To see the other types of publications on this topic, follow the link: संरक्षक.

Journal articles on the topic 'संरक्षक'

Create a spot-on reference in APA, MLA, Chicago, Harvard, and other styles

Select a source type:

Consult the top 50 journal articles for your research on the topic 'संरक्षक.'

Next to every source in the list of references, there is an 'Add to bibliography' button. Press on it, and we will generate automatically the bibliographic reference to the chosen work in the citation style you need: APA, MLA, Harvard, Chicago, Vancouver, etc.

You can also download the full text of the academic publication as pdf and read online its abstract whenever available in the metadata.

Browse journal articles on a wide variety of disciplines and organise your bibliography correctly.

1

पांचाळ, नारायण हणमंतराव. "आकाशगंगाचे संरक्षक: ओझोन अशी मोजणारी आणि त्याच्या परिणामांची समज". 'Journal of Research & Development' 15, № 16 (2023): 181–86. https://doi.org/10.5281/zenodo.8362701.

Full text
Abstract:
<strong>संक्षिप्त</strong> ओझोन अशी मोजणारी ही पृथ्वीच्या स्त्रातोस्फेरमधील संरक्षक ओझोन परताची धीरगीर अळीव होणे आहे, प्रमुखपणे क्लोरोफ्लुओरोकार्बन (सीएफसी) आणि हॅलॉन्स इत्यादी मानवनिर्मित रसायनांच्या मुक्तपणाच्या कारणांमुळे. ही मोजणारी आपल्या आणि दुष्ट अल्ट्राव्हायलेट (यूव्ही) किरणाच्या पृथ्वीच्या परतवर्ती तळाशी वाढते. ओझोन अशी मोजणारीच्या परिणाम सुत्रधार आहेत आणि त्यामध्ये आरोग्यावरील परिणाम, पारिस्थितिकी विघटने आणि सामग्रीची क्षयस्थिती समाविष्ट आहे. उच्च यूव्ही किरणे माणसांमध्ये त्वचा कॅन्सर, मोत्यांच्या वातांच्या अशा आरोग्यिक परिणामांची वाढी देतात. जीवोपयोगी प्रणाली, विशेषतः जलीय प्रणाली,
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
2

प्रहलाद-सिंह, "अहलूवालिया". "वैश्विक परिदृश्य में पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं का योगदान". Siddhanta's International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities 1, № 6 (2024): 107–23. https://doi.org/10.5281/zenodo.13291451.

Full text
Abstract:
महिलाएं दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, अक्सर वे प्राकृतिक संसाधनों की प्राथमिक संरक्षक और स्थिरता की चैंपियन के रूप में कार्य करती हैं। उनका योगदान जमीनी स्तर की सक्रियता और सामुदायिक नेतृत्व से लेकर नीति-निर्माण और वैज्ञानिक अनुसंधान में प्रभावशाली भूमिकाओं तक है। यह पत्र उन बहुमुखी तरीकों की पड़ताल करता है जिनसे महिलाएं पर्यावरण संरक्षण में योगदान देती हैं, विविध क्षेत्रों के केस स्टडीज पर प्रकाश डालती हैं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों की जांच करती हैं। यह पर्यावरण नीतियों और पहलों में लिंग-समावेशी दृष्टिकोण के महत्व को भी रेखांकित करता है। महिलाओं के प्र
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
3

सिंह, सुमन लता. "मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के अनन्य सखा: वानरराज सुग्रीव". SCHOLARLY RESEARCH JOURNAL FOR INTERDISCIPLINARY STUDIES 9, № 67 (2021): 15701–7. http://dx.doi.org/10.21922/srjis.v9i67.8218.

Full text
Abstract:
आदि कवि वाल्मीकि रचित ‘रामायण’ श्री रामचरित पर आधारित विश्व का प्रथम महाकाव्य है। त्रैलोक्य पीड़क रावण के संरक्षण में पल्लवित फलित राक्षसी वृत्तियों का समूल नाशकर मानवीय मूल्यों की स्थापना, लोकरञ्जक श्री राम व्रत धारण कर चुके राघवेन्द्र, सानुज लक्ष्मण सहित श्रीराम का समुद्र से चतुर्दिक घिरी लंकानगरी पर आक्रमण का तात्कालिक कारण रावण द्वारा महादेवी सीता का हरण था। बिना वानरराज सुग्रीव की सहायता के न तो सीता-अनुसंधान सम्भव था, न ही समुद्र पर सेतु बाँध वानरों की विशाल सहित रावण की पूरी तरह सुरक्षित लंकापुरी पर आक्रमण ही। मानवीय मूल्यों के संरक्षक तथा सम्वाहक श्री राम ने रावणोन्मूलन में वानरराज के स
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
4

देवकोटा, गोकर्ण. "गैँडा संरक्षणका लागि सुरक्षा प्रबन्धः चुनौती र अवसर". Unity Journal 5, № 1 (2024): 367–78. http://dx.doi.org/10.3126/unityj.v5i1.63214.

Full text
Abstract:
गैँडा लगायत दुर्लभ वन्यजन्तुको संरक्षणका लागि वि.सं. २०३० मा चितवन राष्ट्रिय निकुञ्जको स्थापना भएपछि संरक्षण सुरक्षामा वि.सं. २०३२ सालबाट खटिरहेका नेपाली सेनाका हाल १५ वटा युनिट, १ शिक्षालय र निर्देशनालयका गरी ८१३६ कुल फौजहरू रहेका छन् । नेपाल सरकारको ब्यावहारिक संरक्षण नीति र नेपाली सेनाको उचित सुरक्षा प्रबन्धका कारण सन् १९६० को दशकमा करिब १०० को हाराहारीमा पुगेको गैँडाको संख्या सन् २०२१ मा ७५२ पुगेको छ । गैँडाको दैनिकी, जीवनचक्र र आनिबानी अत्यन्त संवेदनशील भएको र चोरी शिकार नियन्त्रण तथा अनुकूल वासस्थान गैंडा संरक्षणको पहिलो खुड्किलो भएकाले अनुकुल बासस्थानको उपलब्धता, पर्याप्त पानी तथा घाँसे
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
5

Kumar, Sanjaya. "Origin and Development of Hindi Dalit Literature." RESEARCH REVIEW International Journal of Multidisciplinary 9, no. 5 (2024): 306–8. http://dx.doi.org/10.31305/rrijm.2024.v09.n05.037.

Full text
Abstract:
Literature is not only a mirror of the society but also a motivator of change and reform. It presents social problems before the people and also suggests ways to solve them. Apart from the real and beautiful form of the society, it also describes its distorted anomaly and inequality with neutrality. Dalit literature is neither a protector of the caste system nor a supporter of hedonism; its main objective is to establish an egalitarian society. Abstract in Hindi Language: साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं अपितु परिवर्तन और सुधारक का प्रेरक भी है। यह सामाजिक समस्याओं को लोगों के सामने प्रस्तुत करने
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
6

मौ0, शुऐव, та त्यागी सुकृति. "भारत में डाटा संरक्षण सम्बन्धी विधियाँः एक विधिक विश्लेषण". RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES 12, № 1 (2025): 83–86. https://doi.org/10.5281/zenodo.15289364.

