Academic literature on the topic 'एक अप ेक्षा'

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Journal articles on the topic "एक अप ेक्षा"

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डा, ॅ. मीनाक्षी जा ेषी. "स ंगीत म ें नवाचार - एक अप ेक्षा". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.887008.

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Abstract:
आधुनिक युग में सर्वा धिक विकास का अथवा प ्रगतिषीलता का द्या ेतक षब्द ह ै ‘नवाचार‘ जिसे अ ंग्र ेजी भाषा में कहते है ं प्ददवअंजपवद अर्थात् कुछ ऐसा नयापन जो विकास अथवा प ्रगति/उन्नति में सहायक हा े जावे। ये नयापन तकनीकी से अधिक जुड़ा हुआ होता ह ै। आज सारा विष्व इस नवाचार के लिये संकल्पित व कटिबद्ध सा दीखता है। षिक्षा के क्षेत्र में, अध्ययन-अध्यापन क े क्षेत्र म ें निरंतर किये जा रह े सायास प ्रयासा ें में नवाचारों का े विषेष स्थान दिया जा रहा ह ै। उच्च षिक्षा क े क्षेत्र में अध्ययन-अध्यापन की आधुनिक ष ैलिया ें के प ्रयोग ह ेतु विषेष तकनीकी व्यवस्थाओं क े लिये नवाचारों की महती आवष्यकता अनुभूत की ज
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मोनीषा, वीरवानी. "स ेहत का मीत - स ंगीत". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.885867.

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Abstract:
संगीत लोगा ें का े संव ेदना क े स्तर पर एक गहरी समझ देकर उन्ह ें ब ेहतर बनने की दिशा में प्र ेरित करता ह ै आ ैर यही तत्व जब निज से व्यापक हा ेता ह ै ता े दुनिया भी बदल सकती ह ै. ये संगीत ही है जो आदि का े अ ंत से जा ेडकर हमारे हृदय का साहित्य बन जाता ह ै। आत्मा का े स्नेह से भर देता ह ै मन का े गहन अन्धकार से लेकर अनन्त ऊंचाइया ें तक ले जाता ह ै । संगीत क® ईश्वर का दर्जा प्राप्त ह ै, इसीलिए इस विधा में शुध्दता का विश ेष महत्व है। सात ष ुघ्द अ©र पा ंच क®मल स्वर®ं क े माध्यम से मन क® साधने का उपाय ह ै संगीत। अतः कहा जा सकता ह ै कि शरीर तथा मन क® स्वस्थ््ा, प्रफुल्लित रखने क े लिए संगीत आवश््यक ह
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श्रीमती, सुधा शाक्य. "र ंग दृष्टि दा ेष: र ंग अ ंधता". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.889298.

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Abstract:
्रस्तावना:- मानव में र्कइ प्रकार की संव ेदनाएं होती हैं जैसे दृष्टि, श्रवण, स्पर्श , गंध, स्वाद आदि। इनकी उत्पत्ति उद्दीपका ें से होती ह ै, जिसे व्यक्ति अपने बाह ्य पर्यावरण से ग्रहण करता ह ै, यह उद्दीपक ज्ञानेन्द्रिया ें अर्था त आंख, कान, त्वचा, नाक आ ैर जिव्हा को उद्दीप्त करते ह ैं, आ ैर विभिन्न संव ेदना को उत्पन्न करते ह ै ं। आइजनेक (1972) क े अनुसार ‘‘ संव ेदना एक मानसिक प ्रक्रम ह ै जा े आगे विभाजन या ेग्य नहीं होता। यह ज्ञानेन्द्रिया ें को प ्रभावित करने वाली बाह ्य उत्तेजना द्वारा उत्पादित हा ेता ह ै, तथा इसकी तीव ्रता उत्तेजना पर निर्भ र करती ह ै, आ ैर इसके गुण ज्ञानेन्द्रिय की प ्रकृत
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Dhiman, Utkarshi, Dr Anu Devi, Dr Manoj Dhiman, Mrs Meenakshi та Mrs Binnu Pundir. "ग्राफिक डिज़ाइन में फ्रीलांसिंगः चुनौतियाँ और अवसर". INTERNATIONAL JOURNAL OF SCIENTIFIC RESEARCH IN ENGINEERING AND MANAGEMENT 09, № 07 (2025): 1–8. https://doi.org/10.55041/ijsrem51364.

