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Journal articles on the topic 'लोकतंत्र'

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Jain, Dr Shilpa. "Practical Form of Caste and Religion in Indian Democracy." International Journal of Multidisciplinary Research Configuration 1, no. 3 (2021): 43–49. http://dx.doi.org/10.52984/ijomrc1308.

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Abstract:
लोकतंत्र शासन का एक ऐसा स्वरूप है जिसमें सर्वोच्च सत्ता जनता में निहित रहती है और जनता इस सत्ता का प्रयोग नियमित अन्तराल में होने वाले स्वतन्त्र निर्वाचनों मे ंएक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से करती है। किसी शासन व्यवस्था को प्रामाणिक एवं व्यापक लोकतंत्र या सफलतापूर्वक क्रियाशील लोकतंत्र तभी कहा जा सकता है जब सच्चा लोकतंत्र किसी भी देश विशेष की जनता की आशा-आकांक्षाओं को पूरा करने से ही अपना सही मार्ग ढूंढ सकता है अपनी एक सही व्यवस्था की खोज कर सकता है भारतीय लोकतंत्र ने इनमें से अनेक आवश्यक शर्तो को पिछले कई वर्षो में पूरा किया है लेकिन इसे अनेक चुनौतियों का स
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., हेमलता. "वर्तमान में भारतीय लोकतंत्र". International Journal of Political Science and Governance 6, № 2 (2024): 302–4. https://doi.org/10.33545/26646021.2024.v6.i2d.559.

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Bajpai, Neeta. "सामाजिक गतिशीलता लोकतंत्र और आतंकवाद". RESEARCH EXPRESSION 6, № 9 (2023): 29–35. https://doi.org/10.61703/re6.

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Abstract:
शास्त्रीय रूप में लोकतंत्र लोगों की अभिव्यक्ति को वास्तविक रुप प्रदान करता है। किंतु समसामयिक विश्व जन पुंज समाजों का विश्व है। इसमें इस शास्त्रीय उक्ति के लिये अधिक स्थान नहीं है कि लोकतंत्र जनता का जनता के लिये जनता द्वारा शासन है। अभिजन वादियों और नव उदार वादियों ने लोकतंत्र का अधिक व्यवहारिक रुप प्रस्तुत किया है। आज का प्रजातंत्र राजनैतिक निर्णय निर्माण शक्ति को जनता के मतों द्वारा प्रतियोगिता पूर्ण तरीके से प्राप्त करने का संस्थागत प्रयास है। वस्तुतः राजनीति सत्ता के लिये संघर्ष है और लोकतंत्र की यह विशेषता है कि वह सत्तात्मक प्रतियोगिता हेतु खुला मंच प्रदान करता है एवं निर्वाचनिय बहुलतंत
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Yadav, Muneshwar, and Ramnath Sharma. "Relevance of democracy in Indian electoral politics." RESEARCH REVIEW International Journal of Multidisciplinary 8, no. 7 (2023): 126–30. http://dx.doi.org/10.31305/rrijm.2023.v08.n07.017.

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Abstract:
Democracy is the best form of government because its source is from the public. In a democracy, the relationship between the government and the public should be enabling. The sovereignty of the government depends on the consent of the people, making India a sovereign, socialist, secular. democratized and stuck to their word by giving all citizens the right to vote without distinction after adopting what the national leadership had promised in the early 1930s for universal adult suffrage. Caste, illiteracy, communalism, poverty, unemployment are the main points in Indian politics which are crea
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RC. "चुनाव सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास". Research Converse 1, № 1 (2024): 22–25. https://doi.org/10.5281/zenodo.14810933.

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Abstract:
चुनाव की प्रणाली में करने योग्य उन परिवर्तनों/ बदलावों को चुनाव सुधार कहते हैं, जिनके आवेदित करने से जनता की आकांक्षाऐं व अपेक्षाएँ चुनाव परिणामों के रूप में अधिकाधिक परिणति होने लगे। लोकतंत्र के सशक्तिकरण को मापने के लिए (आन्तरिक दलीय लोकतंत्र) को अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है। आन्तरिक लोकतंत्र के अभाव में दलों में विचार-विमर्श नहीं हो पाता है, जिसके कारण स्थायित्व की भावना नहीं आ पाती है।चुनाव सुधार के लिए आवश्यक है कि राजनीतिक दलों के आयकर के विवरण को सार्वजनिक किया जाए। भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में अनेक राजनीतिक दल है, इनमें से कुछ संचरित और कैडर आधारित संगठन है, जो एक वैचारिक लक्ष्य या
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सिंह, संतोष कुमार. "भारतीय लोकतंत्र के सशक्त आयाम". Lokprashasan 15, № 3 (2024): 17–40. http://dx.doi.org/10.32381/lp.2023.15.03.2.