Full text
Abstract:
जब विज्ञान और प्रौद्योगिकी में तेजी से विकास और उन्नति होने लगी तो सभी देषों को सम्बन्धित कानून बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम ऐसे कानूनों में से एक है। यह व्यक्ति के निजता के अधिकार की संरक्षता हेतु लाया गया। निजता के अधिकार में व्यक्ति के व्यक्तिगत डाटा का संरक्षण का अधिकार भी शामिल हैं। व्यक्ति की डाटा सुरक्षा वर्तमान में महत्वपूर्ण चिंता का विषय बना हुआ है। डाटा सुरक्षातन्त्र डाटा के अनाधिकृत पहुंच तथा दुर्भावनापूर्ण लोगों से बचाने की बात करता है। भारतीय संविधान अन्य संविधानों के मुकाबले कर्तव्यों से ज्यादा मूलाधिकार की बात करता है। संविधान के अनुच्छेद 19, 21,
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
7

Gadhavi, Manaliben H. "प्राचीन भारत में महिला उद्यमिता : एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य". Journal of Research & Development 17, № 4 (2025): 173–75. https://doi.org/10.5281/zenodo.15553283.

Full text
Abstract:
<strong><em>Abstract:</em></strong> <em>प्राचीन भारत में इस घटना की जड़ों का पता लगाना आवश्यक है। लोकप्रिय धारणा के विपरीत, प्राचीन भारत में महिलाएँ केवल घरेलू कामों तक ही सीमित नहीं थीं, उन्होंने व्यापार, शिल्प और व्यवसाय सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। यह लेख प्राचीन भारत में महिला उद्यमिता के इतिहास पर प्रकाश डालता है, उनके योगदान, चुनौतियों और सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश डालता है, जो ऐतिहासिक ग्रंथों और विद्वानों के शोध के संदर्भों द्वारा समर्थित है। </em>
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
8

त्रिपाठी Tripathi, गीता थपलिया Geeta Thapaliya. "संरक्षण कविता यात्रा (२०५३) मा पर्यावरण [Environment in Conservation Poetry Journey (2053)]". SIRJANĀ – A Journal on Arts and Art Education 7, № 1 (2021): 75–83. http://dx.doi.org/10.3126/sirjana.v7i1.39885.

Full text
Abstract:
‘संरक्षण कविता यात्रा (२०५३)’ सङ्ग्रहभित्र दस जना कविहरू हरिदेवी कोइराला, जे. अस्मिता, भूपिन व्याकुल, धनप्रसाद तामाङ, नवराज अधिकारी, सरस्वती श्रेष्ठ ‘सरू’, सुकुम शर्मा, रमेश श्रेष्ठ, पुष्प आचार्य तथा सरूभक्तका कविताहरू सङ्कलित छन् । यसभित्र पाँच जना स्थानीय सहभागीका प्रकृतिमुखी लयात्मक सिर्जनालाई पनि समावेश गरिएको छ । प्रकृति संरक्षणको मुख्य ध्येय बनाएरआरम्भ गरिएको यस अभियानका मुख्य परिकल्पनाकार कवि सरूभक्त हुन् । प्रस्तुत अध्ययन संरक्षणकविता यात्रा (२०५३) का कवितामा प्रयुक्त पर्यावरणीय चेतनाको खोजीसँग सम्बद्ध रहेको छ । यसकानिम्ति संरक्षण कविता यात्रा (२०५३) मा सङ्कलित कविताहरूबाट प्रतिनिधि सा
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
9

गौतम Gautam, बद्रीनारायण Badri Narayan. "बहुआयामिक व्यक्तित्व तुलसीराम वैद्य". HISAN: Journal of History Association of Nepal 10, № 1 (2024): 158–73. https://doi.org/10.3126/hisan.v10i1.74917.

Full text
Abstract:
काठमाडौँको सम्भ्रान्त भारदारी परिवारमा जन्मिएर शिक्षादिक्षाको उचित अवसर पाई आकर्षक प्रशासनिक पदमा जान ठिक्क परेका बेला पिताको वचन र मार्गदर्शनलाई शिरोधार्य गरी धेरैको रोजाइमा नपर्ने प्राध्यापन पेशामा प्रवेश गरेका तुलसीराम वैद्य आफ्नो मेहनत र कर्मबाट गुरुहरूका गुरु भन्दै स्मरण गरिने व्यक्तित्व बन्न सफल भएका व्यक्ति हुन् । आफ्ना कर्महरूले गर्दा नेपालका प्रख्यात इतिहासकार, ऐतिहासिक अध्ययन अनुसन्धानलाई अन्वेषणात्मक दृष्टिकोणबाट अगाडि बढाएर राष्ट्रिय इतिहास निर्माणको आधार तयार पार्न लागि पर्ने प्राज्ञ, आफ्ना घरायसी विषयवस्तु आवश्यकतालाई भन्दा शोधार्थी एवं ज्ञानात्मक भोक लिएर आउनेहरूलाई प्राथमिकता द
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
10

आशा, सक्सेना स. ुनीता चैहान. "ज ैव विविधता और उसका संस्थितिक एवं असंस्थितिक स ंरक्षण". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.838910.

Full text
Abstract:
सामान्य शब्दों में जैव विविधता से तात्पर्य सजीवों (वनस्पति और प्राणी) म ें पाए जान े वाले जातीय भेद से ह ै। व्हेल मछली से लेकर सूक्ष्मदर्षी जीवाणु तक मन ुष्य से लेकर फफंूद तक ज ैव विविधता का विस्तार पाया जाता है। पर्या वरणीय ह्रास क े कारण जैव विविधता का क्षय हुआ है। मानव के अनियंत्रित क्रियाकलापा ें, बिजली, लालच और राजनीतिक कारणांे से जैव विविधता का विनाष बहुत त ेजी स े हो रहा ह ै। लगातार बढ ़ती जनसंख्याा, नगरीय क्ष ेत्रों की वृद्धि बाॅधों, भवनो ं तथा सड ़कांे का निर्मा ण, कृषि के लिए वना ें का कटाव, खदाना ें की खुदाई आदि ए ेसे कुछ उदाहरण है जिनसे प ्राक ृतिक संसाधनों में कमी आई है। जैव विविध
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
11

भास्कर, कृष्ण कुमार, та शिव बहादुर तिवारी. "पानी का अधिकार एवं संकट (चुनौतियां एवं समाधान) एक समग्र अध्ययन". Humanities and Development 19, № 03 (2024): 4–9. https://doi.org/10.61410/had.v19i3.195.

Full text
Abstract:
संपूर्ण मानव सभ्यता के विकास में मानव जीवन भोजन एवं जल पर केंद्रित व निर्भर रहा है वर्तमान में संपूर्ण विश्व स्तर पर एक योजना जिसका नाम सतत विकास (ैनेजंपदंइसम क्मअमसवचउमदज) है संचालित है जिसके अंतर्गत प्राकृतिक संसाधनों में सम्मिलित खनिजों को संरक्षित कर अपनी अगली पीढ़ी के लिए संरक्षित करना व स्वयं उपयोग करना, मुख्य उद्देश्य के रूप में वर्णित है जिसमें भारतवर्ष भी एक प्रतिभागी के रूप में सम्मिलित है। ऐसे में जल जोकि इसकी मुख्यधारा में शामिल है का संरक्षण एवं संवर्धन मानव अधिकार से संबंधित विषय के रूप में अध्ययन के लिए अनिवार्य हो जाता है इस लेख का उद्देश्य जल के अधिकार व उससे संबंधित संकट, चुनौ
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
12

डॉ., विकास सिन्हा. "भारतीय सांस्कृतिक विरासत: विविधता, मौलिकता और संरक्षण". International Journal of Arts, Social Sciences and Humanities 01, № 03 (2023): 32–39. https://doi.org/10.5281/zenodo.10365948.

