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Tripathi, Harish. "Cultural Heritage of Mewar - Study of Traditions, Customs and Rituals." RESEARCH REVIEW International Journal of Multidisciplinary 8, no. 3 (2023): 285–91. http://dx.doi.org/10.31305/rrijm.2023.v08.n03.035.

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Abstract:
In this research paper, I have studied the cultural heritage of Mewar - traditions, customs and religious rituals. Mewar is a major cultural and historical identity of Rajasthan, whose cultural heritage is very important. The study provides a deeper understanding of the major aspects of the cultural heritage, traditions, customs and religious rituals of Mewar. Its purpose is to research, analyze and understand this religious and cultural heritage of Mewar. In this study, priority will be given to the study of traditions which are important components of the cultural heritage of Mewar. This wil
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गोपाल, गोस्वामी. "विरासत का संरक्षणः एक चिन्तन". Recent Researches in Social Sciences & Humanities (ISSN: 2348 – 3318) 10, № 01 (Jan.-Feb.Mar.) (2023): 34–36. https://doi.org/10.5281/zenodo.7940839.

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Abstract:
पिता की आज्ञानुसार राजपाट त्याग कर रामचन्द्र का चैदह वर्षों का वनवास’ तथा ‘कलियुगी पुत्र द्वारा सम्पŸिा के लिए पिता की हत्या‘, भारतीय संस्कृति के मूल्यों के हनन की यह व्यथा-कथा अपने आप मंे गंभीर चिन्तन का विषय है। आधुनिक युग विज्ञान एवं तकनीकी का युग है। दुनिया सिमट कर इतनी छोटी हो गयी है कि आज विभिन्न संस्कृतियां एक दूसरे पर अपना प्रभाव डाल रही हैं। पाष्चात्य संस्कृति ने भारतीय युवाओं के मस्तिष्क, रहन-सहन और सोचने-विचारने की क्षमता को इतना प्रभावित कर दिया है कि नैतिक, सामाजिक, धार्मिक आदि बहुमुल्य मूल्यों से युक्त भारतीय आज मौद्रिक मूल्यों की झूठी चमक के सामने अपने हीर
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डॉ., विकास सिन्हा. "भारतीय सांस्कृतिक विरासत: विविधता, मौलिकता और संरक्षण". International Journal of Arts, Social Sciences and Humanities 01, № 03 (2023): 32–39. https://doi.org/10.5281/zenodo.10365948.

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Abstract:
"भारतीय सांस्कृतिक विरासत, जो समृद्ध और विविधतापूर्ण है, विश्व के लिए एक महत्त्वपूर्ण संपत्ति का संज्ञान कराती है। इस निबंध में, हम भारतीय सांस्कृतिक विरासत के विविध आयामों को विशेष रूप से देखेंगे, जैसे कि इसकी विभिन्नता, मौलिकता, और संरक्षण के माध्यम से इसका महत्त्व और महत्त्वाकांक्षा।हम इस निबंध में भारतीय संस्कृति के विविध पहलुओं को अन्वेषण करेंगे और उसके मौलिक तत्त्वों को समझेंगे, जैसे कि भाषा, साहित्य, कला, संगीत, धर्म, और समाज। इसके साथ ही, हम इसे संरक्षित करने और संरक्षित रखने के लिए उपायों और कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।इस शोध-निबंध में हम भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति हमा
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महतो, राम नरेश. "भारत की सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा". International Journal of Advanced Academic Studies 5, № 4 (2023): 54–57. http://dx.doi.org/10.33545/27068919.2023.v5.i4a.1025.

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सुश्री, मालिनी काले. "भारतीय सांस्कृतिक विरासत- राजस्थानी ला ेक स ंगीत". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.886833.

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Abstract:
भारतीय स ंगीत का मूलाधार संगीत ह ै। संगीत से ही भारतीय जीवन शैली अनुप्रेरित ह ै। सृष्टि क े निर्माण से मानव क े ग्र ंथ का का ेई भी पृष्ठ ऐसा नहीं ह ै जो संगीत से शून्य हा े। जन्म लेते ही जा े गीत सुने उसका संगीत जीवन पर्यन्त रग रग में रचता गया आ ैर अन्ततः इसी संगीत के अ ंतिम काल तक उसका सान्निध्य रहा। यह संगीत मानव शरीर की सŸाा का स्वरूप ह ै। क्षिति, जल, पावक, गगन समीरा’ प ंच रचित यह अधम सरीरा। यही पंच तत्व जिसका कण-कण बूंद-ब ूंद लहर-लहर प्रकृति संगीत ह ै जिसमें क्रम है, लयबद्धता ह ै, विषालता ह ै, मधुरता सा ैंधी ख ुषबू ह ै। व ैज्ञानिका ें ने भी इस बात की प ुष्टि की ह ै कि इन पांच तत्वों मे ं न
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Adhikari, Rishiram. "सामाजिक मनोविज्ञानमा आन्दोलन र विद्रोहको विरासत अवसर कि चुनौती". Samaj Anweshan समाज अन्वेषण 3, № 1 (2025): 23–32. https://doi.org/10.3126/anweshan.v3i1.81951.

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Abstract:
नेपाली समाजलाई अग्रगमन, लोकतान्त्रिक शासन व्यवस्था, नागरिकको मौलिक अधिकारको संरक्षणको दिशामा अगाडि बढाउन आन्दोलन र विद्रोहले महत्त्वपूर्ण भूमिका खेलेको अवस्था बोल्न सकिँदैन, तर पनि विद्यमान समयमा नेपाली समाजको मनोविज्ञानमा आन्दोलन गरेपछि सत्तालाई घुँडा टेकाउन सकिन्छ र सत्तालाई घुँडा टेकाउन सकेको खण्डमा आफ्ना निहित स्वार्थहरू पूरा हुन्छन् भन्ने मनोविज्ञान विकसित भइरहेको अवस्था छ । यस सन्दर्भमा यस अध्ययनमा नेपाली समाजले आन्दोलन तथा विद्रोहलाई कसरी प्रयोग गर्दै गरेको छ; के नेपाली समाजले आन्दोलन र विद्रोहलाई सामाजिक एकीकरण तथा आम नागरिकको आधारभूत अधिकारको संरक्षणको दिशामा प्रयोग गरेको छ वा एउटा शा
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ज्योति, शर्मा (शोधार्थी) डॉ दिनेश कुमार पाटीदार (निर्देशक ). ""पर्यटन और स्थानीय संस्कृति का संरक्षण :- मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के संदर्भ में". International Educational Applied Research Journal 09, № 01 (2025): 35–40. https://doi.org/10.5281/zenodo.14739932.

