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Ankita, Shambhawi Verma. "बंगाल के बाउलों की साधना". Sameecheen 29, Oct. -Dec., 2021 (2021): 105–11. https://doi.org/10.5281/zenodo.8126926.

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Abstract:
बाउल बंगाल के ऐसे संप्रदाय विशेष के लोग होते हैं जो किसी भी सामाजिक नियम, रीति-रिवाज़ों, शास्त्रों को नहीं मानते हैं और न ही उनके अनुरूप आचरण करते हैं। बाउल अपने साधना पद्धति को लेकर अत्यंत रहस्यवादी होते हैं, उनकी साधना पद्धति की मुख्य धुरी गुरु पर केंद्रित होती है, जिनके बिना साधना की सफलता असंभव है। बाउलों की साधना का मुख्य उद्देश्य शरीर के भीतर ही 'मोनेर मानुष' को प्राप्त करना है। उनके यहाँ चारिचंद्र साधना का विधान है जिसमें शारीरिक तत्वों और अनुशासन की अनिवार्यता होती है।
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Ankita, Shambhawi Verma. "बंगाल के निरक्षर सहज साधक बाउल". Aadhunik Sahitya 40, Oct. -Dec., 2021 (2021): 134–38. https://doi.org/10.5281/zenodo.8126915.

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Abstract:
बाउलों के संबंध में कोई स्वतंत्र ग्रंथ नहीं मिलता। मोटे तौर पर हम कह सकते हैं कि वैष्णव-सहजिया पंथ के ही ग्रंथ, तत्व और दर्शन ही बाउलों के भी तत्व और दर्शन कहलाएंगे। उपेंद्रनाथ भट्टाचार्य के अनुसार लोचनदास के 'वृहत् निगम' और पंचानन दास के संग्रह ग्रंथ बाउल संप्रदाय के संबंध में विशेष मूल्यवान सिद्ध होते हैं। इसके अलावा बाउल गीतों में इनका दर्शन और विशेष रूप से इनकी साधना पद्धति की जानकारी हमें मिलती है।
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विष्णु, शंकर तिवारी. "भारत-बांग्लादेश तीस्ता नदी जल विवाद का एक संक्षिप्त अवलोकन". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 18 (2023): 180–82. https://doi.org/10.5281/zenodo.8052061.

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Abstract:
“जल ही जीवन है” हर जीवन का मूल आधार जल ही हैं, जिसके लिए आदि अनादि काल से धरती पर जीवन को बचाने के लिए जल की महत्ता रही है। उसी कड़ी में वर्ष 1951 में पूर्वी पाकिस्तान जो कि आज का बांग्लादेश से भारत की जल के साझाकरण पर एक चर्चा का प्रारंभ हुआ। तीस्ता नदी की बात की जाए तो इस पर भारत के पश्चिम बंगाल के उत्तर बंगाल के लगभग 6 जिले तीस्ता नदी पर ही आश्रित हैं। तथा पश्चिम बंगाल में इस नदी पर 60 मेगा वाट बिजली उत्पादन का हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बना रखा है। नौ लाख बाइस हजार हेक्टेयर भूमि का सिंचन भी इसी नदी के जल पर निर्भर है। यदि बांग्लादेश की बात की जाए तो गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना के बा
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कष्यप, प्रेमलता. "बंगाल के सुप्रसिद्ध चित्रकार - असित कुमार हाल्दार एवं क्षितीन्द्रनाथ मजूमदार - एक अध्ययन". SCHOLARLY RESEARCH JOURNAL FOR INTERDISCIPLINARY STUDIES 9, № 66 (2021): 15480–85. http://dx.doi.org/10.21922/srjis.v9i66.6844.

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Abstract:
कला सदैव से मनुश्य की सहचरी रही है, मनुष्य के सृजन की प्रक्रिया, जिसमें नवीनता का समावेष हो वही कला है। कला एक ऐसी अभिव्यक्ति है, जिसमें सुख षान्ति की प्राप्ति होती है। आत्मा के स्वरूप को समझने की जिज्ञासा और प्रवृत्ति को समझना एक मानवीय स्वभाव है। कलाकार की कृतियों के माध्यम से इस स्वरूप को आसानी से समझा जा सकता है। बगांल षैली कला के पुर्नजागरण काल का अभ्युदय माना जाता है। जिसका श्रेय श्री ई0वी0हेविल और श्री अवनीन्द्रनाथ जी को निःसन्देह जाता है। अवनीन्द्र नाथ के षिश्य असित कुमार हाल्दार और क्षितिन्द्रनाथ मजूमदार हुए जिन्होनें बगांल शैली में कार्य किया जहां क्षितीन्द्रनाथ मजूमदार जी के चित्र व
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मजूमदार, पांचाली. "ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण से संबंधित नीतियाँः पश्चिम बंगाल के विशेष संदर्भ में अध्ययन". Lokprashasan 15, № 4 (2024): 94–102. http://dx.doi.org/10.32381/lp.2023.15.04.8.

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चौबे, मिथिलेश कुमार. "नक्सलवाद का उद्भव एवं विकास: एक समाजशास्त्रीय अध्ययन". Humanities and Development 17, № 1 (2022): 40–42. http://dx.doi.org/10.61410/had.v17i1.38.

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Abstract:
सामाजिक व्यवस्था केे बनाने वालों को इतना भी अन्दाजा नहीं रहा होगा कि उनकी कुचालों से भविष्य में किस तरह की समस्या खड़ी हो सकती है। अगर नक्सलवाद से सम्बन्धित समस्याओं का गम्भीरता से अध्ययन किया जाए तो यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि आजादी के साथ देश का बंटवारा होना और आजादी के 20 साल बाद नक्सलवाद हमारी व्यवस्था की ही देन है। यह देश के लिए एक ऐसा नासूर बन गया है जो उसके अस्तित्व के लिए खतरनाक होता जा रहा है। 1967 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के अनाम गांव नक्सलवाड़ी से शुरू हुआ इसका सफर आज अपने लिए नित नई मंजिले तय कर रहा है।
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भण्डारी Bhandari, इन्द्रकला Indrakala. "मेचे जातिको परिचयात्मक अध्ययन {An Introductory Study of the Meche Caste}". PRAGYAN A Peer Reviewed Multidisciplinary Journal 3, № 1 (2021): 1–9. http://dx.doi.org/10.3126/pprmj.v3i1.61653.

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Abstract:
नेपालमा बसोवास गर्ने अल्पसङ्ख्यक लोपोन्मुख समुदायअन्तर्गत पर्ने आदिवासी जनजातिका रूपमा मेचे जातिलाई लिइन्छ । मेचे जातिको बसोवास विशेषतः प्रदेश नं १ को झापा जिल्लाका जलथल, भद्रपुर, लखनपुर अनारमुनी, ज्यामिरगढी, बाहुनडाँगी, शनिश्चरे, चकचकी, महेशपुर बनियानीजस्ता विभिन्न गाउँवस्तीहरूमा पाइन्छ । नेपाल बाहिर भारतको आसाम, पश्चिम बंगाल, सिक्किम तथा भुटानका केही क्षेत्रहरूमा पनि यिनीहरू बसोवास गर्दछन् । यिनीहरूका मौलिक सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक विशेषता यो आदिवासी जनजातिलाई चिनाउने प्रमुख आधार हुन् । यो लेख मेचे जातिको परिचयात्मक अध्ययनसँग सम्बन्धित छ । विश्लेषणात्मक र विवरणात्मक ढाँचामा आधारित छ । यस
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Yadav, Vishal. "RELIGION IN THE COLOR SYSTEM UNDER BADRINATH ARYA." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 2, no. 3SE (2014): 1. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v2.i3se.2014.3678.