Full text
Abstract:
"भारतीय सांस्कृतिक विरासत, जो समृद्ध और विविधतापूर्ण है, विश्व के लिए एक महत्त्वपूर्ण संपत्ति का संज्ञान कराती है। इस निबंध में, हम भारतीय सांस्कृतिक विरासत के विविध आयामों को विशेष रूप से देखेंगे, जैसे कि इसकी विभिन्नता, मौलिकता, और संरक्षण के माध्यम से इसका महत्त्व और महत्त्वाकांक्षा।हम इस निबंध में भारतीय संस्कृति के विविध पहलुओं को अन्वेषण करेंगे और उसके मौलिक तत्त्वों को समझेंगे, जैसे कि भाषा, साहित्य, कला, संगीत, धर्म, और समाज। इसके साथ ही, हम इसे संरक्षित करने और संरक्षित रखने के लिए उपायों और कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।इस शोध-निबंध में हम भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति हमा
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
13

Gupta, Dr Rajni. "Depiction of women in the traditional and changing dimension of Indian culture (भारतीय संस्कृति के परम्परागत एवं परिवर्तनशील आयाम में महिलाओं का चित्रण)". International Journal of Multidisciplinary Research Configuration 1, № 4 (2021): 45–47. http://dx.doi.org/10.52984/ijomrc1407.

Full text
Abstract:
भारत संस्कृति में नारी को बहुत ही उत्तम स्थान प्राप्त है जबकि अन्य देशों में नारी को केवल भोग विलास की वस्तु समझा जाता है। “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता” अर्थात् जहाँ नारी की पूजा की जाती है वहाँ देवता निवास करते है। भारतीय संस्कृति में प्राचीनकाल से लेकर आधुनिक काल तक महिलाओं की स्थिति परिवर्तनशील रही है। संसार की ईश्वरीय शक्ति दुर्गा, लक्ष्मी व सरस्वती आदि नारी शक्ति, धन, व ज्ञान का प्रतीक मानी जाती है। वैदिक काल भारतीय नारी के लिए स्वर्णिम काल था। ऐतिहासिक पात्रों में भी उसे वीरागंना के रूप में प्रस्तुत किया है। भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति समय और काल के अनुसार बदलती रही है
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
14

पनेरु Paneru, तारादत्त Taradatta. "नेपालमा संविधानवादको कार्यान्वयन". Pragyaratna प्रज्ञारत्न 5, № 1 (2023): 315–22. http://dx.doi.org/10.3126/pragyaratna.v5i1.59706.

Full text
Abstract:
नेपालको संविधानले जनताको अधिकार प्रत्याभूति गर्नुका साथै सरकार र जनताबीचको सन्तुलन कायम राख्ने गरेको पाइन्छ । नेपालको राजनीतिक इतिहासमा धेरै संविधानको निर्माण भए तथापि तिनमा संविधानवादको प्रभाव भने लामो समय रहनसकेन । राज्यप्रणालीमा आएको परिवर्तनको कारण र पटकपटकको व्यवस्था परिवर्तन भएसँगै संविधानवादको कार्यान्वयनमा राजनैतिक दलको स्वार्थगत भावना र सरकार तथा शासनमा बसेका मानिसहरुको आफू अनुकुलको व्याख्याका कारण संविधानवाद ओझेलमा पर्यो । त्यो सँगै कानूनी शासनका संरक्षक, बुद्धिजिवी, कानूनका जानकार समेतले दलीय भागबण्डामा आफ्नो अस्तित्व बनाउँदै जानु र सैद्धान्तिक विषयलाई मात्रै बहसको विषय बनाएर जाँदा
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
15

कुमार, नवीन, та सन्तोष कुमार सिंह. "जनजातियों पर वैश्वीकरण के प्रभाव का समाजशास्त्रीय अध्ययन". Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 21, № 5 (2024): 263–70. http://dx.doi.org/10.29070/ywvbsm94.

Full text
Abstract:
यह शोध पत्र भारत की जनजातियों पर वैश्वीकरण के सामाजिक प्रभावों का समाजशास्त्रीय अध्ययन प्रस्तुत करता है। वैश्वीकरण ने जहां आर्थिक विकास और आधुनिक सुविधाओं तक पहुँच को सुलभ बनाया है, वहीं इसके परिणामस्वरूप जनजातीय पहचान और पारंपरिक प्रथाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं। इस अध्ययन में गुणात्मक और मात्रात्मक विश्लेषण के संयोजन से जनजातीय आजीविका, प्रवासन पैटर्न, शिक्षा, और स्वास्थ्य देखभाल में आए परिवर्तनों का विश्लेषण किया गया है। निष्कर्षों से यह स्पष्ट होता है कि वैश्वीकरण के लाभों और जनजातीय धरोहर के ह्रास के बीच एक जटिल संबंध है, जिससे यह आवश्यक हो जाता है कि विकास की ऐ
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
16

शाह Shah, हरिजङ्ग Harijung, та हर्कबहादुर Harka Bahadur शाही Shahi. "मगरभाषी विद्यार्थीको भाषिक अपसरण {Linguistic drift of Magar-speaking students}". Mangal Research Journal 5, № 01 (2024): 127–42. https://doi.org/10.3126/mrj.v5i01.73533.

Full text
Abstract:
प्रस्तुत अध्ययन मगरभाषी विद्यार्थीको भाषिक अपसरणसँग सम्बन्धित छ । आंशिक रूपमा केही परिमाणात्मक तथ्याङ्क भए तापनि यस अध्ययनको ढाँचा गुणात्मक रहेको छ । क्षेत्रीय अध्ययन विधिमा आधारित प्रस्तुत अध्ययनको तथ्याङ्क सङ्कलन अन्तर्वार्ता र समूह छलफलबाट गरिएको छ भने केही आवश्यक तथ्याङ्क पुस्तकालय कार्यबाट समेत सङ्कलन गरिएको छ । कर्णाली प्रदेशका विभिन्न जिल्लाबाट मध्यपश्चिम विश्वविद्यालयमा अध्ययनरत मगरभाषी विद्यार्थीलाई सम्भावनारहित नमुना छनोटअन्तर्गत सुविधाजनक नमुना छनोट विधिको उपयोग गरी ३० जना विद्यार्थीको नमुना छनोट गरिएको छ । सङ्कलन गरिएका सामग्रीलाई अध्ययनको उद्देश्य अनुसार विभिन्न शीर्षक–उपशीर्षकहरू
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
17

ओली Oli, लाल बहादुर Lal Bahadur. "नेपालमा जैविक विविधताः वर्तमान स्थिति, खतरा र संरक्षण {Biodiversity in Nepal: Current Status, Threats and Conservation}". Cognition 6, № 1 (2024): 244–58. http://dx.doi.org/10.3126/cognition.v6i1.64477.