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Abstract:
आधुनिक युग में पर्यटन को एक उद्योग माना जाता है। पर्यटन वर्तमान में विश्व का सबसे तेजी से विकसित होने वाला उद्यम है। सभी देशों का पर्यटन उस देश का एक महत्वपूर्ण भाग होता है। जो देश की अर्थव्यवस्था को एक शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्रोत होता है। अधिकांश देशों की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर निर्भर रहती है। पर्यटन को उद्यम इसलिए कहा जाता है कि एक पर्यटन स्थल के कारण कई परिवारों की आजीविका चलती हैं। पर्यटन विविध प्रकार के प्राकृतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं धार्मिक अवयवों तथा आधारभूत सुविधाओं जैसे रू– यातायात, आवासीय सुविधाओं, शिक्षा, स
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आराधना, धुर्वे, та अनिल दुबे डॉ. "मध्य प्रदेश की गोंड जनजाति: एक विस्तृतअध्ययन". International Educational Applied Research Journal 09, № 04 (2025): 1–10. https://doi.org/10.5281/zenodo.15249430.

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Abstract:
गोंड जनजाति, भारत के सबसे बड़े और सबसे प्रमुख स्वदेशी समुदायों में से एक है, जिसकी मध्य प्रदेश में मजबूत उपस्थिति है। शहरी प्रवास और जन संचार ने गोंड पहचान को नया रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे सामाजिक गतिशीलता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में चुनौतियों दोनों के अवसर पैदा हुए हैं। सरकारी हस्तक्षेपों ने औसत दर्जे की प्रगति की है, लेकिन अधिक समावेशी और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील नीतियों की आवश्यकता है। आधुनिकीकरण ने शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और रोजगार तक पहुंच में सुधार किया है, लेकिन इसने पारंपरिक अनुष्ठानों, भाषाओं और सामाजिक संरचनाओं के क्षरण सहित महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परिव
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एस., जे. पाटील. "छत्रपति शिवाजी महाराज का नौसैनिक बल". International Journal of Arts, Social Sciences and Humanities 03, № 02 (2025): 06–11. https://doi.org/10.5281/zenodo.15365128.

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Abstract:
छत्रपति शिवाजी महाराज एक महान योद्धा और मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे। उन्होंने 17वीं शताब्दी में एक मजबूत नौसेना बनाई, जिसने भारत के समुद्री तटों की रक्षा की और विदेशी शक्तियों, जैसे पुर्तगालियों और अंग्रेजों, को चुनौती दी। उस समय, समुद्र पर इन विदेशी शक्तियों का दबदबा था, लेकिन शिवाजी ने समझा कि अपने साम्राज्य को सुरक्षित रखने के लिए समुद्री शक्ति जरूरी है। उन्होंने किलों, जहाजों और चतुर रणनीतियों के साथ एक ऐसी नौसेना बनाई जो तेज और प्रभावी थी। उनकी नौसेना ने व्यापार को बढ़ावा दिया और तटीय क्षेत्रों को सुरक्षित किया। आज, उन्हें भारतीय नौसेना का जनक कहा जाता है, और उनकी विरासत हमारे देश की न
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Nayma, Kailash Chand, and Ekta Nehra. "Spatial Analysis of Tourist Destination of Vagad Circuit of Rajasthan." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 12, no. 1 (2025): 101–8. https://doi.org/10.53573/rhimrj.2025.v12n1.014.

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Abstract:
Rajasthan is considered one of the leading states in India from a tourism perspective. The state has not only carved a distinct identity on the national level but has also gained recognition on the world map due to its rich art and culture. Secondary data related to tourism indicate that, on average, every third tourist visiting India also visits Rajasthan. The cultural heritage of Rajasthan includes historical buildings, palaces, forts, monuments, etc., which narrate the glorious history of the state. It is our collective responsibility to preserve Rajasthan's magnificent history and cultural
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डॉ, सुमन एव डॉ मजू नेहरा. "ऊट का दू ध: भारत का पोषण खजाना". Science world a Monthly e magazine 5, № 2 (2025): 6162–64. https://doi.org/10.5281/zenodo.14811401.

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Abstract:
भारत, विविधताओं से भरा देश, सवदयों से प्र वत ्े संसाधनों पर वनभ्र रहा है। इन्ं अनमोल उपहारों मे से ए् है ऊं ट ्ा दू ध, जो अपने अद् भुत पोषण और औषध्य गुणों ्े वलए पवसस है। राजस्ान और गुजरात जैसे राजों से जुडा यह दू ध अब पूरे देश मे लो्वपय हो रहा है। ऊं ट ्ा दू ध न ्े िल साविध्् है, बल् यह पया्िरण ्े अनु्ू ल और पारंपरर् विरासत ्ा पत्् भ् है। 
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डाॅ., पंकज उप्रेती. "लखनऊ की संगीत परम्परा में भातरखण्डे संगीत विद्यापीठ". International Journal of Trends in Emerging Research and Development 2, № 4 (2024): 01–03. https://doi.org/10.5281/zenodo.12684210.

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Abstract:
भारतीय शास्त्रीय संगीत लखनऊ शहर का पर्याय है। अपनी साहित्यिक विरासत के लिए मशहूर लखनऊ भातखंडे संगीत की परंपरा को पोषित करने और संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाता रहा है। पंडित विष्णु नारायण भातखंडे द्वारा स्थापित भातखंडे संगीत संस्थान ने भारतीय संगीत को आकार देने और उसे सुरक्षित रखने की नींव रखी। विश्वविद्यालय के रूप में विकसित होने के बावजूदए इसका सार पुरानी और नई दोनों यादों में निहित हैए जो वैश्विक स्तर पर गूंजती रहती हैं।
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नामदेव, गुड्डी. "“गोंड जनजाति के महिलाओं के सांस्कृतिक विरासत का वर्तमान परिवेश” एक विश्लेषणात्मक अध्ययन". INTERNATIONAL JOURNAL OF SCIENTIFIC RESEARCH IN ENGINEERING AND MANAGEMENT 09, № 06 (2025): 1–9. https://doi.org/10.55041/ijsrem49829.

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Abstract:
सारांश :- भारत के “धान का कटोरा” कहे जाने वाले राज्य छत्तीसगढ़ प्रदेश को जनजातियों का प्रदेश भी कहा जाता है। छत्तीसगढ़ प्रदेश में अनेक जनजातीयां पाई जाती हैं ।उनमें से बैगा, मुंडा ,गोड़,भील आदि है ।इस शोध पत्र में जनजातियों का परिचय देते हुए उन जनजातियों के महिलाओं के सांस्कृतिक विरासत और उनके शिक्षा का वर्णन करने का प्रयास किया गया है और उनके लिए क्या-क्या योजनाएं तैयार की गई है छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा उसका वर्णन करने का प्रयास किया गया है। और उनके आर्थिक और सामाजिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर क्या-क्या योजनाएं बनाए गए हैं उनमें भी प्रकाश डालने की कोशिश की गई ह
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मनोज, कुमार साहू. "छत्तीसगढ़ राज्य में पर्यटन उद्योग के विकास की चुनौतियां एवं संभावनाएँ". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 8 (2023): 101–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.7798449.

