंतन के प ्राचीन छोर से वर्तमान तक दर्शन, कला और साहित्यिक विमर्श का केन्द्र रहा ह ै। अतः रंग भी इस से अछूते नही ं ह ै।’’सूरज की पहली किरण जब किसी वस्तु पर पड़ती ह ै तब वह वस्तु रंगमय हा े जाती ह ै। का ेई रंग आपको इस तरह छूता है कि आपकी कल्पना में र्कइ ख्वाब जागने लगते ह ै ं। कभी कोई रंग आपका े इस तरह मोहित कर लेता ह ै कि आप उसके साथ लय मिलाते हुए जीवन का छंद जीने लगते ह ै ं। आ ैर कभी कोई रंग आपकी स्मृति में ठहर आपको प ्रफुल्लित रखता ह ै।’’1 चित्र मानवीय मन को अभिव्यक्त करने का एक जरिया है। ’’मालवा की परिधि में पूर्वोक्त शिलाचित्र भीम ब ेटका में विविध रुप में प
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
22

प, ्रो. श्रद्धा दुब े. प्राध्यापक इतिहास. "अजन्ता के चित्र एवं र ंग स ंयोजन (गुप्तकालीन कला क े परिप्रेक्ष्य म ें)". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1. https://doi.org/10.5281/zenodo.892002.

Full text
Abstract:
गुप्तकाल भारत के इतिहास का स्वर्ण -युग कहा जाता ह ै। सुख समृद्धि आ ैर व ैभव के इस काल में सभी कलाओं का समान रूप से उन्नयन ह ुआ। इस युग की सबसे बड ़ी देन ह ै अजंता के भित्तिचित्र। चित्रकारों ने गहन अधंकरामयी गुफाओं में ब ैठकर जिन अपार्थिव कृत्तियों का सृजन किया वे अप्रतिम है। इनमें कथावस्तु और विषय तो भगवान तथागत के जीवन आ ैर जातक कथाआ ें से ही लिए किन्तु उन्ह े ं किसी सीमा में बांध कर नहीं रखा। उनमें सैकड ़ों वर्षों का लोकजीव दर्पण की भाँति प ्रतिबिम्बित है।अजंता में अर्ध-चन्द्राकार पर्व त का े काटकर 29 गुफाएँ बनाई गई ह ै। यह समूहा ें में ब ंटी हुई ह ै। इनमें दसवी ं आ ैर नवीं गुफाएँ बीच के समू
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
23

प्रज्ञा, पाण्ड ेय गरिमा यादव. "स्वच्छताः भारत की चुनौती". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special edition) (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.883539.

Full text
Abstract:
किसी भी द ेश की उन्नति का आधार स्वच्छता व स्वास्थ्य है। स्वच्छ पर्यावरण ही किसी भी समुदाय की स्वास्थ्य स्थिति को ऊंचा उठान े में सहायक है। स्वच्छ पर्यावरण सम ुदाय क े लोगा ें के जीवन स्तर को सुधारन े में सहायक हो सकता है। साथ ही वह समुदाय मं े रोगों के चक्र को तोड ़न े में भी सक्षम ह ै। सरकार व आम जनता के प्रयास व सहभागिता द्वारा विभिन्न संसाधनों का प्रया ेग किया जा रहा ह ै आ ैर ब ेहतर परिणाम हेत ु प्रयासरत हंै। इसके द्वारा समुदाय का सामाजिक-आर्थिक विकास, स्वच्छ पर्यावरण हेत ु संब ंधित सांस्कृतिक कारक, समुदाय की क्षमता, व्यवहार, कान ून आदि का उपया ेग ब ेहतर तरीके से हा े रहा है। भारत द ेश सम्प
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
24

गीताली, सेनग ुप्ता. "मानव स्वास्थ्य एवं प्रदूषण". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–5. https://doi.org/10.5281/zenodo.803458.

Full text
Abstract:
‘‘स्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ्य मन का निवास होता ह ै।’’ उत्तम स्वास्थ्य प ्रत्येक मन ुष्य के लिए अम ूल्य निधि है, दीर्घ आयु एव ं उत्तम स्वास्थ्य का अट ूट ब ंधन है। इस संदर्भ में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दी र्गइ परिभाषा सर्वमान्य है -’’ स्वास्थ्य संप ूर्ण शारीरिक, मानसिक व सामाजिक निरोगता की अवस्था हैं तथा मात्र बीमारी या द ुर्बलता की अन ुपस्थिति को स्वास्थ्य नही माना जा सकता है।’’ अर्था त स्वास्थ्य एक सामान्य व्यक्ति क े लिए स्वस्थ्य वातावरण में, स्वस्थ्य परिवार मे ं, स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ्य दिमाग का वास है। प्राकृतिक वातावरण की संुदरता प ेड ़ - पौधे, जीव - जंत ुआ े, नदी - तालाब, पर्वत
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
25

गा, ैरव यादव. "स ंगीत क े प्रचार प्रसार में स ंचार साधना ें की भ ूमिका". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.886968.

