Academic literature on the topic 'हस्तशिल्प'

Create a spot-on reference in APA, MLA, Chicago, Harvard, and other styles

Select a source type:

Consult the lists of relevant articles, books, theses, conference reports, and other scholarly sources on the topic 'हस्तशिल्प.'

Next to every source in the list of references, there is an 'Add to bibliography' button. Press on it, and we will generate automatically the bibliographic reference to the chosen work in the citation style you need: APA, MLA, Harvard, Chicago, Vancouver, etc.

You can also download the full text of the academic publication as pdf and read online its abstract whenever available in the metadata.

Journal articles on the topic "हस्तशिल्प"

1

Chouhan, Manish. "INFLUENCE OF MODERN PAINTING ON HANDICRAFTS OF JODHPUR DISTRICT." ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 2, no. 2 (2021): 124–33. http://dx.doi.org/10.29121/shodhkosh.v2.i2.2021.48.

Full text
Abstract:
English: With the development of civilization, we get evidence of handicrafts creation art. Many types of were made by humans, whose use is seen in many forms. According to the demand of time and their utility, their form changed. In the present time, the forms, shapes, expressions etc. of the prevailing arts have been changed and influenced. In such a situation, how can ancient arts like handicrafts remain untouched. The desire for new art and new experiments have changed the meaning of handicraft art. In this context, The influence of modern painting can also be on the handicrafts being made
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
2

Chouhan, Manish. "CHANGING NATURE OF TRADITIONAL KUTTI ART OF WESTERN RAJASTHAN." ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 3, no. 1 (2022): 134–48. http://dx.doi.org/10.29121/shodhkosh.v3.i1.2022.99.

Full text
Abstract:
English: The ever-flowing stream of folk art is a unique heritage of tradition, these forms and handicrafts associated with the spontaneous joy of creation and social life, being beautiful, with their positive energy, vibrate the mind, mind and consciousness of man as well as the courtyard of the house. The credit for keeping these forms and handicrafts with importance of social life alive through traditions goes to the people of rural areas here. From the development of civilizations to the modern times, human beings have edited many types of arts. In all these types of arts edited by humans,
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
3

Gadhavi, Manaliben H. "प्राचीन भारत में महिला उद्यमिता : एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य". Journal of Research & Development 17, № 4 (2025): 173–75. https://doi.org/10.5281/zenodo.15553283.

Full text
Abstract:
<strong><em>Abstract:</em></strong> <em>प्राचीन भारत में इस घटना की जड़ों का पता लगाना आवश्यक है। लोकप्रिय धारणा के विपरीत, प्राचीन भारत में महिलाएँ केवल घरेलू कामों तक ही सीमित नहीं थीं, उन्होंने व्यापार, शिल्प और व्यवसाय सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। यह लेख प्राचीन भारत में महिला उद्यमिता के इतिहास पर प्रकाश डालता है, उनके योगदान, चुनौतियों और सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश डालता है, जो ऐतिहासिक ग्रंथों और विद्वानों के शोध के संदर्भों द्वारा समर्थित है। </em>
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
4

रघुबर, प्रसाद सिंह, та सिंह2 साध्वी. "भारतीय अर्थव्यवस्था पर पर्यटन का प्रभाव". Journal of Research & Development' 15, № 2 (2023): 24–30. https://doi.org/10.5281/zenodo.7631534.

Full text
Abstract:
पर्यटन उन गतिविधियों, सेवाओं और उद्योगों का संग्रह है जो यात्रा का अनुभव प्रदान करते हैं, जिसमें परिवहन, आवास, खाने-पीने के प्रतिष्ठान, खुदरा दुकानें, मनोरंजन व्यवसाय और घर से दूर यात्रा करने वाले व्यक्तियों या समूहों के लिए प्रदान की जाने वाली अन्य आतिथ्य सेवाएं शामिल हैं। भारत में, पर्यटन उद्योग के विकास का देश के आर्थिक विकास पर गुणक प्रभाव पड़ता है। पर्यटन न केवल देश के सकल घरेलू उत्पाद में जोड़ता है बल्कि बहुत सारे रोजगार भी पैदा करता है और नागरिकों को खुशी से जीने में मदद करता है। इसलिए, राष्ट्रीय संपदा के सतत विकास के लिए पर्यटन क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसमें कृषि, बागवान
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
5

मीणा, शिव कुमार. "राजस्थान में ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से समावेशी सामाज का दर्शन". Lokprashasan 16, № 1 (2024): 115–26. http://dx.doi.org/10.32381/lp.2024.16.01.9.