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Abstract:
अपने समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी विविधता के कारण भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में पर्यटन उद्योग की अपार संभावनाएं हैं। यद्यपि, राज्य को अपने पर्यटन उद्योग को विकसित करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, यथा अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा, कुशल जनशक्ति की कमी, खराब विपणन रणनीतियाँ और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ। इस शोध पत्र का उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य में पर्यटन उद्योग के विकास की चुनौतियों और संभावनाओं का विश्लेषण करना और टिकाऊपन पर्यटन विकास के लिए रणनीतियों की सिफारिश करना है।
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शर्मा, गौरव कुमार. "भारत-अमेरिका सम्बन्ध: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में". RESEARCH REVIEW International Journal of Multidisciplinary 05, № 01 (2020): 18–22. https://doi.org/10.5281/zenodo.3784667.

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Abstract:
भारत अमेरिका संबंधों की शुरूआत कोलम्बस की 1492 में की गई भारत यात्रा से होती है। सन् 1810 में अनेक ईसाई मिशनरियां भारत में स्थापित हुईं एवं 19वीं शताब्दी में अनेक अमेरिकी लेखकों ने भारत की सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान दोनों देशों के संबंध काफी अच्छे रहे। 20वीं शताब्दी में लाला हरदयाल ने अमेरिका में गदर पार्टी की स्थापना की। स्वामी विवेकानंद ने भी अपने उद्बोधन से अमेरिका के लोगों को प्रभावित किया। महात्मा गांधी के अहिंसा दर्शन का भी अमेरिका जनमानस पर प्रभाव पड़ा।
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घर्ती Gharti, विष्णु Bishnu. "सीमान्तकृत जाति: घर्ती/भुजेल". Samaj Anweshan समाज अन्वेषण 2, № 2 (2025): 182–90. https://doi.org/10.3126/anweshan.v2i2.74235.

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Abstract:
गतिशील समाजमा भएको परिवर्तनले त्यो बेलाको स्थितिका बारेमा बोलेको हुन्छ । समाज चिनाउने सवालमा मानव समूह एक प्रमुख तत्त्वका रूपमा रहेको हुन्छ भने सीमान्तकृत समुदायलाई पनि ओझेलमा पार्न मिल्दैन । परिवर्तनका पारिला पाखाहरूमा आदिवासी जनजाति समूहअन्तर्गत घर्ती /भुजेल पनि एक सीमान्तकृत समुदायका रूपमा रहेको छ । यो जाति हुनु र रहनुमा यसै समाजका अब्बल ऐतिहासिक तथ्य प्रमाणहरू हाम्रा सामु सजिएका छन् । यस्ता सामाजिक सवालहरूमा उसको विगतको अवस्था, जनसंख्या, धर्म, भाषा, भेषभूषा, संस्कार/ संस्कृति, बसोबासको स्थान, राज्यसत्तामा सहभागिता, सामाजिक मूल्य मान्यता आदि पर्छन् । परिवर्तित सामाजिक जीवनका विभि; क्षेत्रमा
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प्रा., संजय जाधव. "'डॉ. कुमार विश्वास की कविताओं में शहीद वीरों का जयगान'". International Journal of Advance and Applied Research 10, № 1 (2022): 1043 to 1045. https://doi.org/10.5281/zenodo.7314934.

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Abstract:
राष्ट्रीय भावना का अर्थ है अपने देश के लिए प्रेम और धार्मिक भावना का प्रकट होना। जैसे, सभी भारतीय अथवा भाई बहन राष्ट्रीय प्रतीकों, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता के विकास में मदत करते हैं।२१ वीं सदी की हिंदी कविता का आरंभ २० वीं सदी की हिंदी कविता के विरासत के रूप में हुआ। २१ वी सदी की आरंभिक कविता को बीसवी  सदी के अंत की हिंदी कविता का ही विस्तार समझना चाहिए। साहित्यकार की रचना में युगीन परिस्थितीयों की झाकी देखने को मिलती है और परिस्थितियों को जानने के लिए साहित्य का अध्ययन करना आवश्यक  है।
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डॉ, रविंद्र कारभारी साठे. "भूमंडलीकरण और कालीचाट". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 15 (2023): 25–26. https://doi.org/10.5281/zenodo.7866769.

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Abstract:
समाज की सबसे छोटी इकाई मनुष्य हैl मनुष्य संवेदनशील माना जाता है l मनुष्य ही संस्कृति का प्राचीन काल से अब तक का यात्री है l उसने सास्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक उथल-पुथल देखी हैl साथ ही मानवीय मूल्यों को आधार बनाकर प्राचीन काल से अब तक सांस्कृतिक विरासत कायम रखा हैl यही उसकी विरासत उसको मनुष्य बनाने में सहायक होती है l मनुष्य की सही पहचान परिवर्तनशील रहना हैl लेकिन आधुनिक युग में मनुष्य हर नई समस्याओं से लड़ रहा है, अपने आप को स्वतंत्र रूप में देखने के लिए अपने आप को अलग साबित करने के लिए वह लड़ रहा है l  आज विश्व में उदारनीकरण को अपना स्वयं मान लिया हैl उदारनीकरण से सभी देश एक दूसरे
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Tawse, Suvarna. "CHANGING SOCIAL VALUES AND MUSIC." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 3, no. 1SE (2015): 1–2. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v3.i1se.2015.3487.

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Abstract:
Music is a symbolic symbol of artistic achievements and musical traditions of human society. Music is considered as the social cultural heritage of society.When memories, anxiety, malice, mental tension, emotion and complex emotions make social life monotonous and rooted, then the arts especially the music arts have a special effect on the social value of society.
 संगीत मानव समाज की कलात्मक उपलब्धियों एवं सांगीतिक परम्पराओं का मूर्तिमान प्रतीक है।संगीत समाज की सामाजिक सांस्कृतिक विरासत मानी जाती है।जब स्मृतियाँँ,चिन्ता,द्वेष,मानसिक तनाव,आवेष तथा जटिल भावना,सामाजिक जीवन को नीरस तथा जड़ बना
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स, ंध्या जैन. "वैदिक काल म ें पर्यावरणीय संरक्षण क े प ्रति च ेतना पर एक अध्ययन". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.883020.

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Abstract:
हिन्द ू धर्म के सबसे प्राचीन ग ्रंथ व ेद आ ैर उपनिषद ् है इनमें जगह जगह प्रक ृति से विरासत में मिली सभी वस्त ुओं का जीवन स े गहरा जुड ़ाव मिलता है आ ैर इन सभी को अत्य ंत पवित्र मानकर लोग इनकी प ूजा अर्चना करत े है। व ेद वैदिक युग की शिक्षा के पाठ ्यक्रम की पाठ ्यपुस्तकें रही है शिक्षार्थी व ेद मंत्रों तथा सूक्तियों को कंठस्थ करत े और जीवन का अंग बनात े। वैदिक काल म ें पर्यावरण शिक्षा, प्रद ूषण के कारणा ें और निवारण के विषय में चिंतन किया जाता रहा ह ै। वैदिक युग के सिद्ध ग्रंथों न े पर्यावरण शिक्षा का े सर्वो परि माना। उनकी सीख आज और अधिक प ्रांसगिक व हितसाधक है।
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बिन्दु, अवस्थी, та खण्डेलवाल नुपुर. "दयालबाग (राधास्वामी) समाध के मुख्य द्वारों का स्थापत्य". RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES 11, № 1 (2024): 134–36. https://doi.org/10.5281/zenodo.11002025.