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Abstract:
Indian modern art is considered to have started from the mid-19th century. When the English ruler decided to set up art colleges in Madras, Calcutta, Mumbai, Lahore and Lucknow to train Indian artists in European art. These art colleges hired English artists who painted using natural English method. During this time, Japanese artists Hidisa and Taikan came to Calcutta who trained the Wash system first in India to Avindranath Thakur and this is how the Wash system was born in India. When it comes to the Indian wash system, first comes the atmosphere of the Bengal School, by which trained artist
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Chandra, kanta Sharma. "भारतीय मानसून: वर्तमान के संदर्भ में (INDIAN MONSOON: IN THE CONTEXT OF CURRENT)". International Journal of Research - Granthaalayah 5, № 12 (2017): 318–21. https://doi.org/10.5281/zenodo.1135028.

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Abstract:
भारत में मानसून उन ग्रीष्मकालीन हवाओं को कहते हैं जो दक्षिण एशिया में जून से सितंबर तक सक्रिय रहती हैं। ये हवाएं हिन्दमहासागर, बंगाल की खाड़ी और अरबसागर से भारतीय उपमहाद्वीप की ओर प्रवाहित होती है। इनकी दिशा दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-उत्तर की ओर होती है अतः मानसूनी हवाओं को दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं के नाम से भी जाना जाता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून देश में कुल वर्षा का 70% भाग प्रदान करता है। लेकिन इस वर्ष देश में औसत से कम वर्षा दर्ज की गई है संपूर्ण देश में 5.2% की कमी रही। देश के उत्तर – पश्चिम क्षेत्र में सबसे अधिक 10 फीसद की कमी दर्ज की गई। जून और जुलाई में अच्छे वर्षा के बाद अगस्त और
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thakur, Pappu, and Dr Narad singh. "Naxalism collapse in Bihar." International Journal of Multidisciplinary Research Configuration 1, no. 2 (2021): 09–13. http://dx.doi.org/10.52984/ijomrc1203.

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Abstract:
नक्सलीय समस्या हमारे देश के लिए बड़ा आंतरिक खतरा बन गया है। खासकर 2007 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की टिप्पणियों के बाद, यह एक चिंता का विषय बन गया है और साथ ही अकादमिक बहस का विषय भी है। इस मुद्दे को बड़े पैमाने पर और गहनता से संबोधित करने के लिए नवीन विचार और नए सिरे से योजना बनाई गई है। इस पृष्ठभूमि में, मध्य बिहार का एक मामला अध्ययन इस मुद्दे पर प्रकाश को केंद्रित करने के लिए प्रासंगिक हो जाता है। यह एक स्थापित तथ्य है कि बिहार में नक्सलवाद ने मध्य बिहार के माध्यम से अपना रास्ता बनाया था। जब काउंटरिंसर्जेंसी तंत्र ने पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में नक्सलवाद के पहले बुलबुले को कुचल दिया, तो
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शिल्पी, मंडल. "स्वतंत्रता सेनानी नंदलाल भकत". 'Journal of Research & Development' 15, № 1 (2023): 5–10. https://doi.org/10.5281/zenodo.7575728.

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Abstract:
15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिली। इस स्वतंत्रता की उपलब्धि के पीछे अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों का आत्म-बलिदान था। राम मोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, बंकिमचंद्र चटर्जी, विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, नजरुल इस्लाम, शरतचंद्र चटर्जी, खुदीराम बोस, मातंगिनी हाजरा, विनॉय-बादल-दिनेश और अन्य इस मिट्टी पर पैदा हुए थे। इन सभी महापुरुषों और कुलीनों ने बंगाल और भारत के निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाई। कामदाकिंगकर मुखोपाध्याय (दिवंगत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पिता), ताराशंकर बंद्योपाध्याय, दुखरीबाला देवी (उन्हें मासिमा के नाम से जाना जाता था), ननीबाला देवी, उमा दत्ता, दिनकर कौशिक, सुमित्रानंद
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Pappu, thaakur, та Naarad sinh Dr. "Naxalism collapse in Bihar (विहार में नक्सलवाद का पतन)". International Journal of Multidisciplinary Research Configuration 1, № 2, April 2021 (2021): 9–13. https://doi.org/10.5281/zenodo.4718312.

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Abstract:
नक्सलीय समस्या हमारे देश के लिए बड़ा आंतरिक खतरा बन गया है। खासकर 2007 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की टिप्पणियों के बाद, यह एक चिंता का विषय बन गया है और साथ ही अकादमिक बहस का विषय भी है। इस मुद्दे को बड़े पैमाने पर और गहनता से संबोधित करने के लिए नवीन विचार और नए सिरे से योजना बनाई गई है। इस पृष्ठभूमि में, मध्य बिहार का एक मामला अध्ययन इस मुद्दे पर प्रकाश को केंद्रित करने के लिए प्रासंगिक हो जाता है। यह एक स्थापित तथ्य है कि बिहार में नक्सलवाद ने मध्य बिहार के माध्यम से अपना रास्ता बनाया था। जब काउंटरिंसर्जेंसी तंत्र ने पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में नक्सलवाद के पहले बुलबुले को कुचल दिया,
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अजय, कुमार ओझा. "वर्तमान राजनीति में राज्यपाल की विवादास्पद भूमिका". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 22 (2023): 26–29. https://doi.org/10.5281/zenodo.8146298.

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Abstract:
राज्यों में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए तथा सामाजिक एवं आर्थिक विकास कार्यों को संचालित करने के लिए हमारे संविधान वेताओं ने संसदात्मक शासन व्यवस्था के साथ-साथ एकात्मक शासन व्यवस्था के कुछ गुणों को अपनाया । विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों एवं नीतियों को व्यवहारिक रूप प्रदान करने के लिए कार्यपालिका का गठन किया गया है। हमारे देश के संघीय शासन की भांति भारतीय राज्यों में भी कार्यपालिका के तीन स्वरूप भारतीय संविधान के भाग 6 के अनुच्छेद 153 से 167 में वर्णित है। भारतीय संविधान के अनुसार राज्यपाल राज्य स्तर पर संवैधानिक प्रमुख होता है। कार्यपालिका का प्रमुख होने के नाते वह राज्य के प्रमुख के रूप
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यादव, देवेंद्र कुमार. "गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के षिक्षा दर्षन का वर्तमान परिप्रेक्ष्य और उसकी प्रासंगिकता". SCHOLARLY RESEARCH JOURNAL FOR HUMANITY SCIENCE AND ENGLISH LANGUAGE 10, № 53 (2022): 13444–50. http://dx.doi.org/10.21922/srjhsel.v10i53.11645.

