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Journal articles on the topic 'पेशकार'

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Singh, Dr Deep Shikha. "Ancient and New Playing Style of the Punjab Gharana of Tabla: A Brief Discussion." International Journal of Multidisciplinary Research Configuration 1, no. 3 (2021): 67–79. http://dx.doi.org/10.52984/ijomrc1312.

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Abstract:
प्रस्तुत शोध पत्र के अन्तर्गत तबले के पंजाब घराने में प्रचलित वादन शैली व वर्तमान में विशेष रूप से उस्ताद अल्लारखा खां जी द्वारा किये गये विभिन्न बंदिशों जैसे-पेशकार, कायदे, क्लिष्ट तिहाईया, संगत हेतु कठिन रचनाओं द्वारा विकसित नवीन वादन शैली पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। इसके अन्तर्गत पंजाब घराने की वादन शैली में किन-किन वंदिशों का समावेश था विशेष रूप से दीपचंदी अंग की बंदिशें, लमक्षण, कायदें, बढैया की गते, रेले, गते इत्यादि का संक्षिप्त विवेचन प्रस्तुत किया गया है व निष्कर्ष रूप में तबले की पंजाब घराने की प्राचीन व नवीन वादन शैली के संयोग से विकसित वादन शैली को दर्शाने का प्रयास किया
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द्विजेश, उपाध् याय, та मकुेश चन्‍द र. पन डॉ0. "तबला एवंकथक नृत्य क अन् तर्सम्‍ बन् धों का ववकार्स : एक ववश् ल षणात् मक अ्‍ ययन (तबला एवंकथक नृत्य क चननांंक ववे ष र्सन् र्भम म)". International Journal of Research - Granthaalayah 5, № 4 (2017): 339–51. https://doi.org/10.5281/zenodo.573006.

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Abstract:
तबला एवांकथक नृत्य ोनन ताल ्रधाान ैं, इस कारण इनमेंसामांजस्य ्रधततत ैनता ै। ूरवव मेंनृत्य क साथ मृो ां की स ां त ैनतत थत ककन्तुबाो म नृत्य मेंजब ्ृां ािरकता ममत्कािरकता, रांजकता आको ूैलुओांका समाव श ैुआ तन ूखावज की ांभतर, खुलत व जनरोार स ां त इन ूैलुओांस सामांजस्य नै ब।ाा ूा। सस मेंकथक नृत्य क साथ स ां कत क कलए तबला वाद्य का ्रधयन ककया या कजस मृो ां (ूखावज) का ैत ूिरष्कृत एवां कवककसत प ू माना जाता ै। तबला वाद्य की स ां त, नृत्य क ल भ सभत ूैलुओांकन सैत प ू में्रधस्तुत करन मेंस ल साकबत ैु। कथक नृत्य की स ां कत में ूररब बाज, मुख्यत लखन व बनारस ररान का मैत् वूरणव यन ोान रैा ै। कथक नृत्य की स ां कत
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शाही Shahi, शारदाकुमारी Sharada Kumari. "दलियकरणको प्रभावमा शिक्षण पेशाः एक विश्लेषण". Journal of Educational Research and Innovation 4, № 1 (2024): 197–205. https://doi.org/10.3126/jeri.v4i1.75823.

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Abstract:
शिक्षण संस्था भित्र राजनीति दलका भातृ संघ संगठनका कारण शिक्षक वा प्राध्यापकहरू आपसमा विभाजित भएको अवस्थामा शिक्षण पेशा अमर्यादित बनेको छ । शिक्षक र शिक्षण पेशालाई हेयको दृष्टिले हेर्ने अवस्था आएको छ। शिक्षण पेशामा युवाको आकर्षण छैन । यो अवस्था सृजना हुनमा शिक्षण संस्था भित्र दलिय राजनीतिको भूमिका छलफल गर्ने हेतुले यो लेख तयार गरिएको छ। यसका लागि शिक्षण पेशामा संलग्न र शिक्षण पेशालाई नजिकबाट निआलेका व्यक्तिका लेखन कार्यको अध्ययन वा पुनराबलोकन गरिएको छ । साथै लेखक विगत पन्ध्र बर्षदेखि सुर्खे त बहुमुखि क्याम्पस र दश बर्षदेखि मध्य पश्चिम विश्व विद्यालयमा आंशिक प्राध्यापकको रूपमा कार्यरत हुदा प्रत्
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Srivastawa, Yogesh Kumar, та Rajesh Kumar Tripathi. "शिक्षकों के दृष्टिकोण को प्रभावित करने वाले कारकों की पहचान: एक बहुआयामी अध्ययन". Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 19, № 4 (2022): 810–16. https://doi.org/10.29070/sya3xr10.

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Abstract:
शिक्षकों के दृष्टिकोण को प्रभावित करने वाले कारकों की पहचान करना एक जटिल और बहुआयामी प्रक्रिया है, जो शिक्षण और सीखने के परिणामों को गहराई से प्रभावित करती है। यह अध्ययन शिक्षकों के दृष्टिकोण पर प्रभाव डालने वाले सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, पेशेवर, और संस्थागत कारकों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों से प्राप्त डेटा का उपयोग करते हुए, शोध में प्रश्नावली, साक्षात्कार, और अवलोकन जैसी विविध विधियों के माध्यम से जानकारी एकत्रित की गई। निष्कर्षों से पता चलता है कि शिक्षकों का दृष्टिकोण मुख्यतः उनके कार्य वातावरण, पेशेवर विकास के अवसर, समाज से मिलने वाली मान्यत
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Gurjar, Chatar Singh. "Carrier castes of folk songs and commercial songs." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 9, no. 7 (2022): 31–34. http://dx.doi.org/10.53573/rhimrj.2022.v09i07.008.

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Abstract:
There are some castes in Rajasthan who make their living by singing folk songs. These professional singers get neg in return by singing occasion-specific songs at specific host castes. Dhadhi, Dholi, Manganiyar, Langa etc. are prominent among professional singer castes. These singers mainly sing more love based songs. The beautiful combination of song and music is mesmerizing. The main feature of these songs is the poignant portrayal of love in ragas like Mand, Sorath, Maru, etc.
 Abstract in Hindi Language:
 राजस्थान में कुछ ऐसी जातियाँ हैं, जो लोकगीत गाकर अपना गुजर-बसर करती हैं। ये
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Dhiman, Utkarshi, Dr Anu Devi, Dr Manoj Dhiman, Mrs Meenakshi та Mrs Binnu Pundir. "ग्राफिक डिज़ाइन में फ्रीलांसिंगः चुनौतियाँ और अवसर". INTERNATIONAL JOURNAL OF SCIENTIFIC RESEARCH IN ENGINEERING AND MANAGEMENT 09, № 07 (2025): 1–8. https://doi.org/10.55041/ijsrem51364.