Full text
Abstract:
बीसवीं शताब्दी क े पूर्वा द्र्ध को व ैज्ञानिक क्रांति क े अभ्युदय का समय कहा जा सकता है, जहाँ व ैज्ञानिक अविष्कारों क े अ ंतर्गत कुछ ऐसे उपकरणों का अविष्कार ह ुआ जिन्होंने संगीत क े प्रचार-प्रसार का े तीव्रता प्रदान की। संचार साधनों क े प्रारंभिक दौर में संगीत क े क्षेत्र में एक वैज्ञानिक अविष्कार का विश ेष महत्व ह ै ,जिसने भारतीय संगीत के क्षेत्र में ही नहीं वरन् विश्व में क्रांति ला दी यह था रेडिया े का आगमन। भारत में इसकी स्थापना सन् १९२७ ई. में र्ह ुइ । सन् १९३६ ई. में इ ंडियन स्टेट ब ्रॉडकास्टिंग स ेवा का नाम बदलकर आकाशवाणी कर दिया गया। उस समय आकाशवाणी एक सशक्त माध्यम था शास्त्रीय संगीत क
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
26

राय, अजय क. ुमार. "जनसंख्या दबाव से आदिवासी क्षेत्रों का बदलता पारिस्थितिकी तंत्र एवं प्रभाव (बैतूल-छिन्दवाड़ा पठार के विशेष सन्दर्भ में)". Mind and Society 9, № 03-04 (2020): 31–38. http://dx.doi.org/10.56011/mind-mri-93-4-20214.

Full text
Abstract:
जनजातीय पारिस्थितिकी म े ं वन, क ृषि म े ं स ंलग्नता, आवास, रहन-सहन का स्तर, स्वास्थ्य स ुविधाआ े ं का अध्ययन आवश्यक हा ेता ह ै। सामान्यतः धरातलीय पारिस्थ्तििकी का े वनस्पति आवरण क े स ंदर्भ म ें परिभाषित किया जाता ह ै। अध्ययना ें स े यह स्पष्ट ह ैं कि यदि किसी स्थान पर जनस ंख्या अधिक ह ैं आ ैर यदि उसकी व ृद्धि की गति भी तीव ्र ह ै ं ता े वहा ं पर अवस्थानात्मक स ुविधाआ ंे क े निर्मा ण क े परिणास्वरूप तथा विकासात्मक गतिविधिया ें क े कारण विद्यमान स ंसाधना ें पर दबाव निर ंतर बढ ़ता ही जाता ह ैं, प ्रस्त ुत अध् ययन म े ं शा ेधार्थी आदिवासी एव ं वन बाह ुल्य क्ष ेत्र ब ैत ूल-छि ंदवाड ़ा पठार म ें ज
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
27

ब, ृजेश क. ुमार. "भारतीय चित्रकथाआ ें (काॅमिक्स) म ें र ंग सया ेजन क े ग्राफिक अभिप्राय". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1. https://doi.org/10.5281/zenodo.890567.

Full text
Abstract:
रंग संया ेजन के आधार पर ग्राफिक अभिप्राय एक व्यवस्थित और प्रबन्धात्मक विचार धारा का े कला की भाषा में संया ेजन कहते ह ै। जिसका विभिन्न समस्या अन्तराल आ ैर क्षेत्रा ें में विभाजित करने ए ंव रेखाओं, आकृतियों, वर्णा े (रंगा ें), ताना े तथा वयन आदि के चयन का े व्यवस्थित करने से सम्बधित ह ै।चित्रकथा (काॅमिक्स) में रंगा ें का सयोजन का इतिहास काफी प ुराना रहा ह ै। मानव ने जब सर्व प ्रथम आँखे खोली ता े वह प ्राकृतिक वातावरण के बीच रहते ह ुए शिकार करके अपना पेट भरने लगा। परिणाम स्वरूप अपने प ्राकृतिक वातावरण को देखकर उसने पत्थरों, चट्टानों, गुफाआ ें आदि की दीवारांे पर का ेयले, पत्थर तथा प्रकृति प्रद्दत
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
28

डाॅ., आरती तिवारी. "सामाजिक मुद ्दे एव ं पर्यावरण". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.574865.