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Abstract:
रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई सन् 1861 ई॰ को बंगाल के एक षिक्षित धनी तथा सम्मानित परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम महर्षि देवेंन्द्र नाथ टैगोर था। देवेन्द्र नाथ अपने पुत्र टैगोर को संस्कृत षिक्षा के साथ-साथ भारतीय दर्षन एवं नक्षत्र विज्ञान (ज्योतिष षिक्षा) की षिक्षा दिलाई। सन् 1877 ई॰ में रविन्द्रनाथ टैगोर को कानून पढ़ने के लिए इंग्लैंड भेजा गया परंतु वहां उन्हें संतुष्टि नहीं हुई और वे बिना कोई षिक्षा की डिग्री लिए हुए वापस भारट लौट आए। रविन्द्रनाथ टैगोर की षिक्षा अधिकतर गृह षिक्षण तथा स्वाध्याय के द्वारा घर पर ही हुई। उन्होंने वे बाल्यावस्था से ही बंगाली पत्रिकाओं में लेखन लिखते थे तथा लो
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Sharma, Chandra kanta. "INDIAN MONSOON: IN THE CONTEXT OF CURRENT." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 5, no. 12 (2020): 318–21. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v5.i12.2017.508.

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Abstract:
The monsoon in India is called the summer winds which are active in South Asia from June to September. These winds flow from the Indian Ocean, the Bay of Bengal and the Arabian Sea towards the Indian subcontinent. Their direction is towards the south-west and south-north, hence the monsoon winds are also known as the south-west monsoon winds. The southwest monsoon provides 70% of the total rainfall in the country. But this year, the country has received less than average rainfall, which was 5.2%. The northwest region of the country recorded the highest decrease of 10 percent. After good rainfa
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अजय, चौधरी, та पशुपति प्रसाद डॉ. "चीन की मोतियों की माला और हिंद महासागर की सुरक्षा चुनौतियां (भारत के विशेष संदर्भ में)". 'Journal of Research & Development' 15, № 3 (2023): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.7694830.

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Abstract:
मोतियों की माला हमारे देश के आसपास के हिंद महासागर क्षेत्र आई ओ आर में एक नेटवर्क स्थापित करने की मंशा से संबंधित हैं। इस माले की प्रत्येक मोती एक स्टिंग के साथ स्थानों की एक श्रृंखला में अस्थाई चीनी सैन्य स्थापना क्षेत्र के रूप में प्रतिस्थापित होना है। हमारे देश के चारों ओर हाल ही में बंदरगाहों का विकास हुआ है म्यांमार  में बंगाल की खाड़ी के तट पर ग्वादर, हंबनटोटा, सितवे आदि में मोतियों की एक स्ट्रिंग के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि यह बंदरगाह व्यवसायिक हैं फिर भी चीन के विस्तार वादी नीति का एक कड़ी है जो कि भारत को समय के अनुसार घेरने का एक अड्डा हो सकता है। तभी तो मीडिया ने इस घेर
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Kishor, Kumar, та Kumari Anjna. "मध्यकालीन भारत में शिक्षा की व्यवस्था का समालोचनात्मक अध्ययन". Shodh Sarita 08, № 29 (2021): 142–48. https://doi.org/10.5281/zenodo.15303577.

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Abstract:
भारत में  मुस्लिम शासन स्थापित होने से पहले यहाँ प्राचीन व बौद्ध कालीन शिक्षा व्यवस्था ही चल रही थी, लेकिन मुस्लिम शासक भारतीयों से अलग भाषा व संस्कृति से संबंधित थे और उन्होनें उसी को बढावा दिया। मुस्लिम शासकों  ने मस्ज़िदें, मकतब व मदरसों का निर्माण कराया तथा इन्हीं के माध्यम से शिक्षण कार्य को प्रोत्साहित किया। प्राचीन भारतीय शिक्षा  को आश्रय न मिलने के कारण समाप्ति की कागार पर थी। फारसी भाषा को राजभाषा  का दर्जा मिलने के कारण इसी का ज्ञान रखने वालों  को राज्य में  प्रशासनिक पदों  की प्राप्ति होती थी। अतः भारतीय भी फारसी भाषा का ज्ञान प्राप्त करने के लिए आ
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विशाल, यादव. "बद्रीनाथ आर्य क े वाॅश र ंग पद्धति मंे प ्रया ेगधार्मि ता". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1. https://doi.org/10.5281/zenodo.892050.

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Abstract:
भारतीय आधुनिक कला की प्रारंभ 19वीं सदी के मध्य से मानी जाती है। जब अंग्र ेजी शासक ने यूरा ेपियन कला में भारतीय कलाकारा ें को प ्रशिक्षित करने के लिए मद्रास, कलकत्ता, मुंबई, लाहौर व लखनऊ में कला महाविद्यालय स्थापति करने का निर्ण य लिया। इन कला महाविद्यालया ें ने स्वाभाविक अंग्र ेजी पद्धति से चित्रण करने वाले अ ंग्र ेजी कलाकारा ें की नियुक्ति ह ुई। इसी दौरान जापान के कलाकार हिदिसा आ ैर र्ताइ कान कलकत्ता आए जिन्होंने वाॅश पद्धति का प्रषिक्षण भारत में सर्व प ्रथम अविन्द्रनाथ ठाकुर का े दिया और इसी प्रकार भारत में वाॅश पद्धति का जन्म ह ुआ। जब भारतीय वाॅश पद्धति की बात आती है ता े सबसे पहले बंगाल स्
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डॉ., अरविंद कुमार, та देवेन्द्र कुमार पाण्डेय डॉ. "सोशल मीडिया और उसके प्रभाव को समझना". International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary 3, № 5 (2024): 207–9. https://doi.org/10.5281/zenodo.13997555.

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Abstract:
"इंटरनेट एक दोहरी धार वाली तलवार है, जो समाज को एक ओर जोड़ती है और दूसरी ओर तोड़ती भी है। यह एक ऐसा माध्यम है जहां अच्छाई और बुराई दोनों को समान रूप से प्रसारित किया जा सकता है, और जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक स्तर पर इसके प्रभाव को देखना शुरू कर रहे हैं।"  भारत ने हाल के वर्षों में मास मीडिया और सोशल मीडिया के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखी है, जिससे मीडिया की भूमिका वर्तमान परिदृश्य में अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गई है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के विकास ने टेलीविजन, इंटरनेट, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया जैसे कई समाचार और सूचना स्रोतों की उपलब्धता और पहुंच को बढ़ाया है । मीडिया न केवल संद
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निशा, माहौर. "प्राचीन भारतीय ग्रन्थ में चित्रकला उल्लेख". International Journal of Research - Granthaalayah 7, № 11(SE) (2019): 252–56. https://doi.org/10.5281/zenodo.3592634.