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Abstract:
आज के डिडजटल युग मेंफ्रील ांड ांग एक ऐ क ययक्षेत्र बनकर उभर है, डज नेप रांपररक नौकररय ांकी पररभ ष क बदल डदय है। यह न के वल र जग र क एक नय म ध्यम है, बल्कि युव ओां क अपनी रुडिय ांऔर रिन त्मक क्षमत ओां के अनु र क यय करनेकी स्वतांत्रत भी प्रद न करत है। डवशेषकर ग्र डिक डिज इन जै ेरिन त्मक क्षेत्र ां में, फ्रील ांड ांग नेछ त्र ां, नव डदत डिज इनर ांऔर पेशेवर ांक डबन डक ी स्थ डनक ीम के वैडिक स्तर पर क ययकरनेक अव र डदय है। पहलेजह ाँडिज इडनांग क के वल एक ह यक भूडमक म न ज त थ , वही ांअब यह एक पूर्यक डलक, आय- ृजन करनेव ल और स्वतांत्र कररयर डवकल्प बन िुक है। डिडजटल म ध्यम ांकी पहाँि और ऑनल इन क यय ांस्कृ
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अखमेदोवा, कमोला. "हिन्दी के निपुण विशेषज्ञ:बयात रखमतोव". Oriental Renaissance: Innovative, educational, natural and social sciences 4, № 22 (2024): 77–79. https://doi.org/10.5281/zenodo.13765621.

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Abstract:
मालूम है कि उज्बेकिस्तान और भारत के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध काफी पुराने हैं। अब भी विभिन्न क्षेत्रों में मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित हो रहे हैं। ऐसे संबंधों में दोनों देशों की भाषाएं सीखना जरूरी है। उज्बेकिस्तान में 1947 से हिंदी पढ़ाई जाती है। आजकल उज्बेकिस्तान में हिन्दी भाषा के शिक्षक बहुत हैं। इनमें बयात रखमतोव का नाम प्रमुख है। रहमताव बायोत, जिनका जन्म 4 मई 1949 को हुआ। कई वर्षों तक ताशकंद राज्य प्राच्या विद्या विश्वविद्यालय (टी.एस.यू.ओ.एस.), दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई भाषाओं विभाग में हिंदी भाषा के वरिष्ठ शिक्षक रहे । उन्होंने अपने जीवन में हिंदी और उर्दू भाषा के अध्ययन और शिक्षण में महत्व
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डॉ.माने, ए. एस. "इ.स. 1761 चा पानिपत रणसंग्राम व मल्हारराव होळकर". International Journal of Advance and Applied Research 3, № 5 (2022): 170–71. https://doi.org/10.5281/zenodo.7398957.

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Abstract:
     पेशवा बाजीराव प्रथम यांच्या विस्तारवादी धोरणास पाठिंबा देणारा नवा वर्ग त्यांच्या काळात उद्यास आला होता. त्यामध्ये होळकर, शिंदे, गायकवाड, पवार इत्यादी सरदार घराणी ही उदयास आली. या सादर घरण्याचा  यश-अपयशावर मराठीशाहीचे यध-अपयश मोजले जाऊ लागले होते. याच होळकर घराण्याची पानिपत युद्धातील भूमिका हा विषय सदर संशोधन निबंधासाठी निवडण्यात आला आहे.
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राजबीर, सिंह डॉ. जितेन्द्र शर्मा. "मराठा साम्राज्य के मजबूत स्तम्म महादजी सिंधिया (1727- 1794 ई.)". International Educational Applied Research Journal 09, № 04 (2025): 32–39. https://doi.org/10.5281/zenodo.15289535.

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Abstract:
इस प्रकार महादजी सिंथिया का जीवनकाल उत्साहपूर्ण कार्यशीलता का लन्चा समय हैं। महादजी महान् राजनीतिज्ञ दुरदर्शिता से सम्पन्न चतुराई एवं रणनीति में कुशल थे। पेशवा परिवार को प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने में महादजी कभी पीछे नहीं हटते थे। रानोजी सिंथिया को पांच पुत्रों में वे सबसे योग्य पुत्र साबित हुये। उन्होंने पानीपत के युद्ध में खोई हुई मराठा प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त किया। निर्वासित मुगल बादशाह को दिल्ली की गद्दी पर बैठाया। इसके अलावा उन्होंने अपने सीमित साधनों का सफलतापूर्वक प्रयोग करके एक छोटी किन्तु प्रशिक्षित सेना तैयार की जिसके वन पर उसने उत्तर भारत को उन क्षेत्रों को जीता जो उन्होंने पा
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आचार्य मनीष जी, आचार्य मनीष जी, डॉ अभिषेक डॉ. अभिषेक ., डॉ जयंत बत्रा डॉ. जयंत बत्रा та डॉ गितिका चौधरी डॉ. गितिका चौधरी. "यकृतोत्पत्ति की अवधारणा की व्यवस्थित समीक्षा". International Journal of Physical Education & Sports Sciences 18, № 1 (2024): 7–11. http://dx.doi.org/10.29070/hjc9we22.

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Abstract:
आयुर्वेद शारीर अवयव उत्पत्ती और रचनासे निगडित विभाग है.आधुनिक शास्त्र मे भ्रूण विज्ञान के रूप में भी जाना जाता है, अध्ययन का एकमात्र क्षेत्र है जो यकृत की समस्याओं के अध्ययन और निदान और उनके इलाज के सर्वोत्तम तरीके के पेशेवर निर्धारण के लिए समर्पित है। इसका लक्ष्य बीमारी में योगदान देने वाले मूलभूत तंत्र पर प्रकाश डालकर बीमारी की बेहतर रोकथाम और इलाज करना है। इसलिये यकृत निर्मिती का ज्ञान बहोत महत्व राखता हेपेटोजेनेसिस एक ऐसा क्षेत्र है जो नवीन प्रयोगात्मक, ऊतक और इमेजिंग दृष्टिकोण के उपयोग के माध्यम से यकृत स्वास्थ्य और बीमारी के कारणों की जांच करता है। यह अध्ययन उत्पत्ती के ज्ञान के साथ जिसम
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जगताप, प्रकाश. "शिक्षक व्यवसायिक सचोटी अभ्यास". SCHOLARLY RESEARCH JOURNAL FOR HUMANITY SCIENCE AND ENGLISH LANGUAGE 10, № 53 (2022): 13392–96. http://dx.doi.org/10.21922/srjhsel.v10i53.11639.

