To see the other types of publications on this topic, follow the link: सत्य.

Journal articles on the topic 'सत्य'

Create a spot-on reference in APA, MLA, Chicago, Harvard, and other styles

Select a source type:

Consult the top 50 journal articles for your research on the topic 'सत्य.'

Next to every source in the list of references, there is an 'Add to bibliography' button. Press on it, and we will generate automatically the bibliographic reference to the chosen work in the citation style you need: APA, MLA, Harvard, Chicago, Vancouver, etc.

You can also download the full text of the academic publication as pdf and read online its abstract whenever available in the metadata.

Browse journal articles on a wide variety of disciplines and organise your bibliography correctly.

1

अन्जू रानी. "जीवन का सत्य". International Journal for Research Publication and Seminar 15, № 4 (2024): 153–58. https://doi.org/10.36676/jrps.v15.i4.211.

Full text
Abstract:
प्रायः हमसे यह प्रश्न पूछा जाता है, जीवन का सत्य क्या है ? अथवा जीवन का उद्देश्य क्या है ? अथवा हम जन्म क्यों लेते हैं ? जीवन के उद्देश्य के सन्दर्भ में अधिकतर हमारी अपनी योजना होती है, किन्तु आध्यात्मिक दृष्टि से सामान्यतः जन्म के दो कारण है। ये दो कारण हमारे जीवन के उद्देश्य को मूलरूप से परिभाषित करते हैं।
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
2

Porwal, Urmila. "Premchand and his novel Literature-Comparative Studies in the light of Gandhi Darshan." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 7, no. 4 (2019): 171–77. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v7.i4.2019.886.

Full text
Abstract:
These popular lines are praises of Bapu's charismatic personality and gratitude. Mahatma Gandhi has not created any new philosophy, but the philosophical basis of his ideas is the same Gandhi philosophy. Gandhi.Darshan has four basic principles. Truth, non-violence, love and harmony.He became a satyavalambi in childhood watching the drama of the satirist king Harishchandra. He believed that truth is God. He considered the worship of truth as devotion and named his autobiography as Shastya. The national sentences taken from Shmundakopanishad are the inspiration of Bapu, the inspiration of Jayan
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
3

प्रा., डॉ. मुसळे हनुमान. "गांधीजीच्या सत्य व अहिंसेची प्रासंगिकता". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 860–63. https://doi.org/10.5281/zenodo.10281672.

Full text
Abstract:
ज्या कामातून आपण चांगला माणूस बनू शकतो, अशा कामावर गांधीजी विश्वास ठेवत. गांधीजी हे या शतकातील महान नेते आहेत. सत्याला बोलण्याची गरज पडत नाही, ते आपल्या कृतीतून दिसते. ज्या कामातून आपण चांगला माणूस बनू शकतो, अशा कामावर गांधीजी विश्वास ठेवत. सत्याची कास धरल्यास मानवाचा नक्की विकास होईल. हे मात्र गांधीजींच्या सत्याचे प्रयोग असलेल्या जीवनचरित्रावरूनही प्रकट होतच आहे. सत्याला खूप किंमत असते आणि त्याची किंमत चुकवावी लागते. कारण, सत्य अनमोल असते. आजही जगभराच्या परिप्रेक्षात पाहिले तर सत्याचे तेज स्वीकारणे प्रत्येकालाच जमते असे नाही. पण तो योग येतोच य
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
4

केंद्रे, तिरुपती दशरथ. "महात्मा गांधींची सत्य व अंहिसा संकल्पना". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 343–50. https://doi.org/10.5281/zenodo.10128244.

Full text
Abstract:
कोणत्याही सत्पुरुषाचे त्याच्याच जीवंतपणी मूल्यांकन करणे व इतिहासातिल त्याचे स्थान ठरवणे सोपी गोष्ट नसते गांधीजी एकदा म्हणाले होते माणसाच्या सुखाविषयी त्यांच्या जिवंतपणी निर्णय घेणे कठीण झाले होते सत्य .... काय आहे ? हा एक कठीण प्रश्न आहे. परंतु तुझ्या आतील आवाज जे सांगेल ते सत्य आहे. असे म्हणून माझ्यापुरता हा प्रश्न मी सोडवला आहे तुम्ही विचार कराल कि मग वेगवेगळ्या लोकांचे सत्य वेगवेगळे का ? कारण, असे कि मानवी मन असंख्य माध्यमांतून काम करत असल्यामुळे आणि सर्व लोकांचा मानसिक विकास एकाच गतीने होत नसल्यामुळे एक व्यक्तीकरीत जे सत्य असते, ते दुसऱ्या व्यक्ती करीत असत्या असू शकते त्यामुळे ज्
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
5

प्रा., डॉ. गोविंद केरबा शिळे. "राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की सत्य और अहिंसा की अवधारणा". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 241–44. https://doi.org/10.5281/zenodo.10115573.

Full text
Abstract:
गांधीजी इस सदी के सबसे महान नेता हैं। सत्य को बोलने की आवश्यकता नहीं होती, वह हमारे कार्यों में झलकता है। सत्य का पालन करने से मनुष्य का अवश्य ही विकास होगा। अहिंसा केवल अहिंसा नहीं है, बल्कि अपने धर्म के साथ-साथ दूसरे धर्मों को भी महत्व देना है। गांधीजी के अनुसार, अहिंसा मनुष्य का स्थायी स्वभाव है। जो देश और समाज अहिंसा के मार्ग पर चलते हैं, उन्हें आत्म-सम्मान त्यागना और बाकी सब कुछ त्यागना सीखना चाहिए। इसीलिए गांधीजी कहते हैं कि अहिंसा नहीं है एक कायर की निशानी है, बल्कि एक बहादुर व्यक्ति की निशानी है। इसके अलावा, गांधीजी की अहिंसा की शिक्षाओं का पालन हर कोई कर सकता है। शरीर, हत्यारों, औजारो
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
6

रंजिनी, घोष. "विज्ञान के विथ्याकरण कार्ल पॉपर के दृष्टिकोण से समाज -विज्ञान शोध". International Journal of Research - Granthaalayah 7, № 6 (2019): 67–71. https://doi.org/10.5281/zenodo.3262169.

Full text
Abstract:
सर कार्ल पॉपर के अनुसार वैज्ञानिक सिधान्तो में पुन विवेचना की आवश्यकता है जिससे वे सत्य के निकट पहुंचे जहा विज्ञानं अपने आप को स्वयं सिद्द्त मानता है वही विज्ञानं स्वयं का कई कसौटियों में परीक्षण करता है सत्य तक पहुंचने हेतु तर्क एवं गणित की सहायता आवश्यक होती है ावैज्ञानिक विधि केवल प्रत्यक्षिकरण पर आधारित होती है 
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
7

Garg, Sushma. "Expression of love portrayed in Mannu Bhandari's story 'Shamshaan'." RESEARCH REVIEW International Journal of Multidisciplinary 7, no. 4 (2022): 104–8. http://dx.doi.org/10.31305/rrijm.2022.v07.i04.015.

Full text
Abstract:
When the book Mannu Bhandari's best love stories was studied by the researcher, it was found that in the love made by his characters in the stories of Mannu Bhandari, a very lively and beautiful depiction of the social story truth, time truth, and craft truth of the society was expressed. Has happened. The story world of his love is very simple and meaningful, which exposes many links of human heart, how the worldly creature accepts the feeling of love in different forms. By the way, love in all her stories in this book is in different forms such as 'this is the truth', the emotional truth of
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
8

प्रा., डॉ. कविता चंद्रकांत लोहाळे. "महात्मा गांधी: सत्य आणि अहिंसा एक चिरंतन विचार". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 554–58. https://doi.org/10.5281/zenodo.10137654.