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Abstract:
प्राचीन भारतीय ग्रन्थों में चित्रकला से सम्बन्धित नियमों का उल्लेख विस्तृत रूप से मिलता है जिसमें काव्य, नाटक, महाकाव्य, पुराण, उपनिषद् व विभिन्न विषयों के ग्रन्थों द्वारा भारतीय चित्र लेखन की प्राचीन परम्परा व सांस्कृतिक विधियों एवं जनमानस में उनकी लोकप्रियता का वर्णन मिलता है। इसके अतिरिक्त कुछ ऐसे ग्रन्थ भी हैं, जिनमें स्वतन्त्र व व्यापक रूप से चित्रकला की व्याख्या विस्तार रूप से की गयी है। उदाहरण स्वरूप विष्णुधर्मोत्तर पुराण मार्कण्डेय द्वारा रचित इस ग्रन्थ में 269 अध्याय हैं। जिसके अन्तर्गत तीसरे खण्ड में संस्कृत विषयों में विशेषकर ललित कलाओं के लिये सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। जिसमें अध्याय
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शुक्ल, पंकज कुमार. "अखण्ड राष्ट्र के पुरोधा श्याम प्रसाद मुखर्जी: एक ऐतिहासिक दृष्टि". Humanities and Development 19, № 03 (2024): 13–15. https://doi.org/10.61410/had.v19i3.197.

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Abstract:
सिंह का कभी राज्याभिषेक नहीं होता तभी तो अपने पराक्रम से वह स्वतः ही ‘‘मृगेंद्र’’ पद को प्राप्त करता है। यह युक्ति वन के प्राणियों के लिए ही नहीं मानव के व्यवहार में भी चरितार्थ होती हैं। भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष और भारतीय लोकसभा में विरोधी पक्ष के प्रमुख नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी अपनी विद्वता और वाकपटुता एवं महान व्यक्तित्व के कारण लोकप्रिय हैं। संसार में ऐसे कम लोग हैं जिन्होंने जीवन के केवल 52 साल के अंतिम 14 साल राजनीति में बिताए हों और इसी अल्पावधि में यह महानतम ऊंचाई को छूकर इतिहास में अमर हो गए हो। श्यामा प्रसाद मुखर्जी इनमें से एक थे। उनका जन्म 8 जुर्ला 1901 केा कलकत्ता में हुआ था। ‘‘ब
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नलिनी, देविदास अंबुरे, та डॉ. निवृत्ती पिस्तूलकर व. "आदिवासी विकासयोजने अंतर्गत शासकीय आश्रमशाळा समूहयोजनेची पार्श्वभूमी". International Journal of Advance and Applied Research S6, № 18 (2025): 198–202. https://doi.org/10.5281/zenodo.15245343.

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Abstract:
<em>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; आदिवासी ही जमात भारतामध्ये वेगवेगळ्या डोंगर रांगेमध्ये आढळते. त्याचप्रमाणे जगामध्ये तसेच वेगवेगळ्या देशात ही आदिवासी जमात आढळते ही जमात वेगवेगळ्या देशात वेगवेगळ्या नावाने ओळखली जाते जसे युरोपमध्ये जिप्सी, आफ्रिका व आशिया खंडात आदिवासी म्हणून ओळख आपणास दिसून येते.&nbsp; भारतामध्ये लक्षद्वीप, अंदमान व निकोबार बेटे ओडिसा, छत्तीसगड, झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, उत्तर पूर्व भारतात त्याचबरोबर महाराष्ट्र राज्यांमध्ये सातपुडा पर्वत, सह्याद्री डोंगररांग, बालाघाट व निर्मल डोंगररांग इत्यादी ठिकाणी आदिवासी समाज मोठ्या प्रमाणात आढळून येतो. आदिवा
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पासवान, चंदन कुमार. "राष्ट्रीय आंदोलन में महर्षि अरविंद घोष का योगदान". INTERNATIONAL JOURNAL OF SCIENTIFIC RESEARCH IN ENGINEERING AND MANAGEMENT 09, № 07 (2025): 1–9. https://doi.org/10.55041/ijsrem51506.

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Abstract:
महर्षि अरविंद का योगदान भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में एक विशिष्ट विचारधारा और गहन वैचारिक दिशा प्रस्तुत करता है। वे न केवल एक क्रांतिकारी नेता थे, बल्कि एक दार्शनिक, कवि और आध्यात्मिक चिंतक भी थे, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता को केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि एक व्यापक आध्यात्मिक प्रक्रिया के रूप में देखा। यह शोध आलेख उनके बहुआयामी योगदान का विश्लेषण करता है, जिसमें उनके क्रांतिकारी राष्ट्रवाद से लेकर आध्यात्मिक राष्ट्रवाद तक की विचारयात्रा को शामिल किया गया है। अरविंद घोष ने प्रारंभ में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध तीव्र प्रतिरोध और सशस्त्र क्रांति का समर्थन किया। वे बंगाल विभाजन के विरोध मे
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Dhankar, Rita. "Major Classical Instrument of Hindustani Music." RESEARCH REVIEW International Journal of Multidisciplinary 7, no. 2 (2022): 08–11. http://dx.doi.org/10.31305/rrijm.2022.v07.i02.002.

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Abstract:
The strings of the musical instruments are struck by rubbing them with the hair of a horse mounted on a gaz or a wooden stick. These instruments completely imitate the singing styles. Instruments like sarangi, dilruba and israj are the main classical instruments of the Musical category. The stringed instrument used in concerts is made of a single piece of wood and is about sixty centimeters long. Due to the contact of prostitutes, this instrument was neglected in the prestigious society for many years, but due to its personal characteristics, at this time it has managed to get the most importa
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Yadav, Indu. "A Study on the Freedom of the Press in the Indian Constitution." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 10, no. 2 (2023): 19–23. http://dx.doi.org/10.53573/rhimrj.2023.v10n02.005.

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Abstract:
We get the introduction of the freedoms provided in the Indian Constitution in the preamble itself. Five types of freedoms have been provided in the preamble, freedom of thought, expression, belief, religion and worship. In these also the main part of our study is the freedom of the press. Which is freedom of expression in the constitution i.e. Anu. contained in Part 1 of 19 itself. The press is considered as the fourth pillar of the constitution because the freedom of the press is especially important in the strengthening of democracy. For this reason, the press and its freedom have a history
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सुनील, कुमार तिवारी. "हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत का सुरक्षा उत्तरदायित्वः एक मूल्यांकन". International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary 2, № 6 (2023): 60–63. https://doi.org/10.5281/zenodo.10446887.

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Abstract:
सम्पूर्ण विश्व एक मूल-भूत परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, तथा इसके साथ ही बदल रहा है विश्व का शब्द कोश, जिसमें आवश्यकता एवं महत्ता के आधार पर एक शब्द है &lsquo;इंडो-पैसिफिक&lsquo; जिसने विगत कुछ वर्षों में विश्व की महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं की भू-रणनीति को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान समय में विश्व के कई देशों ने अपने-2 अधिकारपत्र में आवश्यकतानुसार विवरण तैयार कर रहे हैं। भौगोलिक तौर पर हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ भागों को मिलाकर समुद्र का जो हिस्सा बनता है, उसे हिंद-प्रशांत ;प्दकव.च्ंबपपिब ।तमंद्ध के नाम से जाना जाता है। हिंद और प्रशांत महासागर की बढ़ती अहमियत ने &
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डॉ०, मो० शाहब उद्दीन, та अहमद अंसारी इंजमालउल. "बिहार के सिवान जिले में पंचायती राज व्यवस्था के सामाजिक भागीदारी". 'Journal of Research & Development' 15, № 4 (2023): 25–27. https://doi.org/10.5281/zenodo.7694955.