Full text
Abstract:
प्रस्तुत लेखमा नेपालमा जैविक विविधताको स्थिति,जैविक विविधताका खतराहरु र जैविक विविधता संरक्षणको बाटो बारेमा व्याख्या र विश्लेषण गरिएको छ । यस अध्ययनमा द्वितिय स्रोतहरूबाट प्राप्त तथ्याङ्कहरू र सूचनालाइ तालिकिकरण र बर्गीकरण गरि वर्णनात्मक विधिबाट विश्लेषण र व्याख्या गर्ने प्रयास गरिएको छ । यस अध्ययनको निष्कर्षले के देखाउँछ भने नेपाल विश्वकै सानो मुलुक भएता पनि जैविक विविधतामा नेपाल समृद्ध मुलुक हो । विशिष्ट भौगोलिक अवस्था, उचाइगत विविधता,जलवायु विविधता र यिनको समिश्रणबाट विशिष्ट पारिस्थितिक प्रणालिको विकास भएको छ । यसर्थ पारिस्थितिक प्रणालि र बासस्थान, प्रजाति र जीन गरि तीन तहको नेपालको जैविक व
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
18

Neupane, Mahendra. "नेपालका मातृभाषाहरूको प्रयोगावस्था". Interdisciplinary Research in Education 9, № 1 (2024): 1–16. http://dx.doi.org/10.3126/ire.v9i1.69742.

Full text
Abstract:
प्रस्तुत लेख नेपालमा बोलिने मातृभाषाको वितरण, परिवर्तन र लोपोन्मुखताको स्थितिसँग सम्बन्धित छ । नेपालमा भएका पछिल्ला तीन दशकका राष्ट्रिय जनगणनाले प्रस्तुत गरेका तथ्यमा आधारित रही नेपालका मातृभाषाहरूको वितरणको अवस्था, परिवर्तनको प्रवृत्ति र लोपोन्मुखताको अवस्था पत्ता लगाउनु यस लेखको मुख्य उद्देश्य हो । भाषाका लोपोन्मुखताको कारण र जीवन्तताका लागि अपनाउनुपर्ने नीति पनि यस लेखमा सङ्केत गरिएको छ । गुणात्मक ढाँचामा आधारित वर्णनात्मक र विश्लेषणात्मक विधिमा आरित भई यो लेख तयार पारिएको छ । लेख तयार पार्ने व्रmममा नेपालका राष्ट्रिय जनगणनाबाट प्रस्तुत तथ्य, मातृभाषा तथा भाषाका बारेमा लेखिएका विभिन्न पुस्त
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
19

गौतम, सुन्दर. "हाम्रो संस्कृति: एक अध्ययन {Our Culture: A Study}". Nepalese Culture 15, № 1 (2022): 105–14. http://dx.doi.org/10.3126/nc.v15i1.48548.

Full text
Abstract:
विद्यमान नेपाली समाजको गतिशीलतामा विज्ञान र प्रविधिले केही नयाँपन पक्कै दिएको छ । तर पनि प्रविधिलाई आत्मसात गर्दैगर्दा मानवीय प्रवृत्तिमा के र कस्ता अन्योन्याश्रित सम्बन्धहरूको प्रभाव परेको छ त ? त्यस विषयमा स्पष्ट हुन आवश्यक छ । यद्यपि संस्कृति संरक्षणको नाममा भोगिरहेका विकृतिहरूले वर्तमानमा पारेको प्रभावबाट भावि पुस्ताको दिनचर्यालाई कति मर्यादित बनाउने हो, त्यो हेर्न र बुझ्न बाँकी नै छ । मूल रूपमा नेपालको राष्ट्रिय संस्कृतिका विविध पक्षले हाम्रो सिङ्गो नेपाली समाजमा स्थापित गरेका मौलिक मूल्य र मान्यता नै हाम्रा सांस्कृतिक सम्पत्तिहरू हुन् भनेर आज हरेकले बुझ्न सक्नुपर्दछ र त्यस अनुरूप नै हाम्
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
20

अर्च, ना परमार. "पर्यावरण संरक्षण". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.883529.

Full text
Abstract:
मानव शरीर प ंच तत्वों- प ्रथ्वी, जल, वाय ु, अग्नि आ ैर आकाश स े ही बना ह ै। य े सभी तत्व पर्या वरण के धोतक है। प ्रकृति मे मानव को अन ेक महत्वप ूर्ण प्राकृतिक सम्पदायें भी ह ै। जिसका उपयोग मन ुष्य अपन े द ैनिक जीवन में करता आया है ज ैसे- नदियाँ, पहाड ़, मैदान, सम ुद ्र, प ेड ़-पौधे, वनस्पति इत्यादि। प्रथ्वी पर प्राकृतिक संसाथनों का दोहन करन े से प्राकृतिक संसाथनो के भण्डार तीव्र गति से घटत े जा रह े है, जिससे पर्यावरण में असन्त ुलन बढ ़ रहा है। उसके परिणाम स्वरूप जल की कमी, आ ेजा ेन परत में छेद का पाया जाना, वना ें की अत्यधिक कर्टाइ से वना ें की कमी आना, सम ुद ्रों का जल स्तर बढना, ग्लेशियरों
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
21

Sherpa, Pasang. "प्राकृतिक स्रोतको उपयोग र जैविक विविधता संरक्षणमा नुब्री समुदायको परम्परागत ज्ञान र प्रथाजनित अभ्यासको भूमिका". Indigenous Nationalities Studies आदिवासी जनजाति अध्ययन 3, № 3 (2025): 58–74. https://doi.org/10.3126/ins.v3i3.80714.

Full text
Abstract:
आदिवासी नुब्री समुदायमा प्रथाजनित संस्था गोवा ल्हेजेन, कू–छोङा र श्याग्या परम्परामार्फत् वनजङ्गल, चरन क्षेत्र, कृषियोग्य भूमिको प्रयोग र दिगो व्यवस्थापन गर्दै आएका छन् । यस्ले जैविक विविधता, प्रकृतिको संरक्षणका साथै समाजमा शान्ति, एकता र सुव्यवस्था कायम गर्न यसले योगदान पु¥याएको छ । यो परम्परागत प्रणाली गोरखा जिल्लाको नुब्री उपत्यकामा बसोबास गर्ने नुब्री जातिको वनजङ्गल, भूमि र अन्य प्राकृतिक स्रोतहरूसँग जीविकोपार्जन र आर्थिक रूपमा मात्र नभई सांस्कृतिक, धार्मिकार आध्यात्मिक रूपमा अन्योन्याश्रित सम्वन्ध रहेको छ । नुब्रीहरूले श्याग्या परम्परा, बौद्ध दर्शनको पञ्चशीलमा उल्लेखित अहिंसात्मक सिद्धान्त
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
22

Panwar, Apeksha, and Archana Rani. "CONTEMPORARY LANDSCAPE IN TRADITIONAL GOND ART." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 9, no. 1 (2021): 169–75. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v9.i1.2021.3047.

Full text
Abstract:
English: Indian Folk art mainly depicts social and cultural aspects of trible society. Gond Painting is developed by Gond Community which is a large trible community in India and hence named after the same. “This art is quite famous in central India.&#x0D; Traditionally Gond Art were painted on walls and floors during weddings and on auspicious occasions. With time the art witnessed developments and now it is seen on textile, canvas, clothes, articles and valuable artifacts. Last decade witnessed a boom in the popularity of Gond Art. Jangan Singh Shyam who is called the father of Gond Art is o
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
23

अभिषेक, यादव. "निजता के अधिकार: एक विवेचनात्मक अध्ययन". International Journal of Contemporary Research in Multidisciplinary 3, № 1 (2024): 168–74. https://doi.org/10.5281/zenodo.10686091.