Full text
Abstract:
माणूस इतिहास घडवतो आणि माणसाला घडवतात ते त्याचे विचार! येणाऱ्या पिढीला घडवण्यासाठी, त्यांच्या उज्वल भविष्यासाठी सत्य, अहिंसा या मूल्यांची नितांत आवश्यकता आहे. सद्यस्थितीत समाजात झालेला बदल टिपताना असे लक्षात येते की, मानवी मूल्यांचा सातत्याने ऱ्हास होत आहे. त्यामुळे विध्वंसक बनलेले समाजमन समाजात एक प्रकारची अस्वस्थता निर्माण करत आहे. या संदर्भाने मार्टि
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
9

तिवारी, विपुल. "ब्रेस्ट टैक्स: एक सत्य घटना या ऐतिहासिक षड्यंत्र". International Journal of Social Science Research (IJSSR) 2, № 3 (2025): 367–71. https://doi.org/10.70558/ijssr.2025.v2.i3.30417.

Full text
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
10

पौड्याल Poudyal, ज्ञानेन्द्र Gyanendra. "नेपाल इतिहास सङ्घको आठौं महाधिवेशन (२०७८) प्रसङ्ग {Proceedings of the Eighth Congress of Nepal History Association (2078)}". HISAN: Journal of History Association of Nepal 8, № 1 (2022): 134–38. http://dx.doi.org/10.3126/hisan.v8i1.53096.

Full text
Abstract:
इतिहास विगतमा घटेका सत्य तथ्य घटनाहरूको विवरण हो । त्यसैले इतिहासले अतितका सत्य र तथ्यलाई केलाउँदै प्रस्तुत गर्दछ । हिजोको सत्य र तथ्यबाट आज सिक्दै भोलिको लागि सही मार्ग पहिल्याउन इतिहासको अध्ययन जरूरी हुन्छ । हरेक वस्तु र विषयको इतिहास हुन्छ । इतिहास विनाको विषय र वस्तु नै हुँदैन । इतिहासको ज्ञान विना कुनै पनि वस्तु तथा विषयको प्रगति र विकास असंभव हुन्छ, त्यसैले इतिहास मानव जीवन र सजिव निर्जिव वस्तु सबैको अध्ययनको विषय हुनुसक्छ । इतिहासको अध्ययन र विश्लेषण गरेर मात्र अगाडि बढ्नाले मात्र जो कोहीले सफलता प्राप्त गर्दछ । इतिहासबाट पाठ सिकेर अगाडि बढ्ने सङ्घसंस्था राष्ट्रले नै प्रगति र विकास गर्न
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
11

षडानन्द पौड्याल. "गुरुप्रसाद मैनालीका कथामा अमूर्त संस्कृति {Abstract Culture in the Stories of Guru Prasad Mainali}". Interdisciplinary Journal of Management and Social Sciences 3, № 2 (2022): 120–28. http://dx.doi.org/10.3126/ijmss.v3i2.50269.

Full text
Abstract:
सामाजिक चेतनाले ग्रहण गर्ने तर दृश्यमूलक नभई केवल भावनाबाट मात्र प्रत्यक्षीकरण गर्न सकिने विचारपरक सत्य अमूर्त संस्कृति हो । व्यक्तिगत वा सामाजिक भावनाको केन्द्रमा निहित आस्था र त्यसमा प्रकट भई सामाजिक प्रतिबिम्बका रूपमा अगिल्लो पुस्ताबाट पछिल्लो पुस्तामा हस्तान्तरित हुने आस्थापरक व्यवहार अमूर्त संस्कृति हो । प्राकृतिक शक्तिलाई पनि दैवीशक्तिमा परिणत गरी मानव जीवनलाई पल्लवित गराउन सामथ्र्य राख्ने आस्थाको केन्द्र बनेको अमूर्त संस्कृति गुरुप्रसाद मैनालीका कथामा सामाजिक भावना अनुरूप प्रयोग गरिएको सत्य पहिचान गर्नु लेखको उद्देश्य हो । व्यक्तिगत चिन्तनका आलोकमा सामाजिक भावना प्रकट भएको छ भने सामाजिक
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
12

घोष, रंजिनी. "विज्ञान के मिथ्याकरण: कार्ल पॉपर के दृष्टिकोण से समाज-विज्ञान शोध". International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 7, № 6 (2019): 67–71. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v7.i6.2019.751.

Full text
Abstract:
सर कार्ल पॉपर के अनुसार वैज्ञानिक सिद्धांतों में पुनर्विवेचना की आवश्यकता है, जिससे वे सत्य के निकट पहुंचे । जहाँ छद्मविज्ञान अपने आप को स्वयं-सिद्ध मानता है, वहीं विज्ञान स्वयं का कई कसौटियों में परीक्षण करता है। सत्य तक पहुँचने हेतु तर्क एवं गणित की सहायता आवश्यक होती है । अवैज्ञानिक विधि केवल प्रत्यक्षीकरण पर आधारित होती है । सर कार्ल पॉपर ने पहली बार थॉमस कुह्न, सिगमंड फ़्रोएड, कार्ल मार्क्स जैसे तमाम विद्वानों के सिद्धांतो पर प्रश्न उठाया था । इस आलेख में समाज-विज्ञान के क्षेत्र में किए गए शोधकार्य पर सर पॉपर के मिथ्याकरण सिद्धांत के महत्व को सूचित किया गया है ।
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
13

Joshi, Rashmi, and Aslam Khan. "ART WORLD OF PAINTER VISHNU CHINCHALKAR." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 7, no. 11 (2019): 261–64. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v7.i11.2019.3748.

Full text
Abstract:
English : Shri Vishnu Chinchalkar is one such name in the Indian art field, who considered not only life but also the world as the medium of art. The works of Shri Chinchalkar, who considers nature to be his Guru, speak of his untold truth. It is the ideal of his art to express object and truth through art. From his art point of view, he has been searching for new values ​​of art. From his art point of view, he kept searching for new values ​​from where. For this reason, his images are a medium to connect life with truth and truth with self. You have tried to make the simple form of photograph
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
14

चौलागाईं Chaulagai, प्रेमप्रसाद Prem Prasad. "अनुसन्धानमा प्रमाता, प्रमेय, प्रमाण र प्रमा". Vaikharivani 1, № 2 (2024): 35–46. http://dx.doi.org/10.3126/vaikharivani.v1i2.69852.

Full text
Abstract:
प्रस्तुत लेख पूर्वीय दर्शनका मान्यतामा आधारित भएर अनुसन्धान र यसका अङ्गहरू प्रमाता, प्रमेय, प्रमाण र प्रमेयको भूमिका र तिनका बिचको सम्बन्धको निरूपणमा केन्द्रित छ । गुणात्मक प्रकृतिको यस लेखमा वर्णनात्मक, व्याख्यात्मक र आवश्यक स्थलमा तुलनात्मक विधिको उपयोग गरी अनुसन्धानको स्वरूप र प्रक्रियाको व्याख्या गर्नुका साथै यसका अङ्गका रूपमा रहेका प्रमाता, प्रेमय, प्रमाण र प्रमाको वैशिष्ट्यको निरूपण गरिएको छ । पूर्वीय दर्शनले अनुसन्धानप्रक्रियाको समग्र रूपरेखालाई प्रमाता, प्रमेय, प्रमाण र प्रमा गरी चारओटा अङ्गका माध्यमबाट प्रस्तुत गरेको छ । यी चार अङ्गमध्ये प्रमाताले शोधार्थी, प्रमेयले शोध्य विषय, प्रमाण
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
15

Dhakal, Bodhraj. "‘सूर्य–महिमा’ कवितामा अद्वैत वेदान्त दर्शन". Kanya Journal 4, № 1 (2023): 89–97. http://dx.doi.org/10.3126/kanyaj.v4i1.57070.