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Abstract:
शिक्षक हा समाजातील आणि राष्ट्र विकासातील एक महत्वाचा घटक आहे.म्हणून शिक्षक प्रमाणिक,इमानदार असणे आवश्यक आहे. आपल्या व्यवसाया विषयी ,पेशा विषयी उत्तरदायित्व ,बांधिलकी पार पाडणारे व्यक्तिमत्व शिक्षकाचे असावे.प्रस्तुत संशोधन लेखात शिक्षकाचे व्यवसायिक सचोटी ची सद्य स्थिती ,ग्रामीण व शहरी व शिक्षक शिक्षिका यांच्या व्यवसायिक सचोटीचा सर्वेक्षण संशोधन पद्धतीचा वापर करून शोध घेऊन निष्कर्ष काढले आहे.
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रेनू कपूर. "राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उच्च शिक्षा का स्वरूप". Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 21, № 2 (2024): 5–7. http://dx.doi.org/10.29070/3kbb4821.

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Abstract:
प्रस्तुत शोध पत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उच्च शिक्षा का स्वरूप का अध्ययन करने का प्रयास किया गया है। जब से मानव सभ्यता का उदय हुआ है, तब से भारत अपनी शिक्षा तथा दर्षन के लिये प्रसिद्ध रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देष्य उच्च षिक्षण संस्थानों की नई गुणवत्ता को स्थापित करना और आसान बनाना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति अन्तः विषय अध्यन को प्रोत्साहित करने, नये विषयों की पेशकश करने और छात्रों को नये अवसरों और लचीले पाठयक्रम विकल्पो तक पहंुच प्रदान करने पर जोड़ देती है। यह नीति उच्च शिक्षा में छात्रों को उन विषयों का चयन करने की अनुमति देती है, जो उनकी रूचियों और क्षमताओं के लिये सबसे
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सतीश, पाटीलबा चव्हाण. "डॉ. रखमाबाई राऊत यांच्या जीवन व कार्याचा परिचय सन १८६४ ते १९५५". 'Journal of Research & Development' 15, № 13 (2023): 196–97. https://doi.org/10.5281/zenodo.8149676.

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Abstract:
इंग्रजांचे भारतातील आगमन, ईस्ट इंडिया कंपनीची स्थापना व इंग्रजाची भारतात सत्ता स्थापन होणे, हे भारतियांसाठी विविध पैलूणी महत्वपूर्ण होते. इ.स. १८१८ मध्ये पेशवाई सत्तेचा अस्त झाला आणि ब्रिटीशांची राजवट महाराष्ट्रात सुरू झाली. यातून महाराष्ट्रात अनेक बाबतीत बदलाव घडून आले. परंतू या काळात महाराष्ट्रातील सामाजिक स्थिती, धार्मिक घटक व स्त्रियांचे समाजातिल स्थान आणि महत्व मात्र दयनीय स्थितित होते. यामुळे आगरकर यांनी महाराष्ट्राच्या सामाजिक गतिशून्य अवस्थेवर टिका केल्याचे दिसून येते. ज्या काळात समाजव्यवस्थेवर धर्म, जातीभेद, अस्पृश्यता, बालविवाह, बहुपत्नीत्व, सतीप्रथा, सक्तीचे वैधत्व आणि पुरुष प्रधान
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विक्रम, मोबारसा. "आजीवन शिक्षा और सामुदायिक विकास में पुस्तकालयों की भूमिका". International Journal of Innovative Research and Creative Technology 10, № 3 (2024): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.12513945.

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Abstract:
अमूर्तपुस्तकालय शिक्षा और सामुदायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह समीक्षा पत्र उच्च शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल पुस्तकालयों के विकास के संदर्भ में पुस्तकालयों की भूमिका का विश्लेषण करता है। उच्च शिक्षा में, पुस्तकालय सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के माध्यम से डिजिटल पुस्तकों, शोध पत्रों और अन्य संसाधनों को सुलभ बनाते हैं, जिससे अध्ययन और शोध अधिक प्रभावी हो जाते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी ने पुस्तकालयों को डिजिटल संसाधन प्रदान करने में सक्षम बनाया है, जिससे ज्ञान की पहुँच व्यापक हो गई है। सामुदायिक विकास में, डिजिटल पुस्तकालय सामुदायिक केंद्र के रूप में कार्य कर सकते हैं
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सूर्य, प्रकाश राठौर, та संगीता माथुर प्रो.(डॉ.). "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में व्यावसायिक शिक्षा की उपादेयता". INTERNATIONAL EDUCATION AND RESEARCH JOURNAL - IERJ 11, № 1 (2025): 167–69. https://doi.org/10.5281/zenodo.15599870.

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Abstract:
1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में तकनीकि और व्यावसायिक शिक्षा के पक्ष में लगातार वृद्धि हो रही थी। यह महसूस किया गया है कि यदि देश का विकास होना है और जनता के जीवन स्तर को ऊपर उठाना है, तो व्यावसायिक शिक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान किया जाना चाहिए। शिक्षा का लक्ष्य नागरिकों में जनतांत्रिकता, उत्तरदायित्व, कार्यकुशलता, निर्णय लेने की क्षमता, आधुनिकता और वैज्ञानिकता पैदा करना होता है। वर्तमान में, केवल 7 से 10ः आबादी औपचारिक क्षेत्र में भाग लेती है, व्यावसायिक शिक्षा के विकास से अनौपचारिक क्षेत्र में एक प्रशिक्षित श्रम बल की पेशकश होगी, जिससे उत्पादकता में वृद्धि होगी। उभरती प्रौद्योग
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मौसमी, पाल. "कामकाजी महिलाएं और चिंताः एक अवलोकन". RECENT EDUCATIONAL & PSYCHOLOGICAL RESEARCHES (ISSN: 2278-5949) 12, № 2 (2023): 13–16. https://doi.org/10.5281/zenodo.8150579.