Full text
Abstract:
मन ुष्य अपन े पर्यावरण क े साथ ही जन्म लेता ह ै। और उसके बीच ही अपना जीवन यापन करता ह ै। द ूसर े शब्दों में सारा समाज पर्यावरण के बीच अर्था त प्रकृति की गोद में अपना जीवन यापन करता ह ै। किन्त ु इस जीवनयापन के लिए मन ुष्य मुख्य रूप से पर्यावरण पर निर्भर करता है। अपन े जीवन को स ुचारू रूप से चलाए रखन े एव ं उसे और अधिक ब ेहतर बनान े के लिए मन ुष्य निर ंतर प्रयास करता है तथा इसके लिए वह प्राक ृतिक संसाधनों का दोहन करता है। इस प्रकार मन ुष्य आदिम युग स े आज तक निरंतर प्रकृतिक संसाधनों से अपना जीवन चलाता आया है। जिससे प्रकृति का े कुछ नुकसान भी पहुंचा है। क्योंकि मन ुष्य न े आधुनिकता की अंधीदौड में
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
29

डा, ॅ० नमिता त्यागी. "र ंग एवं रसाभिव्यक्ति". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.888772.

Full text
Abstract:
मानव जीवन का उद्देश्य क्रियाशीलता अथवा निर्मा ण में निहित है। इससे रहित जीवन श ून्य से अधिक नही ं होता। एक कलाकृति में मानव अपने अनुभवों का े निश्चित चित्र तत्वों एवं सौन्दर्य सिद्धान्तों क े आधार पर ही अभिव्यक्ति करता है। इस रूप सजृन की प्रक्रिया का े कला की संज्ञा प्रदान की जाती ह ै। हृदय अनुभूति क े परिणाम स्वरूप ही कला की भाषा भावों स े परिपूर्ण है। भाव का अर्थ हा ेता ह ै, भावना, उद्वेग, आव ेग, संव ेग, उन्मेष, इच्छा, प ्रकृति आ ैर व्यंग इत्यादि का अ ुनभव। यह अनुभव हमारी इन्द्रियों क े द्वारा हमारे आन्तरिक मन मस्तिष्क में उतर कर हमारी आत्मा को प ्रभावित करता ह ै। यह भाव सुख एवं दुख के रूप म
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
30

प, ्रो. सुनीता जैन. "महान संगीतज्ञ तानस ेन". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.886067.

Full text
Abstract:
तानस ेन एक महान संगीतज्ञ थे। अब ुल फजल बादशाह अकबर क े उदार संरक्षण में विभिन्न संगीतज्ञा ें क े हा ेने का वर्ण न करता ह ै, उनमें वह पहला स्थान संगीत सम्राट तानस ेन का े प ्रदान करता ह ै।। तानसेन उस युग क े सर्व श्र ेष्ठ प ्रतिभावान संगीतज्ञ थ े। तानस ेन की प्रशंसा करते ह ुए अब ुल फजल ने लिखा ह ै ’’ भारत में उसक े समान गायक एक सहस्त्र वर्षो से नहीं ह ुआ’’ तानस ेन का जन्म 1531-32 में ग्वालियर से लगभग 43 किला ेमीटर दूर ब ेहट ग्राम में एक गा ैड़ ब ्राम्हण परिवार में ह ुआ था। इनका प ्रारंभिक नाम त्रिलोचन पांडे था, बाल्यकाल से ही उन्ह ें संगीत में विशेष अभिरूचि थी। ग्वालियर के नरेश मानसिंह तोमर ने
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
31

साह ू, प. ्रवीण क. ुमार. "संत कबीर की पर्यावरणीय चेतना". Mind and Society 9, № 03-04 (2020): 57–59. http://dx.doi.org/10.56011/mind-mri-93-4-20219.

Full text
Abstract:
स ंत कबीर भक्तिकालीन निर्ग ुण काव्यधारा अन्तर्ग त ज्ञानमार्गी शाखा क े प ्रवर्त क कवि मान े जात े ह ैं। उनकी वाणिया ें म ें जीवन म ूल्या ें की शाश्वत अभिव्यक्ति एव ं मानवतावाद की प ्रतिष्ठा र्ह ुइ ह ै। कबीर की ‘आ ंखन द ेखी’ स े क ुछ भी अछ ूता नही ं रहा ह ै। अपन े समय की प ्रत्य ेक विस ंगतिया ें पर उनकी स ूक्ष्म निरीक्षणी द ृष्टि अवश्य पड ़ी ह ै। ए ेस े म ें पर्या वरण स ंब ंधी समस्याआ ें की आ ेर उनका ध्यान नही गया हा े, यह स ंभव ही नही ह ै। कबीर क े काव्य म ें प ्रक ृति क े अन ेक उपादान उनकी कथन की प ुष्टि आ ैर उनक े विचारा ें का े प ्रमाणित करत े ह ुए परिलक्षित हा ेत े ह ैं। पर्या वरणीय जागरूक
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
32

क, ंचन क. ुमारी. "मधुवनी चित्रकला म ें र ंगा ें का समाव ेष". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.889288.