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Abstract:
आज के डिडजटल युग मेंफ्रील ांड ांग एक ऐ क ययक्षेत्र बनकर उभर है, डज नेप रांपररक नौकररय ांकी पररभ ष क बदल डदय है। यह न के वल र जग र क एक नय म ध्यम है, बल्कि युव ओां क अपनी रुडिय ांऔर रिन त्मक क्षमत ओां के अनु र क यय करनेकी स्वतांत्रत भी प्रद न करत है। डवशेषकर ग्र डिक डिज इन जै ेरिन त्मक क्षेत्र ां में, फ्रील ांड ांग नेछ त्र ां, नव डदत डिज इनर ांऔर पेशेवर ांक डबन डक ी स्थ डनक ीम के वैडिक स्तर पर क ययकरनेक अव र डदय है। पहलेजह ाँडिज इडनांग क के वल एक ह यक भूडमक म न ज त थ , वही ांअब यह एक पूर्यक डलक, आय- ृजन करनेव ल और स्वतांत्र कररयर डवकल्प बन िुक है। डिडजटल म ध्यम ांकी पहाँि और ऑनल इन क यय ांस्कृ
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क, ंचन क. ुमारी. "मधुवनी चित्रकला म ें र ंगा ें का समाव ेष". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.889288.

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Abstract:
भारत एक प ्राचीन सा ंस्कृतिक देश ह ै। यहाँ की कला एवं संस्कृति में लोककला का अनूठा समन्वय दिर्खाइ देता ह ै। अनेक विद्वानों ने समय-समय पर लोककला क े महत्त्व को बताया ह ै। लोककलाऐं हमारे देश में लोक परम्पराओं संस्कृति का दर्प ण ह ै। जो विभिन्न रीति रिवाज उत्सव में देख े जा सकते ह ै। भारत जैसे ं देश में विभिन्न प्रान्तों में विविध रूपों में लोककला देखी जा सकती ह ै। जा े विभिन्न नामों से जानी जाती ह ै। जा े विश्वभर में ख्याति प ्राप्त ह ै-मधुवनी की लोक चित्रकला उन्हीं में से एक है। मधुवनी का नाम शायद इसलिए हुआ क्या ेंकि इस नाम का अपना एक महत्व ह ै। जा े यहा की लोक चित्रों में मधु जैसी मिठास है। दर
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या, ेगेन्द्र सिंह नरूका फ. ूलैता. "वशेष बालका ें की कला म ें र ंग संया ेजनः- एक अध्ययन". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.889271.

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Abstract:
वषेष बालका ें (मानसिक,विकलंाग,मूक-बधिर,अंध) से कला सृजनकार्य करवाना अपने आप में एक चुनौती प ूर्ण कार्य है। उनमें रंगा ें की समझ प ैदा करना, उनक े सार्थ क उपयोग का े समझाना आ ैर फिर उसे सृजनात्मकता की ओर अग्रसर करना श्रम साध्य कार्य है। विषेष बालकों क े रंग संया ेजन का े समझने क े लिए सर्व प्रथम उन्ह े ं रंग, कैनवास आ ैर ब्रष क े साथ कुछ चित्रित करने क े लिए अक ेले छा ेड़ देना चाहिए। क ुछ समय बाद उनके रंग-संया ेजन का े दृष्टिगत करना चाहिए। रंगा ें से विष ेष बालकों की मानसिक भावनाओं आ ैर संवेगा ें का े समझा जा सकता है। पीले व ब ैंगनी रंग का अधिक उपयोग करन े वाले बालकों में प ्रफ ुल्लता और ख ुषी
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मिश्रा, आ. ंनद म. ुर्ति, प्रीति मिश्रा та शारदा द ेवा ंगन. "भतरा जनजाति में जन्म संस्कार का मानवशास्त्रीय अध्ययन". Mind and Society 9, № 03-04 (2020): 39–43. http://dx.doi.org/10.56011/mind-mri-93-4-20215.