Full text
Abstract:
प्रस्तुत अनुसन्धानात्मक लेखमा लेखनाथ पौड्यालको ‘सूर्य–महिमा’ कवितामा प्रस्तुत अद्वैत वेदान्त दर्शनका मान्यताहरूको विश्लेषण गरिएको छ । यस कवितामा प्रस्तुत अद्वैत वेदान्त दर्शनका मान्यताहरूलाई दृष्टान्तमार्फत विश्लेषण गरी तथ्य निरुपण गर्नु यस अध्ययनको उद्देश्य रहेको छ । ब्रह्मसूत्रका भाष्यकारहरूमध्ये सर्वश्रेष्ठ मानिने शङ्कराचार्यको अद्वैत वेदान्त दर्शनको ब्रह्म सत्य होे र ब्रह्मबाट भिन्न केही छैन भन्ने मान्यतालाई यस कवितामा कविले प्रस्तुत गरेका छन् भन्ने निष्कर्ष दिइएको छ । यस कवितामा सूर्यलाई ब्रह्मजस्तै सत्य, नित्य, सर्वशक्तिमान्, सर्वव्यापी, स्वप्रकाश, अमर र सार्वभौमशक्तिका रूपमा प्रस्तुत गर
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
16

गडतौला Gadtaula, नारायण Narayan. "देवकोटाका काव्यमा रहस्यवादी चेतना". Shabda Sadhana शब्दसाधना 7, № 1 (2024): 1–11. https://doi.org/10.3126/shabdasadhana.v7i1.75078.

Full text
Abstract:
रहस्यवाद मानवीय संज्ञानको एउटा महवपूर्ण वृत्ति हो । यसले इन्द्रिय भन्दा परका सत्य तथ्यलाई अनुभूतिको विषय बनाएर ग्राह्य बनाउँछ । यस लेखमा लक्ष्मीप्रसाद देवकोटाका कृतिलाई प्राथमिक स्रोतसामग्रीको रूपमा तथा रहस्यवादी चेतनाको अवधारणालाई द्वितीयक स्रोतको सामग्रीको रूपमा उपयोग गरिएको छ । दुवै प्रकृतिका सामग्रीको सङ्कलन पुस्तकालयीय कार्यबाट गरिएको छ । विश्वका धर्म, दर्शनर साहित्य जस्ता वाङ्मयका विधाहरूमा रहस्यवादी चेतनाको अभिव्यक्ति भएको पाइन्छ । नेपाली साहित्यका शिखर व्यक्तित्व महाकवि देवकोटाका साहित्यिक कृतिहरूमा रहस्यवादी चेतनाको प्राचूर्य पाइन्छ । इन्द्रियातीत एवं विश्वातीत सत्य तथ्यका सूक्ष्म स्प
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
17

सापकोटा Sapkota, सन्ध्या Sandhya. "‘तिमी र मः अभिन्न सत्य’ कवितामा देह र आत्माको सम्बन्ध". DMC Research Journal 6, № 01 (2024): 1–11. https://doi.org/10.3126/dmcrj.v6i01.73723.

Full text
Abstract:
गोविन्दराज विनोदीद्वारा रचित ‘तिमी र मः अभिन्न सत्य’ कवितामा वेदान्त दर्शनअन्तर्गत देह र आत्माको सम्बन्धको अध्ययन प्रस्तुत अनुसन्धानात्मक लेखको अध्ययनीय क्षेत्र हो । पाठविश्लेषणविधि अवलम्बन गरिएको यस लेखमा पौरस्त्य दर्शनअन्तर्गतको वेदान्त दर्शनभित्रको देहात्मा उपस्थापनलाई सैद्धान्तिक आधार बनाइएको छ । ब्रह्मको इच्छाशक्ति माया उपाधियुक्त चैतन्य नै ईश्वर तथा अविद्या उपाधियुक्त चैतन्यलाई जीवात्मा मान्नु वेदान्त दर्शनको मूल मान्यता हो । विश्लेष्य कवितामा ‘म’ लाई पुरुष अर्थात् ‘देह’ र ‘तिमी’ लाई ‘प्रकृति’ अर्थात् ‘आत्मा’का रूपमा उपस्थित गराई आत्माबिना जीवको अस्तित्व नरहने दर्शन प्रस्तुत भएको छ । यस
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
18

प्रा., डॉ. संदीप भागू चपटे. "महात्मा गांधीजींचे शिक्षण विषयक, ग्राम स्वराज्य, धर्म व राजकारण विषयक विचार". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 269–74. https://doi.org/10.5281/zenodo.10121955.

Full text
Abstract:
भारतीय स्वातंत्र्य संग्रामातील प्रमुख तत्त्वज्ञ म्हणजे महात्मा गांधी हे होय. संपूर्ण जगाला अहिंसात्मक मार्गांनी स्वातंत्र्य मिळवण्यासाठी त्यांनी प्रेरित केले. रवींद्रनाथ टागोर यांनी प्रथम त्यांना 'महात्मा' ही उपाधी दिली.भारतातील लोक प्रेमाने त्यांना 'बापू' असे म्हणत. स्वतंत्र भारताचे 'राष्ट्रपिता' म्हणून महात्मा गांधीजींना ओळखले जाते. ते सत्याग्रहाचे जनक व अहिंसेचे पुजारी म्हणून संपूर्ण जगात ओळखले जातात. त्यांची जयंती जगभरात 'आंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिन' म्हणून साजरी केली जाते. गांधीजींचे तत्त्वज्ञान केवळ पुस्तकी नसून पुढील पिढ्यांना त्याचा उपयोग होणार आहे. भारताला स्वातंत्र्य मिळवून देण्यात
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
19

प्रा., डॉ. वसंत कदम. "गांधी विचार एक चिंतन.." उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 427–30. https://doi.org/10.5281/zenodo.10130789.

Full text
Abstract:
ऐतिहासिक कालखंडामध्ये या पृथ्वीतलावर जे काही महामानव, महानायक, महान क्रांतिकारक, महान योध्दे, महान विचारवंत, आणि महान संत होऊन गेले, त्यामध्ये भारतीयांचे राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी यांच्या नावाचा विश्वातील इतिहासामध्ये अग्रक्रमाने उल्लेख केला जातो.  महात्मा गांधीजी नावाच्या महामानवाने भारतीलच नव्हे तर, विश्वातील सर्व मानवप्राणी मात्रांच्या हिताचा ध्यास घेऊन, नवसमाज निर्मितीचे दिव्य मानवतावादी तत्त्वज्ञान मांडण्याचे महान कार्य केले. महात्मा गांधीजींनी मांडलेले तत्वज्ञान आत्मशांती पासून ते विश्वशांती पर्यंत, गावपातळी पासून ते विश्वपातळी पर्यंत, शांती साधक अहिंसे पासून ते क्रांतिकारी अहिंसे
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
20

Upadhyaya, Mukta Raj. "समका कवितामा ब्रह्मचिन्तन". Journal of Development Review 8, № 2 (2023): 84–93. http://dx.doi.org/10.3126/jdr.v8i2.59240.