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Abstract:
पंचायती&nbsp; राज का अर्थ है कि 5 लोगों की एक परिषद भारत में 2/3 जनसंख्या गांव में निवास करती है महात्मा गांधी ने गांव को एक छोटा उप राज्य का स्थापना किया भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था अस्तित्व में रही है समाज का जगउधार अभी भी ग्राम पंचायत ही है भारत में पंचायती राज्य व्यवस्था में ग्राम तहसील तालुका जिला आते हैं पंचायती राज राज्य के भूमि में सम्मिलित है ब्रिटिश शासन काल में स्थानीय स्वायत शासन प्रथम प्रयास 1882 में वायसराय लार्ड रियन ने किया था 1907 में सही आयोग का गठन उसके बाद 1920 में संयुक्त प्रोत, असन&nbsp; बंगाल बिहार मद्रास के दौरान भी संघ ससस्त् लोगों के लिए पंचायती रा
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इंजमालउल, अहमद अंसारी, та मो० शाहब उद्दीन डॉ०. "बिहार के सिवान जिले में पंचायती राज व्यवस्था के सामाजिक भागीदारी". 'Journal of Research & Development' 15, № 18 (2022): 59–61. https://doi.org/10.5281/zenodo.7431833.

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Abstract:
<strong>:- </strong>पंचायती&nbsp; राज का अर्थ है कि 5 लोगों की एक परिषद भारत में 2/3 जनसंख्या गांव में निवास करती है महात्मा गांधी ने गांव को एक छोटा उप राज्य का स्थापना किया भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था अस्तित्व में रही है समाज का जगउधार अभी भी ग्राम पंचायत ही है भारत में पंचायती राज्य व्यवस्था में ग्राम तहसील तालुका जिला आते हैं पंचायती राज राज्य के भूमि में सम्मिलित है ब्रिटिश शासन काल में स्थानीय स्वायत शासन प्रथम प्रयास 1882 में वायसराय लार्ड रियन ने किया था 1907 में सही आयोग का गठन उसके बाद 1920 में संयुक्त प्रोत, असन&nbsp; बंगाल बिहार मद्रास के दौरान भी संघ ससस्त् लोग
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पाठेकर, रवि आर. "सारस – एक चिकित्सक अभ्यास". Journal of Research & Development 17, № 3 (2025): 147–53. https://doi.org/10.5281/zenodo.15294698.

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Abstract:
<strong><em>गोषवारा:-</em></strong> <em>जगातील हवेत उडणारा सर्वात उंच पक्षी म्हणून गौरविल्या जाणार्या सारस पक्ष्याचा महाराष्ट्रातील अधिवास हा धोक्यात आलेला आहे. महाराष्ट्राच्या पूर्व टोकास असलेल्या गोंदिया जिल्ह्यात ३० तर भंडारा जिल्ह्यात २ सारस पक्षी उरलेले आहेत. व्यग्र संवर्धन व वन उपज उत्पन्नावर लक्ष केंद्रित असलेल्या वनविभागाचे सारस पक्ष्याकडे दुर्लक्ष होणारी ओरड नेहमीच होते. याची मुंबई उच्च न्यायालयाच्या नागपूर खंडपीठाने दाखल घेत सरकारला जाब विचारला. या नंतर विविध सरकारी यंत्रणा कामाला लागल्या. आता सारस पक्षी व त्याचा अधिवास वाचविण्यासाठी मोठे प्रयत्न सुरु झालेले आहेत. पण सारस पक्षी वाचवि
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डॉ., मनोतोष माजि. "सारबंगाली जीवन में कृतिवासी रामायण का प्रभाव". Journal of Research & Development' 14, № 7 (2022): 57–58. https://doi.org/10.5281/zenodo.6988296.

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Abstract:
<strong>सार</strong> भारत के राष्ट्रीय जीवन में लिखे गए दो महाकाव्यों में से एक बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण है। रामायण का अनुवाद भारत की क्षेत्रीय भाषाओं सहित दुनिया की अन्य भाषाओं में किया गया है। बंगाली में अनुवादित सबसे लोकप्रिय रामायण कृतिबास की &lsquo;श्रीराम पांचाली&rsquo; है। हम चर्चा करेंगे कि कैसे कृतिवासी रामायण ने बंगाली जीवन को प्रतिबिंबित और प्रभावित किया। कृतिवासी रामायण मध्यकालीन बंगाली भाषा और साहित्य के उदाहरणों में से एक है। कृतिबास ओझा उत्तर भारत में रामायण के पहले अनुवादक थे। उनकी अनुवादित पुस्तक का नाम &#39;श्रीराम पांचाली&#39; है। कृतिबास की रामायण का प्रकाशन श्रीरामपुर क
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डॉ., मनोतोष माजि. "सारबंगाली जीवन में कृतिवासी रामायण का प्रभाव". Journal of Research & Development' 14, № 8 (2022): 57–58. https://doi.org/10.5281/zenodo.6988596.

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Abstract:
<strong>सार</strong> भारत के राष्ट्रीय जीवन में लिखे गए दो महाकाव्यों में से एक बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण है। रामायण का अनुवाद भारत की क्षेत्रीय भाषाओं सहित दुनिया की अन्य भाषाओं में किया गया है। बंगाली में अनुवादित सबसे लोकप्रिय रामायण कृतिबास की &lsquo;श्रीराम पांचाली&rsquo; है। हम चर्चा करेंगे कि कैसे कृतिवासी रामायण ने बंगाली जीवन को प्रतिबिंबित और प्रभावित किया। कृतिवासी रामायण मध्यकालीन बंगाली भाषा और साहित्य के उदाहरणों में से एक है। कृतिबास ओझा उत्तर भारत में रामायण के पहले अनुवादक थे। उनकी अनुवादित पुस्तक का नाम &#39;श्रीराम पांचाली&#39; है। कृतिबास की रामायण का प्रकाशन श्रीरामपुर क
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Mahore, Nisha. "PAINTING MENTIONS IN ANCIENT INDIAN TEXTS." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 7, no. 11 (2019): 54–58. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v7.i11.2019.984.

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Abstract:
Engish : In ancient Indian texts, the rules related to painting are mentioned in detail, in which texts of poetry, drama, epic, Puranas, Upanishads and various disciplines describe their popularity in ancient tradition and cultural methods of Indian painting and public opinion. Apart from this, there are some texts in which free and comprehensive painting has been explained in detail. For example, there are 269 chapters in this book composed by Vishnudharmottara Purana Markandeya. Under which, in the third section, Sanskrit subjects are especially important for the fine arts. In which chapters
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सागर, सरिता, та डाॅ अंजू बिष्ट. "उत्तराखंड में निवास कर रहे बंगाली समुदाय की परंपरागत खान-पान संबंधी आदतों का अध्ययन". International Journal of Home Science 10, № 2 (2024): 01–04. http://dx.doi.org/10.22271/23957476.2024.v10.i2a.1592.