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Talekar, P. R. "लोकतंत्र का संघीय मूल्यांत्मक अवधारणा". International Journal of Advance and Applied Research 5, № 17 (2024): 192–95. https://doi.org/10.5281/zenodo.12184410.

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Abstract:
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डॉ., श्रीमती अनुराधा शर्मा. "लोकतंत्र की मज़बूती के हित में सत्रहवीं लोकसभा चुनाव -2019 के चुनावी घोषणा-पत्रों में भारतीय भाषाए". International Journal of Research - Granthaalayah 7, № 4 (2019): 255–60. https://doi.org/10.5281/zenodo.2653885.

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Abstract:
लोकतंत्र लोक की भावनाओं का आदर करने वाली व्यवस्था है। लेकिन भारत के संदर्भ में कुछ अनुभव इसके विपरीत है। यहां लोकतंत्र के नाम पर व्यवस्था को ‘लोक’ की भाषा से दूर करने वाले ‘तंत्र’ लगातार हावी रहे हैं। इस दृष्टि में उसे सच्चा और अच्छा लोकतंत्र कहते हुए शब्द ठिठकते है। प्रशासन की लोक भाषा से दूरी अनेक समस्याओं का मूल है तो न्याय की लोक की भाषा से दूरी बनाये रखने की जिद्द न्याय पर प्रश्नचिन्ह लगाती है। इसी का दुष्प्रभाव है कि शिक्षा भी उस भाषा से आलिंगन कर रही है जो लोक भाषा के स्वाभिमान को नकारती है। भारतीय भाषाओं को उनके स्वाभाविक अधिकारों से विमुख करना भारतीय लोकत ंत्र
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Suman Yadav та Dr. Pushpendra Yadav. "भारतीय लोकतांत्रिक संस्थानों की प्रासंगिकता और संवैधानिक समीक्षा की आवश्यकता: एक सैद्धांतिक विश्लेषण". International Journal of Multidisciplinary Research in Arts, Science and Technology 3, № 5 (2025): 61–73. https://doi.org/10.61778/ijmrast.v3i5.142.

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Abstract:
संसदीय प्रणाली, विधायी स्वतंत्रता, न्यायिक निष्पक्षता और संवैधानिक समीक्षा प्रक्रिया सभी हाल के वर्षों में कई कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। इस तथ्य के बावजूद कि भारतीय लोकतंत्र अपनी संवैधानिक नींव और मजबूत संस्थाओं पर आधारित है, ये मुद्दे हाल के वर्षों में उभरे हैं। संसद की गरिमा में गिरावट, सांसदों में अनुशासन की कमी, सत्ता के केंद्रीकरण की ओर झुकाव और संविधान में संशोधन की प्रक्रिया में खुलेपन की कमी सहित कई कारकों ने लोकतंत्र की प्रभावकारिता पर सवाल उठाने में योगदान दिया है। इस शोध पत्र का उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र को परेशान करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों की जांच करना और आवश्यक समाधान सुझाना
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Usmani, Akhlak Ahmed. "अरब लहर, लोकतंत्र और न्यू मीडिया". Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 15, № 9 (2018): 100–101. http://dx.doi.org/10.29070/15/57931.

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flag, 'osrk. "भारत में पंचायती राजः सशक्त लोकतंत्र". International Journal of Political Science and Governance 2, № 1 (2020): 16–17. http://dx.doi.org/10.33545/26646021.2020.v2.i1a.27.

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भारती, कंवल. "लोकतंत्र का पाठ सीखें नामवर सिंह". फॉरवर्ड प्रेस 5, № 4 (2013): 25–27. https://doi.org/10.5281/zenodo.7283545.

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Sharma, Anuradha. "Indian Languages in Election Manifesto of Seventeenth Lok Sabha Election-2019 in the interest of strengthening democracy." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 7, no. 4 (2019): 255–60. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v7.i4.2019.895.

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Abstract:
Democracy is a system that respects the feelings of the people. But some experience in the context of India is the opposite. Here in the name of democracy, the system, which removes the system from the language of 'Lok', has continued to dominate. In this vision, words are called out, calling it true and good democracy. Distance from the local language of administration is the root of many problems, so the insistence on keeping distance from the language of justice puts a question mark on justice. The side effect of this is that education is also embracing the language which negates the self-r
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प्रकाश, वेद, та कुमुद रंजन. "संसदीय व्यवस्था में विपक्ष का उदभव एवं विकास". Humanities and Development 19, № 02 (2024): 43–48. https://doi.org/10.61410/had.v19i2.188.