Full text
Abstract:
ईश्वरचिन्तनबाट आफ्नो काव्ययात्राको पहिलो पाइलो सारेका बालकृष्ण समका अधिकांश कविता पूर्वीय दर्शनबाट अनुप्राणित रहेका छन् । यिनलाई नास्तिक वा भौतिकवादी कविका रूपमा व्याख्या विवेचना गर्ने गरिए तापनि यिनका कवितामा निहित वैचारिक मान्यताको मूल आधार पूर्वीय दर्शन नै हो । आध्यात्मिक एवं ईश्वरीय चिन्तनयुक्त पारिवारिक वातावरण र संस्कारमा हुर्किएका बालकृष्ण समको ध्यान विज्ञान विषय लिई त्रिचन्द्र कलेजमा पढ्न थालेपछि भने बिस्तारै भौतिकवादी दर्शनतर्फ आकृष्ट हुन थालेको हो तापनि अध्यात्मविनाको विज्ञान त्रूmर र विनाशक हुनसक्छ भन्ने कुरामा सचेत समले अध्यात्मचिन्तन र पूर्वीय दर्शनको गहिरो अध्ययनबाट नै आफ्नो वैचा
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
21

Poonam and Pintu Kumar. "Buddhist Philosophy and Its Relevance in the Present Times." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 12, no. 5 (2025): 102–5. https://doi.org/10.53573/rhimrj.2025.v12n5.012.

Full text
Abstract:
Gautama Buddha’s philosophy, rooted in the Four Noble Truths, the Eightfold Path, impermanence, non-self, karma, compassion, and non-violence, offers a rational and experiential framework for addressing human suffering. This paper explores the relevance of Buddhist philosophy in tackling modern challenges such as mental health crises, environmental degradation, and social inequalities. The Four Noble Truths provide insights into the nature of suffering and its cessation, while the Eightfold Path offers practical ethical guidance. Concepts like impermanence and interconnectedness resonate with
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
22

प्रा., डॉ. मंगल पांडुरंग खेडेकर. "महात्मा गांधीजींचे स्त्री विषयक विचार". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 313–17. https://doi.org/10.5281/zenodo.10125484.

Full text
Abstract:
साधी राहणी उच्च विचारसरणी असे जीवन विषयक तत्त्व असणारे,नैतिकता हा जीवनाचा मुलाधार मानणारे, अहिंसा धर्माचे प्रवर्तक व मानवतेची पुजारी तसेच श्रेष्ठ तत्त्वचिंतक व समाज सुधारक म्हणजे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी होय.राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजींनी सामान्य माणसाला आदर्श जीवन जगता यावे याकरिता सत्य अहिंसा सत्याग्रह सर्वधर्मसमभाव ही तत्वे जगाला दिली त्यामागे जगात शांतता प्रस्थापित व्हावी हाच त्यांचा उदात्त हेतू होता.महात्मा गांधीजींनी आयुष्यभर सत्य आणि अहिंसा या तत्त्वांचा पुरस्कार केला. स्वतःदेखील याच तत्त्वांनुसार जगले आणि इतरांनीही तसे करावे असे सुचवले. त्यांनी खेड्यांना खऱ्या भारताचे मूळ म्हणून पाहिल
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
23

डॉ., नारायण बागुल. "रामायण में सामाजिक सन्दर्भ : एक अनुशीलन". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 26 (2023): 159–61. https://doi.org/10.5281/zenodo.8416557.

Full text
Abstract:
आदिकवि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण एक ऐसा आचारशास्त्र एवं धर्मशास्त्र है, जो भारतीय समाज में ही नहीं अपितु विदेशों में भी विश्रुत है। यह मानव जीवन का सर्वांगीण आदर्श प्रस्तुत करता है। रामायण धार्मिक दृष्टि से प्राचीन संस्कृति, आचार, सत्य, धर्म, व्रत-पालन आदि को समाज में प्रदर्शित करता है। सामाजिक दृष्टि से यह पति-पत्नी के दाम्पत्य सम्बन्ध, पिता-पुत्र के कर्त्तव्य, गुरू-शिष्य का पारस्परिक व्यवहार, भाई का भाई के प्रति कर्त्तव्य, व्यक्ति का समाज के प्रति उत्तरदायित्व, आदर्श माता-पिता, पुत्र, भाई, पति एवं पत्नी का चित्रण, आदर्श गृहस्थ जीवन की अभिव्यक्ति करता है। रामायण में सामाजिक सन्दर्भ में पितृ
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
24

प्रा., नामावार आकाश सायलू. "महात्मा गांधीजींच्या आर्थिक विचारांचे वर्णनात्मक विश्लेषण". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 973–77. https://doi.org/10.5281/zenodo.10285050.

Full text
Abstract:
गांधीजींचे राजकीय सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक आणि नैतिक विचार त्यांच्या अभ्यासातून, लेखनातून आणि आत्मचरित्रावरून निदर्शनास येते. पण त्यांचा आर्थिक दृष्ट्या विचार केला असता त्यांनी अर्थशास्त्राचा कोणत्याही वैज्ञानिक पद्धतीने अभ्यास केलेला नाही, पण त्यांनी अर्थव्यवस्थेच्या संबंधित जे विचार मांडलेले आहेत ते खूप मूल्यवान आहेत.गांधीजींनी अर्थशास्त्रावर कोणतीही पुस्तक लिहिलेली नाहीत पण त्यांनी अर्थशास्त्रावर भाष्य केलेल्या विचारांना एकत्र केले तर, त्यांचे त्या काळातील विचार आजच्या काळात सुद्धा प्रासंगिक ठरतात. त्यांचे आर्थिक विचार हे राजकीय आणि सामाजिक विचार प्रणाली प्रमाणे सत्य आणि अहिंसा या तत्त्वा
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
25

सैनी, अंगूरी. "गाँधीजी के सामाजिक चिन्तन के विविध आयाम (नारी व दलितोद्धार तथा अस्पृश्यता निवारण एवं मद्यनिषेध के विशेष संदर्भ में)". Innovation The Research Concept 9, № 1 (2024): H 9 — H 18. https://doi.org/10.5281/zenodo.10707379.

Full text
Abstract:
This paper has been published in Peer-reviewed International Journal "Innovation The Research Concept"                  URL : https://www.socialresearchfoundation.com/new/publish-journal.php?editID=8529 Publisher : Social Research Foundation, Kanpur (SRF International)                  Abstract : महात्मा गाँधी एक ऐसे युग पुरुष थे, जिनकी मनोइच्छा एक ऐसी राष्ट्र के निर्माण की थी जिसमें सभी लोग समन्वयात्मक भावनाओं के आधार पर जीवन निर्वाह से ऊपर उठकर आध्यात्मिक एवम
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
26

लाल, राम, та रामदेव साऊ. "रामायण महाकाव्य में भगवान श्रीराम का चारित्रिक वर्णन". Innovation The Research Concept 9, № 4 (2024): H15—H20. https://doi.org/10.5281/zenodo.12515502.

Full text
Abstract:
This paper has been published in Peer-reviewed International Journal "Innovation The Research Concept"                      URL : https://www.socialresearchfoundation.com/new/publish-journal.php?editID=9100 Publisher : Social Research Foundation, Kanpur (SRF International)    Abstract : भगवान श्री राम का रामायण महाकाव्य का सारांश जिसमे बताया गया है की उनका जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर हुआ था। वे धर्म सत्य और मर्यादा के प्रतीक माने जाते हैं और उन्हें 'मर्या
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
27

कुसुम, लता. "आधुनिक राजनीति में सत्याग्रह: अतीत से सबक, भविष्य के लिए परिप्रेक्ष्य". RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES 12, № 1 (2025): 92–97. https://doi.org/10.5281/zenodo.15289477.