Full text
Abstract:
भारत एक प ्राचीन सा ंस्कृतिक देश ह ै। यहाँ की कला एवं संस्कृति में लोककला का अनूठा समन्वय दिर्खाइ देता ह ै। अनेक विद्वानों ने समय-समय पर लोककला क े महत्त्व को बताया ह ै। लोककलाऐं हमारे देश में लोक परम्पराओं संस्कृति का दर्प ण ह ै। जो विभिन्न रीति रिवाज उत्सव में देख े जा सकते ह ै। भारत जैसे ं देश में विभिन्न प्रान्तों में विविध रूपों में लोककला देखी जा सकती ह ै। जा े विभिन्न नामों से जानी जाती ह ै। जा े विश्वभर में ख्याति प ्राप्त ह ै-मधुवनी की लोक चित्रकला उन्हीं में से एक है। मधुवनी का नाम शायद इसलिए हुआ क्या ेंकि इस नाम का अपना एक महत्व ह ै। जा े यहा की लोक चित्रों में मधु जैसी मिठास है। दर
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
33

श्रीमती, प. ूनम शर्मा. "विकलांग चित्रकारा ें के चित्रा े ं म ें र ंगा ें की भ ूमिका". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1. https://doi.org/10.5281/zenodo.890535.

Full text
Abstract:
रंगा ें के बिना जीवन अपूर्ण ह ै। विकलांग चित्रकारों के चित्रों में रंगा ें का विश ेष महत्व ह ै नीरस जीवन जीने को मजबूर ये कलाकार शारीरिक अक्षमताओं के उपरांत भी अपनें चित्रा े ं में रंगा ें के विशिष्ट संया ेजन कर, उन्ह ें जीवित रुप प ्रदान कर , प ्राण डाल देते ह ै ं ,चित्रा े ं द्वारा मूक अभिव्यक्ति इतनी सशक्त होती ह ै कि देखने वाला स्वप्न में भी यह नहीं सा ेच पाता कि इस चित्र का े बनाने वाला विकला ंग ह ै। ए ेसे विशेष कलाकारों के रंगा ें का चयन अति विलक्षण होता है। वर्णों की विभिन्न रंगता ें के कारण ही हम वर्ण विशेष का नाम ज्ञात कर पाते ह ै ं। इन कलाकारा ें के चित्रा ें में रंगा ें के मान का वि
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
34

अनूप, मा ेघ े. "वर्तमान समयानुसार संगीत पाठ्यक्रमा ें म ें बदलाव की आवश्यकता". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.886988.

Full text
Abstract:
भारतीय कलाओं में नवीन प्रया ेग एव ं संभावनाए ँ भारतीय कलाओं में संगीत कला का विशेष महत्व ह ै। संगीत कला अन्य कलाआ ें की तरह मानसिक बोध कराने की अनुक ृति नहीं करती, बल्कि वह स्वयं की इच्छा की अनुकृति है आ ैर यह बोध कराने की क्रिया इसी की छाया ह ै। संगीत के सशक्त प्रभाव का यही कारण है कि वह स्वयं असली तत्व की अभिव्यक्ति करता है। संगीत कला किसी विश ेष सीमित आनन्द, दुःख, पीड़ा, भय, शांति या प्रसन्नता क े व्यक्त नहीं करती बल्कि वह इनके सामान्य आ ैर सार्वभौमिक स्वरूप का े अभिव्यक्ति देती है। संगीत हमारी आत्मा में भक्तिमय अनुभूतिया ं भर देता ह ै। संगीत द्वारा छात्र का बौद्धिक, भावात्मक आ ैर आध्यात्मि
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
35

विशाल, यादव. "बद्रीनाथ आर्य क े वाॅश र ंग पद्धति मंे प ्रया ेगधार्मि ता". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1. https://doi.org/10.5281/zenodo.892050.

Full text
Abstract:
भारतीय आधुनिक कला की प्रारंभ 19वीं सदी के मध्य से मानी जाती है। जब अंग्र ेजी शासक ने यूरा ेपियन कला में भारतीय कलाकारा ें को प ्रशिक्षित करने के लिए मद्रास, कलकत्ता, मुंबई, लाहौर व लखनऊ में कला महाविद्यालय स्थापति करने का निर्ण य लिया। इन कला महाविद्यालया ें ने स्वाभाविक अंग्र ेजी पद्धति से चित्रण करने वाले अ ंग्र ेजी कलाकारा ें की नियुक्ति ह ुई। इसी दौरान जापान के कलाकार हिदिसा आ ैर र्ताइ कान कलकत्ता आए जिन्होंने वाॅश पद्धति का प्रषिक्षण भारत में सर्व प ्रथम अविन्द्रनाथ ठाकुर का े दिया और इसी प्रकार भारत में वाॅश पद्धति का जन्म ह ुआ। जब भारतीय वाॅश पद्धति की बात आती है ता े सबसे पहले बंगाल स्
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
36

डा, ॅ. ़संगीता सक्सेना. "र ंगा ें का मना ेवैज्ञानिक प्रभाव एवं र ंग चिकित्सा". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.888792.