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डॉ., जगदीश सदाशिव आवटे. "मराठीतील ऐतिहासिक कादंबरीचे जनक रामचंद्र भिकाजी गुंजीकर: एक अभ्यास". International Journal of Advance and Applied Research 9, № 6 (2022): 388–91. https://doi.org/10.5281/zenodo.7070774.

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Abstract:
<strong>सारांश :&nbsp; </strong> रामचंद्र भिकाजी गुंजीकर हे मराठी साहित्यातील ऐतिहासिक कादंबरीचे आद्य कादंबरीकार म्हणून ओळखले जातात &#39;मोचनगड&#39; या मराठीतील पहिल्या ऐतिहासिक कादंबरीचे लेखन रामचंद्र भिकाजी गुंजीकर यांनी केले. गुंजीकरांना मराठी, संस्कृत, इंग्रजीबरोबरच गुजराती, कानडी व बंगाली याही भाषा अवगत होत्या.इंग्लंडमधील &#39;एडिंबरो रिव्ह्यू&#39; व &#39;क्वार्टरली रिव्ह्यू&#39; या नियतकालिकांच्या धर्तीवर मासिक निघावे या विचाराने १८६७ मध्ये &#39;विविधज्ञानविस्तारा&#39;ची स्थापना झाली. त्याचे गुंजीकर हे पहिले संपादक होते.&nbsp; मराठी साहित्य समृद्धीकरणात गुंजीकर यांचे मोठे योगदान आहे. त्य
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Verma, Harish. "CLASSICAL EXPERIMENT IN CINE MUSIC." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 3, no. 1SE (2015): 1–4. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i1se.2015.3404.

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Abstract:
Indian films cannot be imagined without music. The hallmark of Indian cinema is its vibrant music. Indian films, whether they are in any language (ie Hindi, Tamil, Bengali, Marathi, Telugu, Kannada or Malayalam), music predominates. Music is their basic element in films made in regional dialects like Bhojpuri, Rajasthani, Bandeli, Chhattisgarhi etc. Most of the films in India are made in Hindi language which are popular all over the world. Hence, we will discuss about Indian films by keeping Hindi films at the center.&#x0D; संगीत के बिना भारतीय फिल्मों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। भारतीय सिने
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पोतदार, डॉ. अनुराधा विजय. "जागतिक स्तरावर महिलांचे साहित्यिक योगदान". International Journal of Advance and Applied Research 5, № 35 (2024): 4–9. https://doi.org/10.5281/zenodo.13855541.

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Abstract:
प्रस्तावना:&nbsp; &nbsp; भारत हा जगातील सर्वाधिक भाषिक वैविध्य असलेला देश व हीच &nbsp;भाषिक विविधता भारतीय संस्कृतीच्या समृद्धतेमध्ये भर घालते. भारताच्या प्रत्येक प्रदेशाला &nbsp; &nbsp;उत्कृष्ट राष्ट्रीय लेखक, कवी, साहित्यिक &nbsp;आणि काही आंतरराष्ट्रीय कीर्ती असलेली उच्च विकसित साहित्यिक परंपरा आहे. भारत सरकारने साहित्य अकादमी सारख्या संस्थांद्वारे भारतातील प्रत्येक प्रादेशिक भाषा आणि साहित्याचे जतन आणि संवर्धन करण्यासाठी स्वतःला वचनबद्ध केले आहे.&nbsp;भारतीय लेखक, कवी, समीक्षक आणि कादंबरीकारांनी रवींद्रनाथ टागोरांच्या सखोल गीतांपासून ते अरुंधतो रॉय यांनी लिहिलेल्या विचारप्रवर्तक पुस्तकांपर्
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शेख, प्रा. डॉ. इम्रान. "भारत में बहुभाषित एवं हिन्दी शिक्षण". International Journal of Advance and Applied Research 6, № 25(D) (2025): 34–36. https://doi.org/10.5281/zenodo.15332327.

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Abstract:
<strong>साराश :-</strong> &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; हमारा देश भारतवर्ष विश्व में एक अकेला ऐसा देश है जहाँ पर संस्कृति में विविधता पायी जाती है। यहाँ पर अनेक जातियों एवं धर्मों के लोग परस्पर सौहार्द के साथ जीवन यापन करते हैं। अनेक धर्म एवं जातियाँ भिन्न-भिन्न मानव जीवनानुभवों को प्रस्तुत करते हैं। पृथक् पृथक् समूहों एवं विभिन्न धर्म-जातियों के कारण सांस्कृतिक जीवन के साथ-ही-साथ उनकी बोली-आषा भी अनेक प्रकार की होती है। भाषा विचारों एवं भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम होती है। मानव प्रत्येक युग में अपनी सांस्कृतिक सम्पदा को भाषा के भण्डार में सुरक्षित रखता आ
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पाटील, अमित अशोक. "पंडिता रमाबाई यांच्या जीवन व कार्याचा ऐतिहासिक आढावा". International Journal of Advance and Applied Research 11, № 6 (2024): 441–42. https://doi.org/10.5281/zenodo.14059318.

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Abstract:
पंडिता रमाबाईंचा जन्म कर्नाटक मधील माळहेरंजी येथे एका ब्राह्मण कुटुंबात झाला. त्यांच्या वडिलांचे नाव अनंतशास्त्री डोंगरे व आईचे नाव अंबाबाई हे होते. वडील आनंदशास्त्री हे पुरोगामी विचारांचे असल्याने तत्कालीन समाजमध्ये स्त्री शिक्षण निषिद्ध असताना सुद्धा समाजाचा रोष पत्करून त्यांनी स्वतःच्या मुलीलाच म्हणजेच रमाबाईंना संस्कृत व वेद पुराणे इत्यादींचे शिक्षण दिले. परिणामी रमाबाईंचा उदय एका विदुषीच्या स्वरूपात झाला. त्यांना खूप विद्वत्ता प्राप्त झाली परंतु पूर्ण समाजाने मात्र आनंदशास्त्री यांच्या कुटुंबास बहिष्कृत केले. त्यानंतर अनंतशास्त्री यांनी पूर्ण हिंदुस्तानच्या तीर्थयात्रेस जाण्याचे ठरवले व त
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Bhole, Dr.R.V. "मेरेंगः इंदिरा मिरी और नेफा के जनजाति की जीवनगाँथा". Journal of Research & Development 16, № 7 (2024): 118–21. https://doi.org/10.5281/zenodo.11927746.

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Abstract:
सारांश:अनुराधा शर्मा पूजारी का &lsquo;मेरेंग&rsquo; उपन्यास की मेरेंग तथा इंदिरा मिरी के माध्यम से नेफा की जाति-जनजाति तथा अनुसूचित जनजाति की विविध घटनाएँ, समस्याएँ तथा दृश्य-परिदृश्य संयोजन कर उपन्यास को पूर्णांग रूप दिया है। इसमें 1960 ई. के पहले भारत के अंगराज्य असम (शिलांग) तथा नेफा की अमर कथा लिपिबद्ध है। सन 1950 में असम में भारी भयावह प्राकृतिक आपदा के रूप में भूकंप हुआ, जिससे असम की भौगोलिक स्थिति तथा नद-नदी, पहाड़-पर्वत, खेत-खलिहान आदि के विविध रूप परिवर्तन हो गया। परिणाम स्वरूप लोगों की संपत्ति का काफ़ी नुकसान हुआ। असमिया समाज जीवन तथा नेफा के जनजाति लोगों की शैक्षिक व्यवस्था तथा उसके
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खुटे, डी एन. "1920 में छत्तीसगढ़ का प्रथम मजदूर आंदोलन एवं ठा.प्यारेलाल सिंह". International Journal of Reviews and Research in Social Sciences, 29 червня 2023, 96–102. http://dx.doi.org/10.52711/2454-2687.2023.00014.