Full text
Abstract:
आधुनिक राजनीति के उथल-पुथल भरे परिदृश्य में, सत्याग्रह महात्मा गांधी की कालातीत शिक्षाओं के रूप में नैतिकता, सत्य और अहिंसा के मूल्यों को पुनर्स्थापित करने का मार्ग दिखाता है। "हिंद स्वराज" में निहित उनके विचार आज भी शासन, सामाजिक न्याय, पर्यावरणीय स्थिरता और वैश्विक सहयोग की चुनौतियों के समाधान हेतु प्रेरणास्रोत हैं। सत्याग्रह केवल सत्ता का प्रतिरोध नहीं, बल्कि एक सक्रिय नैतिक आंदोलन है जो सत्य के लिए आग्रह, आत्मबलिदान, अहिंसा, सविनय अवज्ञा और व्यक्तिगत परिवर्तन पर आधारित है। यह दर्शन विभिन्न वैश्विक आंदोलनों—जैसे नागरिक अधिकार संघर्ष, जलवायु न्याय, और डिजिटल नैतिकता—में स्पष्ट रू
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
28

डाॅ0, श्रीमती हीना परवीन. "गाँधी-दर्शन की प्रासंगिकता". International Journal of Research - Granthaalayah 6, № 5 (2018): 73–77. https://doi.org/10.5281/zenodo.1255233.

Full text
Abstract:
गाँधी-दर्शन के आधार तत्व सत्य, अहिंसा और प्र ेम हैं और इसी आधार पर राजनीतिक, धार्मिक और आर्थिक विचारों की बेल फल-फूल रही है। यही तीन तत्व प्रकाश, जल और वायु की भँाति सम्पूर्ण  गाँधी-दर्शन को पोषित व पल्लवित कर रहे हैं। प्रस्तुत आलेख द्वारा हम वर्तमान समाज में गाँधी-दर्शन की अनिवार्यता तथा प्रासंगिकता अवलोकन करेंगे।
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
29

प्रा., शिवाजी सुभाष खिराडे. "महात्मा गांधी यांचे विचार : काल, आज आणि उद्या "महात्मा गांधीची सत्य व अहिंसा संकल्पना"". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 351–54. https://doi.org/10.5281/zenodo.10128687.

Full text
Abstract:
भारताला प्राचीन समृद्ध वारसा लाभलेला आहे. साहित्य, कला, संगीत, तत्वज्ञान, राजकीय, सामाजिक इ. क्षेत्रात भारतीय लोकांनी आपली एक वैशिष्ट्यपूर्ण परंपरा जतन केलेली आहे. भारतात विविध जातपंथ, रूढी, परंपरा, भाषा, धर्म यांचे वैविध्य आहे. अनेक सत्ताबद्द्ल भारतात झालेत आणि त्यामध्ये प्राचीन काळापासून ते आजच्या आधुनिक काळापर्यंत विविध परिवर्तन घडून आलेत. ब्रिटीशांचे भारतातील वर्चस्व काढून टाकण्यासाठी अनेक देशभक्तांनी महत्त्वपूर्ण योगदान दिले. भारतीय स्वातंत्र्य संग्रामातील एक प्रमुख नेते आणि तत्वज्ञ म्हणून महात्मा गांधी यांचे अलौकिक स्थान आहे. आपल्या सत्य, अहिंसा या तत्वांवर आधारित अहिंसात्मकरित्या भारतभू
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
30

ढकाल Dhakal, बोधराज Bodha Raj. "ऋतुविचार काव्यमा प्रस्तुत अद्वैत चिन्तन {Vedantic Philosophy in Hrituvichar}". Kaumodaki: Journal of Multidisciplinary Studies 4, № 1 (2024): 128–37. http://dx.doi.org/10.3126/kdk.v4i1.64572.

Full text
Abstract:
यस अनुसन्धानात्मक लेखमा प्रकृतिपरक काव्य ‘ऋतुविचार’मा प्रस्तुत अद्वैत चिन्तनको विश्लेषण गरिएको छ । शङ्कराचार्यद्वारा प्रतिपादित अद्वैत वेदान्त दर्शनका मूल्यमान्यताहरू प्रकृतिपरक भाव अँगालेको ऋतुविचारका कतिपय सन्दर्भमा प्रस्तुत भएका छन् । काव्यमा अद्वैत चिन्तन कसरी प्रस्तुत गरिएको छ? भन्ने समस्यालाइ साङ्गपाङ्ग रूपमा निरूपण गरी पुष्टि गर्नु यस लेखको उद्देश्य रहेकोछ । शङ्कराचार्यले अद्वैत वेदान्त दर्शनमा प्रस्तुत गरेको ब्रह्म सत्य हो; योभन्दा भिन्न केही छैन र ब्रह्मज्ञान विना मोक्ष प्राप्त गर्न सकिँदैन भन्ने चिन्तनलाई यस खण्डकाव्यमा प्रस्तुत गरेको निष्कष् दिइएको छ । काव्यमा जीवभावका कारण जीवले व्
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
31

Dr, Vinod Kumar Jain, та sharma ruby. "''एकीकृत शिक्षक शिक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिरूचि का अध्ययन''". Samsamyiksrijan 1, № 7 (2021): 531–35. https://doi.org/10.5281/zenodo.7296357.

Full text
Abstract:
शिक्षा मानव विकास का मलू साधन ह।ै इसक ेद्वारा मनष्ुय की जन्मजात शक्तियों का विकास उसके ज्ञान व कला-कौशल में वृद्धि एवं व्यवहार में परिवर्तन किया जाता है और उसे सभ्य सुसस्ंकृत एव ंयाग्ेय नागरिक बनाया जाता है। यह कार्य मनुष्य के जन्म स ेपा्ररम्भ हाकेर जीवन पयनर््त चलता रहता ह।ै शिक्षा व्यक्ति की क्षमताओं को प्रकाशित करने का कार्य करती है। उसे अपनी वातावरणीय परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने की योग्यता प्रदान करती है। शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति पशुवत् प्रवृत्ति से ऊपर उठते हुए मानव बनता है। मन आरै बुिद्ध पर नियत्रंण वही व्यक्ति कर सकता ह ैजिसका चित्त एवं प्रकृति विवेकशील हो तथा जो सत्य की खोज
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
32

प्रा.डॉ., उद्धव निर्वळ. "आचार्य विनोबा भावे यांच्या दृष्टिकोनातून विज्ञान आणि अध्यात्म". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 25 (2023): 28–30. https://doi.org/10.5281/zenodo.8242491.

Full text
Abstract:
भारतीय स्वतंत्र लढत म. गांधींनी वेळोवेळी जे तत्व आणि नीती वापरली व सर्व भारतीयाना 'सत्य आणि अहिंसा' हे तत्व अंगीकारून स्वातंत्र्य लढयात भाग घेऊन इंग्रजा विरुद्ध लढायला प्रवर्त केले. त्याच विचारधारेतून आपले वेगळेपण जपून ही गांधीजींच्या मार्गावरूनच विनोबांनी प्रवास केला. उलट स्वातंत्र्यप्राप्तीनंतर विनोबांनी सत्य आणि अहिंसेचा मार्ग स्वीकारून भूदान चळवळ व ग्रामदान चळवळ राबवली. भारतीय इतिहासात ती एक स्वप्नवत वाटणारी घटना असली तरी मानवी इतिहासात हा अनुभव वेगळा होता, ज्यामुळे सामाजिक परिवर्तनाला आध्यात्मिक पैलू आणि विज्ञाननिष्ठ दृष्टिकोन हा मुख्य आधार होता. म्हणून भारत वर्षांमध्ये मोठाच लढा
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
33

श्रीवास्तव, अतुल कुमार. "शिक्षा-दर्शन एवं पाठ्यक्रम: श्री अरविन्द घोष एवं एनी बेसेण्ट के सन्दर्भ में". International Journal of Science and Social Science Research 1, № 4 (2024): 252–57. https://doi.org/10.5281/zenodo.15570077.