Full text
Abstract:
अंशक: निजता एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य अधिकार है जो व्यक्ति को उनकी व्यक्तिगत और सांविदिक जीवन की सुरक्षा और स्वतंत्रता प्रदान करता है। इस अधिकार के महत्व को समझते हुए, यह अध्ययन निजता के अधिकार के विभिन्न पहलुओं को विश्लेषण करता है, उनके उत्थान, पतन, और विकास की प्रक्रिया को समझते हुए। यह अध्ययन अन्याय, सरकारी उपाय, और न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से निजता के अधिकार के मुद्दों की प्रकृति और महत्व को उजागर करता है । यह अध्ययन निजता के अधिकार की परिभाषा और प्रमाणीकरण के साथ-साथ, निजता के अधिकार के लिए विभिन्न मानकों और नियमों की अवधारणा पर ध्यान केंद्रित करता है। इसके साथ ही, यह अध्ययन निजता के
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
24

सिंह, दीप्ति. "भूगर्भ जल संरक्षण". Anusandhaan - Vigyaan Shodh Patrika 3, № 01 (2015): 162–64. https://doi.org/10.22445/avsp.v3i01.8602.

Full text
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
25

ममता, का ेठारी. "पर्यावरण संरक्षण एव ं हिन्दू धर्म". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.883537.

Full text
Abstract:
पर्यावरण के अन्तर्गत वायु जल भूमि वनस्पति प ेड़ पौधे, पशु मानव सब आत े है । प ्रक ृति में इन सबकी मात्रा और इनकी रचना कुछ इस प्रकार व्यवस्थित है कि प ृथ्वी पर एक संत ुलनमय जीवन चलता रह े । विगत करोंड ़ांे वर्षो से जब से पृथ्वी मन ुष्य पशुपक्षी और अन्य जीव-जीवाणु उपभा ेक्ता बनकर आये तब से, प्रकृति का यह चक्र निर ंतर और अबाध गति से चल रहा ह ै । जिसको जितनी आवष्यकता है व प्रकृति से प्राप्त कर रहा है आ ैर प्रक ृति आगे के लिये अपन े में और उत्पन्न करके संरक्षित कर लेती है । मानव इतिहास का अवलोकन कर े तो आज स े प ंाॅच सौ सात सा ै वर्ष प ूर्व मन ुष्य प ्रकृति के समीप था । प्रक ृति से मिले भोजन पर साम
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
26

Maharjan, Anirudra. "आर्थिक सवालमा बुद्ध शिक्षाको महत्त्व". Historical Journal 15, № 1 (2024): 45–55. http://dx.doi.org/10.3126/hj.v15i1.63975.

Full text
Abstract:
यस धर्तीमा मानिसको सृष्टिपश्चात् समयक्रमसँगै सभ्यताको विकास हुँदै आजको आधुनिक समाजको रूपमा विकसित भई हरक्षेत्र तथा हरपलमा मानव जीवनमा आर्थिक पक्ष जोडिन थाल्यो । विहान उठेदेखि नसुतेसम्म अनि गर्भधारणदेखि मृत्यु पश्चात्सम्म नै आर्थिक पक्षले गाज्न थालेसँगै आर्थिक क्रियाकलाप चलायमान भई आर्थिक सम्पतिको संकलन तथा संरक्षणको महत्त्व तथा आवश्यकता रहन गयो । वर्तमान जटिल जीवनशैलीमा आर्थिक सम्पन्नताको लागि मानव समाजमा हुने/नहुने, वैध/अवैध, नैतिक/अनैतिक क्रियाकलाप बढ्न गई समाजमा अपराध तथा भ्रष्टाचारजन्य घटना एवं शारीरिक तथा मानसिक तनावले ग्रसित बनाएको वर्तमान परिवेशमा उपरोक्त विकृति तथा विसंगतिको निराकरणको
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
27

थानी Thani, दिनेश प्रसाद Dinesh Prasad. "व्यवसायिकता र निष्ठाको कसीमा निजामती सेवा {A civil service based on professionalism and integrity}". Prashasan: The Nepalese Journal of Public Administration 55, № 2 (2023): 16–26. http://dx.doi.org/10.3126/prashasan.v55i2.63530.

Full text
Abstract:
निजामती सेवामा व्यवसायिकता र निष्ठाको वर्तमान स्थिति र यसको प्रयोगको अवस्था हेर्दा यससँग सम्बन्धित नीतिगत तथा कानुनी व्यवस्था, सिद्दान्त र व्यवहारमा मेल खाएको देखिंदैन। हाल निजामती सेवा निकै अप्ठ्यारो स्थितिमा गुज्रिरहेको देख्न सकिन्छ। यसले शुरुवात देखि हालसम्म प्राप्त गरेको साख जोगाइ राख्‍नु र सेवाकै दिगो निरन्तरता समेत चुनौतीपूर्ण नहोला भन्न सकिन्न। यसो हुनुको पछाडि राजनीतिक नेतृत्व मुख्य रुपमा जिम्मेवार त छँदैछ, निजामती सेवा हाँक्ने पदमा बसेका अधिकांश अधिकारीहरु पनि कम जिम्मेवार छैनन्। निजामती सेवाको संरक्षक राजनीतिक नेतृत्व नै हो, यसमा विवाद छैन तर राजनीतिक नेतृत्वको प्रकृति अस्थायी हुन्छ,
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
28

अधिकारी Adhikari, पशुपति Pasupati. "प्रकृति संरक्षणमा नेपाली सेनाको योगदान {Nepali Army's contribution to nature conservation}". Unity Journal 4, № 01 (2023): 372–84. http://dx.doi.org/10.3126/unityj.v4i01.52262.

Full text
Abstract:
बि.स. २०३२ देखि प्रकृतिसंरक्षणमा संलग्न नेपाली सेनाको प्रकृतिसंरक्षण सम्बन्धी कमाण्ड संरचनाभित्र १५ युनिटमा ८,११७ आधारभूत फौज कार्यरत छन् । सेनाको संलग्नतापछि गंैडा, बाघ, हात्ती, घडियाल गोही जस्ता दुर्लभ वन्यजन्तु चोरी शिकार र वासस्थान विनाशका कारण नेपालबाट लोप हुनबाट जोगिएका छन् । प्रकृतिसंरक्षणमा नेपाली सेनाको योगदानलाई अझै कसरी परिष्कृत गर्न सकिन्छ भन्ने विषयमा अनुसन्धान गर्न यो अध्ययन गरिएको हो । त्यसका लागि प्राथमिक र द्वितीय स्रोतबाट संकलित तथ्याङ्कलाई विश्लेषण गरी प्रतिवेदन तयार पारिएको छ । यस अध्ययनमा प्रकृतिसंरक्षणको इतिहास, नेपाली सेनाले प्रकृति संरक्षणको क्षेत्रमा हालसम्म सम्पादन गर
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
29

सुबेदी Subedi, अबतार Abatar. "संपदा संरक्षण र विकास". Patan Prospective Journal 2, № 2 (2022): 276–84. http://dx.doi.org/10.3126/ppj.v2i2.53137.

Full text
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
30

चतुर्वेदी, सुजाता. "ब्रज संस्कृति में पर्यावरण चेतना". Dev Sanskriti Interdisciplinary International Journal 7 (31 січня 2016): 50–56. http://dx.doi.org/10.36018/dsiij.v7i0.75.