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Abstract:
आगरा एक लम्बी एेि तहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक विरासत अपने अचल मंे समेटे है। इस नगरी को विश्व के मानचित्र में एक विशिष्ट स्थान दिया गया है। ताजमहल के शहर आगरा मं,े ताज जैसा ही सफेद संगमरमर का विशाल समाध खड़ा किया जा रहा है। यह स्थान स्वामी बाग कहलाता है। जो लोग दयालबाग आगरा मं े स्थित राधास्वामी समाध के गटे पर आते है वह इसकी भव्यता को देखकर आश्चर्यचकित हा े जाते है। समाध अपने अनूठे स्थापत्य कलात्मकता-रूपात्मकता को सहज ही समेटे है। स्वामी बाग मंदिर एक वास्तुशिल्प रूप से प्रभावशाली मील का पत्थर है और कई धर्मों के भक्तों के लिए एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है। प्रस्तुत लेख में इसकी स्थापत्य कला की विवेचन
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Bhusal, Bhishm Kumar. "समाजशास्त्रीय आलोकमा मूर्त सम्पदाहरू". Samaj Anweshan समाज अन्वेषण 3, № 1 (2025): 104–12. https://doi.org/10.3126/anweshan.v3i1.81968.

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Abstract:
पुरातत्त्व, जीवाश्म विज्ञान, ऐतिहासिकता, वास्तुकला, धार्मिक, सौन्दर्य अथवा अन्य सांस्कृतिक महत्त्व भएका भौतिक वस्तु, कलाकृति तथा पुरातात्त्विक स्थानहरूलाई मूर्त सम्पदा भनिन्छ जसमा स्मारक, भवनहरू र स्थलहरू पर्छन् । यस्ता सम्पदाहरूले समुदायको पहिचान, इतिहास, सांस्कृतिक मूल्य तथा विरासत बोकेका हुन्छन्, जसलाई समुदायले अपनत्वका साथ आÇनो गौरवका रूपले लिएको हुन्छ । अमूर्त सम्पदाहरूको समाजशास्त्रीय अध्ययन गर्दा नृवंशविज्ञानको अध्ययन, ऐतिहासिक शोध, मौखिक इतिहास, सादृश्य र अन्तर्विषयक दृष्टिकोण लगायतका दृष्टकोणबाट अध्ययन गर्न सकिन्छ । यस दृष्टिकोणबाट हेर्दा सम्पदाहरूसँग कसरी समाज जोडिएको हुन्छ र समाजले
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वर्मा, अशोक कुमार. "राष्ट्रीय षिक्षा नीति के अन्तर्गत प्राथमिक षिक्षा में त्रिभाषा सूत्र का ज्ञान बालकों के बौद्धिक विकास का पोषक". SCHOLARLY RESEARCH JOURNAL FOR HUMANITY SCIENCE AND ENGLISH LANGUAGE 9, № 46 (2021): 11326–29. http://dx.doi.org/10.21922/srjhsel.v9i46.1542.

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Abstract:
देष में भावनात्मक एकता और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए सन् 1968 ई. में संसद के दोनों सदनों ने आम सहमति से त्रिभाषा सूत्र से सम्बन्धित संकल्प पारित किया था। इस संकल्प में स्कूली षिक्षा में मुख्यतः हिन्दी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषा को अनिवार्य रुप से पढ़ाने की बात स्वीकार की गयी थी। राष्ट्रीय षिक्षा नीति के प्रारुप में संस्कृत को भी अनिवार्य विषय के रुप में रखने का सुझाव दिया गया है। त्रिभाषा सूत्र में हिन्दी, अंग्रेजी के अलावा दक्षिण भारतीय भाषाओं में से किसी एक को पढ़ाने की बात की गई थी परन्तु हिन्दी भाषी राज्यों में हिन्दी, अंग्रेजी भाषाओं के साथ सांस्कृतिक विरासत की भाषा के रुप म
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डॉ., जया जैन. "'पाण्डुलिपि' चित्रकला का एक प्रमुख आधार". International Journal of Research - Granthaalayah 7, № 11(SE) (2019): 241–46. https://doi.org/10.5281/zenodo.3592563.

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Abstract:
पाण्डुलिपि भारतीय चित्रकला की अनमोल विरासत है यह धार्मिक भावनाओं सामाजिक जनजीवन व जीवन शैली का अनूठा परिचय देती है। पाण्डुलिपि प्रथमतः कलाकृति है कलात्मक काव्य के साथ सुन्दर लिप्यासन, कलात्मक लिपि लेखन, कलात्मक पृष्ठ सज्जा और कलात्मक चित्रविधान इसके मूल्य के साथ पाण्डुलिपि का भी मूल्य घटता बढ़ता है। पाण्डुलिपि संरचना में इन सभी अव्यवों का अनोखा संगम है। पाण्डुलिपि का रूप समय के साथ-साथ बदलता रहा है पाण्डुलिपि के प्रत्येक अव्यव से सम्बन्धित ज्ञान-विज्ञान और अनुसंधान का अपना-अपना इतिहास है। प्रत्येक के विकास के अपने सिद्धांत है इन अव्यवों की अलग सत्ता भी है। पर ये पाण्डुलिपि निर्माण में जब संयुक
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Kumar, Manoj. "Cultural identity in Rajasthani folk songs: A study of regional variations." Gyanvividh 02, no. 01 (2025): 58–65. https://doi.org/10.71037/gyanvividha.v2i1.04.

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Abstract:
राजस्थान के लोक गीत राज्य की जीवंत परंपराओं, सांस्कृतिक समृद्धि और ऐतिहासिक गहराई का प्रतीक हैं। ये कहानी कहने, भावनात्मक अभिव्यक्ति और सामुदायिक पहचान का एक प्रभावी माध्यम हैं। सरल संगीत रचनाओं से परे, ये गीत वीरता, भक्ति, प्रेम और सामाजिक गतिशीलता की कथाएँ बुनते हैं, जो राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। यह लेख राजस्थानी लोक गीतों और सांस्कृतिक पहचान के बीच जटिल संबंध का अध्ययन करता है, क्षेत्रीय विविधताओं, विषयगत समृद्धि और वाद्य विशेषताओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए। विद्वतापूर्ण स्रोतों के माध्यम से, यह दर्शाता है कि मेवाड़, मारवाड़, शेखावाटी, हाड़ौती और धुंधर की लोक परंपर
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Singh, Kritika, та Kiran Hooda. "भारतीय शास्त्रीय संगीत में घराना परंपराओं का ऐतिहासिक और समकालीन परिप्रेक्ष्य: डिजिटल युग में संरक्षण और नवाचार की चुनौतियाँ". Shodh Manjusha: An International Multidisciplinary Journal 2, № 01 (2025): 171–82. https://doi.org/10.70388/sm240128.