Full text
Abstract:
श्री अरविन्द के अनुसार शिक्षा केवल जानकारी का संप्रेषण नहीं है, बल्कि यह मानव की आत्मा, चरित्र और चेतना के विकास की प्रक्रिया है। वे शिक्षा को एक साधना मानते हैं जिसका उद्देश्य मनुष्य के भीतर छिपी दिव्यता को जाग्रत करना है। उनके विचारों में शिक्षा का मूल आधार चार तत्वों पर आधारित हैः विवेक (discernment), सदाचार (virtue), शुद्धता (purity), और सत्य के प्रति समर्पण।श्री अरविन्द के अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यावसायिक दक्षता नहीं बल्कि आत्मा और राष्ट्र की चेतना का निर्माण होना चाहिए। उन्होंने चरित्र निर्माण, आत्म-ज्ञान, सत्य की खोज, और मन, शरीर, हृदय और आत्मा के समन्वित विकास पर बल दिया।उनके
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
34

महेश, आमेटा. "पुरुषार्थों में धर्म का महत्त्व". Recent Researches in Social Sciences & Humanities (ISSN: 2348 – 3318) 9, № 2 (Apr.-May-June) (2022): 88–91. https://doi.org/10.5281/zenodo.6844296.

Full text
Abstract:
प्रकृति प्रवत्त शक्तियों का सामूहिक विकास और परिष्कार संस्कृति का मूलधार है। निरन्तर सत्य कहते हुए चिरन्तन सौन्दर्य और मानव प्रेम के मूल तत्त्वों को अनुप्रमाणित करते रहने से ही संस्कृति पुष्पित-पल्लवित होती है। सत्यं, षिवं, सुन्दररं की अभिलाषा एवं संरक्षण ही संस्कृति का प्राणतत्व है। अपने पुरूषार्थ पर विश्वास करके किसी भी सरल अथवा दुर्लभ बाधा को पार करने क उत्साह, ओजस्विता एवं महाप्राणता का मंत्र भारतीय संस्कृति ने दिया है। निष्क्रिय होकर बैठ जाना मृत्यु है, निरन्तर कर्म करते रहना ही जीवन है। भारतीय ऋषियों ने धर्म उसे कहा जो इहलोक से परलोक दोनों को सिद्ध कर देता है वही धर्म है और वही भारतीय सं
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
35

कृष्णप्रसाद Krishna Prasad सापकोटा Sapkota. "'कठपुतलीको मन’ कथामा विनिर्माणवाद [Deconstructionism in the story 'Puppet's Mind']". BMC Journal of Scientific Research 4, № 1 (2021): 99–105. http://dx.doi.org/10.3126/bmcjsr.v4i1.42273.

Full text
Abstract:
कठपुतलीको मन इन्द्रबहादुर राईको ।।।कठपुतलीको मन कथासब्ग्रहमा सब्कलित कथा हो । यस कथालाई ज्याक डेरिडाकाविनिर्माणवादका आधारमा विश्लेषण गरिएको छ । विनिर्माणवादमा रहने महŒवपूर्ण पक्षहरूमध्ये विधाभञ्जन, विधामिश्रण,द्विचरको विरोध, आलब्कारिकताको महŒव स्थापना, जग वा आधारलाई नमान्नु, लेखकलाई भन्दा पाठकलाई महŒव दिँदबहुपठन र बहुअर्थमा जोड, अन्तिम सत्य र आदर्शलाई नमान्नु, विशृब्खलित शृब्खलाजस्ता पक्षलाई आधार बनाएर कथाकाविश्लेषण गरिएको छ । “कठपुतलीको मन” कथामा यस्ता पक्षहरूको भूमिका महŒवपूर्ण रूपमा आएको विनिर्माणवादी प्रवृत्तिकादृष्टिकोणले कथा महŒवपूर्ण रहेको कुराको चर्चा यसमा गरिएको छ ।
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
36

प्रा., डॉ. शिवाजी सोमला पवार. "महात्मा गांधी यांचे सत्याग्रह विचार". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 417–26. https://doi.org/10.5281/zenodo.10130731.

Full text
Abstract:
21 व्या शतकात आपण पदार्पण केले आहोत. काळाच्या प्रवाहाबरोबर आपल्याला पुढे जायचे आहे, परंतु त्याचबरोबरच आपले पाऊल योग्य दिशेने पडत आहे याची पण काळजी घेणे आवश्यक आहे. आपल्या जीवनातील निष्ठा, ध्येये ही मूल्यांवर आधारित आहेत वा मूल्य विरहित आहेत याचा आपण शांतपणे विचार केला पाहिजे. मूल्यांवर दृढ निष्ठा बाळगणाऱ्या व साधनशुचितेला अन्य महत्व देणाऱ्या गांधीजीना आपण 'महात्मा' व 'राष्ट्रपिता' म्हणतो. भारतीय इतिहासात अनेक वंदनीय वा निंदणीय व्यक्ती होऊन गेल्या आहेत. परंतु एकाच व्यक्तीबद्दल पूज्य भावना व तेवढाच तिरस्कार असणारी व्यक्ती म्हणजे महात्मा गांधी एकीकडे सत्य, अहिंसा, प्रेम, सर्वधर्मसमभाव यांचा उपासक
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
37

प्रा., ज्योती उद्धवराव मामडगे. "महात्मा गांधी यांचे शैक्षणिक विचार". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 452–56. https://doi.org/10.5281/zenodo.10134161.

Full text
Abstract:
भारतीय स्वातंत्र्य लढ्यामध्ये महात्मा गांधी यांचे मोलाचे योगदान आहे. त्यांच्या अहिंसा तत्त्वामुळेच भारताला स्वातंत्र्य मिळाले. ब्रिटिशांच्या विरुद्ध दिलेला मानवी लढा हा भारतीय समाजाच्या बदलासाठी कारणीभूत ठरला. भारतीय राजकारणात गांधीजीचा अवतार झाला नसता तर लोकांनी शस्त्रास्त्रांचा वापर करून भारताला स्वातंत्र्य मिळविण्यासाठी बऱ्याचशा प्रमाणात हिंसेचा वापर देखील केला असता, परंतु गांधीजीच्या कार्याची प्रेरणा आणि आदर्श भारतीय तरुणांनी समोर ठेवून सत्य आणि अहिंसा या तत्त्वाच्या आधारे स्वातंत्र्याचा लढा चालू ठेवला. अहिंसेच्या मार्गानेच आपल्याला स्वातंत्र्य मिळवायचे, असे गांधीजीचे ठाम मत होते. त्यांनी
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
38

गंगा, शिवाजी यरोळकर. "स्वामी दयानंद सरस्वती के सामाजिक विचार". International Journal of Advance and Applied Research S6, № 7 (2025): 253–56. https://doi.org/10.5281/zenodo.14792631.

Full text
Abstract:
स्वामी दयानंद भारत के  एक महान शिक्षाविद, समाज सुधारक और धार्मिक एवं  सांस्कृतिक राष्ट्र‌वादी  थे। वे आर्य समाज के संस्थापक और सत्य के अन्वेषक थे। उन्होने हमारे  आत्म-सम्मान और प्रबल मानसिक जागरण के लिए महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त  अनेक सामाजिक बुराइयों तथा अनेक कुप्रथाओं को साहसपूर्वक मिटाने का प्रयास किया। साथ ही दयानंद जी ने शिक्षा और धर्म के क्षेत्र में क्रान्ति स्थापित की।
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
39

प्रा., डॉ. सूर्यकांत सावंत. "महात्मा गांधी आणि अहिंसा". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 05 (2023): 85–87. https://doi.org/10.5281/zenodo.10072547.