Full text
Abstract:
ब्रज में बसे प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक सौहार्द के मूल में कल्याणमय पर्यावरण पोषण एवं संरक्षण का भाव निहित है। इस शोध पत्र द्वारा सूर-साहित्य में निदेर्शित कृष्ण-लीलाओं और ब्रज संस्कृति में व्याप्त पर्यावरण संरक्षण के विविध आयामों को खोजने की चेष्टा की गयी है। यह संरक्षण का भाव कहीं पशु-पालन की प्रवृत्ति में मिलता है, तो कहीं ग्राम्य संस्कृति में वनों और वृक्षों के अपूर्व महत्व में झलकता है। जैव-विविधता, वन-संरक्षण, वृक्षारोपण, जल-संरक्षण, पर्यावरण नैतिकता आदि आयामों का बहुत स्पष्ट द्योतन ब्रज संस्कृति में प्राप्त होता है। ब्रज संस्कृति द्वारा पर्यावरण संरक्षण हेतु अपने परिवेश से पूर्ण ता
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
31

विक्रम, मोबारसा. "डिजिटल संरक्षण और सूचना साक्षरता निर्देश की चुनौतियां". International Journal of Innovative Research and Creative Technology 10, № 3 (2024): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.12514003.

Full text
Abstract:
अमूर्तडिजिटल संरक्षण और सूचना साक्षरता वर्तमान युग में अत्यंत महत्वपूर्ण हो गए हैं। सूचना साक्षरता का उद्देश्य लोगों को सूचना का सही उपयोग और विश्लेषण करने में सक्षम बनाना है, जबकि डिजिटल संरक्षण का मतलब है डिजिटल संसाधनों और सूचनाओं की सुरक्षा और उनका दीर्घकालिक संरक्षण। इस लेख में डिजिटल संरक्षण और सूचना साक्षरता के क्षेत्र में सामने आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। डिजिटल संरक्षण की मुख्य चुनौतियों में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, और डिजिटल सामग्री का दीर्घकालिक संरक्षण शामिल हैं। वहीं, सूचना साक्षरता के क्षेत्र में प्रमुख चुनौतियाँ डिजिटल विभाजन, डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों की प्रभाव
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
32

अनिता, सिंह, та सिंह रागिनी. "प्राकृतिक संसाधन एव ं उनका संरक्षण". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.838917.

Full text
Abstract:
्रकृति न े मन ुष्य को सभी जीवनोपया ेगी संसाधन म ुक्त हस्त से प्रदान किये हैं। आदिमानव अपनी समस्त आवष्यकताओं की प ूर्ति के लिये प ूरी तरह प्रकृति पर निर्भर करता था, किंत ु आदि मानव से आध ुनिक मन ुष्य बनन े की विकासयात्रा म ें मन ुष्य न े प्राकृतिक संसाधनों का भरप ूर दोहन किया फलस्वरूप प्रकृति की अक ूत संपदा धीर े-धीर े समाप्त हा ेन े लगी। इस क्रम मे ं विभिन्न प्रजातियाँ विलुप्त प्रजातियो ं की श्रेणी में पहुँच गयी ं, शेष बची हुई प ्रजातिया ें और स्वयं मन ुष्य प ्रजाति को बचाये रखन े के लिय े भी प ्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण अत्यावष्यक हो गया है। इस हेत ु विभिन्न सुरक्षात्मक कदम उठान े के साथ-सा
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
33

द, ेवेन्द ्रसिंह ठाक ुर. "सामाजिक वानिकी एव ं पर्यावरण संरक्षण". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.580638.

Full text
Abstract:
पर्यावरण अर्थात हमार े चारो ओर का वातावरण जो प्रत्यक्ष आ ैर अप्रत्यक्ष रूप से हमारी जीवनषैली का े प्रभावित करता ह ै। सैद्धांतिक एव ं व्यावहारिक रूप में वनो की संरचना प्रब ंध तथा उनके उत्पादो का उचित उपयोग वानिकी कहलाता है। कार्यद ृष्टि के क्षेत्र अन ुसार वानिकी के अन ेक प्रकार है ज ैसे कृषि वानिकी, उद्यान वानिकी, ग्रामीण वानिकी, नगरीय वानिकी , सामाजिक वानिकी। सामाजिक सेवा के उद ्द ेष्य स े किया गया वनीकरण सामाजिक वानिकी कहलाता ह ै। सामाजिक वानिकी समाज की मुलभूत आवष्यकताओं की प ूर्ति करने के साथ साथ पर्यावरण संत ुलन को बनाये रखन े का महत्वप ूर्ण कार्य करती है। सामाजिक वानिकी न े मानवजीवन आ ैर प
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
34

निशा, प. ंवार. "ज ैव विविधता एवं संरक्षण". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special edition) (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.882969.

Full text
Abstract:
पृथ्वी अपन े म ें असीम संभावनाए ं एकत्रित किये ह ुए है । प ्रकृति के अन ेकान ेक विविधताओ ं की कल्पना कर ही इस बात का पता लगाया जा सकता ह ै कि संभावनाए ं पक्ष की ह ै या विपक्ष की तात्पर्य प ृथ्वी पर अथाह कृषि भूमि, जल वृक्ष, जीव-जन्त ु तथा खाद ्य पदार्थ थे, परन्त ु मानव के अनियंत्रित उपभोग के कारण ये सीमित हा े गये ह ै । पर वास्तव में हम अपन े प्रयासों से इन संपदाओं का उचित प ्रब ंध कर इसे भविष्य के लिए उपयोगी बना सकत े ह ै । जैव विविधता किसी दिये गये पारिस्थितिकी त ंत्र बायोम, या एक प ूर े ग ृह में जीवन क े रूपों की विभिन्नता का परिणाम है । ज ैव विविधता किसी जैविक त ंत्र के स्वास्थ्य का घोतक ह
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
35

प्रगति, वर्मा. "प्राक ृतिक संसाधनों का संरक्षण". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.882980.

Full text
Abstract:
मानव जीवन का अस्तित्व, प्रगति विकास संसाधनों पर निभ्रर करता है । आदिकाल स े मन ुष्य प्रकृति स े विभिन्न प्रकार की वस्त ुएँ प्राप्त कर अपनी आवष्यकताओं को प ूरा करता ह ै वास्तव में संसाधन व े ह ै जिनकी उपया ेगिता मानव क े लिए हो, अन्य जीवों क े समान ही मानव भी पर्यावरण का ही एक अंग ह ै परन्त ु एक विभिन्नता जो सहज ही परिलक्षित होती ह ै वह यह है कि अन्य जीवों की त ुलना में मानव अपन े चारो ं ओर के पर्या वरण का े प्रभावित तथा कुछ अर्थो में उसे नियंत्रित कर पान े की पर्याप्त क्षमता ह ै यही कारण है कि मानव का पर्यावरण के साथ संब ंधों को इतना महत्व दिया जाता ह ै । आधुनिक जीवन में मानव तथा पर्या वरण के
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
36

प, ूर्णेन्द ु. शर्मा. "पर्यावरण संरक्षण सब का दायित्व". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.883541.

Full text
Abstract:
सृष्टि के प्रारम्भ से वर्त मान युग तक मन ुष्य न े विकास की लम्बी यात्रा तय की है। किन्त ु इस यात्रा में वह जीवन के शाश्वत सत्य को पीछ े छोड ़कर अकेला आगे निकल आया है जिसके परिणाम में पर्यावरण की प्रलयंकारी समस्याओं न े जन्म ले लिया ह ै आ ैर विश्व समुदाय विगत र्कइ दशकों से इनसे जूझता हुआ आग े बढ ़न े का प्रयास कर रहा है। 1972 में इसकी गम्भीरता को द ेखत े हुए स्टाॅकहोम मे ं संयुक्त राष्ट ª सम्म ेलन आयोजित किया गया जिसमें श्रीमती इन्दिरा गांधी न े पर्यावरण संरक्षण एव ं मानव जाति के कल्याण हेत ु दिय े गये अपन े वक्तव्य म ें कहा कि, ’’मन ुष्य तब तक सभ्य एव ं सच्चा मानव नहीं हो सकता जब तक कि वह सम्प
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
37

VARSHA, RANI. "संस्कृत में पर्यावरण संरक्षण - बोहल". बोहल शोध मञ्जूषा 3, № 15 (2025): 131–35. https://doi.org/10.5281/zenodo.15269391.