Full text
Abstract:
जीवन का समूचा ताना-बाना रंगा ें से बना ह ै, चाहे हमारे वस्त्र हांे, घर हो, या गाड़ी हो। सबकी पहचान रंगा ें क े साथ ह ै। रंगा ें का मनुष्य क े जीवन आ ैर मन पर विशिष्ट प ्रभाव होता ह ै। रंग प ्रकृति की बहुमूल्य देन ह ै आ ैर मानव क े जीवन का सा ैंदर्य भी। उषाकाल की लालिमा, नीलाभ नभ, भूरे पहाड़, तिनकों, पा ैधों आ ैर प ेड़ों की हरिताभा, फीरोज़ी समुद्र- सबकुछ विशिष्ट और अद्भुत। मनुष्य आ ैर प ्रकृति का संब ंध भी अटूट ह ै। कभी बसंती पीला तो कभी हरियाला सावन, कभी सिताभ ता े कभी तमावृता रात। ऐसे ही मनुष्य की जीवन-यात्रा भी ह ै। कभी सुनहली आशा ता े कभी निराशा की कालिमा। मेघाच्छादित आकाश मन को भी धुँधला द
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
37

सीमा, कदम. "धरती क े ताप की दवा". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.883026.

Full text
Abstract:
आज धरती माॅ ं का द ुःख सर्वविदित है। उसे संभाले रखन े वाले तत्व-जल, वनस्पति, आकाश आ ैर वाय ु, विकास की चिमनियों स े निकलन े वाले धुए ं के कारण हांप रहे हैं । भू-मण्डलीकरण की लालची जीभ न े इन सभी तत्वों को बाजार में सुन्दर पैकिंग में भर व्यापार की वस्त ु क े रूप में प ेश कर दिया है । इन चारों के कम होन े से पाॅ ंचव े अंग यानी अग्नि न े आज प ूरी धरती को भीतर-बाहर से घेर लिया है । जिसके कारण धरती का भीतर-बाहर सब तपन े लगा ह ै । इसीलिए ‘पृथ्वी दिवसों’ की आड ़ में संयुक्त राष्ट्र टाइप धरती के द ूर क े रिश्त ेदार आईसीयू में डाॅयलिसिस पर लेटी धरती को शीशों क े कमरों से झांकत े रहत े हैं । धरती क े बु
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
38

रेड्डी, डॉ.एम. नारायण. "मृदुला गर्ग की कहानियों में सामाजिक चित्रण". Sahitya Samhita 9, № 9 (2023): 1–7. https://doi.org/10.5281/zenodo.10071863.

Full text
Abstract:
मृदुला गर्ग ने भोगे हुए यथार्थ को अपने साहित्य में हू-ब-हू चित्रित करने का प्रयास किया है। उसके बाद धीरे-धीरे उनकी सोच का दायरा बढ़ता चला गया। अपने युगीन व्यक्ति और समाज की सहज झलक इनकी कहानियों में देखी जा सकती है। उन्होंने अपनी कहानियों में युग-जीवन को तथा युग जीवन के संदर्भ में व्यक्ति के जीवन को विभिन्न कोणों, प्रसंगों तथा स्थितियों में देखा है और भिन्न-भिन्न आयामों का चित्रण प्रस्तुत किया है। अब हम समाज को और सामाजिक संगठन को सुनियोजित करने के लिए, उसे तीन प्रमुख वर्गों में विभाजित कर सकते हैं- 'उच्च', 'मध्य' और 'निम्न' वर्ग। किसी भी नगरीय समाज को इन तीनों वर्गें की वि
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
39

रामवीर, सिंह. "समाजिक समस्याऐं व पर्यावरण". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.883543.

Full text
Abstract:
सामाजिक पर्या वरण ;ठपव ैवबपंस म्दअपतवदउमदजद्ध में परिवर्ति त हो रहा है फलस्वरूप पर्या वरण संघटों क े मौलिक गुणा ें म ें परिर्वतन हो रहा है। स्वस्थ जीवन के लिए पर्यावरणीय परीक्षण आवश्यक ह ै, विकास क े संचालन के लिए नत्य व अनत्य संसाधनों का े उपयोग द ुर्लभ एव ं अमूल्य संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता न े पर्यावरण प ्रबन्धन को अव्यन्त महत्वप ूर्ण बना दिया है। 1 पर्यावरण के प ्रति सचेत संवद ेनशील तथा जागरूक बनाया जाना भी ब ेहद जरूरी है, लोगो को यह समझाया जाना आवश्यक है कि आखिर हमारा पर्या वरण या परिस्थितिक त ंत्र क ैसे प्राकृतिक आपदाआ ें से हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करता है तथा पर्यावरण का संरक्षण व
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
40

ऋचा, उपाध्याय. "विभिन्न कालान्तर्गत तत् वाद्या ें म ें अधुनातन प्रयोग". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–4. https://doi.org/10.5281/zenodo.884966.