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Abstract:
माँ पत्नी होने और घरेलू आय में योगदान देने जैसी पारंपरिक भूमिकाओं को पूरा करने के लिए महिलाओं से सामाजिक अपेक्षाएँ रखी जाती हैं। उन्हें अपने अन्य कर्तव्यों के साथ.साथ अपने व्यावसायिक विकास के प्रबंधन के कार्य का सामना करना पड़ता है। ऐसा प्रतीत होता है कि कामकाजी महिलाओं के सामने आने वाले दायित्वों में कुछ ओवरलैप हो सकता है। नतीजतन कामकाजी महिलाएं अक्सर अपनी पारंपरिक भूमिकाओं के अलावा अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों की मांगों के कारण चिंता का अनुभव करती हैं। कामकाजी महिलाओं के लिए घर और अपने कार्यस्थल के दायित्वों के बीच एक स्वस्थ संतुलन बनाए रखना एक आवश्यक जिम्मेदारी है। यह कठिन उपक्रम कामकाजी महिला
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महला, अरविंद कुमार, та कीर्ति पारीक. "महामारी के दौरान विद्यालय शिक्षकों की पारिवारिक, आर्थिक और सामाजिक स्थितिः ऑनलाइन शिक्षा, उत्पन्न अवसरों और भविष्य की संभावनाओं का अध्ययन". International Journal of Education, Modern Management, Applied Science & Social Science 07, № 01(I) (2025): 61–73. https://doi.org/10.62823/ijemmasss/7.1(i).7224.

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Abstract:
यह अध्ययन कोविड-19 महामारी के दौरान विद्यालय शिक्षकों की पारिवारिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर पड़े प्रभावों का विश्लेषण करता है। महामारी के कारण विद्यालयों के बंद होने और ऑनलाइन शिक्षा को अपनाने की आवश्यकता ने शिक्षकों के व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाए। इस शोध में 150 शिक्षकों का चयन किया गया और डेटा संग्रह के लिए स्वयं-निर्मित प्रश्नावली तथा पॉंच-बिंदु वाली लाइकरट स्केल का उपयोग किया गया। अध्ययन में पाया गया कि महामारी के दौरान डिजिटल संसाधनों की कमी, इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्याए और ऑनलाइन शिक्षण की जटिलताओं के कारण शिक्षकों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आर्थिक
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Shrees, Min Bahadur. "भेजा : मगर जातिको प्रथाजनित प्रणाली". Indigenous Nationalities Studies आदिवासी जनजाति अध्ययन 3, № 3 (2025): 43–57. https://doi.org/10.3126/ins.v3i3.80689.

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Abstract:
मगर जातिको परम्परागत प्रमुख संस्था ‘भेजा’ लाई भेजा, गुठ, तिसर, झोम्जे वा गुठी को नामले पनि चिनिन्छ । कृषि युगको प्रारम्भमा मगर जातिका स–साना पारिवारिक झुण्डहरूले पशुपालनका साथै खोरिया खेती प्रणाली अपनाएर जीवन निर्वाह गर्ने क्रममा रीतिथिति बसाल्ने र समूहको व्यवस्थापन गर्ने उद्देश्यले प्रथाजनित संस्था भेजा स्थापना गरेको मानिन्छ । नेपाली इतिहासको मध्यकालसम्म मगरातमा भेजाले परम्परागत शासन व्यवस्थाको भूमिका निर्वाह गर्दथ्यो । खस साम्राज्यको विस्तारसँगै भेजाको राजनीतिक भूमिका सीमित हुँदै गएर नेपाल एकिकरण पश्चात सामाजिक र सांस्कृतिक भूमिकामा मात्र क्रियाशिल हुन पुग्यो । एकीकरण पछिको उमरा÷मुखिया तथा २
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Sharma, Har Sahai. "Social Media: An Effective Weapon for the Youth Generation." RESEARCH REVIEW International Journal of Multidisciplinary 9, no. 11 (2024): 110–13. https://doi.org/10.31305/rrijm.2024.v09.n11.016.

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Abstract:
Social media has impacted the lives of the youth in various ways. It has emerged as an effective weapon that not only strengthens social relationships but also provides a platform for the exchange of information, education, and professional networking. Young people now use social media to voice their opinions globally, which is bringing significant changes to their personal and professional lives. Through it, they share their ideologies, creativity, and thoughts on social issues. However, there are some negative aspects, such as the impact on mental health and time wastage. This research discu
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जतिंदर, कौर. "बैचलर ऑफ एजुकेशन (बी.एड) प्रोग्राम में फाइन आर्ट्स को शामिल करने से भावी शिक्षकों को लाभ". International Journal of Advance and Applied Research 12, № 2 (2024): 320–25. https://doi.org/10.5281/zenodo.14744210.

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Abstract:
<em>ललित कला को बैचलर ऑफ एजुकेशन (बी.एड) कार्यक्रम में शामिल करने से महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं, जो भावी शिक्षकों के पेशेवर और व्यक्तिगत विकास को समृद्ध करते हैं। ललित कला शिक्षा रचनात्मकता, नवाचार और प्रभावी संचार कौशल को बढ़ावा देती है, जिससे महत्वाकांक्षी शिक्षक आकर्षक और गतिशील पाठ तैयार कर पाते हैं। यह भावनात्मक बुद्धिमत्ता और सहानुभूति को बढ़ाता है, जिससे शिक्षकों को अपने छात्रों की सामाजिक और भावनात्मक जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने और उनका समर्थन करने में मदद मिलती है। विविध कला रूपों के संपर्क में आने से सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ती है, जिससे शिक्षक समावेशी कक्षाओं को बढ़ावा देने के लिए तैय
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अर्चना, पांडे. "मिश्रित शिक्षा प्रणाली: एक अध्ययन". RECENT EDUCATIONAL & PSYCHOLOGICAL RESEARCHES (ISSN: 2278-5949) 12, № 1 (Jan.-Feb.-March) (2023): 69–73. https://doi.org/10.5281/zenodo.7930533.