Full text
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
38

Oli, Shiva. "खसानी नेपालीमा प्रचलित शब्दावलीहरु". Journal of Deukhuri Multiple Campus 3, № 4 (2025): 25–35. https://doi.org/10.3126/jdmc.v3i4.80549.

Full text
Abstract:
खसानी उपभाषिका नेपाली भाषाको क्षेत्रीय भाषिक भेद हो, जुन मध्य–पश्चिमका जिल्लाहरूमध्ये सुर्खेत, जुम्ला, सल्यान र आसपासका क्षेत्रहरूमा बोलिन्छ । नेपाली भाषाकै उपभेद भएकाले यसको उच्चारण, शब्दावली र वाक्य संरचनामा प्रशस्त भिन्नताहरू छन् । खसानी उपभाषिका प्राचीन संस्कृत र स्थानीय जनजातीय भाषाहरूको मिश्रण हो, जसले यसलाई अन्य क्षेत्रीय भेदबाट विशिष्ट बनाएको छ । खसानी उपभाषिकामा संस्कृतका शब्दहरूको प्रचलन पनि प्रचुर मात्रामा छ, विशेष गरी धार्मिक र दार्शनिक सन्दर्भमा यसको प्रयोग देख्न सकिन्छ । उदाहरणका लागि, “ब्रह्मा”, “धर्म” जस्ता शब्दहरू खसानीमा प्रशस्तै छन् । साथै, यसमा स्थानीय जनजीवन र परिवेशसँग मे
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
39

अमिता, कृष्णा महातळे (विरुटकर). "पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन में महिलाओं की भूमिका". International Journal of Advance and Applied Research 4, № 30 (2023): 100–102. https://doi.org/10.5281/zenodo.8394544.

Full text
Abstract:
आज पुरे विश्व मे जिस मुद्दे पर चर्चा हो रही है उनमें पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण &nbsp;सबंधीत है। &nbsp;8 मार्च को आंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।&nbsp; आज महिलाए स्वावलंबीत के साथ सशक्तीकरण की अद्वितीय मिसाल बनी है। &#39;पर्यावरण&quot; मानवजाती के लिए एक अमुल्य वरदान है, मानव और प्रकृति के बीच गहरा नाता है। &#39;5 जून&#39; पूरा विश्व पर्यावरण दिवस मनाता है। पर्यावरण के प्रति जागृकता फैलाने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन में महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई है। भारतीय इतिहास का अध्ययन किया तो यह बात ज्ञान में आती है की वैदिक काल से ही महिलाएं पर्यावरण संरक
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
40

प्रकाश, तेज. "जल संसाधन के प्रकार एवं संरक्षण". Innovation The Research Concept 9, № 3 (2024): H11—H17. https://doi.org/10.5281/zenodo.12543722.

Full text
Abstract:
This paper has been published in Peer-reviewed International Journal "Innovation The Research Concept''&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; URL : http://socialresearchfoundation.com/new/publish-journal.php?editID=8523 &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
41

पालीवाल, महेन्द्र कुमार. "पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की सक्रियता". Anthology The Research 8, № 10 (2024): H 60 — H 73. https://doi.org/10.5281/zenodo.10635244.

Full text
Abstract:
This paper has been published in Peer-reviewed International Journal "Anthology The Research"&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; URL : https://www.socialresearchfoundation.com/new/publish-journal.php?editID=8189 Publisher : Social Research Foundation, Kanpur (SRF International)&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; Abstract : &nbsp;पर्यावरण संरक्षण मानव जीवन एवं संपोषणीय विकास के लिए अति आवश्यक विषय वस्तु है। प्रस्तुत शोध पत्र अनियंत्रित आर्थिक विकास के कुपरिणामा को समझन
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
42

श्रीवास्तव, पीयूष, та बृजेश कुमार मिश्र. "शहरी निजी माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के अभिभावकों का विद्यालयी संरक्षा एवं सुरक्षा के प्रति जागरुकता का तुलनात्मक अध्ययन". International Journal of Science and Social Science Research 1, № 3 (2023): 38–44. https://doi.org/10.5281/zenodo.13511138.

Full text
Abstract:
विद्यालय वह स्थान है, जहाँ पर समाज एवं राष्ट्र का भविष्य निर्मित होता है। प्रत्येक समाज एवं राष्ट्र अपने नागरिकों के विकास के लिए विद्यालय की स्थापना करता है। जब विद्यार्थी घर से निकल कर विद्यालय आता है एवं शिक्षा प्राप्त करता है तो यह माना जाता है कि विद्यार्थी जितने समय तक विद्यालय में रहता है उसके संरक्षा एवं सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन की होती है। इसके सम्बन्ध में राज्य एवं केंद्र सरकार के साथ-साथ अन्य कई स्वायत्तशासी संस्थाओं ने विद्यार्थियों के संरक्षा एवं सुरक्षा के लिए कई प्रकार के नियमों का निर्धारण किया है। विद्यार्थियों की संरक्षा एवं सुरक्षा के इन प्रावधानों के सम्ब
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
43

श्रीवास्तव, पीयूष, та बृजेश कुमार मिश्र. "शहरी निजी माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के अभिभावकों का विद्यालयी संरक्षा एवं सुरक्षा के प्रति जागरुकता का तुलनात्मक अध्ययन". International Journal of Science and Social Science Research 1, № 3 (2023): 38–44. https://doi.org/10.5281/zenodo.13511138.

Full text
Abstract:
विद्यालय वह स्थान है, जहाँ पर समाज एवं राष्ट्र का भविष्य निर्मित होता है। प्रत्येक समाज एवं राष्ट्र अपने नागरिकों के विकास के लिए विद्यालय की स्थापना करता है। जब विद्यार्थी घर से निकल कर विद्यालय आता है एवं शिक्षा प्राप्त करता है तो यह माना जाता है कि विद्यार्थी जितने समय तक विद्यालय में रहता है उसके संरक्षा एवं सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन की होती है। इसके सम्बन्ध में राज्य एवं केंद्र सरकार के साथ-साथ अन्य कई स्वायत्तशासी संस्थाओं ने विद्यार्थियों के संरक्षा एवं सुरक्षा के लिए कई प्रकार के नियमों का निर्धारण किया है। विद्यार्थियों की संरक्षा एवं सुरक्षा के इन प्रावधानों के सम्ब
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
44

श्रीवास्तव, पीयूष, та बृजेश कुमार मिश्र. "शहरी निजी माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के अभिभावकों का विद्यालयी संरक्षा एवं सुरक्षा के प्रति जागरुकता का तुलनात्मक अध्ययन". International Journal of Science and Social Science Research 1, № 3 (2023): 38–44. https://doi.org/10.5281/zenodo.13511138.