Full text
Abstract:
राजस्थान के ग्रामीण परिवेश में ग्रामीण पर्यटन अपेक्षाकृत एक नया पक्ष है। राजस्थान में ग्रामीण पर्यटन समावेशी समाज का महत्वपूर्ण औजार बना है। ‘‘राज्य में विभिन्न जातीय संघटन व सांस्कृतिक स्वरूपों के समूह है। यहाँ भील, मीणा, डामोर, गरासिया जनजातियाँ विद्यमान है।’’ (भार्गव, 2011, 101) यह जनजातियाँ मुख्य रूप से बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, प्रतापगढ़, सिरोही व बरन जिलों में स्थापित है। इन जनजातियों का विकास करना अति महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सामाजिक व दैनिक जीवनचर्या से बिल्कुल कटे हुए है। ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से इनके सामाजिक व आर्थिक स्तर को उठाया जा सकता है। यह जनजातीय लोग ग्रामीण पर्यटन के माध
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
6

झां, आरसी प्रसाद. "महात्मा गांधी के दृृष्टिकोंण में व्यावसायिक शिक्षा". Humanities and Development 19, № 03 (2024): 28–34. https://doi.org/10.61410/had.v19i3.201.

Full text
Abstract:
वर्तमान शोध का मूल उद्देश्य है कि महात्मा गांधी के दृृष्टिकोण में व्यावसायिक शिक्षा को जाना जाए। वर्तमान शोध आलेख द्वितीयक स्रोत पर आधाारित है। वर्तमान अध्ययन के परिणाम इंगित करते हैं कि गांधी जी स्वावलंबन की शिक्षा देना चाहते थे। उनके दृष्टिकोण में ग्रामीणों कीे शिक्षा में कृषि, कताई, बढईगिरी, कुटीर शिल्प, हस्तशिल्प, हथकरघा, चरखा चलाना, आदि समावेश हो। वे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में औद्योगिक शिक्षा के पक्षधर थे। महात्मा गांधी शरीर में उत्पन्न होने वाली गति को सर्वोपरि मानते थे। गांधी जी चाहते थे कि गांव के अनुसार उपयोग में आने वाले गणित, भूगोल, ग्राम इतिहास, आदि पाठ्य क्रम में हो। गांधी
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
7

डॉ., मीनाक्षी राणा. "लोक कलाओं के संदर्भ में उत्तराखंड के मुखौटा नृत्य". Siddhanta's International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities 2, № 5 (2025): 51–61. https://doi.org/10.5281/zenodo.15493967.

Full text
Abstract:
&lsquo;उत्तराखंड&rsquo; &lsquo;देवभूमि&rsquo; के नाम से प्रसिद्ध है, जिसका अर्थ है &lsquo;देवताओं की भूमि&rsquo;। हिमालय क्षेत्र की वह भूमि जहां देवताओं ने निवास किया, ऋषि-मुनियों ने तप किया, देव नदी गंगा का इस भूमि में अवतरण हुआ, शुद्ध व शांत प्रकृति जो पग-पग में अपना सौन्दर्य बिखेरे दिखाई देती है, &nbsp;अटल समाधिस्थ पर्वत जो विश्व शांति एवं विश्व कल्याण हेतु तपरत प्रतीत होते &nbsp;हैं। &nbsp;स्वाभाविक ही है कि उस भूमि के निवासी भी प्रकृति सदृश &nbsp;सरल व शांत चित्त होंगे। यह स्वाभाविक सी बात&nbsp; है कि किसी शांत, निर्जन &nbsp;क्षेत्र में व्यक्ति जब अपने निकट किसी अन्य को अपनी व्यथा-कथा&nbs
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
8

प्रा., डॉ. सीमा बर्गट. "महात्मा गांधी और नई तालीम : गांधीजी के बुनियादी शिक्षा की समीक्षा करते हुए पाठ्यचर्या निर्माण". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका 01, № 05 (2023): 118–23. https://doi.org/10.5281/zenodo.10072780.