Full text
Abstract:
भारतीय संगीत में अनेक प्रकार क े तत् वाद्यों की परम्परा आदिकाल से चली आ रही है । आदि मानव ने अपनी रुचि एवं ब ुद्धि क े आधार पर कलात्मक विविध तत् वाद्यों की नी ंव ही नहीं डाली वरन् उनका उपयोग कर मानव जीवन का े भौतिक धरातल से ऊँचा उठाकर कला को दिव्य तथा आलौकिक धरा पर लाकर प्रतिष्ठित कर दिया । तत् वाद्यों की श्रेणी में किये गये प ्रया ेगा ें क े माध्यम से ही संगीत क े सिद्धान्तों ,श्र ुति, स्वर, सप्तक, एक स्वर से दूसरे स्वर की दूरी, मूछ्र्र च्ना पद्धति आदि का े प ्रमाणित व निष्चित किया जा सका । आज भी इसमें निरंतर अधुनातन प ्रयोग किये जा रह े ह ंै, जिस प्रकार स े प ्र त्येक वस्तु में समयंातराल क े
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
41

डा, ॅ. पि ्रयंका व. ैद्य. "गुरू-शिष्य परम्परा बनाम द ूरस्थ शिक्षा कथक नृत्य के स ंदर्भ में". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.886109.

Full text
Abstract:
यह ष्लोक भारतीय दर्ष न, संस्कृति व परम्परा में गुरू क े स्थान का े दर्षा ता है। हमारी प्रत्येक यज्ञ आह ुति में, हर पूजा में इस ष्लोक को बा ेला जाता ह ै। क्या यह हमारे जीवन में गुरू क े स्थान को नही ं दर्षा ता? भारतीय दर्ष न में मनुष्य का े कर्म और ज्ञान के समन्वित रूप से ही स्वीकार किया गया है। उसके ये दो रूप ही उसे समाज में पहचान एवं प ्रतिष्ठा प ्राप्त करने में मार्ग प ्रषस्त करते ह ै ं। माता-पिता मनुष्य का े जन्म देन े क े कारक ह ैं, परन्तु ब ुद्धि, ज्ञान व कर्म का प ्रकाष गुरू के द्वारा ही मनुष्य को प ्राप्त होता है। आज की पीढ़ी नये ज्ञान के प्रकाष में जो कि व ैज्ञानिक ज्ञान है, कम्प्यूटर
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
42

अमृता, सोनी. "स ंगीत चिकित्सा (एक नवाचार)". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–5. https://doi.org/10.5281/zenodo.885055.

Full text
Abstract:
भगवान श्री विष्णु से एक बार नारद जी ने प ूछा आप कहां रहते हैं। तब उन्होंने कहा ह े नारद ना ही मैं ब ैकुण्ठ में रहता ह ूं आ ैर ना ही या ेगिया ें क े हृदय म े।ं लेकिन मेरे भक्त जहां गायन वादन करते ह ै ं वहां मैं मूर्त रूप में उपस्थित रहता हूं। (नारद भक्ति सूत्र) ज्ञान-विज्ञान से परिपूर्ण मानव-जगत में नित नए प्रया ेग हा े रहे ह ैं। जब ये प ्रया ेग जीवन क े अभिन्न अंग बन जाते हैं, तब मानव फिर अभिनव अनुसंधान में प ्रवृत्त हा े जाता है। यद्यपि संगीत स्वयं एक विज्ञान है, किन्तु अभी उसकी सिद्धी क े लिए वर्षा ें की तपस्या अपेक्षित ह ै। इधर कुछ समय से व ैज्ञानिकों का ध्यान संगीत की ओर गया ह ै, लेकिन संग
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
43

आशा, द. ेवी. "हिंदी-साहित्य म ें प्रकृति". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.883531.