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Abstract:
राजनांदगांॅव छत्तीसगढ़ को छोटा सा शहर है, किन्तु राजनीतिक चेतना के दृष्टिकोण से सदैव अग्रणी रहा हैं। मजदूरो में दिन-प्रतिदिन असंतोष बढ़ता जा रहा था। परिणामस्वरूप ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने मजदूरों तथा महिला मजदूरों को जागृत और संगठित करने का काम आरंभ किया। मजदूरों में राजनीतिक तौर पर सन् 1919 में पहली बार चेतना जागृत हुई जब रौलेट एक्ट के विरोध में राजनांदगॉंव शहर तथा मिल बंद रही। पुनः बालगंगाधर तिलक की मृत्यु पर बंगाल-नागपुर-कॉटन मिल के मजदूरों ने दो दिन काम बंद रखा। नवम्बर 1917 से ठाकुर प्यारेलाल सिंह मजदूर आंदोलन से जुड़ गये थे इसी वर्ष ठाकुर साहब की मुलाकात कुछ मिल मजदूरों से हुई। अपने स्वभाव के
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Kumar Rathia, Mukesh, та Arun Kumar. "सिंघनपुर के शैलचित्र का कंवर जनजातीय मिथक के साथ संबंध". International Journal of Reviews and Research in Social Sciences, 27 грудня 2024, 259–62. https://doi.org/10.52711/2454-2687.2024.00043.

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Abstract:
रायगढ-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जिला मुख्यालय रायगढ़ से पश्चिम में लगभग 20 किमी की दूरी पर सिंघनपुर स्थित है। छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम बंगाल नागपुर रेल्वे के डिस्ट्रिक्ट इंजीनियर सी डब्ल्यू एंडरसन जिनका पूरा नाम क्लेरेंस विलियम एंडरसन था ने सिंघनपुर के शैलचित्रों की खोज सन 1910 में की थी। इस खोज की सूचना उन्होंने प्रसिद्ध ब्रिटिश विद्वान, कलाकार, कला समीक्षक इतिहासकार, पुरातत्वविद पर्सी ब्राउन जो भारतीय वास्तुकला और कला के लेखक के रुप में जाने जाते थे को दी। पर्सी ब्राउन ने हेरिटेज ऑफ इंडिया सीरीज में प्रकाशित इंडियन पेंटिंग नामक अपनी प्रसिद्ध पुस्तक के 1917 में मुद्रित प्रथम संस्करण में इसक
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Singh, Ritesh Kumar, та Shagufta Parveen. "मुगलकालीन भारत में कृषि भूमि के महत्व का एक अध्ययन". ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 4, № 2 (2023). http://dx.doi.org/10.29121/shodhkosh.v4.i2.2023.2248.

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Abstract:
मुगलकाील भारत का भौगोलिक मानचित्र को देखने से पता चलता है कि कहीं जगल था तो कहीं पथरीले पठार और कहीं रेगिस्तान। पश्चिमी बंगाल में सुंदरवन तक खेती होती थी तो चटगांव से सिलहट तक घने जंगल थे। बिहार और अवध गें बड़े पैमाने पर खेती होती थी। इस क्षेत्र में भी गोरखपुर से लेकर आजमगढ़ तक का क्षेत्र जंगलों से ढंका हुआ था। आगरा प्रांत में सारी की साशी भूमि पर खेती होती थी। मालवा की भूमि बड़ी ही उर्वर थी। बरार के जंगलो को काटकर वहाँ की भूमि को कृषि योग्य बनाया गया। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि मुगल साम्राज्य में समस्त कृषि योग्य भूमि पर खेती होती थी और आज की अपेक्षा उस समय की भूमि बडी ही उपजाऊ थी। भूमि पर आ
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प्रा. डाॅ. प्रभाकर गणपत गावंड. "ब्रिटिश कालखंडातील रायगड जिल्ह्यातील शिक्षण विकास". International Journal of Advanced Research in Science, Communication and Technology, 30 січня 2023, 91–94. http://dx.doi.org/10.48175/ijarsct-8118.

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Abstract:
भारतात ब्रिटिशांचे आगमन होईपर्यंत भारतीय शिक्षणाचे स्वरुप हे प्रामुख्याने पारंपारिक व धार्मिक स्वरुपाचे होते. भारतातील बहुसंख्य हिंदू धर्मीयांचे शिक्षण हे पारंपारिक पाठशाळांमधून होत असे तर मुस्लिम धर्मीयांसाठी मदरशांमधून शिक्षण दिले जाई. हिंदू धर्मात ब्राम्हणांची शिक्षणावर मक्तेदारी होती. प्रामुख्याने संस्कृत भाषेमधून शिक्षण दिले जाई. मुस्लिम मदरशांतील शिक्षण हे अरबी भाषेत दिले जाई. संस्कृत आणि अरबी या भाषा सामान्य लोकांमध्ये बोलल्या जात नव्हत्या. या काळातील शिक्षण हे पारंपारिक पध्दतीचे होते. ब्रिटिश भारतात आल्यानंतर भारतीय षिक्षण पध्दतीचे वास्तव त्यांच्या लक्षात आले. विल्यम कॅरी या ख्रिश्चन म
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त्रिपाठी, बालेन्दु मणि. "ग्रामीण महिलाओं का स्वरोजगारः रेशम उद्योग". Gurukul International Multidisciplinary Research Journal, 31 грудня 2024. https://doi.org/10.69758/gimrj/2412ivvxiip0019.

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Abstract:
सारांश भारत जैसे विकासशील देश में महिलाओं के विकास के बिना ‘‘विकास’’ संभव ही नहीं हो सकता हैं। भारत की जनसंख्या का लगभग 72 प्रतिशत जनाधार ग्रामीण हैं अर्थात भारत अब भी ग्रामों में ही बसता है जहां से कृषि आधारित उद्योगों के माध्यम से न केवल भरण-पोषण का आधार मिलता है, अपितु रोजगार का सुलम साधन भी मिलता है। भारत के कुछ राज्यों में विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्र की महिलाओं के सामने ‘‘बेरोजगारी’’ की विकट समस्या हैं। न तो वे खेती कर सकती हैं। न ही आवागमन के अभाव में कोई व्यापार कर सकती हैं। ऐसे में रेशम कीटपालन एक सशक्त विकल्प के रूप में महिलाओं को स्वरोजगार का साधन उपलब्ध हैं। भारत के लगभग 50,000 गांव
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R. S. Pawar. "नक्षलवाद आणि भारताची अंतर्गत सुरक्षा : कारणे आणि उपाय". ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 5, № 7SE (2024). https://doi.org/10.29121/shodhkosh.v5.i7se.2024.5836.