Full text
Abstract:
अहिंसेच्या मार्गाने एखाद्या देशाला स्वातंत्र्य मिळविता येऊ शकते. अशी कल्पना जगात कोणालाही नव्हती. परंतु महात्मा गांधीजींनी ती प्रत्यक्षात उतरवली. आज संपूर्ण जगात 2 ऑक्टोबर हा महात्मा गांधीजींचा जन्मदिवस 'जागतिक अहिंसा दिवस' म्हणून साजरा केला जातो. दक्षिण आफ्रिकेमध्ये नेल्सन मंडेला यांच्याद्वारे वर्णविरोधी आंदोलनाच्या यशस्वीतेसाठी गांधीचे अहिंसाविषयक विचारच कारणीभूत ठरले. अमेरिकेचे माजी राष्ट्राध्यक्ष बराक ओबामा यांनी महात्मा गांधीजींना आपले प्रेरणास्रोत मानले. आज जगातील अनेक समस्यांची सोडवणूक गांधींचे अहिंसाविषयक विचार आणि तत्त्वज्ञान सोडवू शकते यात शंका नाही.मानवाचे क्रोध आणि असहिष्
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
40

KUMAR, LAVLESH. "संत कवियों के काव्य में समभाव". Vaak sudha 9, № 34 (2022): 126–30. https://doi.org/10.5281/zenodo.15462949.

Full text
Abstract:
संत कवियों के काव्य में समभाव लवलेश कुमार   संस्कृत भाषा में संत शब्द का अर्थ है- महात्मा। सरकत भाषा में संत शब्द का है महात्मा। अर्थ है- साधु, संन्यासी, विरक्त या त्यागी पुरुष, सज्जन, महात्मा आदि। संत शब्द को लेकर विभिन्न विद्वानों ने अपने विचार प्रकट किया है। पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल के मतानुसार संत शब्द की व्युत्पत्ति दो प्रकार से मानी जाती है। "यह संस्कृत भाषा के संत शब्द का बहुवचन हो सकता है। जिसका हिन्दी में प्रयोग हुआ है अथवा शांत शब्द का अपभ्रंश रूप हो सकता है, जैसा पालि भाषा में होता है। पहली व्युत्पत्ति के अनुसार संत शब्द का अर्थ हुआ जो सत्य है अर्थात् जिसे सत्य की अनुभूति हो चुकी
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
41

डॉ., रावसाहेब पिराजी इंगळे, та विजय नागोराव भोपाळे डॉ. "गांधीवाद: एक शास्वत विकासाची प्रेरणा". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 663–66. https://doi.org/10.5281/zenodo.10279087.

Full text
Abstract:
महात्मा, बापू, राष्ट्रपिता या संबोधनाने महात्मा गांधी यांना आज जगभर ओळखले जाते. सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह इत्यादी नैतिक मूल्यांच्या आधारावरच महात्मा गांधी यांनी भारताला ब्रिटिशांच्या गुलामगिरीतून मुक्त केले. गांधी यांनी धर्म, अर्थकारण, राजकारण अथवा एकूण जीवनाचे जे तत्त्वज्ञान मांडले, त्यात त्यांनी अर्थशास्त्र आणि नीतीशास्त्र यांना एकत्रित केले आहे. गांधी असे म्हणतात की, आर्थिक जीवनावर नीतीशास्त्राचा प्रभाव नसेल तर भौतिकवादाच्या अतिरेकामुळे राष्ट्रीय कल्याण साधता येणार नाही. असे प्रभावी विचार महात्मा गांधी यांनी मांडले. त्यांचे विचार चिरंतन, शास्वत असेच आहेत, असे म्हणता येईल.
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
42

कोईराला Koirala, लक्ष्मी laxmi विलास Bilas. "नेपालको राष्ट्रियता, अखण्डता र राष्ट्रिय एकता Nepalko Rashtriyata, Akhandata". Unity Journal 1 (2 лютого 2020): 220–26. http://dx.doi.org/10.3126/unityj.v1i0.36082.

Full text
Abstract:
“नेपाली हामी रहौला, कहा नेपालै नरहे, उचाइ हाम्रो चुलिन्छ, कहा हिमालै नरहे” राष्ट्रकवि माधव घिमिरेकोमर्मस्पर्शी राष्ट्रभावयुक्त गीतले राष्ट्र राज्य, राष्ट्रियता,राष्ट्रिय एकता र भौगोलिक अखण्डता देश र जनताकोराष्ट्रिय अस्तित्वस“ग गा“सिएको सत्य प्रस्ट गरेको छ । यी सबैको छुट्टाछुट्टै अर्थ र परिभाषा भए पनि यीएकआपसमा घनीभूत रुपमा जोडिएका हुन्छन् । एउटाले अर्कोलाई सवल र एउटामाथिको आपतले सबैलाईप्रभावित बनाइरहेको हुन्छ । राष्ट्रराज्यको निर्माण तथा राष्ट्रियता, राष्ट्रिय एकता र भौगोलिक अखण्डताकोमहवानुभूतिले मात्र राष्ट्रिय अस्तित्व जीवन्त रहन्छ । यसकारण लेखलाई राष्ट्र राज्य, राष्ट्रियता, राष्ट्रियएकता, भ
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
43

सरिता, कुमारी. "वीरेंद्र जैन की कहानियों में यथार्थ-बोध". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 7 (2023): 126–28. https://doi.org/10.5281/zenodo.7714734.

Full text
Abstract:
&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &lsquo;<strong>यथार्थबोध</strong>&rsquo; शब्द दो शब्द, यथार्थ और बोध के संयोग से बना है जिसका अर्थ है वास्तविकता का ज्ञान कराना, सत्य से परिचित कराना। यह जीवन की सच्ची अनुभूति है,जिसमें हम अपने जीवन में घटित होने वाले सुख-दुःख और अन्य भावनाओं का अनुभव करते हैं। अपनी इंद्रिय के माध्यम से समाज में होने वाली गतिविधियों का अनुभव करना ही यथार्थ है। इस बोध में हम स्वंय को <strong><em>मधुमती की भूमिका</em></strong> के&nbsp; साँचे में ढलकर समाज में घटित होने वाली घटनाओं का सम्यक आकलन करते हैं। यथार्थ वह है जो भौतिक पदार्थो का वास्तविक&nbsp; रूप दिखाता है। यथार्थ का
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
44

सरिता, कुमारी. "वीरेंद्र जैन की कहानियों में यथार्थ-बोध". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 7 (2023): 131–33. https://doi.org/10.5281/zenodo.7735821.

Full text
Abstract:
&lsquo;<strong>यथार्थबोध</strong>&rsquo; शब्द दो शब्द, यथार्थ और बोध के संयोग से बना है जिसका अर्थ है वास्तविकता का ज्ञान कराना, सत्य से परिचित कराना। यह जीवन की सच्ची अनुभूति है,जिसमें हम अपने जीवन में घटित होने वाले सुख-दुःख और अन्य भावनाओं का अनुभव करते हैं। अपनी इंद्रिय के माध्यम से समाज में होने वाली गतिविधियों का अनुभव करना ही यथार्थ है। इस बोध में हम स्वंय को <strong><em>मधुमती की भूमिका</em></strong> के&nbsp; साँचे में ढलकर समाज में घटित होने वाली घटनाओं का सम्यक आकलन करते हैं। यथार्थ वह है जो भौतिक पदार्थो का वास्तविक&nbsp; रूप दिखाता है। यथार्थ का कोशगत अर्थ सत्य, प्रकृत, ऊचित आदि है
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
45

प्रा., डॉ. देशमुख गंगाधर बालाजीराव. "महात्मा गांधीजीची सत्याग्रहाची भूमिका आणि तंत्र". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 600–606. https://doi.org/10.5281/zenodo.10258939.