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Abstract:
भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में सबसे महत्वपूर्ण योगदानकर्ताओं में से एक घराना प्रणाली है। इस शोध का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत में ऐतिहासिक जड़ों, पारंपरिक शिक्षण तकनीकों और आधुनिक विकास का एक व्यापक अवलोकन प्रस्तुत करना है। अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, गुरु-शिष्य परंपरा लंबे समय से भारतीय शास्त्रीय संगीत की नींव रही है। हालाँकि, वर्तमान समय में, इन कारकों के कारण वैश्वीकरण, डिजिटल मीडिया और फ्यूजन संगीत के प्रभाव के परिणामस्वरूप इसमें बदलाव आया है। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के प्रसार के परिणामस्वरूप संगीत की पहुँच बढ़ी है, जिसने दुनिया भर में इसकी लोकप्रियता में वृद्धि
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कंचनमाला та (डॉ.) कुसुम कुमारी प्रोफेसर. "बाजरा के कैलोरी संवर्धन पर जागरूकता पैदा करके महिलाओं का सशक्तिकरण". Siddhanta's International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities 1, № 4 (2024): 49–55. https://doi.org/10.5281/zenodo.11066692.

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Abstract:
बाजरा प्रागैतिहासिक काल में मनुष्यों द्वारा पालतू बनाई गई पहली फसल थी। बाजरा को पोषक तत्वों से भरपूर चमत्कारिक फसल माना जाता है और इसे जैविक और अजैविक तनाव में आसानी से उगाया जा सकता है। वर्षा आधारित फसल होने के कारण इसे कम वर्षा, कम नमी और बंजर/कम उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्रों में उगाया जा सकता है। बाजरा का उपयोग भोजन और चारे दोनों के रूप में किया जाता है। विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि समय के साथ बाजरा की खपत कम हो गई है। बाजरा मानव उपभोग के लिए स्वास्थ्यवर्धक और पौष्टिक है। वर्तमान स्थिति में जब मोटापा, मधुमेह और हृदय संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं और बीमारियाँ अधिक हैं, बाजरा के उत्पादन और खप
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जगदीश, पावरा. "बौद्धिक संपदा का समाजशास्त्र बौद्धिक संपदा कानूनों के कारण समाज में ज्ञान प्राप्ति के अवसरों पर प्रभाव पारंपरिक ज्ञान और आदिवासी विरासत के पेटेटिंग से उत्पन्न चुनौतियां सांस्कृतिक पहचान और वैश्वीकरण में बौद्धिक संपदा की भूमिका ।". International Journal of Advance and Applied Research S6, № 12A (2025): 125–27. https://doi.org/10.5281/zenodo.14905164.

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Abstract:
बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) वह अधिकार होते हैं, जो किसी व्यक्ति या संगठन को उनके मानसिक श्रम, रचनात्मकता और नवाचार के परिणामस्वरूप उत्पन्न संपत्ति पर मिलते हैं। इन अधिकारों में पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिज़ाइन आदि आते हैं। बौद्धिक संपदा के अंतर्गत आने वाले ये अधिकार समाज में ज्ञान और सूचना के वितरण, उपयोग और स्वामित्व को नियंत्रित करते हैं। बौद्धिक संपदा के कानूनों के माध्यम से एक ओर जहां रचनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है, वहीं दूसरी ओर समाज में ज्ञान के प्राप्ति के अवसरों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। समाजशास्त्र इस तरह के प्रभावों का अध्ययन करता है कि कैसे इन
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Dadhich, Reena, та Lokesh Sharma. "राजस्थानी सिनेमा समस्याएँ सम्भावनाएँ एवं समाधान". ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 5, ICETDA24 (2024): 402–9. http://dx.doi.org/10.29121/shodhkosh.v5.iicetda24.2024.1414.

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Abstract:
रंग बिरंगी संस्कृति, सभ्यता, पहनावा, खान-पान जैसी विशेषताओं से युक्त राजस्थान जिसका हर शहर सांस्तिक विरासत को अपने आप में समेटे हुए हैं, वो राजस्थान जिसने पर्यटन से लेकर सिनेमा सबको अपनी ओर आकर्षित किया उसने अपने क्षेत्रिय सिनेमा को अनदेखा क्यों कर दिया ये विचारणीय प्रश्न हैं। जिस भारत में हर साल सभी भाषाओं को मिलाकर 1500 से 2000 फिल्मों का उत्पादन होता हैं, उस भारत में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़े राज्य राजस्थान में उँगलियों पर गिनी जा सके उतनी क्षेत्रीय फिल्मों का निर्माण होना एक प्रश्न है। उन कुछ फिल्मों का फायदा होना तो दूर, लागत भी न मिल पाना एक प्रश्न है। इन्ही प्रश्नों की तलाश में रा
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अनुजा, रोहिला. "वर्तमान समय में अजराड़ा घराने की परंपरा और योगदान का वर्णन". Recent Researches in Social Sciences & Humanities (ISSN: 2348 – 3318) 8, № 5 (Special Issue) (2021): 51–54. https://doi.org/10.5281/zenodo.6586895.

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Abstract:
अजराड़ा घराने में सब अपने बुजुर्गों की तरह तो वह नहीं बन पाए मगर वह अपनी विरासत को अच्छे से कायम रख रहें है। पुरानी पुस्तकों के आधार पर शम्मू खाँ और बब्बू खाँ की परंपरा में अजराड़ा घराने के लोगों की परंपरा चली मगर हमें बब्बू खाँ के बेटे अज़ीजुद्दीन उर्फ मुल्ला जी के तीन बेटे थे; रमजान खाँ, आशि़फ हुसैन खाँ, शमशाद खाँ, इससे आगे की परंपरा नहीं मिलती, तबला पूर्णतः एक भारतीय तालवाय है। उ. हबीबुद्दीन खाँ के वादन में गतिमानता सौंदर्य साकार हुआ करता था। वह ‘धिन-धिन नागिन घेतग घेतग तिनति नाकिना’ जैसे कायदे के विस्तार शब्द प्रयोग व प्रचंड तैयारी में और कर्ण मधुर नादों, ध्
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Kumar, Manoj. "Vijaydan Detha : Pioneer of the renaissance of Rajasthani folk tales." Shodhaamrit 02, no. 01 (2025): 12–19. https://doi.org/10.71037/shodhaamrit.v2i1.01.

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Abstract:
यह शोधपत्र राजस्थान की लोककथाओं के पुनरुद्धार में विजयदान देथा की परिवर्तनकारी भूमिका का परीक्षण करता है, जिसमें पारंपरिक मौखिक कथाओं का दस्तावेजीकरण और पुनर्व्याख्या शामिल है। 'बातां री फुलवारी' जैसे प्रमुख ग्रंथों और देथा एवं सिंह के सहयोगी कार्यों के साथ-साथ गुप्ता, शर्मा, राव एवं अन्य विद्वानों के विश्लेषणों पर आधारित यह अध्ययन इस बात की पड़ताल करता है कि देथा की अभिनव विधियाँ किस प्रकार मौखिक और लिखित परंपराओं के बीच सेतु का कार्य करती हैं। गुणात्मक सामग्री विश्लेषण पद्धति का उपयोग करते हुए, शोध उनके कथा रणनीतियों, विषयगत पुनर्संयोजनों, और शैलीगत अनुकूलनों की जांच करता है, जिन्होंने क्षीण
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सुरेश, चंद पचौरी, та शर्मा विशाल. "वर्तमान भारतीय समाज में परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन". RECENT EDUCATIONAL & PSYCHOLOGICAL RESEARCHES 14, № 1 (2025): 42–46. https://doi.org/10.5281/zenodo.15283081.