Full text
Abstract:
हंदी साहित्यकारों का प्रकृति-प्रेम सर्वविदित है। आदिकाल , मध्यकाल आ ैर आधुनिककाल सभी कालों में प्रकृ ति पर काव्य-रचनाए े ं होती रहीं । प्रसिद्ध छायावादी कवि जयशंकरप्रसादजी लिखत े है ं- ले चल मुझे भुलावा द ेकर मेर े नाविक धीर े-धीर े-जहाँ निर्जन मे ं सागर-लहरी-अंबर के कानो ं में गहरी-निच्छल प्र ेमकथा कहती हो--तज कोलाहल की अवनि कवि न े यहाँ मानव की शांतिप्रियता को इ ंगित किया है ।मानव कोलाहलप्रिय नहीं है, और न ही वह ए ेसी धरती चाहता है।( सागर की लहर) और (अब ंर) के रूप में प्रकृति न े भी मानव से प्र ेम ही किया ह ै ।आज विचारणीय विषय यह है कि फिर ए ेसा क्या है, क्यो ं है, कौन ह ै जो मानव और प्रकृति
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
44

डा, ॅ. अनुराधा अवस्थी. "तनाव प्रब ंधन म ें स ंगीत की भ ूमिका". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.886839.

Full text
Abstract:
तनाव का अर्थ मनुष्य के मन आ ैर मस्तिष्क की उस दशा से ह ैं जिसमें वह अपने विचारों में किसी दबाव और बेचैनी का अनुभव करता ह ै यह ब ेचैनी उसक े शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालती ह ै तनाव की स्थिति ऐसे हार्मोन का स्तर बढ़ा देती है जिससे धड़कन तेज हो जाती ह ै, रक्तचाप बढ़ने लगता ह ै और विभिन्न व्यक्तिया ें में विभिन्न लक्षण देख े जाते है। तनाव प ्रबंधन का अर्थ कुछ ऐसी मनेाव ैज्ञानिक आ ैर शारीरिक क्रियाआंे की प ्रणाली विकसित करने से ह ै जिन्ह े ं सीख कर मनुष्य क े शरीर आ ैर मन पर पडने वाले दुष्प ्रभावा ें को कम किया जा सकता ह ै। रिचर्ड लज़ारस तथा सुसैन फोक मेन के अनुसार जब मनुष्य के पास किसी लक्ष्य तक पह
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
45

डा, ॅ. कुमकुम भारद्वाज. ""अम ूर्त चित्रकला शैली म ें र ंग संया ेजन"". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.890369.

Full text
Abstract:
वर्ण अर्था त रंग किसी भी कलाकृति का प्राण ह ै जा े दृष्टि एवं प ्रकाश पर निर्भ र करता ह ै प्रत्येक वस्तु में का ेई न कोई रंग विद्यमान होता ह ै अतः किसी भी वस्तु की पहचान रंगा ें क े कारण होती ह ै। रंग प ्रकाश का गुण ह ै रंग का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता ह ै अपितु अक्षपटल द्वारा मस्तिष्क पर पड़ने वाला प्रभाव रंग ह ै एक ही रूप की दा े वस्तुआ ें को प ृथक-प ृथक रंगा ें द्वारा पहचाना जाता ह ै रंग वस्तु का वह गुण है जिसका अनुभव हम नेत्रा ें द्वारा करते है प्रकाष की उपस्थिति में ही हम किसी वस्तु का े देख सकते ह ै अतः प ्रकाश हमें रंगा ें का बा ेध कराता ह ै। तूलिका और रंगा ें का निर्मा ण क े संब ंध म
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
46

डा, ॅ. कुमकुम भारद्वाज. ""अम ूर्त चित्रकला शैली म ें र ंग संया ेजन"". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.890487.

Full text
Abstract:
वर्ण अर्था त रंग किसी भी कलाकृति का प्राण ह ै जा े दृष्टि एवं प ्रकाश पर निर्भ र करता ह ै प्रत्येक वस्तु में का ेई न कोई रंग विद्यमान होता ह ै अतः किसी भी वस्तु की पहचान रंगा ें क े कारण होती ह ै। रंग प ्रकाश का गुण ह ै रंग का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता ह ै अपितु अक्षपटल द्वारा मस्तिष्क पर पड़ने वाला प्रभाव रंग ह ै एक ही रूप की दा े वस्तुआ ें को प ृथक-प ृथक रंगा ें द्वारा पहचाना जाता ह ै रंग वस्तु का वह गुण है जिसका अनुभव हम नेत्रा ें द्वारा करते है प्रकाष की उपस्थिति में ही हम किसी वस्तु का े देख सकते ह ै अतः प ्रकाश हमें रंगा ें का बा ेध कराता ह ै। तूलिका और रंगा ें का निर्मा ण क े संब ंध म
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
47

रेखा, धीमान. "मुगल कालीन रंग निर्माण -प्रक्रिया (जहाँगीर काल क े संदर्भ म ें)". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.890563.