Full text
Abstract:
सन 1937 में महात्मा गांधी ने वर्धा योजना शुरू की । इसको बुनियादी शिक्षा या नई तालीम के नाम से भी जाना जाता है । बुनियादी शिक्षा का तात्पर्य शिक्षा की उच्च प्रणाली से है जिससे बालक शिक्षा को प्राप्त करके आत्मनिर्भर बन सके, स्वावलंबी&nbsp; बन सके तथा अपने जीवन को चलाने हेतु कुछ उपार्जन कर सके ।बूनियादी&nbsp; शिक्षा का तात्पर्य शिक्षा की उसे प्रणाली से है जिसमें विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्पों का प्रशिक्षण प्रदान करते हुए बालकों का शारीरिक, मानसिक, नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास करना है और इसमें शिक्षा को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाता है।वर्तमान में दशकों के बाद, भारत को एक नई राष्ट्रीय
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
9

Kumari, Uma, та Nirupama Singh. "बनारस की पारंपरिक शिल्प में रशियन डॉल्स का समावेश". International Journal For Multidisciplinary Research 7, № 3 (2025). https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i03.48004.

Full text
Abstract:
बनारस की पहचान न केवल इसके घाटों और मंदिरों से है, बल्कि यहाँ की समृद्ध लोककला और हस्तशिल्प परंपरा भी उतनी ही खास है। लकड़ी के खिलौने बनाना यहाँ की एक पुरानी और जीवंत परंपरा रही है। ये खिलौने पूरी तरह हाथ से बनाए जाते थे, जिनमें जानवरों, देवी-देवताओं और आम जीवन से जुड़ी चीज़ों का सुंदर चित्रण होता रहा है। समय के साथ इस परंपरा ने एक नया मोड़ लिया, जब बनारस में रशियन मैट्र्योश्का डॉल्स जैसे खिलौनों का निर्माण शुरू हुआ। पहले ये डॉल्स रूस की पहचान थीं, पर बनारसी कारीगरों ने उन्हें अपनी शैली, रंगों और धार्मिक-लोककथाओं से जोड़कर एक नई सांस्कृतिक पहचान दी। आज ये डॉल्स भगवानों, त्योहारों और बनारसी जीव
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
10

-, कमलेश कुमार वरकड़े, та बृजेन्द्र कुमार -. "कान्हा क्षेत्र के आदिवासीयों की विविधता का सांस्कृतिक अध्ययन पर्यटन के विशेष संदर्भ में". International Journal For Multidisciplinary Research 7, № 1 (2025). https://doi.org/10.36948/ijfmr.2025.v07i01.38146.

Full text
Abstract:
कान्हा और उसके नजदीकी आदिवासी क्षेत्र की विविधताओं का सांस्कृतिक अध्ययन और पर्यटन क्षेत्र की विशेषताओं को पहचानना हैं, यहाँ पर्यटन स्थल प्राचीन काल से मौजूद हैं। पर्यटन, इस क्षेत्र में सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्थिति के विकास में सहायक हैं। क्षेत्रविशेष तथा विभिन्नताओं जैसे- खान-पान, रहन-सहन, वेशभूषा, बोली-भाषा, मेंले-त्यौहारों, हस्तशिल्प तथा धार्मिक पर्वों की विभिन्न जानकारी मिलती हैं। कान्हा में जंगल सफारी और अन्य गतिविधियाँ भी हैं। पर्यटकों के आवागमन ने आर्थिक स्तिथि को प्रभावित किया हैं। कान्हा का क्षेत्र, आदिवासी बाहुल क्षेत्र और प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण के होने के कारण देश के
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
We offer discounts on all premium plans for authors whose works are included in thematic literature selections. Contact us to get a unique promo code!