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Abstract:
संसदीय लोकतंत्र एक ऐसी लोकतांत्रिक प्रणाली है, जिसमें विधायी शक्ति और कार्यकारी शक्ति का वास्तविक नियंत्रण एक प्रतिनिधि निकाय के पास होता है। लोकतंत्र की वैधता विधायिका के विश्वास को प्राप्त करने की शक्ति को हासिल करता है जिसमें प्रति उसकी जवाबदेही भी होती है। वास्तव में प्रतिनिधि निकाय का गठन चुनावों के माध्यम से होता जिसमें देश की जनसंख्या के व्यापक बहुमत द्वारा स्वतंत्र या समान प्रकार से प्रतिभाग करने की अपेक्षा की जाती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष ही सरकार की नीतियों एवं कार्यों के प्रति पारदर्शिता एवं जवाबदेही को सनुनिश्चित करने हेतु सरकार को बाध्य करता है।
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प्रदीप कुमार, डॉ. "ज़मीनी लोकतंत्र की प्रहरी इरोम शर्मिला चानू". Praxis International Journal of Social Science and Literature 4, № 3 (2021): 10–16. http://dx.doi.org/10.51879/pijssl/4.3.2.

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चंद्राकर, खेमराज, та डॉ सुभाष चन्द्राकर. "भारत में संसदीय लोकतंत्र के 70 वर्ष". Praxis International Journal of Social Science and Literature 4, № 2 (2021): 30–34. http://dx.doi.org/10.51879/pijssl/4.2.7.

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मुरारी, कृष्ण, та अभय प्रसाद सिंह. "भारतीय लोकतंत्र की विशिष्टताएंः एक शोध अन्वेषण". Lokprashasan 15, № 4 (2024): 36–53. http://dx.doi.org/10.32381/lp.2023.15.04.4.

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लाल, कन्हैया. "संवैधानिक लोकतंत्र और समकालीन समाज की चुनौतियाँ". Lokprashasan 15, № 3 (2024): 57–79. http://dx.doi.org/10.32381/lp.2023.15.03.4.

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कुमार, ज्योति. "लोकतंत्र का उदभव और विकास: एक अध्ययन". International Journal of Applied Research 9, № 9 (2023): 207–11. http://dx.doi.org/10.22271/allresearch.2023.v9.i9c.11281.

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सैनी, पूजा. "अध्यक्षीय बनाम संसदीय लोकतंत्र : एक तुलनात्मक विश्लेषण". International Journal of Political Science and Governance 6, № 1 (2024): 12–16. http://dx.doi.org/10.33545/26646021.2024.v6.i1a.295.

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पटेल, राजेन्द्र कुमार. "लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण में मनरेगा की भूमिका: मीडिया की भूमिका के विशेष संदर्भ में". RESEARCH REVIEW International Journal of Multidisciplinary 05, № 01 (2020): 23–28. https://doi.org/10.5281/zenodo.3784679.

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Abstract:
विश्व में सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राष्ट्र कहलाने वाले भारत में आजादी के साथ ही संसदीय प्रणाली को अपनाया गया और लोकतंत्र स्थापित किया गया जिस कारण भारत में विकेन्द्रित शासन व्यवस्था के सिद्धांत को अपनाया गया है। भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संविधान निर्मात्री सभा के अनुभवों के अनुसार सम्पूर्ण देश के गांवों का शासन राजधानी दिल्ली से कर पाना संभव न था जिस कारण संविधान द्वारा देश को एक लोक कल्याणकारी राज्य बनाने के लिए विकेंद्रीकरण पर जोर दिया गया जिससे सत्ता का हस्तांतरण ऊपर से नीचे की ओर किया जाने लगा और उच्च अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के प्रति उतरदायित्व की भूमिका बढ़ने लगी। विकेंद्रीकर
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पाण्डेय, शैलेन्द्र, та मंजू सोलंकी. "भारतीय राजनीति में राजनैतिक दलों के समक्ष चुनौतीयां". Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 20, № 4 (2023): 819–24. https://doi.org/10.29070/c5cep810.

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Abstract:
भारतीय राजनीति में राजनैतिक दलों को वर्तमान समय में अनेक जटिल और बहुआयामी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ये चुनौतियाँ लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं, चुनावी प्रक्रिया, आंतरिक लोकतंत्र, विचारधारात्मक स्पष्टता, वित्तीय पारदर्शिता, और क्षेत्रीय संतुलन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी प्रभावित करती हैं। दलों के बीच बढ़ती व्यक्तिवादिता, विचारधारा की अस्पष्टता, और गठबंधन राजनीति की अनिश्चितता भी लोकतांत्रिक प्रणाली को जटिल बनाती है। साथ ही, मतदाताओं की बढ़ती अपेक्षाएं, सामाजिक मीडिया का प्रभाव, और जातीय व धार्मिक ध्रुवीकरण ने राजनैतिक दलों के समक्ष नई रणनीतियाँ विकसित करने
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Uday Singh. "The changing nature of Lok Sabha elections in India in the context of public opinion and media: Analysis." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 9, no. 3 (2022): 50–53. http://dx.doi.org/10.53573/rhimrj.2022.v09i03.008.