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Abstract:
स ंस्कार शब्द का अर्थ ह ै श ुद्धिकरण। जीवात्मा जब एक शरीर का े त्याग कर द ुसर े शरीर म ें जन्म ल ेता है ता े उसक े प ुर्व जन्म क े प ्रभाव उसक े साथ जात े ह ैं। स ंस्कारा े क े दा े रूप हा ेत े ह ैं - एक आंतरिक रूप आ ैर द ूसरा बाह्य रूप। बाह ्य रूप का नाम रीतिरिवाज ह ै जा े आंतरिक रूप की रक्षा करता है। स ंस्कार का अभिप्राय उन धार्मि क क ृत्या ें स े ह ै जा े किसी व्यक्ति का े अपन े सम ुदाय का प ुर्ण रूप स े योग्य सदस्य बनान े क े उदद ्ेश्य स े उसक े शरीर मन मस्तिष्क का े पवित्र करन े क े लिए किए जात े ह ै। सभी समाज क े अपन े विश ेष रीतिविाज हा ेत े ह ै, जिसक े कारण इनकी अपनी विश ेष पहचान ह ै,
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डा, ॅ0 नाजिमा इरफान. "भारतीय चित्रकला में र ंगा ें का या ेगदान (अब्दुर्रहमान चुगताई के विष ेष संदर्भ में)". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.889177.

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Abstract:
मानव जीवन में वर्ण का महत्वप ूर्ण स्थान ह ै। प्रत्येक वस्तु का ेई न कोई रंग लिये हुए ह ै। रंगा ें क े प ्रति मानव का आकर्ष ण कभी घटा नही ह ै। इसीलिये आदि मानव से लेकर आधुनिक मानव तक ने सा ैन्दर्य क े विकास में वर्ण का सहारा लिया ह ै। कमरे की रंग व्यवस्था से लेकर बाग बगीचा ें में फ ूल पौधों की रंगया ेजना तक में कलाकार ने अपना हस्तक्ष ेप किया ह ै क्योंकि रंगा ें का अपना एक प्रभाव हा ेता ह ै जो मानव की मानसिक भावनाओं का े उद्वेलित करने की शक्ति रखता ह ै। वर्ण सार्वभौमिक ह ै तथा चित्रकला में सबसे अधिक महत्व रंग का े दिया जाता है। रंगा ें क े विविध रुपों मे ं मन की भावनायें जुड़ी ह ै ं जैसे बसन्त क
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SAKSHI, GUPTA (JRF). "र ंगा ें का मना ेवैज्ञानिक प्रभाव एवम् रंग चिकित्सा". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–7. https://doi.org/10.5281/zenodo.889290.

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Abstract:
सरंाश- संसार में प ्रत्येक व्यक्ति अन्तर्मन क े भावा ें का े व्यक्त करने क े लिय े किसी न किसी माध्यम का े अपनाता ह ै। किसी के लिये स्वर माध्यम ह ैं तो किसी क े लिये शब्द परन्तु एक चित्रकार के लिये उसक े भावा ें को अभिव्यक्त करने का माध्यम या साधन रंग ह ै। रंगा ें की विभिन्न ताना ें क े द्वारा मन म ें उद्व ेलित भावों का े अभिव्यक्त करता ह ै। वह चित्रा ें में संया ेजन विधियों का प ूर्ण ध्यान रखते हुये कहीं गहरे या तीख े रंगा ें का प ्रया ेग करता है तो कहीं हल्के व का ेमल रंगा ें का। इस विधि से अपने भावों की अभिव्यक्ति करके उसे आत्म-संता ेष मिलता ह ै। एक कृति अपने भीतर छुपे ह ुये अनेक आयामों का
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ज्योति, ढोल े. ""विश्वविद्यालयीन विद्यार्थिया ें म ें पर्या वरण जागरूकता: एक अध्ययन"". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–4. https://doi.org/10.5281/zenodo.881961.

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Abstract:
आज हम 21वीं सदी म े प्रव ेष कर च ुके है, जिसम ें विज्ञान आ ैर प्रा ैद्योगिकी एक महत्वप ूर्ण भूमिका निभा रहे ह ै। इस प्रगति न े जहां एक आ ैर ब्रह्माण्ड के अन ेक रहस्या ें को सुलझाया ह ै । वही द ूसरी और मानव का अन ेकान ेक सुख सुविधाए ं प्रदान की है। इन मानवीय प्रगति एव ं विकास म े पर्यावरण तो सद ैव सहायक रहा है, परन्त ु इस विकास की दौड ़ मे हमन े पर्यावरण की उप ेक्षा की आ ैर उसका अनियन्त्रित शोषण किया ह ै। तात्कालिक लाभा ें के लालच मे मानव न े स्वयं अपन े भविष्य को दीर्घ कालीन संकट मे डाल दिया है। परिणामस्वरूप जीवन क े स्त्रोत पर्यावरण का अवनयन होता जा रहा है। इसी परिप ेक्ष्य मे यह परियोजना कार्
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