Full text
Abstract:
महात्मा गांधी यांच्या विचारातून तयार झालेला अभिनव प्रयोग म्हणजे सत्याग्रह होय. सत्याग्रह या तंत्राची उपयुक्तता&nbsp;आणि फायदे समजुन&nbsp;त्यानुसार अनुकरण करणे ही काळाची गरज आहे .महात्मा गांधी यांनी अन्यायी&nbsp;ब्रिटिश शासन व्यवस्थेविरुद्ध सत्याग्रहाच्या माध्यमातून आपले हक्क, अधिकार, आणि राजकीय स्वतंत्र मिळवण्यासाठी केलेला प्रयत्न हा सामान्य&nbsp;जनमानसात रुजत गेला. सत्याग्रह या तंत्रामध्ये गांधीजींनी अहिंसात्मक पद्धतीने विना शस्त्र वापरता युद्ध जिंकण्याची कला किंवा मार्ग सत्याग्रहाच्या अभिनव तंत्रातून कसे साध्य करता येते. या बाबी ब्रिटिशाविरुद्ध विविध चळवळीत&nbsp;सत्याग्रहाचा केलेला&nbsp;वापर
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
46

बहादुरे, मोनाली यशवंत. "गांधीजींच्या स्वप्नातील भारत". Journal of Research & Development 17, № 3 (2025): 154–56. https://doi.org/10.5281/zenodo.15294733.

Full text
Abstract:
<strong><em>गोषवारा:</em></strong> <em>मोहन ते महात्मा बनण्याच्या यशस्वी प्रवास करणारे मोहनदास करमचंद गांधी आपल्या सर्व जनसामान्यना परिचित. आश्चर्य असे की, सात दशके लोटली तरी. गांधी आणि त्यांचे विचार अजुनही जिवंत असल्याचे जाणवते. तसेच गांधींचे विचारचं 'जिवंत आहेत' असे नाही तर त्या विचारांचा जगभर प्रचार व प्रसार होतांना दृष्टीस येते. महात्मा गांधी यांनी सत्य, अहिंसा व शांततेच्या मार्गाचा वापर करून सर्व सामान्य जनतेला एकत्र जोडून जनतेमध्ये राष्ट्रभावना व एकात्मतेची भावना निर्माण करण्यास सहकार्य केले. महात्मा गांधींना केवळ राष्ट्रपिता म्हणून चालणार नाही तर गांधीजींचे जीवनमूल्ये समजून ती आचरणात आण
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
47

Sharma, Sudha. "‘मृत्युपछिको अभिव्यञ्जन’ कवितामा बन्धन र मोक्षचिन्तन". Prajnik Bimarsha प्राज्ञिक विमर्श 7, № 13 (2025): 118–25. https://doi.org/10.3126/pb.v7i13.77734.

Full text
Abstract:
प्रस्तुत आलेख बालकृष्ण समद्वारा रचित ‘मृत्यपछिको अभिव्यञ्जन’ कवितामा बन्धन र मोक्षचिन्तन विश्लेषणमा केन्द्रित रहेको छ । यो लेखमा विवेच्य कविता प्रयुक्त कथ्य र कविका चिन्तनको विश्लेषण गर्नु सान्दर्भिक रहेको देखिन्छ । यो मूलतः गुणात्मक प्रकृतिको अनुसन्धानमा आधारित रहेको छ । प्रस्तुत लेख मुख्यतया पुस्तकालयीय अध्ययनबाट सामग्री सङ्कलन गरिएको छ । यहाँ पूर्वीय दर्शनले प्रतिपादन गरेका सिद्धान्त अन्तर्गतको दार्शनिक मान्यताका रूपमा बन्धन र मोक्षचिन्तनजस्ता योगदर्शन र वेदान्तदर्शनका मुख्य प्रतिपाद्य विषय अभिव्यञ्जित रहेका छन् । यहाँ बन्धन र मोक्षचिन्तनका आधारमा रहेर कविताभित्र रहेको बन्धन र मोक्षसम्बन्धी
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
48

प्रा., डॉ. जितेंद्र पांडुरंगराव काळे. "महात्मा गांधीजींचे आर्थिक आणि शैक्षणिक विचार". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 469–72. https://doi.org/10.5281/zenodo.10135288.

Full text
Abstract:
राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी हे मानवतेचे थोर उपासक होते. गांधींचा जन्म 02 ऑक्टोंबर 1869 रोजी गुजरात येथील पोरबंदर येथे झाला. महात्मा गांधीजींच्या जीवनावर टॉलस्टॉय, रस्कीन व थोरो या विचारवंतांचा प्रभाव पडला होता. रस्कीन यांच्या 'Unto this last' या ग्रंथावरुन गांधीजींनी 'सर्वोदय' हा ग्रंथ लिहिला. सर्वोदय या कल्पनेत गांधीजींना सर्वांचाच उदय अभिप्रेत आहे. टॉलस्टॉय यांच्या 'Kingdom of god within you' या ग्रंथामुळे ते अहिंसेचे पुजारी व सत्याचे उपासक बनले होते. भारत देशामध्ये 1920 ते 1948 हा काळ 'गांधी युग' म्हणून ओळखला जातो.&nbsp;म.गांधीजींनी 1914 पासून भारतात लोकजागृतीचे कार्य हाती घेतले. त्यां
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
49

अंजली, कमलाकर स्वामी. "महात्मा गांधी यांचे शिक्षण व्यवसाय विषयीचे विचार". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 04 (2023): 941–45. https://doi.org/10.5281/zenodo.10284335.

Full text
Abstract:
भारतात सर्वात प्रभावशाली महापुरुषात महात्मा गांधीजींचे नाव वरच्या दर्जाचे आहे. त्यांना राष्ट्रपिता म्हणून संबोधले जाते. भारत पारतंत्र्यात रखडला असता त्याला स्वतंत्र करण्याचा सर्वप्रथम महात्मा गांधींनी विडा उचलला. यासाठी अहिंसक मार्गाचा त्यांनी अवलंब केला. भारतीय जनतेत प्रथम आत्मविश्वास निर्माण केला, सत्य, अहिंसा, साधी राहणी उच्च विचार सरणी व साधन सूचिता या महान तत्वांचा अवलंब करून आपल्या विशिष्ट तंत्र मंत्राने ब्रिटिश साम्राज्यशाहीला हादरा देणारे भारताच्या स्वातंत्र्यलढ्यातील अग्रगण्य सेनानी, परिश्रम व स्वावलंबनाच्या पायावर भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था द्वारा स्वराज्यातून सुराज्याचे स्वप्न पाहण
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
50

तिवारी, गायत्री. "वेदों में वैज्ञानिक संचेतना". HARIDRA 1, № 01 (2021): 53–58. http://dx.doi.org/10.54903/haridra.v1i01.7811.

Full text
Abstract:
ज्ञानार्थक 'विद्' धातु से निश्पन्न 'वेद' शब्द का अर्थ ज्ञान है। यह ज्ञान समस्त आध्यात्मिक और लौकिक ज्ञान के स्रोत या आधार के रूप में है। इसे ईश्वरीय ज्ञान कहे या प्राचीनतम ऋषियों के द्वारा अपनी प्रतिभा से प्राप्त सत्य ज्ञान कहा जा सकता था। वैयाकरण लोग वेद शब्द का निर्वचन भाव अर्थ में ज्ञान या जानना' नहीं करके करण अर्थ में ज्ञान का साधन' करते हैं। विद्यते ज्ञायतेऽनेनेति वेदः जिसके द्वारा कोई ज्ञान प्राप्त किया जाय वही वेद है। वेद परम-प्रमाण अर्थात् आगम या भाब्द प्रमाण में उत्कृश्ट है। वेद से वह ज्ञान मिलता है जिसे प्राप्त करने के लिए अन्य कोई साधन इस जगत् में नहीं है।
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
We offer discounts on all premium plans for authors whose works are included in thematic literature selections. Contact us to get a unique promo code!