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Abstract:
From the results of the general elections held after India's independence in 1952, it cannot be said that Indian democracy is not getting a strong base or its vitality has been questioned. The truth is that the Indian public is adapting democracy and elections in its own style. That is why a serious, responsible and decision-making process like elections is celebrated as the biggest festival of democracy. It can be said that during the election period, the whole melody of folk culture gets mixed together to make the democratic environment alive. It is true to a large extent that in elections t
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डॉ., अम्बुजेश कुमार मिश्र. "लोकतंत्र को सशक्त बनाने में चुनावी सुधारों की भूमिका". Siddhanta's International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities 2, № 5 (2025): 51–67. https://doi.org/10.5281/zenodo.15471553.

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Abstract:
भारतीय लोकतंत्र की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ इसकी चुनाव प्रणाली है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के बिना लोकतंत्र केवल एक औपचारिक व्यवस्था बनकर रह जाता है। लेकिन भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी, समावेशी और उत्तरदायी बनाए रखने के लिए निरंतर सुधार आवश्यक हैं। इस संदर्भ में चुनावी सुधार केवल तात्कालिक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की दिशा में एक दूरगामी प्रक्रिया हैं। पिछले कुछ दशकों में भारत में अनेक महत्वपूर्ण चुनावी सुधार लागू किए गए हैं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), वोटर वेरीफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT), मतदाता पहचान पत्र, उ
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नीशू, कमार. "एक राष्ट्र एक चुनाव का विश्लेषणात्मक अध्ययन". RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES 11, № 4 (2024): 79–82. https://doi.org/10.5281/zenodo.14840953.

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Abstract:
आज के आधुनिक युग में लोकतांत्रिक सरकार, शासन का सबसे प्रचलित रूप है। दुनिया के अधिकतर देश इस परंपरा का अनुसरण करते है। लेकिन लोकतंत्र की परिभाषा कहती है कि लोकतंत्र वह शासन है, जिसमें सरकार चुनाव के माध्यम से जनता द्वारा चुनी जाए। यानि की लोकतांत्रिक प्रणाली की नींव में होते है चुनाव। चुनाव आयोग अलग-अलग देशों में अलग-अलग विधियों के माध्यम से होता है। जब कई देश में सभी चुनाव एक साथ होते है, वहीं भारत में अलग-अलग समय पर अलग-अलग चुनाव होते ही रहते हैं। प्रस्तुत आलेख भारत में ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ प्रणाली की प्रासंगिकता का अवलोकन करता है, साथ ही ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ के कार
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जायसवाल, डॉ पीयूष कुमार. "अमृत काल और भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ". Humanities and Development 18, № 1 (2018): 80–82. http://dx.doi.org/10.61410/had.v18i1.117.

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Abstract:
अमृत काल का आशय भारत की स्वतंत्रता के स्वर्णिम 75वें वर्ष को भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सर्वप्रथम इस शब्द को प्रयोग करते हुए अगले 25 वर्ष को उत्सव के रूप में देखने का प्रयास किया है और देश के विकास के समस्त कार्यों को ‘अमृत काल’ के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। वास्तव में ‘अमृत काल’ कोई नया शब्द नहीं है, इसे वैदिक ज्योतिष में प्रयोग किया जाता रहा है। प्राचीन कालीन ज्योतिष विज्ञान अमृत काल के मूल आशय को सम्पूर्ण मानवता के साथ जोड़कर देवदूतों एवं व्यक्तियों के लिए जिस समय आधिकाधिक सुख के द्वार खुल जाय उसे ‘अमृत काल’ कहा जाता है। अर्थात् ऐसे समय में जब नये कार्य की शुरूआत हो
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वर्मा, रवि. "फेक न्यूज़ और चुनावी लोकतंत्र पर इसका प्रभाव". International Journal of Political Science and Governance 7, № 4 (2025): 08–16. https://doi.org/10.33545/26646021.2025.v7.i4a.476.

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साहू, सनत. "पंचायती राज: अवधारणा उद्भव और प्रगति". RESEARCH EXPRESSION 6, № 9 (2023): 47–66. https://doi.org/10.61703/re7.