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Abstract:
भारतीय समाज अपनी प्राचीन परंपराओं और तेजी से विकसित हो रही आधुनिकता से बुना हुआ एक समृद्ध चित्रपट है। यह शोधपत्र समकालीन भारत में परंपरा और आधुनिकता के बीच गतिशील अंतर्संबंध की खोज करता है, जिसमें सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक आयामों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह जांचता है कि इन शक्तियों का सह-अस्तित्व राष्ट्र की पहचान और प्रगति को कैसे आकार देता है। शोधपत्र चुनौतियों और अवसरों पर भी चर्चा करता है, सामंजस्यपूर्ण संश्लेषण के मार्गों पर प्रकाश डालता है। भारत, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध परंपराओं का देश है, जो एक ऐसे चौराहे पर है जहाँ प्राचीन प्रथाएँ सह-अस्तित्व में हैं और कभी-कभी आधुनि
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Gadhavi, Manaliben H. "प्राचीन भारत में महिला उद्यमिता : एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य". Journal of Research & Development 17, № 4 (2025): 173–75. https://doi.org/10.5281/zenodo.15553283.

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Abstract:
<strong><em>Abstract:</em></strong> <em>प्राचीन भारत में इस घटना की जड़ों का पता लगाना आवश्यक है। लोकप्रिय धारणा के विपरीत, प्राचीन भारत में महिलाएँ केवल घरेलू कामों तक ही सीमित नहीं थीं, उन्होंने व्यापार, शिल्प और व्यवसाय सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। यह लेख प्राचीन भारत में महिला उद्यमिता के इतिहास पर प्रकाश डालता है, उनके योगदान, चुनौतियों और सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश डालता है, जो ऐतिहासिक ग्रंथों और विद्वानों के शोध के संदर्भों द्वारा समर्थित है। </em>
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प्रा., डॉ. जितेंद्र वामन बनसोडे. "२१वीं सदी के हिंदी उपन्यासों में चित्रित हाशिए का समाज (आदिवासी समाज के विशेष संदर्भ में)". International Journal of Humanities, Social Science, Business Management & Commerce 08, № 01 (2024): 144–48. https://doi.org/10.5281/zenodo.10484171.

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Abstract:
हमारे भारत देश में आज भी आदिवासी समाज एक हाशिए का समाज हैं। हिंदी साहित्य बहुआयामी तथा सामाजिक जीवन से जुड़ा हुआ है। आधुनिक युग में उपन्यास एक लोकप्रिय विधा है। कभी कबार मानव मन का रंजन करने वाला उपन्यास सामाजिक जीवन का दर्पण बन गया है। हिंदी उपन्यासों में आदिवासियों के जीवन को चित्रित करने वाले साहित्यकारों में प्रमुखता से मैत्रेयी पुष्या, संजीव, तेजिंदर सिंह, भगवानदास मोरवाल, प्रकाश मिश्र आदि का योगदान महत्वपूर्ण हैं। कबूतरा, थारू, उराँव, कंचन, मुण्डा, असुर और मिजो आदि कई आदिवासी जनजातियों हैं। ये जनजातियाँ भारत माँ की आदि संताने हैं। इन जनजातियों के पनाह में ही हमारी विरासत की गौरव गरिमा अब
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डॉ., आशा कुमारी. "भारतीय साहित्य के आधुनिक काल में राष्ट्रीय चेतना". International Journal of Advance and Applied Research 3, № 6 (2022): 4–6. https://doi.org/10.5281/zenodo.7404580.

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Abstract:
वैदिक काल से ही भारतीय साहित्य में &lsquo;राष्ट्र&rsquo; जैसे विशिष्ट शब्द का प्रयोग होता रहा है | जिस प्रकार साहित्य का मानव जीवन से गहरा नाता है ठीक उसी तरह राष्ट्र से समाज का गहन सम्बन्ध है | &ldquo;देश भक्ति का उद्वेलन कभी समर्पण तो कभी आंदोलन का रूप धारण कर लेता है,&nbsp;जिससे व्यक्ति के स्वत्व से लेकर राष्ट्र तथा देश की स्वतंत्रता और समानता की सुरक्षा के लिए सर्वस्व समर्पण तक के भाव समाविष्ट होते हैं।&quot;[i]&nbsp;राष्ट्र को आधुनिक संकल्पना में नहीं रखा जा सकता क्योंकि राष्ट्र का सम्बन्ध प्राचीनतम है | हम कह सकते हैं कि राष्ट्र हमारी सांस्कृतिक विरासत है | यह हमारी संस्कृति का एक अभिन्न
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मेरावी, जयप्रकाश, та बलीराम अहिरवार. "हिंदी नवगीत परंपरा: प्रमुख नवगीतकारों के योगदान के मूल्यांकन पर एक अध्ययन". Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 21, № 7 (2024): 63–67. https://doi.org/10.29070/4zcdb639.

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Abstract:
हिंदी साहित्य में नवगीत परंपरा आधुनिक हिंदी कविता में एक महत्वपूर्ण विकास का प्रतिनिधित्व करती है, जो 20वीं सदी के मध्य में स्वतंत्रता के बाद के भारत में सामाजिक-राजनीतिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों की प्रतिक्रिया के रूप में उभरी। यह लेख नवगीत रूप के उद्भव और विकास की पड़ताल करता है, जो इसकी संक्षिप्तता, यथार्थवाद और समकालीन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की विशेषता है। यह नरेश मेहता, नागार्जुन, श्रीपाल सिंह, वासुदेव सिंह और शमशेर बहादुर सिंह जैसे प्रमुख नवगीतकारों के योगदान का मूल्यांकन करता है, जिन्होंने इस शैली को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। व्यक्तिगत और सामाजिक विषयों के मिश्रण के
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डॉ., रविन्द्र कुमार. "भारतीय ज्ञान प्रणाली में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावों का अध्ययन". International Journal of Advance and Applied Research 12, № 3 (2025): 207–12. https://doi.org/10.5281/zenodo.15347688.

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Abstract:
<strong>सारांश</strong><strong>:</strong> राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System) के पुनरुत्थान और संवर्द्धन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह नीति पारंपरिक भारतीय शिक्षा पद्धतियों, जैसे योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, दर्शन, साहित्य, और शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली में एकीकृत करने का प्रयास करती है। नीति में समावेशी और बहु-विषयक दृष्टिकोण को बढ़ावा देकर भारतीय ज्ञान परंपराओं के वैज्ञानिक और व्यावहारिक पक्षों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसके तहत स्थानीय भाषाओं में शिक्षा को प्राथमिकता दी गई
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कुमार, डॉ. रविन्द्र. "भारतीय ज्ञान प्रणाली में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावों का अध्ययन". International Journal of Advance and Applied Research 12, № 3 (2025): 215–20. https://doi.org/10.5281/zenodo.15385778.