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Abstract:
पारंपरिक कक्षा शिक्षण मूल रूप से औद्योगिक युग के दौरान भविष्य के श्रमिकों को कठोर कार्य भूमिकाओं के लिए निर्देशों का पालन करने के लिए प्रशिक्षण देने के संदर्भ में विकसित हुआ। सूचना युग में, कार्य की प्रकृति और सफल होने के लिए आवश्यक कौशल स्पष्ट रूप से भिन्न हैं। अब शिक्षार्थियों को एक पूछताछ-आधारित, स्व-निर्देशित सीखने के संदर्भ में अत्यधिक विशिष्ट जानकारी प्राप्त करने में सक्षम होना चाहिए। शिक्षार्थियों को आमने-सामने और ऑनलाइन दोनों तरह से अल्पकालिक सहयोगी समस्या-समाधान परियोजनाओं के आसपास प्रभावी ढंग से सहयोग करना सीखना चाहिए। कई उभरते हुए नए इंटरनेट संचार माध्यमों के लिए मल्टीमीडिया प्रारूप
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रेड्डी, डॉ.एम. नारायण. "कमृदुला गर्ग की कहानियों में नारी". Sahitya Samhita 9, № 10 (2023): 22–29. https://doi.org/10.5281/zenodo.10071890.

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Abstract:
प्राचीन काल की औरत से आधुनिक काल की औरत बेहतर है। पहले जिस समाज को पुरुष प्रधान समाज नाम से पहचाना जाता था,&nbsp;आज उस विचार में बहुत-कुछ बदलाव आया है। स्त्री घर के बाहर जाकर नौकरी-पेशा,&nbsp;काम-काज करने लगी है। आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन रही है। हमेशा पति के सामने हाथ&nbsp; बढ़ानेवाली स्त्री,&nbsp;दिमागी तौर पर पुरुष को ही कमजोर समझने लगी है। नया मजदूर वर्ग,&nbsp;बेकार शिक्षित युवा,&nbsp;आदि की अभूतपूर्व वृद्धि के कारण आर्थिक ढांचा एकदम बदल गया है। साहित्य में वर्तमान भारतीय समाज की आर्थिक परिस्थितियों से जन्म लेनेवाली स्त्री साठोत्तरी कहानियों में अर्थतंत्र का प्रत्यक्ष-परोक्ष प्रभाव उसका बह
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बस्याल Basyal, शान्ताकुमारी Shantakumari. "सँकटमा फीरन्ते जाति राउटे जीवनसैली". Patan Gyansagar 6, № 1 (2024): 147–56. http://dx.doi.org/10.3126/pg.v6i1.67706.

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Abstract:
राउटेहरु नेपालको लोपोन्मुख आदिबासी हुन् । नेपालको मध्यपश्चिम मध्यपस्चिम क्षेत्रमा बसोबास गर्ने यिनीहरु फिरन्तेको भेषमा जिविेकोपार्जन गर्दै आएको इतिहासले पुष्टी गरेको छ । यिनीहरु करिब ७०० बर्ष अगाडि सुदुरपश्चिमको सेती नदीको किनारदेखी प्युठानसम्मको क्षेत्रमा बसोबास गर्दै आएको इतिहासको अध्यनबाट पुष्टी भएको छ । कालिकोटको फूर्कोट क्षेत्र राउटेको उद्मगमस्थल मानिएको छ । उ बेला समुह समुहका बिचमा लडाईँ हुँदा लडाइँमा हार खाएर लुक्न जँगल पसेका उनीहरू आफूलाई कर्णाली प्रदेशको राजा खस ठकुरी मान्दछ्न । मुलथलो कालिकोट भएपनि अहिले राउटेहरु विभिन्न जिल्लामा छरिएर बसेका छन् । अहिले उनीहरू दैलेख, जाजरकोट, सुर्खेत
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Shrestha, Omkaresvora. "Sub-caste of Jalamis जलमिहरूको कुनां". Historical Journal 13, № 1 (2022): 28–38. http://dx.doi.org/10.3126/hj.v13i1.46220.

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Abstract:
हरिसिद्धिका वासिन्दालाई नेपालभाषामा ‘जलमि’ भनिन्छ । जलमीहरूको जनसंख्याको ९९ प्रतिशत मानिसहरू ज्यापु जातिका छन् । जनबोलीमा ज्यापु भनिने महर्जनहरू नेपाल उपत्यकाका आदिवासी हुन्, जसले समग्र नेवार जनसंख्याको आधाभन्दा बढी संख्या ओगटेको विश्वास गरिन्छ । उपत्यकाका तीन प्रमुख शहरहरूका साथै अरू ३९ वस्तीहरूमा नेवारहरूको उपस्थिति रहेको छ । यस अध्यायमा जलमिहरूका कुनांको बारेमा केन्द्रित छ । कुनां भन्नाले अंग्रेजीको Totem सित मिल्दोजुल्दो देखिन्छ, नेपाली खस समाजको उपथर भन्न अलि गाह्रो छ । यसभित्र मानिसको पेशा, शरीरको आकृति, स्वभाव, बानीव्यहोरा, स्थाननामबाट प्रेरित भएर राखिएका विशेषणवाची नामहरू छन् । खस समाज
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कुमार, नितेश. "पश्‍चिम चम्‍पारण जिला के थारू जनजाति की व्‍यावसायिक संरचना एवं संविकास : एक भौगोलिक विश्‍लेषण". Journal of Research & Development 16, № 2 (2024): 131–35. https://doi.org/10.5281/zenodo.10863415.

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Abstract:
<strong>सरांश:&nbsp; </strong> आर्थिक स्थिति विकास का महत्&zwj;वपूर्ण पक्ष है जिसका निर्धारण किसी व्&zwj;यक्ति या समाज के कार्यस्&zwj;वरूप, आय, उपभोग व्&zwj;यय तथा जीवन स्&zwj;तर के आधार पर किया जाता है। किसी समाज में विकास के साथ आर्थिक क्रियाकलापों का स्&zwj;वरूप भी परिवर्तित होता है। थारू एक कृषक जनजाति है, जिसमें, आखेट एवं संग्रहण के गुण भी दृष्&zwj;यगत है। परन्&zwj;तु वर्तमान में समाज में कृषि के तकनीकीकृत स्&zwj;वरूप तथा द्वितीयक, तृतीयक एवं चतुर्थक क्रियाकलापों की तरफ बढ़ती रूचि स्&zwj;पष्&zwj;ट दृष्टिगोचर है। मनुष्यों द्वारा किये जाने वाले वैसे वैध आर्थिक क्रिया&mdash;कलापों को व्यवसाय
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Poonam and Tripuresh Tripathi. "Tatya Tope and Kanpur in the 1857 War of Independence." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 11, no. 1 (2024): 118–22. http://dx.doi.org/10.53573/rhimrj.2024.v11n1.020.