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Abstract:
पंचायती राज व्यवस्था ,एक ऐसी व्यवस्था है जिसके अन्तर्गत शक्ति का विकेन्द्रीकरण किया जाता है तथा सत्ता तथा प्रशासनिक शक्तियों को विभिन्न क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है। शक्ति का विकेन्द्रीकरण किया जाता है ताकि विकास योजनाओं को राष्ट्र के प्रत्येक क्षेत्र में क्रियान्वित किया जा सके। पंचायती राज व्यवस्था 73 वें संविधान संशोधन के द्वारा बनाई गई है। स्थानीय स्तर पर शासन के रूप में एक विभाजन होता है। पंचायती राज प्रणाली देश में मूल लोकतांत्रिक संस्थानों के प्रयोजन एवं विकास में एक महत्वपूर्ण स्थान है। पंचायती राज प्रणाली प्रतिनिधि लोकतंत्र को एक सहभागी लोकतंत्र में बदल देता है। पंचायती राज मंत्
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Yachika. "लोकतंत्र बनाम अधिनायकवाद: दक्षिण पूर्व एशिया में राजनीतिक स्थिरता का तुलनात्मक अध्ययन". Siddhanta's International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities 2, № 4 (2025): 131–42. https://doi.org/10.5281/zenodo.15314636.

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Abstract:
यह शोधपत्र दक्षिण-पूर्व एशिया में शासन के प्रकार-लोकतांत्रिक और अधिनायकवादी-और राजनीतिक स्थिरता के बीच संबंधों की खोज करता है। प्रत्येक शासन प्रकार का प्रतिनिधित्व करने वाले चयनित देशों का विश्लेषण करके, यह अध्ययन यह समझने का प्रयास करता है कि शासन मॉडल राजनीतिक निरंतरता, संस्थागत लचीलापन और नागरिक अशांति को कैसे प्रभावित करते हैं। वियतनाम और कंबोडिया (अधिनायकवादी राज्य) के साथ-साथ इंडोनेशिया और फिलीपींस (लोकतंत्र) के तुलनात्मक केस अध्ययनों के माध्यम से, शोध शासन, नागरिक भागीदारी और संस्थागत ताकत के पैटर्न पर प्रकाश डालता है। निष्कर्ष बताते हैं कि जबकि लोकतंत्र अक्सर अधिक स्पष्ट राजनीतिक असहमत
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गायत्री, डाॅ, та रविन्द्र गुर्जर. "भारतीय लोकतंत्र में जाति की राजनीति: प्रभाव एवं भूमिका". International Journal of Political Science and Governance 6, № 2 (2024): 03–05. http://dx.doi.org/10.33545/26646021.2024.v6.i2a.350.

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सिंह, अभय प्रसाद, та कृष्ण मुरारी. "संवैधानिक लोकतंत्र, लोक नीति एवं नागरिक समाजः समकालीन विमर्श". Lokprashasan 15, № 3 (2024): 41–56. http://dx.doi.org/10.32381/lp.2023.15.03.3.

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Vats, Dr Urmil. "आजादी के 75 वर्षः लोकतंत्र की उपलब्धियाँ और चुनौतिया". International Journal of Humanities and Education Research 5, № 1 (2023): 1–3. http://dx.doi.org/10.33545/26649799.2023.v5.i1a.34.

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Kumar, Dr Nitin. "भारत में गठबंधन राजनीति के संसदीय लोकतंत्र पर प्रभाव". SK International Journal of Multidisciplinary Research Hub 11, № 12 (2024): 594–99. https://doi.org/10.61165/sk.publisher.v11i12.116.

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ओझा, डॉ अजय कुमार. "एक देश एक चुनाव की प्रासंगिकता". Journal of Research & Development 16, № 9 (2024): 164–66. https://doi.org/10.5281/zenodo.13354454.

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Abstract:
भारत जैसे अनेकता में एकता वाला देश जो की सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश के ताज से सुशोभित है, जहां पर जीवंत लोकतंत्र का मूल्य विद्यमान है। उस जीवंत लोकतंत्र में चुनाव एक अनिवार्य प्रकिया हैं। स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आधारशिला होती है। भारत जैसे देश में निर्बाध रूप से निष्पक्ष चुनाव कराना हमेशा से एक चुनौती रहा है। यदि हम अपने देश के चुनाव पर एक नजर डालें तो हम पाते हैं कि हमेशा ही देश में कहीं ना कहीं चुनाव होते रहता है। चुनाव के इस निरंतरता के कारण देश हमेशा चुनावी मोड में ही रहता है। इसके चलते प्रशासनिक उथल-पुथल के साथ विकास कार्यों को प्रभावित होना लाजमी है। देश में लगातार चुनाव के
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वर्मा, सचिन कुमार. "आज़ादी का अमृत महोत्सवः बाल गंगाधर तिलक". International Journal of Science and Social Science Research 1, № 2 (2023): 211–15. https://doi.org/10.5281/zenodo.13380449.