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Abstract:
ब्रिटिशांनी भारतावर राज्य केल्यापासून जंगलांचे गैरव्यवस्थापन हा एक मुद्दा आहे. ब्रिटिश सरकारने वनसंपत्तीचे मक्तेदारी करण्यासाठी कायदे आणले, जे यासाठी उपयोगी पडले. १९९० नंतर जेव्हा भारत सरकारने जंगलांच्या नैसर्गिक संसाधनांचा वापर सुरू केला तेव्हा परिस्थिती आणखी बिकट झाली. यामुळे जंगलात राहणाऱ्या लोकांच्या हृदयात एक ठिणगी निर्माण झाली आणि त्यांनी भारत सरकारविरुद्धच्या चळवळीत योगदान दिले.भारत भौगोलिक क्षेत्रुळाच्या दृष्टीने जगात सातव्या क्रमांकावर असुन विविध भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धर्म, भाषा, प्रांत यांनी भिन्न राज्य व्याप्त आहे. स्वातंत्र्यापासून आजपर्यंत भारतासमोर अंतर्गत सुरक्षेला जी धो
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Patel, Dilip Kumar, та Puja Gupta. "अच्युतन रामचन्द्रन नायर के चित्रों में अभिव्यंजनात्मक तत्वों का अध्ययन". ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 5, № 6 (2024). http://dx.doi.org/10.29121/shodhkosh.v5.i6.2024.2501.

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Abstract:
अभिव्यंजनावादी विचारधारा से प्रभावित कलाकारों एवं कलाकृतियों के विषय में बात करने से पहले अभिव्यंजना के विषय में जानना आवश्यक है। अभिव्यंजना का अर्थ है। कलाकार की अभिव्यक्ति व भावों को कलाकृति में उतारना। जिनमें कलाकार अनेक प्रतीकों के द्वारा अभिव्यक्ति प्रदान करते हैं अपने मनोभावों को चित्रों के माध्यम से चित्रित कर आनंदित होते हैं। आज चित्रकला व्यक्तिवादी हो गई है पहले चित्रकार समाज तथा सामाजिक परिस्थितियों तथा समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कलाकृतियों का सृजन करते थे परन्तु आज कलाकार समाज से स्वयं का नाता तोड़ अपनी व्यक्तिगत भावनाओं तथा बिन्दु के आधार पर कलाकृतियों को चित्रित करता है। उसका स
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-, Rakesh Verma. "सर्वोच्च न्यायालय बनाम भारत सरकारः- मुख्य न्यायाधीश डी.वाई.चन्द्रचूड़ के फैसलों के विषेष सन्दर्भ में". International Journal For Multidisciplinary Research 6, № 5 (2024). http://dx.doi.org/10.36948/ijfmr.2024.v06i05.27209.

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Abstract:
संक्षिप्तीकरणः-1947 में भारत औपनिवेशिक ताकतों के चंगुल से पूर्णतः मुक्त हुआ। इससे पूर्व अंग्रेजी हुकुमत द्वारा भारत के बंगाल के फोर्ट विलियम में 1774 में 1773 के रेंग्यूलेटिंग एक्ट द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की जा चुकी थी। भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ और संविधान सभा द्वारा संविधान निर्माण के साथ ही 26 जनवरी 1950 को सर्वोच्च न्यायालय अस्तित्व में आया। वर्तमान भवन(1958) में आने से पूर्व सर्वोच्च न्यायालय की समस्त गतिविधियाँ संसद भवन से संचालित होनी थी। 28 जनवरी 1950 को सर्वोच्च न्यायालय का विधिवत उद्घाटन किया गया। संविधान बनने के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश सम
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-, Dr Geeta Santosh Yadav. "Kinner Jeevan-Sangharsh Ka Anterdwand Karta Atmcharit:Puroosh Tan men Phansa Mera Naree Man." International Journal For Multidisciplinary Research 6, no. 5 (2024). http://dx.doi.org/10.36948/ijfmr.2024.v06i05.27620.

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Abstract:
शोध संकेत(Abstract) : आत्मचरित परिभाषा: किसी लेखक द्वारा दूसरे व्यक्ति के जीवन कथा का चित्रण आत्मकथात्मक शैली में करनेवाली विधा को आत्मचरित कहेंगे| उदाहरण स्वरूप श्री राम के जीवनचरित का उद्घाटन गोस्वामी तुलसी ने रामचरित में किया है| उसी प्रकार वर्तमान समय में किन्नर साहित्य की दो पुस्तकें सामने आई हैं| जिसे आत्मचरित का दर्जा दिया जा सकता है | "मैं हिजड़ा मैं लक्ष्मी” तथा “पुरूष तन में फँसा मेरा नारी मन”इस विधा के अंतर्गत आनेवाली महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं|इन पुस्तकों को अबतक आत्मकथा की श्रेणी में रखा जाता था |लेकिन मेरा मानना है कि इन पुस्तकों में लेखकों की स्वयं अनुभूति तो है,किन्तु,इसे शब्दांकन
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शाही, सविता. "उत्तर प्रदेश विधानसभा निर्वाचन 2012 में आधी आबादी की सांकेतिक भागीदारी". विचार 11, № 02 (2019). http://dx.doi.org/10.29320/vichar.11.2.5.

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Abstract:
भारतीय संविधान में महिलाओं को पुरूषों के समान ही मौलिक अधिकार प्रदान किये गये है, साथ ही वर्ग, जाति, जन्म स्थान, शैक्षणिक व सम्पत्ति के आधार पर भेदभाव व सम्पत्ति के आधार पर भेदभाव के बिना सभी नागरिकों को मताधिकार तथा राजनीतिक अधिकार भी प्रदान किये गये है। पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी पाटिल, पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इन्द्रिरा गांधी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, सुषमा स्वराज्य, स्मृति ईरानी, पूनम महाजन, सुप्रिया फूले, उमा भारती, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की वृंदा करात, तूलमूल कांग
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Singh Kushwaha, Anil. "स्त्रियों की सुरक्षा एवं संरक्षा: विषय, कानून, नीतियाँ और सुझाव (नारी सशक्तिकरण)". International Journal For Multidisciplinary Research 7, № 2 (2025). https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i02.39316.

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Abstract:
भारत में भी महिला सुरक्षा एवं संरक्षा पर प्राचीन काल से ही प्रश्न उठते रहे है। इसके अनेक उदाहरण रामायण और महाभारत काल में भी पाया जाता है। यह मुद्दा अति संवेदनशील है। परन्तु इसे पूर्णतया सही नहीं कहा जा सकता है क्योंकि कुछ एसे भी समाज पाये जाते है जो मातृसत्तात्मक होते है जैसे भारत में पूर्वोत्तर की खासी व कुछ अन्य जनजातियो में मातृसत्तात्मक समाज की अवधारणा पायी जाती है। विश्व में भी कुछ एसी जनजातियाँ है जैसे-कोस्टारिका की ब्रिबी जनजाति, चीन की मोसुओ, न्यू गुयाना की नागोविसी जनजाति में मातृसत्तात्मक समाज पाया जाता है। स्त्रियों के प्रति अनेक घटनाएँ घटी जैसे-27 नवम्बर 1973 में रात्रि के समय किं
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