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Abstract:
Till 1857, people were unfamiliar with the name of Tatya Tope. But the dramatic events of 1857 suddenly brought him out of darkness into the light. Before the start of the First War of Independence, he was only a companion of Raja Nana Saheb of Bithoor, the eldest son of the deposed Bajirao II, but after Kanpur joined the War of Independence, Tatya reached the position of Commander-in-Chief of the Peshwa's army. All the events of the subsequent wars raised his name to the forefront like a comet, which left a long line of light behind it. His name became famous not only in the country but also
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राम, निवास, та ए. के नौटियाल डा. "बी‐एड‐छात्राध्यापकों की शिक्षण सक्षमता एवं सृजनात्मक शिक्षण अभिवृत्ति के मध्य सम्बन्ध का अध्ययन". International Journal of Research - Granthaalayah 5, № 7 (2017): 587–97. https://doi.org/10.5281/zenodo.841156.

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Abstract:
राष्ट्रीय विकास के लिए मानवीय संसाधन को उपयोगी बनाने में अध्यापकों की अहम् भूमिका है। कक्षागत् क्रियाकलापों के लिये अध्यापक अनेक शिक्षण युक्ति एवं विधियाँ प्रयोग करता है। वर्तमान में गुणात्मक शिक्षा उपलब्ध कराने पर अधिक बल दिया जा रहा है। शिक्षण में सृजनात्मक अभिवृत्ति छात्रों की रचनात्मकता को पोषित करती है। जिससे वे उपलब्ध भौतिक एवं मानवीय संसाधनों का समुचित प्रयोग करके संतोषजनक परिणामों को सुनिश्चित किया जा सकता है। यशपाल समिति (1992), ने शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में छात्राध्यापकों के स्वतंत्र चिंतन व स्व-अधिगम क्षमता के विकास पर मुख्य जोर दिया। उत्तम स्तर के शिक्षण संस्थानों को स्थापित कर
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अजय, मोहन सेमवाल, та सी0 पचैरी एस0. "विद्या भारती शिक्षा एक सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक घटना के रूप में". RECENT EDUCATIONAL AND PSYCHOLOGICAL RESEARCHES 12, № 4 (2023): 38–46. https://doi.org/10.5281/zenodo.10468709.

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Abstract:
जीवन की गुणवत्ता पर नए दृष्टिकोण और विचारों के विकास को समकालीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ व्यापार, व्यवसाय, कृषि, संचार और नेटवर्किंग के विकास से सहायता मिली है। इसके प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में, मनुष्य अपने प्रागैतिहासिक स्वरूप से काफी विकसित हुआ है। वह खुद को कई स्थितियों में रख रहा है जहां भौतिक विकास और सौभाग्य की संभावना है। दुनिया भर में, समाज अब संकट की स्थिति में है। यह तथ्य कि लोग अभी भी इस धरती पर मौजूद हैं, असहनीय रूप से भयानक है। इसके कारण, जीवन में विश्वास और टीम वर्क की कमी हो गई है, खुशी का स्तर गिर गया है और जीवन के प्रति वास्तविक उत्साह गायब हो गया है। नैतिक चरित्र, म
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Niwas, Ram, and A. K. Nautiyal. "Study of the relation between teaching ability of B.Ed. teachers and creative teaching aptitude." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 5, no. 7 (2017): 587–97. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v5.i7.2017.2166.

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Abstract:
Teachers have an important role in making human resources useful for national development. The teacher uses many teaching methods and methods for classroom activities. Presently more emphasis is being laid on providing qualitative education. Creative aptitude in teaching nurtures students' creativity. By which they can be used to ensure available physical and human resources and ensure satisfactory results. The Yashpal Committee (1992), laid the main emphasis on the development of independent thinking and self-learning capacity of the students in the teacher training program. Teaching skills c
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धुर्वे, माधवी बापुराव. "साइबर अपराध तथा पेशेवर सामाजिक कार्य हस्तक्षेप". Gurukul International Multidisciplinary Research Journal, 14 квітня 2025. https://doi.org/10.69758/gimrj/2503i3iivxiiip0057.

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Abstract:
साइबर अपराध (Cyber Crime) वह एक ऐसी गतिविधि या अपराध होते हैं जिनका प्रयोग कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल या अन्य डिजिटल तकनीकों का उपयोग मान्य कानून का उल्लंघन हेतु किया जाता हैं। इन अपराधों में आंकडों की चोरी (Data Theft), जानकारी में फेरबदल (Data Alteration), जानकारी को नष्ट करना (Data Destruction), हैकिंग (Hacking), वित्तीय धोखाधड़ी(Financial fraud), पहचान की चोरी(Identity Theft), ऑनलाइन उत्पीड़न(Online Harassment), स्पैम या वाइरस (Spam and Virus) की मदद सेसिस्टम की सुरक्षा को खंडित करना(Dismantling security), साइबर फिशिंग (Cyber Phishing), साइबर बुलीइंग (Cyber Bullying), डाटा चोरी(Data Theft),
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अहमद, रहीस, та विश्वनाथ पांडे. "एक व्यावसायिक विकल्प के रूप में उद्यमिता". International Journal of Reviews and Research in Social Sciences, 30 червня 2024, 117–24. http://dx.doi.org/10.52711/2454-2687.2024.00020.

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Abstract:
इस लेख का उद्देश्य उद्यमिता को एक व्यावसायिक विकल्प के रूप में मानना और व्यवसायों के विभिन्न रूपों के बीच प्रवाह को समझना है। पेशेवर रूप से सक्रिय लोग पेशेवर व्यवसाय के विकल्प के रूप में अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने या वेतन पर रोजगार ढूंढने का निर्णय ले सकते हैं। मुख्य अंतर यह है कि एक उद्यमी विफलता के जोखिम के साथ उद्यमशीलता लाभ कमाता है, जबकि एक नियोजित व्यक्ति प्राप्त करता है। जोखिम मुक्त पारिश्रमिक पेशेवर गतिविधि के रूप का चुनाव दोनों रूपों के आकर्षण की धारणा पर निर्भर करता है, जो लोग उद्यमशीलता के मुनाफे को श्रमिकों के वेतन से अधिक फायदेमंद मानते हैं। वे वेतनभोगी कर्मचारियों की तुलना में
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-, दीपा शुक्ला, та वन्दना चतुर्वेदी -. "सर्वेक्षण माध्यमिक विद्यालय के अध्यापकों का आई. सी. टी. प्रति जागरूकता एवं शिक्षण में प्रभावशीलता का अध्ययन". International Journal For Multidisciplinary Research 6, № 2 (2024). http://dx.doi.org/10.36948/ijfmr.2024.v06i02.15278.