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Abstract:
आज हम भारतीय स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। यह महोत्सव भारत के शैक्षिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं राष्ट्रीय चेतना तथा सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास का एक प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है। भारत को विकास के पथ पर अग्रसर  करने एवं पथ प्रदर्शन में अनेक महान विभूतियों का योगदान रहा है। भारत की स्वतंत्रता के पूर्व अंग्रेजों से आज़ादी हेतु संघर्ष करते हुए भारतीय समाज को सकारात्मक ऊर्जा देना एवं अखंड और मजबूत लोकतंत्र की नींव हेतु मार्गदर्शन  करने में  बाल गंगाधर तिलक का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। वर्तमान आधुनिक समाज एवं भ
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चौधरी, उम्मेद कुमार. "भूगोल और राजनीति: राजस्थान के बाली विधानसभा आम चुनावों का एक तुलनात्मक विश्लेषण". Innovation The Research Concept 9, № 2 (2024): H9—H19. https://doi.org/10.5281/zenodo.10941013.

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Abstract:
This paper has been published in Peer-reviewed International Journal "Innovation The Research Concept"                      URL : https://www.socialresearchfoundation.com/new/publish-journal.php?editID=8784 Publisher : Social Research Foundation, Kanpur (SRF International)  Abstract: चुनाव के अध्ययन विषय को वैज्ञानिक शब्दावली में सेफोलॉजी कहते हैं। चुनावी भूगोल की समझ के लिए भूगोल, राजनीति और लोकतंत्र के बीच संबंधों को समझने की आवश्यकता है। सरकार या स्वतंत्र राजनीतिक व्यवस्था भूगोल और राजनीति के बीच संबंधों की सबसे महत्वपूर्ण अभि
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1प्रदीप, सिंह 2. डॉ. शशि द्विवेदी. "भारतीय लोकतंत्र के अन्तर्गत विभिन्न विभागों में विकेन्द्रीकरण की समस्या". International Educational Applied Research Journal 09, № 02 (2025): 37–40. https://doi.org/10.5281/zenodo.14926318.

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Abstract:
भारतीय संसदीय लोकतंत्र में लोकसभा अध्यक्ष का विशेष महत्व है। लोकसभा का संबन्ध लोकतंत्र की गरिमा से है, जो प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लोकतंत्र की गरिमा पर निर्भर करती है। लोकसभा चुनाव आसन्न है और त्रिशंकु संसद की संभावनाएं सामने हैं। ऐसी स्थिति में अध्यक्षात्मक बलाम संसदीय शासन प्रणाली की बहस दुबारा प्रारंभ हो जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वर्चस्व और एकाधिकार को 1967 में संविद प्रयोग के द्वारा चुनौती मिली और 1977 में जलता प्रयोग द्वारा 1906 के चुनावों में देश ले अल्पमत सरकार का अस्तित्व भी देखा। इन्हीं परिस्थितियों में राजनीतिक अस्थिरता के मंडराते हुए
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VINOD, KUMAR. "CHHADM RAJNEETI KE PRTI SANGHRSHSHEEL DARISHTIKON : SURANG MEN SUBH." नवीन शोध संसार I, no. XIV (2016): 166. https://doi.org/10.5281/zenodo.8197032.

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Abstract:
इस उपन्यास में भारतीय राजनीति की छद्मता को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। लोक और तंत्र की यथार्थ स्थिति पर लेखक ने व्यंग्य करते हुए दिखाया है कि लोकतंत्र में लोक हाशिए पर है और सत्ता अवसरवादियों के हाथ में है। व्यवसाय बन चुकी राजनीति में भ्रष्टाचार, लोलुपता, अपराध आदि का बोलबाला है। 
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प्रकाश, चन्द्रा सत्या. "में चुनावी बांड योजना : लोकतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव पर प्रभाव". International Journal of Sociology and Humanities 6, № 1 (2024): 27–34. http://dx.doi.org/10.33545/26648679.2024.v6.i1a.70.

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डॉ., रामदीन कड़ेला. "भारतीय लोकतंत्र में लोक सेवाओं की भूमिका का विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary 4, № 3 (2025): 213–15. https://doi.org/10.5281/zenodo.15543711.

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Abstract:
लोक सेवा का आशय सामान्य रूप से सरकारी सेवकों के ऐसे समूह अथवा वर्ग से होता है जो राजनीतिक कार्यों से पृथक रहते हुए राज्य के दीवानी मामलों का प्रबंध करते है। आधुनिक युग में लोक सेवा सरकार के नियंत्रण तथा संरक्षण में कार्यरत वे सेवीवर्ग है जो शासन की नीतियों, कार्यक्रमों तथा विधियों के क्रियान्वयन में संलग्न है ताकि राज्य विकास कर सकें। भारतीय शासन सरंचना का एक बुनियादी तत्त्व निष्पक्ष, कुशल और निर्भिक लोक सेवा है जो कार्यपालिका का महत्त्वपूर्ण भाग होती है। भारत जैसे देश में, जो कि एक लोकतांत्रिक कल्याणकारी राज्य है, लोक सेवा की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। प्रभावी और सक्षम संस्था एक सफल शासन व्यवस्थ
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Rathore, Shipra, and Rupam Soni. "Freedom of Expression in Various Political Systems in today’s Digital Age: A Comparative Case Study." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 12, no. 4 (2025): 17–23. https://doi.org/10.53573/rhimrj.2025.v12n4.003.