Full text
Abstract:
म् ुागल चित्रकला सम्प ूर्ण एषिया में स्वतंत्र आ ैर महत्वपूर्ण पहचान बनाये हुए है। तैमूर वंष की पांचवी पीढ़ी क े बाबर ने सन् 1527 में भारत के कुछ हिस्सा ें पर अपना आधिपत्य कर मुगल संस्कृति का े स्थापित किया। जिसे ह ुमा ंयू , अकबर, जहाँगीर, षाहजहँा आ ैर आ ैरंगज ेब आदि षासकों ने विस्तार दिया। इस समय सभी कलाआ ें का समुचित विकास हुआ। षाहजहँा के षासन काल तक म्ुागल कालीन चित्रकला चरम - व ैभव को प ्राप्त थी। इस पर्र इ रानी, चीनी आ ैर पष्चिमी कला ष ैली का प ्रभाव पडा। इस समय चित्रकला लघ ु आ ैर स्फ ुट चित्रा ें क े रुप प ्रभावषाली रही। ’जहाँगीर काल (1605 स े 162र्7 इ . तक) चित्रकला लघ ुचित्रा ें क े रुप
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
48

आरती, दुबे. "''सिने स ंगीत में शास्त्रीय प्रया ेग-संगीतकार स्व. नौषाद द्वारा''". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–4. https://doi.org/10.5281/zenodo.886824.

Full text
Abstract:
संगीत क े विविध रूपों में सुगम संगीत का विषिष्ट स्थान ह ै। इस विधा के अ ंतर्गत आने वाला सिने संगीत या चित्रपट संगीत जनमानस में अन्य विधाओं की अपेक्षा सर्वाधिक लोकपि ्रय है। अपनी सरलता चमत्कारपूर्ण अभिव्यक्ति की प ्रधानता आ ैर भाव प ्रवणता क े कारण यह जनमानस में अत्यंत लोकपि ्रय ह ै। सिने संगीत की जनसाधारण में अत्यंत लोकप्रियता के अनेक कारण ह ैं। सिने संगीत शब्द प ्रधान एवं भाव प ्रधान होता ह ै। इस कारण जनसामान्य का े उसमें अपनी भावनाए ँ अपना सुख दुःख नजर आता ह ै आ ैर वो इसके सरलतम रूप में अपनी व्यक्तिगत जिंदगी की स्थितियों क े अनुभव क े रूप में अपने आपका े देख पाता ह ै, इसकी सादगी के जरिए उसे
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
49

पवनेन्द्र, कुमार तिवारी. "मध्यकालीन पुस्तक चित्रा े तथा लघु चित्रा े म ें र ंग". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.891930.

Full text
Abstract:
मध्यकालीन भारत में चित्रण क े लिए रंग र्कइ प ्रकार के पदार्थो जैसे खनिजों या ेगिका े अथवा प्राकृतिक लवणा ें से प ्राप्त किये जाते थे। कुछ रंग प ्राकृतिक वस्तुओं जैसे वनस्पति जैव पदार्था े स े प ्राप्त किये जाते थे। उदाहरण क े लिए नीम तथा कृमिदाना आदि काजल का प्रयोग न क ेवल चित्रा े में बल्कि लेखन कार्य में भी बडे प ैमाने पर हुआ। इसी प ्रकार लाल स्याही चाँदी तथा सा ेने में लिखा होने क े कारण स्वणाक्षरी शेत्याक्षरी नाम दिया गया । लाल स्याही का प्रयोग अहमाया े क े अन्त में हाशिये खीचने में व ृन्तों रेखाओं यंत्रा ें आदि में हुआ। स्वर्ण रजत चूर्ण से लिखी जाने वाली प ुस्तके अधिक व्यय-साध्य थी उनमें
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
50

निधि, गुप्ता. "उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन हेतु विभिन्न स्तरों पर संस्थागत ढांचा एवं कार्य: एक विमर्श". RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES 11, № 1 (2024): 122–27. https://doi.org/10.5281/zenodo.11001993.

Full text
Abstract:
उत्तराखंड अपने प्राकृतिक सौंदर्य एवं संपदाओं  से सम्पन्न पर्वतीय राज्य है, यहाँ पर एक ओर हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखलाएं है तो दूसरी और सदूर तक विस्तृत हरी-भरी वनराजियों है। यहाँ एक ओर सुन्दर फूलों की घटिया है, वहीं दूसरी ओर सूखे- नंगे कठोर पहाड़, नदियों और झरनों का कल- कल निनाद, सभी के मन को मोह लेता है। परंतु प्रकृति के सन्तुलन को बिगाड़ते मानवीय क्रिया-कलापों से यहाँ प्रकृति का रौद्र रूप भी उत्तराखंड में  विभिन्न आपदाओं के रूप में  यदा- कदा देखने को मिलता है, जिसमें बाढ, भकम्प, भूस्खलन, वनाग्नि, ब अतिवृष्टि, अनावृष्टि व बादल फटना आदि प्रमुख आपदाएँ है, जो राज्य में आपदाओं की संवे
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
We offer discounts on all premium plans for authors whose works are included in thematic literature selections. Contact us to get a unique promo code!