Full text
Abstract:
विद्यालय वह स्थान है, जहाँ पर समाज एवं राष्ट्र का भविष्य निर्मित होता है। प्रत्येक समाज एवं राष्ट्र अपने नागरिकों के विकास के लिए विद्यालय की स्थापना करता है। जब विद्यार्थी घर से निकल कर विद्यालय आता है एवं शिक्षा प्राप्त करता है तो यह माना जाता है कि विद्यार्थी जितने समय तक विद्यालय में रहता है उसके संरक्षा एवं सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन की होती है। इसके सम्बन्ध में राज्य एवं केंद्र सरकार के साथ-साथ अन्य कई स्वायत्तशासी संस्थाओं ने विद्यार्थियों के संरक्षा एवं सुरक्षा के लिए कई प्रकार के नियमों का निर्धारण किया है। विद्यार्थियों की संरक्षा एवं सुरक्षा के इन प्रावधानों के सम्ब
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
45

श्रीवास्तव, पीयूष, та बृजेश कुमार मिश्र. "शहरी निजी माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के अभिभावकों का विद्यालयी संरक्षा एवं सुरक्षा के प्रति जागरुकता का तुलनात्मक अध्ययन". International Journal of Science and Social Science Research 1, № 3 (2023): 38–44. https://doi.org/10.5281/zenodo.13511138.

Full text
Abstract:
विद्यालय वह स्थान है, जहाँ पर समाज एवं राष्ट्र का भविष्य निर्मित होता है। प्रत्येक समाज एवं राष्ट्र अपने नागरिकों के विकास के लिए विद्यालय की स्थापना करता है। जब विद्यार्थी घर से निकल कर विद्यालय आता है एवं शिक्षा प्राप्त करता है तो यह माना जाता है कि विद्यार्थी जितने समय तक विद्यालय में रहता है उसके संरक्षा एवं सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन की होती है। इसके सम्बन्ध में राज्य एवं केंद्र सरकार के साथ-साथ अन्य कई स्वायत्तशासी संस्थाओं ने विद्यार्थियों के संरक्षा एवं सुरक्षा के लिए कई प्रकार के नियमों का निर्धारण किया है। विद्यार्थियों की संरक्षा एवं सुरक्षा के इन प्रावधानों के सम्ब
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
46

शुभम, रेवणशेटे, та डॉ. प्रतिभा स. काळमेघ प्रा. "कृषी विकासात प्रधानमंत्री पिक विमा योजनेचे महत्व". International Journal of Advance and Applied Research S6, № 18 (2025): 387–91. https://doi.org/10.5281/zenodo.15251041.

Full text
Abstract:
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) ही भारत सरकार द्वारा कृषी क्षेत्रात सुधारणा आणि शेतकऱ्यांचे संरक्षण करण्यासाठी सुरू करण्यात आलेली एक महत्वाची योजना आहे. या योजनेचा मुख्य उद्देश शेतकऱ्यांना त्यांच्या पिकांसाठी योग्य विमा कवच पुरवणे आहे, ज्यामुळे नैसर्गिक आपत्ती, कीड किंवा इतर प्रकारच्या संकटांमुळे होणाऱ्या नुकसानापासून शेतकऱ्यांचे संरक्षण होऊ शकेल.
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
47

Jain, Padmini. "पर्यावरण संरक्षण में गृहिणियों की भूमिका: सतत जीवन के सूत्र". Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (in Hindi) 6, № 3&4 (2021): 8–11. https://doi.org/10.24321/2456.0510.202106.

Full text
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
48

धिमाल Dhimal, सोमबहादुर Sombahadur. "सांस्कृतिक सम्पदासहितको शिक्षण: सम्पदा पुस्तान्तरण". Samaj Anweshan समाज अन्वेषण 1, № 2 (2023): 151–60. http://dx.doi.org/10.3126/anweshan.v1i2.65506.

Full text
Abstract:
विश्वसम्पदा महासन्धि १९७२ र अमूर्त सांस्कृतिक सम्पदा महासन्धि २००३ को नेपालपक्ष राष्ट्र बनेको छ । विश्वसम्पदाले मानव निर्मित भौतिक वा मूर्त सांस्कृतिक सम्पदाहरू धरहरा,सङ्ग्रहालय तथा स्मारक, वास्तुकलाकृति, चित्रकला तथा मूर्तिकला; ऐतिहासिक भवनहरू, प्राकृतिक सम्पदाहरू आदि सरोकार पक्षहरूको प्रवर्धन, संरक्षण र पुर्खाको ज्ञान पुस्तान्तरणमा जोड दिन्छ । अमूर्त सांस्कृतिक सम्पदा अन्तर्गत अमूर्त सांस्कृतिक सम्पदाको संवाहकको रूपमा भाषासहितका मौखिक परम्पराहरू तथा अभिव्यक्तिहरू, अभिनय कलाहरू,सामाजिक व्यवहारहरू, अनुष्ठानहरू र चाडपर्वका उत्सवहरू, प्रकृति तथा विश्व ब्रह्माण्डसँग सम्बन्धित ज्ञान तथा व्यवहारहरू
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
49

मनीषा, मीना, та कपिल मीना डॉ. "राजस्थान के आर्थिक विकास पर पर्यटन का प्रभाव". INTERNATIONAL JOURNAL OF INNOVATIVE RESEARCH AND CREATIVE TECHNOLOGY 11, № 2 (2025): 1–4. https://doi.org/10.5281/zenodo.14990363.

Full text
Abstract:
राजस्थान का पर्यटन उद्योग राज्य की आर्थिक स्थिति में एक अहम बदलाव का कारण बन चुका है। राज्य में पर्यटन का विकास न केवल सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में सहायक है, बल्कि यह राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विकास और समृद्धि का स्रोत भी बना है। इस समीक्षा पत्र का उद्देश्य यह अध्ययन करना है कि पर्यटन ने राजस्थान की अर्थव्यवस्था में किस प्रकार योगदान दिया है, और यह किस प्रकार राज्य के सामाजिक और आर्थिक संरचना पर प्रभाव डालता है.इस अध्ययन में विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जैसे पर्यटन के द्वारा रोजगार के अवसरों की सृजन, स्थानीय व्यवसायों का विकास, और राज्य की बुनियादी ढांचे में सुधार। इसक
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
50

खुटे, डी एन. "पर्यावरण संरक्षण और बस्तर का धन: सलफी". Journal of Ravishankar University (PART-A) 26, № 1 (2021): 35–38. http://dx.doi.org/10.52228/jrua.2020-26-1-5.

Full text
Abstract:
बस्तर के वनों में मुख्यतः साल, सागौन, बीजा, साजा, धावड़ा, मछुआ, तेंदू, हर्रा, आंवला, इमली, खैर, बांस तथा सलफी आदि के वृक्ष पाये जाते है। यहां पर हम बस्तर में प्रमुखता से पाये जाने वाले वृक्ष सलफी के बारे में चर्चा करना चाहते है। सलफी का वृक्ष नारियल प्रजाति का वृक्ष होता है। हलबी भाग में इसे सलफी रूख, गोंडी में गोर्गा मर्रा, अंग्रेजी में फिश टेल पाम ट्री कहा जाता है। वनस्पति शास्त्र की भाषा में करयोटा यूरेंस के नाम से इसे जाना जाता है। बस्तर अंचल में यह प्रायः सर्वत्र पाया जाता है। माड़िया जनजाति का सीमित संसार है इसलिए वे कहते हैं- वालिया वाटो गोर्गा उले मामा ले अर्थात् ओ मामा ! तुम जहां भी जाओ
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
We offer discounts on all premium plans for authors whose works are included in thematic literature selections. Contact us to get a unique promo code!