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Abstract:
This research paper is an attempt to conduct a comparative analysis of the status of freedom of expression in the current global scenario, focusing on the governance systems of India, the United States of America, Russia, and China. Freedom of expression is a fundamental pillar of democracy, empowering citizens to express their views freely and ensure governmental accountability. This study employs the theoretical frameworks of liberalism, authoritarianism, and deliberative democracy to understand how different political systems and cultural heritages influence this right. The comparative anal
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Richa, Kushwah Jayshri Diwedi. "ग्राम पंचायत निर्वाचन में मतदान व्यवहार मुरैना जिले के पंचायत आम निर्वाचन 2015 एवं 2022 के विशेष संदर्भ में एक अध्ययन". International Educational Applied Research Journal 09, № 05 (2025): 179–85. https://doi.org/10.5281/zenodo.15567989.

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Abstract:
यह शोधपत्र मुरैना जिले के 2015 और 2022 के ग्राम पंचायत आम निर्वाचन में | मतदाताओं के व्यवहार का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारत के लोकतंत्र में ग्राम पंचायत चुनावों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये जमीनी स्तर पर जनभागीदारी और सशक्तिकरण सुनिश्चित करते हैं। मुरैना जिले की जातीय, सामाजिक और राजनीतिक संरचना ने इन चुनावों को प्रभावित किया है। अध्ययन में पाया गया कि जाति, वर्ग, लिंग और धर्म मतदान व्यवहार को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ी है, परंतु निर्णय अब भी पारिवारिक और सामाजिक प्रभावों से जुड़ा है । प्रचार में माइकिंग, सोशल मीडिया औ
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मित्र, धीरज प्रताप, та विशाल प्रताप मित्र. "डिजिटल युग में जातिगत जनगणना: डेटा, लोकतंत्र तथा अस्मिता का अंतर्संबंध". International Journal of Arts, Humanities and Social Studies 7, № 1 (2025): 515–19. https://doi.org/10.33545/26648652.2025.v7.i1g.219.

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प्रशांत, विलास सत्यश. "जयप्रकाश कर्दम के 'दुनिया के बाजार में' कविता संग्रह में चित्रित हाशिए का समाज". International Journal of Humanities, Social Science, Business Management & Commerce 08, № 01 (2024): 149–55. https://doi.org/10.5281/zenodo.10484573.

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Abstract:
21वीं सदी में साहित्य को अपने बहुआयामी विचारों से हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार जयप्रकाश कर्दम द्वारा एक नई ऊँचाई पर पहुँचाया है। जयप्रकाश कर्दम द्वारा लिखित चर्चित और महत्वपूर्ण कविता संग्रह में 'गूँगा गा नहीं था मैं' 'तिनका तिनका', 'आज बस्तियों के बाहर' तथा खंडकविता ‘राहुल’ यह कविता संग्रह शामिल है। 2021 में प्रकाशित 'दुनिया के बाजार में' यह कवितासंग्रह को 21वीं सदी के हाशिए के समाज को प्रतिनिधित्व करनेवाला वाला कवितासंग्रह है। इस कवितासंग्रह में कुल मिलाकर 111 कविताएँ हैं। इस नए कवितासंग्रह में भी कवि की कुंठित,वंचित तथा हाशिए के लोगों की आवाज बनने की उनके साहित्य की परंपरा
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Ajit. "Electoral Processes and Coalition Politics of Indian Democracy: A Study." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 10, no. 7 (2023): 57–64. http://dx.doi.org/10.53573/rhimrj.2023.v10n07.010.

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Abstract:
This study highlights the complex dynamics of electoral processes and coalition politics within the framework of Indian democracy. As the world's largest democracy, India is characterized by a complex electoral system, multiple political parties and a history of coalition governments. The research examines the electoral machinery, including voter registration, constituency delimitation, and campaign strategies. An important focus of this study is on coalition politics, which has become the hallmark of Indian governance. It details the formation, functioning and outcomes of the alliance at both
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डॉ., जोगेन्दर सिंह. "दल बदल: परिचय, विकास एवं आलोचना". SHODHBODHALAYA 1, № 3 (2024): 25–33. https://doi.org/10.5281/zenodo.11071322.