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Abstract:
<strong>सारांश</strong><strong>:</strong> राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System) के पुनरुत्थान और संवर्द्धन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह नीति पारंपरिक भारतीय शिक्षा पद्धतियों, जैसे योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, दर्शन, साहित्य, और शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली में एकीकृत करने का प्रयास करती है। नीति में समावेशी और बहु-विषयक दृष्टिकोण को बढ़ावा देकर भारतीय ज्ञान परंपराओं के वैज्ञानिक और व्यावहारिक पक्षों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसके तहत स्थानीय भाषाओं में शिक्षा को प्राथमिकता दी गई
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Kishor, Kumar. "प्राचीन भारतीय संस्कृति की पारिस्थितिकीय व्यवस्था". VAAK SUDHA 34, № 09 (2022): 222–24. https://doi.org/10.5281/zenodo.15413203.

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Abstract:
पारिस्थितिकीय सुरक्षा की भावना प्राचीन काल से ही भारतीय बौद्धिक&nbsp; तथा प्रचलित परंपराओं का अभिन्नहिस्सा रही है। पारिस्थितिकीय सुरक्षा की यह भावना पश्चिमी दुनिया की देन नहीं है, जैसा कि सोचा जाता है,बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक प्रवृत्तियों, धार्मिक प्रक्रियाओं तथा सामाजिक नियमों के अभिन्न हिस्से के रूप में दिखाई पड़ती है, जो प्राचीन काल से हमें विरासत में प्राप्त हुयी है। हमारे अनेक प्राचीन ग्रन्थ, परम्पराएँ, रीति-रिवाज आदि में हमें इसकी अभिव्यक्ति दिखाई पड़ती है। भारतीय दर्शन में पर्यावरण को सदैव एक जीवित&nbsp; जैविक सत्ता के रूप में देखा गया है। जो परम्पराएँ है, जिसमें पर्यावरण को जीवन के एक
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धर्मवीर, सिंह आजाद सिंह किरार. ""वर्तमान समय में डिजिटल पुस्तकालय का सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक उपयोगिता जिला ग्वालियर के विशेष संदर्भ में"". International Educational Applied Research Journal 09, № 05 (2025): 186–90. https://doi.org/10.5281/zenodo.15570593.

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Abstract:
डिजिटल लाइब्रेरी कई तरह की होती हैं, जो अलग-अलग उद्देश्यों और दर्शकों की सेवा करती हैं । यहाँ डिजिटल लाइब्रेरी के कुछ सामान्य प्रकार दिए गए हैं। डिजिटल पुस्तकालय कई प्रकार के है, जिनमें प्रमुख रूप निम्न है- शैक्षणिक डिजिटल पुस्तकालय, सार्वजनिक डिजिटल पुस्तकालयः विशिष्ट डिजिटल पुस्तकालयः राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालयः कॉर्पोरेट डिजिटल पुस्तकालय, हाइब्रिड डिजिटल पुस्तकालय, सामुदायिक डिजिटल पुस्तकालयः सरकारी डिजिटल पुस्तकालय एवं मल्टीमीडिया डिजिटल पुस्तकालय हैं। छात्रों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी का महत्व बहुआयामी है और इसमें कई फायदे शामिल हैं जो आधुनिक शिक्षा की उभरती जरूरतों को पूर
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सुप्रिया, सृष्टि. "बिहार में पर्यटन क्षेत्र में भविष्य का विकल्प – इस्कॉन (ISKCON)". Journal of Research and Development 14, № 23 (2022): 51–55. https://doi.org/10.5281/zenodo.7546456.

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Abstract:
<strong>सारांश</strong><strong>:-</strong>प्रस्तुत शोध आलेख में पर्यटन की महत्वता को समझते हुए बिहार में पर्यटक के लिए नए अवसरों की खोज का अध्ययन किया गया है साथ ही बिहार में धार्मिक स्थल की वास्तुकला को परिभाषित करने का एक प्रयास किया गया है । बिहार हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म और इस्लाम जैसे विभिन्न धर्मों के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। कई पर्यटक अपनी तीर्थ यात्रा करने के लिए बिहार की यात्रा करते है। दरभंगा जैसे छोटे जिले मैं पर्याप्त समृद्धि होने के बावजूद भी राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन के क्षेत्र में इसे अनदेखा किया जाता आ रहा है, यहां उचित अवसर प्राप्त नहीं है। इसका प्रमु
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सुप्रिया, सृष्टि, та प्रसाद सिंह रघुबर. "बिहार में पर्यटन क्षेत्र में भविष्य का विकल्प – इस्कॉन (ISKCON)". Journal of Research and Development 14, № 23 (2022): 51–55. https://doi.org/10.5281/zenodo.7546469.

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Abstract:
<strong>सारांश</strong><strong>:-</strong>प्रस्तुत शोध आलेख में पर्यटन की महत्वता को समझते हुए बिहार में पर्यटक के लिए नए अवसरों की खोज का अध्ययन किया गया है साथ ही बिहार में धार्मिक स्थल की वास्तुकला को परिभाषित करने का एक प्रयास किया गया है । बिहार हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म और इस्लाम जैसे विभिन्न धर्मों के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। कई पर्यटक अपनी तीर्थ यात्रा करने के लिए बिहार की यात्रा करते है। दरभंगा जैसे छोटे जिले मैं पर्याप्त समृद्धि होने के बावजूद भी राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन के क्षेत्र में इसे अनदेखा किया जाता आ रहा है, यहां उचित अवसर प्राप्त नहीं है। इसका प्रमु
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आराधना, सिंह, та पान्डेय विमला. "21वीं सदी में स्वामी विवेकानंद के शिक्षा दर्शन की वर्तमान परिस्थिति में प्रासंगिकता". RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES 12, № 1 (2025): 173–76. https://doi.org/10.5281/zenodo.15290645.

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Abstract:
भारतीय ज्ञान, विज्ञान, शास्त्र और दर्शन की परंपरा बहुत प्राचीन है। भारत को प्राचीन काल से महापुरुषों का जन्मस्थान माना जाता है। इन सभी महान आत्माओं ने अपनी आध्यात्मिक विचारधाराओं से विकसित सांस्कृतिक विरासत दी। भारत के विश्व प्रसिद्ध शिक्षाविद् रवींद्रनाथ ठाकुर, महर्षि अरविंद, डॉ. एसपी राधाकृष्णन, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी आदि प्रमुख है। स्वामी विवेकानंद वह महान गौरवशाली व्यक्ति थे जिन्होंने वेदांत सिद्धांत और व्यावहारिक वेदांत को सार्वजनिक जीवन का सहारा बनाया। यह कहा जाता है कि शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति का सर्वांगीण विकास संभव है। स्वामी विवेकानंद का विचार था कि "शिक्षा व्यक्ति में
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Jain, Nisha. "MASS ETHNIC ART AND SOCIAL LIFE." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 2, no. 3SE (2014): 1–2. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v2.i3se.2014.3601.