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Abstract:
यह शोध पत्र माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जागरूकता और शिक्षण प्रभावशीलता पर इसके प्रभाव की जांच करता है। अध्ययन निम्नलिखित शोध प्रश्नों द्वारा निर्देशित है: माध्यमिक स्तर के शिक्षकों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के बारे में जागरूकता का स्तर क्या है? शिक्षकों के बीच शिक्षण प्रभावशीलता का स्तर क्या है? आईसीटी के बारे में जागरूकता के विभिन्न स्तरों वाले शिक्षकों के बीच शिक्षण प्रभावशीलता में क्या अंतर मौजूद हैं? समस्या कथन माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों में आईसीटी जागरूकता और शिक्षण प्रभावशीलता का पता लगाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। उद्देश्यों में शि
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सिंह, मनोज कुमार. "शिक्षक शिक्षा में शिक्षक और व्यावसायिकता का व्यावसायिक विकास". SCHOLARLY RESEARCH JOURNAL FOR INTERDISCIPLINARY STUDIES 9, № 71 (2022). http://dx.doi.org/10.21922/srjis.v9i71.10219.

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Abstract:
व्यावसायिकता और व्यावसायिक विकास एक पेशे की विशिष्ट विशेषताएं हैं, हालांकि परस्पर संबंधित हैं। आधुनिक युग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रगति ने हर पेशे को अपने चरम स्तर पर बदल दिया है। एक पेशे के रूप में अध्यापन भी उसी के अनुरूप फला-फूला। शिक्षकों से छात्रों, अभिभावकों और समाज की अपेक्षा उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसलिए प्रभावी कौशल और दक्षता वाले शिक्षकों को तैयार करने के लिए, अच्छे पेशेवर प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। अपने अध्ययन में हमने शिक्षकों के व्यावसायिकता और व्यावसायिक विकास और उनके सत्यापन को प्रभावित करने वाले कारकों की स्पष्ट अवधारणा बनाने पर ध्यान केंद्रित किया
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कुमार नायर, अनिल, та सोनल चौधरी. "ग्रामीण उद्यमिता विकास संबंधी आर्थिक योजनाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन (मध्यप्रदेश के विशेष संदर्भ मे)". International Journal of Advances in Social Sciences, 22 вересня 2023, 181–84. http://dx.doi.org/10.52711/2454-2679.2023.00027.

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Abstract:
उद्यमिता एक कौशल दृष्टिकोण एवं कार्यपद्धति है। साधारणतया उद्यमी को उसके कार्यों से ही परिभाषित किया जाता है। उद्यमी वह व्यक्ति है जो कुछ विशेष कार्य (उद्योगों, व्यवसाय, व्यापार सेवा) करने के लिये विचारों को जन्म देता है और उन विचारों केा क्रियान्वित करने के लिये अपनी तरफ से निश्चित तौर पर पहल और आत्मबल दिखाता है। जिससे यह विचार एक उद्यमशील कार्य का रूप धारण कर सके। राष्ट्र के आर्थिक विकास को बढ़ाने हेतु ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिये ग्रामीण उद्यमिता के अंतर्गत अनेक वर्ग पेशेवर संस्थाएं नियोजक वर्ग प्रवर्तक मिलकर उद्यमी का कार्य करते हैं।
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-, KM REEMA SINGH, та Dr Manoj Kumar -. "भारत में लड़कियों की शिक्षा की स्थिति". International Journal For Multidisciplinary Research 5, № 3 (2023). http://dx.doi.org/10.36948/ijfmr.2023.v05i03.3468.

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Abstract:
लड़कियों की शिक्षा भारत के लिए सामाजिक और आर्थिक रूप से विकसित होने का बहुत बड़ा अवसर है। शिक्षित बालिकाएं वह हथियार है जो घर और पेशेवर क्षेत्रों में अपने योगदान के माध्यम से भारतीय समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालती है वे देश के साथ-साथ समाज में बेहतर अर्थव्यवस्था का कारण है इस पत्रिका का उद्देश्य है कि भारत में लड़कियों की शिक्षा की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों पर जोर देना। भारत में लड़कियों की शिक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए संभावित सुझाव देना। इस अध्ययन को संचालित करने के लिए विभिन्न प्रकार के लेख, रिपोर्ट शोध पत्र , पुस्तकें, आधिकारिक वेबसाइट और आनलाइन सामग्री का उपयोग किया गया है।
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Sukhadeve, Rakeshkumar, та Raju Mahadev Raut. "एस्ट्रोटर्फ मैदान तथा मिट्टी के मैदान पर अभ्यास करनेवाले हाॅकी खिलाड़ियों की मांसपेशिय शक्ति, समन्वय योग्यता एवं हाॅकी कौशल". ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 5, № 7 (2024). https://doi.org/10.29121/shodhkosh.v5.i7.2024.4402.

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Abstract:
परिवर्तन पारंपरिक घास के मैदानों से सिंथेटिक एस्ट्रो टर्फ सतहों पर संक्रमण है। इस बदलाव ने न केवल खेल के खेलने के तरीके को बदल दिया है, बल्कि खिलाड़ियों पर रखी गई शारीरिक और तकनीकी मांगों को भी प्रभावित किया है। एस्ट्रो टर्फ, अपनी तेज़ गेंद की गति, सुसंगत सतह और कम घर्षण के साथ, अंतर्राष्ट्रीय और पेशेवर प्रतियोगिताओं के लिए मानक बन गया है। हालाँकि, कई क्षेत्रों में, विशेष रूप से जमीनी स्तर पर, पारंपरिक घास के मैदान आर्थिक और बुनियादी ढाँचे की बाधाओं के कारण प्राथमिक प्रशिक्षण और खेल की सतह बने हुए हैं। यह असमानता इस बारे में महत्वपूर्ण प्रश्न उठाती है कि विभिन्न खेल सतहें खिलाड़ियों की शारीरिक वि
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Arti Gupta та Sanjay Pal. "राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षक उत्तरदायित्व: एक विश्लेषण". ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 4, № 2 (2023). https://doi.org/10.29121/shodhkosh.v4.i2.2023.5614.