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Abstract:
यह लेख ‘‘दल बदल: परिचय, विकास एवं आलोचना’’ का विश्लेषण करेगा। इसके अलावा, लेखक इस अधिनियम के महत्व और आलोचना और इसके हालिया विकास को ध्यान में रखते हुए इसके विवादास्पद प्रावधानों की जांच करेगा। यहां, लेखक अधिनियम का एक संक्षिप्त परिचय देगा और फिर भारत के लोकतंत्र पर इसके प्रभावों पर आगे बढ़ेगा। इस अधिनियम पर चर्चा करते समय, लेखक हाल के रुझानों और देश के शासन पर इसके प्रभाव और लोकतंत्र के कामकाज पर इसके प्रभाव का भी विश्लेषण करेगा। साथ ही, लेखक दलगत राजनीति में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति के बीच संघर्ष पर भी प्रकाश डालेंगे। लेखक भ्रष्टाचार और दल-बदल के बीच संबंधों
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राज, आदित्य. "भारतीय लोकतंत्र में मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Advance and Applied Research 12, № 4 (2025): 219–22. https://doi.org/10.5281/zenodo.15285849.

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Abstract:
<strong>सारांश</strong>: &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ सरकार का गठन जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों के द्वारा होता है। जनता शासन व्यवस्था में प्रत्यक्ष रुप से भाग न लेकर अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से भाग लेती है। मतदान व्यवहार, मत डालने के उन कारकों या तरीकों को परिभाषित करता है जो वोट देने में मतदाताओं को प्रभावित करते हैं। भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान किया गया है। भारतीय संविधान के 61 वाँ संशोधन 1988 द्वारा लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों में मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया है। चुनाव
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आदित्य, राज. "भारतीय लोकतंत्र में मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Advance and Applied Research 12, № 4 (2025): 219–22. https://doi.org/10.5281/zenodo.15393489.

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Abstract:
<strong>सारांश</strong>: &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ सरकार का गठन जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों के द्वारा होता है। जनता शासन व्यवस्था में प्रत्यक्ष रुप से भाग न लेकर अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से भाग लेती है। मतदान व्यवहार, मत डालने के उन कारकों या तरीकों को परिभाषित करता है जो वोट देने में मतदाताओं को प्रभावित करते हैं। भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रदान किया गया है। भारतीय संविधान के 61 वाँ संशोधन 1988 द्वारा लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों में मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया है। चुनाव
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Pramod, Ranjan. "भय की महामारी". Gandhi Marg (गांधी मार्ग) 63, № 1 (2021): 40–52. https://doi.org/10.5281/zenodo.6574571.

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Abstract:
इस आलेख में&nbsp;बताया गया है कि कोविड एक महामारी अवश्य है, लेकिन इसका भय वास्तविकता की तुलना में अनुपातहीन है। इस भय की बहुत बड़ी कीमत भारत जैसे तीसरी दुनिया के देशों को उठानी पड़ रही है। पिछली कुछ सदियों में मानव-सभ्यता ने आजादी, बंधुत्व, लोकतंत्र आदि जिन मूल्यों को सृजन किया था, वह कम से कम तीसरी दुनिया के देशों में खतरे है। हालत लगातार बदतर होते जा रहे हैं। अनेकानेक अध्ययन बता रहे हैं कि कोविड से कई गुना अधिक लोगों की मौत भुखमरी, बदहाली व अन्य बीमारियों का उचित इलाज नहीं मिलने के कारण हो रही है तथा आने वाले समय में इनमें और इज़ाफा होगा। &nbsp;
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संतोष, कुमार सिंह. "भारत में पर्यावरणीय जागरूकता आंदोलन". Recent Researches in Social Sciences & Humanities (ISSN: 2348 – 3318) 8, № 5 (Special Issue) (2021): 39–42. https://doi.org/10.5281/zenodo.6586845.

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Abstract:
भारतीय पर्यावरणीय आंदोलन मुख्यतः समता को केन्द्रित करके विकसित हुए हैं। ये आम आदमी के परम्परागत अधिकारों से वंचित होनें की पीड़ा को दर्शता हैं। इन्होंने आम आदमी को अपने परम्परागत अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष को विवश किया हैं। ये आंदोलन जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई लड़ रहें हैं वहीं आम आदमी के परम्परागत अधिकारों की रक्षा की बात कर रहें हैं क्योंकि मूलतः दोनों एक-दूसरे पर निर्मर हैंे जो कि वस्तुतः भारतीय प्राचीन संस्कृति की विशेषता रही हैं। इन्होंने विकाश के वर्तमान माॅडल को वैचारिक वैचारिक चुनौती भी दी हैं। पर्यापरणीय जागरूकता आंदोलन ने भारतीय लोकतंत्र तथा नागरिक समाज को नवीन आयाम दि
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