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Abstract:
Tribal societies are of a different nature than civilized and developed societies. They have their own specific culture. Each tribe's own culture makes them different from other tribes. Traditionally inherited culture is the basis of his life. Due to this particular culture, they fulfill many of their needs. Tribal art is reflected in various social celebrations and rituals. The members of each tribe celebrate the joys of life through art and color that is reflected in their traditional clothes, colorful jewelery and adornment. They do not need any training for this art, their knowledge is aut
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Deepak Kumar Warkade та Dr. Anamika Rawat. "सिवनी जिले में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की राजनैतिक सहभागिता और विकास में सह-संबंध का अध्ययन". Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 21, № 1 (2024): 21–25. http://dx.doi.org/10.29070/v258vr26.

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Abstract:
सिवनी जिला भारत के मध्य भाग, मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है। यह जिला अपनी समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ अपनी भौगोलिक विशेषताओं के कारण भी महत्व रखता है। सिवनी, भारत के मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में स्थित, एक समृद्ध इतिहास और भौगोलिक महत्व वाला एक शहर और नगर पालिका है। जिला, जो मुख्य रूप से आदिवासी परिवारों द्वारा बसा हुआ है, 1956 में स्थापित किया गया था। विशेष रूप से, सिवनी के आसपास के जंगल, जिन्हें ब्रिटिश औपनिवेशिक युग के दौरान सिवनी कहा जाता था, द जंगल बुक में रुडयार्ड किपलिंग (1894-1895) की प्रसिद्ध मोगली कहानियों की पृष्ठभूमि के रूप में काम करते थे। सिवनी गोदावरी नदी की
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Singh, Randheer. "Renunciation in Ramayana – Ayodhyakand." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 11, no. 2 (2024): 27–31. http://dx.doi.org/10.53573/rhimrj.2024.v11n2.004.

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Abstract:
This study explores the theme of renunciation in the Ayodhyakand of the Ramayana. Focusing on Lord Rama’s decision to accept exile, King Dasharatha’s emotional turmoil, and Sita’s loyal support, the study finds these acts of renunciation underscore the ethical and spiritual values of the epic. The analysis reveals how these sacrifices exemplify the principles of dharma, selflessness, and duty, thereby enriching the ethical and philosophical dimensions of the narrative. This research makes it clear that renunciation has a profound impact on the characters and their journeys, proving its crucial
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डॉ., आशा कुमारी. "भारतीय साहित्य के आधुनिक काल में राष्ट्रीय चेतना". International Journal of Advance and Applied Research 3, № 7 (2022): 4–6. https://doi.org/10.5281/zenodo.7426201.

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Abstract:
<strong>प्रस्तावना :</strong> वैदिक काल से ही भारतीय साहित्य में &lsquo;राष्ट्र&rsquo; जैसे विशिष्ट शब्द का प्रयोग होता रहा है | जिस प्रकार साहित्य का मानव जीवन से गहरा नाता है ठीक उसी तरह राष्ट्र से समाज का गहन सम्बन्ध है | &ldquo;देश भक्ति का उद्वेलन कभी समर्पण तो कभी आंदोलन का रूप धारण कर लेता है,&nbsp;जिससे व्यक्ति के स्वत्व से लेकर राष्ट्र तथा देश की स्वतंत्रता और समानता की सुरक्षा के लिए सर्वस्व समर्पण तक के भाव समाविष्ट होते हैं।&quot;[i]&nbsp;राष्ट्र को आधुनिक संकल्पना में नहीं रखा जा सकता क्योंकि राष्ट्र का सम्बन्ध प्राचीनतम है | हम कह सकते हैं कि राष्ट्र हमारी सांस्कृतिक विरासत है |
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सुन्दरम, कुमारी. "भारतीय इतिहास लेखन में उपनिवेशवाद और स्वदेशी दृष्टिकोण का तुलनात्मक अध्ययन". Journal of Research & Development 17, № 4 (2025): 116–20. https://doi.org/10.5281/zenodo.15544256.

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Abstract:
<strong><em>सारांश</em></strong> <em>भारतीय इतिहास लेखन में उपनिवेशवाद और स्वदेशी दृष्टिकोण दो भिन्न विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। उपनिवेशवादी दृष्टिकोण मुख्यतः अंग्रेजी इतिहासकारों द्वारा लिखा गया, जिसमें भारत को एक अविकसित, असभ्य और स्थिर समाज के रूप में दर्शाया गया। इसके विपरीत, स्वदेशी दृष्टिकोण भारतीय विद्वानों द्वारा विकसित हुआ, जिसने भारतीय सभ्यता की गहराई, विविधता और आत्मनिर्भरता को प्रस्तुत किया। यह शोध इस दोनों दृष्टिकोणों का तुलनात्मक अध्ययन करता है ताकि यह समझा जा सके कि किस प्रकार इतिहास लेखन पर विचारधाराओं का प्रभाव पड़ता है। यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि उपनिवेशवादी इतिहास
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महत, कमल बहादुर. "नेपाली सेनामा समावेशिता: एक विश्लेषण". Unity Journal 2 (3 серпня 2021): 288–302. http://dx.doi.org/10.3126/unityj.v2i0.38838.

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Abstract:
आधुनिक नेपालको सबैभन्दा पुरानो संस्थाको ऐतिहासिक विरासत बोकेको नेपाली सेनाले यसको स्थापनाकाल देखि नै समावेशिताको नीतिलाई अख्तियार गरेको पाइन्छ । नेपाली सेनामा विभिन्न जातीयसमूहहरु मगर, गुरुङ, तामाङ, किराती/ लिम्बू र मधेशी समुदायहरुका बटालियनहरु नेपाली राज्यले आरक्षण कोप्रावधान सुरु गर्नुभन्दा दशकौं अघिबाट अस्तित्वमा थियो । यसले नेपाली सेनाको चरित्र स्थापना कालदेखि नै समावेशी थियो भन्ने देखाउँछ । २०७२ साल मा जारी नेपालको संविधानले आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक र प्रशासनिक दृष्टिले पछाडि परेका विभिन्न लक्षित वर्गहरुलाई समानुपातिक समावेशी सिद्धान्तका आधारमा राज्यको निकायमा सहभागिता हुन पाउने हकलाई मौ
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डॉ, मनोज कुमार साहू. "भारत के छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों के बीच पर्यटन उद्योग का तुलनात्मक अध्ययन". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 16 (2023): 178–85. https://doi.org/10.5281/zenodo.7940078.

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Abstract:
पर्यटन उद्योग किसी भी क्षेत्र या राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत के मध्य भाग में स्थित छत्तीसगढ़ में एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विविध वन्य जीवन, सुंदर प्राकृतिक सुंदरता और कई ऐतिहासिक स्मारक हैं। हालाँकि, राज्य पर्यटन विकास के मामले में अपेक्षाकृत नया है और पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। अतः इस अध्ययन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के पर्यटन उद्योग का अपने पड़ोसी राज्यों से तुलनात्मक विश्लेषण करना है। अध्ययन में विभिन्न स्रोतों से प्राप्त द्वितीयक डेटा का उपयोग किया गया, जिसमें सरकारी रिपोर्ट, शोध पत्र और ऑनलाइन संस
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