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Abstract:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 भारत के शैक्षिक परिदृश्य में एक परिवर्तनकारी बदलाव का प्रतीक है, जिसका लक्ष्य देश की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी के वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है। इस नीति के केंद्रीय स्तंभों में से एक परिवर्तन के प्रमुख एजेंट के रूप में शिक्षकों की बढ़ी हुई भूमिका और जिम्मेदारी है। यह शोध पत्र शिक्षक जिम्मेदारियों, शैक्षणिक दृष्टिकोण और पेशेवर विकास पर एनईपी 2020 के प्रभावों की जांच करता है। यह विश्लेषण करता है कि कैसे नीति प्रशिक्षण, स्वायत्तता, जवाबदेही और प्रणालीगत समर्थन के माध्यम से शिक्षकों को सशक्त बनाने की कल्पना करती है और विभिन्न शैक्षिक स्तरों पर इन सुधारों को
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Sharma, Seema Kaushik, та Rajendra Lal. "खेलों में सोशल मीडिया की विषय-वस्तु का विश्लेषण". ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 2, № 2 (2021). https://doi.org/10.29121/shodhkosh.v2.i2.2021.5111.

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Abstract:
सोशल मीडिया आज वैश्विक रूप से हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है और खेल जगत भी इससे अछूता नहीं है। आधुनिक सूचना तकनीक ने खेल उद्योग में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिए हैं। फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, ट्विटर, लिंक्डइन, पिंटरेस्ट, स्नैपचैट और गूगल+ जैसे विभिन्न वेबसाइट्स और मोबाइल एप्लिकेशन खेलों से संबंधित जानकारी और आँकड़े साझा करने में विशेष रूप से सहायक रहे हैं। कॉलेज और पेशेवर खेल विपणन टीमें लंबे समय से दृश्य मीडिया की शक्ति का उपयोग कर रही हैं ताकि मैदान पर हो रही घटनाओं को छोटे पर्दे पर दिखाया जा सके, जिससे प्रशंसकों को प्रेरणा मिले, खेलों में अधिक दर्शक जुटें और भीड़ का जोश
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Panwar, Shubham, та Bindu Singh. "अनुदानित तथा प्राइवेट बी.एड.सस्थानों में कार्यरत शिक्षकों की जीवन सन्तुष्टि का तुलनात्मक अध्ययन". ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 5, № 1 (2024). https://doi.org/10.29121/shodhkosh.v5.i1.2024.5372.

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Abstract:
शिक्षकों की जीवन संतुष्टि न केवल उनकी व्यक्तिगत भलाई से संबंधित है, बल्कि यह उनकी पेशेवर दक्षता, शिक्षण गुणवत्ता और शिक्षार्थियों के समग्र विकास पर भी गहरा प्रभाव डालती है। प्रस्तुत शोध अध्ययन का उद्देश्य अनुदानित (सरकारी सहायता प्राप्त) एवं प्राइवेट (निजी) बी.एड. संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों की जीवन संतुष्टि के स्तर का तुलनात्मक विश्लेषण करना है। यह अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि शिक्षकों की जीवन संतुष्टि को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में वेतन, नौकरी की सुरक्षा, कार्य परिवेश, सामाजिक मान्यता, कार्य-जीवन संतुलन, एवं करियर की प्रगति की संभावनाएं प्रमुख हैं। अनुदानित बी.एड. संस्थानों में का
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-, S. K. Tripathi, Pooja Pandey - та Babita Singh -. "ऊधम सिंह नगर के वित्तपोषित एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत् शिक्षकों के पारिवारिक सम्बन्धों का तुलनात्मक अध्ययन". International Journal For Multidisciplinary Research 6, № 3 (2024). http://dx.doi.org/10.36948/ijfmr.2024.v06i03.23037.

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Abstract:
ऊधम सिंह नगर में वित्तपोषित और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के पारिवारिक सम्बन्धों का अध्ययन करने से हमें इन सम्बन्धों का विश्लेषण करने का अवसर मिलता है। इस अध्ययन के माध्यम से हम समझ सकते हैं कि शिक्षकों के परिवार में सामाजिक, आर्थिक और मानसिक स्थितियों का विश्लेषण कैसे किया जा सकता है और इसका महत्व क्या है। शिक्षकों के परिवार में विभिन्न संघर्ष और संघर्षों का सामना किया जा सकता है। उनके पारिवारिक सम्बन्ध उनके काम के साथ संतुलित नहीं हो सकते हैं, खासकर जब शिक्षक अत्यधिक कार्यभार और दबाव के अधीन होते हैं। यह उनके परिवारिक जीवन को प्रभावित कर सकता है और उनके संघर्षों को बढ़ा
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Anjum, Shabana. "भारतीय महिला की शैक्षिक स्थिति: एक ऐतिहासिक अध्ययन". ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 4, № 1 (2023). https://doi.org/10.29121/shodhkosh.v4.i1.2023.4901.

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Abstract:
लड़कियों की शिक्षा भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा अवसर है। शिक्षित लड़कियाँ वे हथियार हैं जो अपने घर और पेशेवर क्षेत्रों में योगदान के माध्यम से भारतीय समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। वे देश और समाज में बेहतर अर्थव्यवस्था का कारण हैं। इस पत्र के उद्देश्य हैं: भारत में लड़कियों की शिक्षा की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों का मूल्यांकन करना; और भारत में लड़कियों की शिक्षा की चुनौतियों को पार करने के लिए संभावित सुझाव प्रदान करना। इस अध्ययन को करने के लिए शोधकर्ता ने विभिन्न प्रकार के लेख, रिपोर्ट, अनुसंधान पत्र, किताबें, सरकारी वेबसाइटें और ऑनलाइन सामग्री का उपयोग किया है। यह पत्
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Sharma, Seema Kaushik, та Meenakshi Anand. "जम्मू -कश्मीर की महिलाओं को सशक्त बनाने में खेलों की भूमिका". ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 4, № 1 (2023). https://doi.org/10.29121/shodhkosh.v4.i1.2023.5112.

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Abstract:
युवा खेलों के प्रति अधिक समर्पित हैं क्योंकि वे प्रसिद्ध होना चाहते हैं। खेल एक तेजी से फैलने वाला उद्योग है। बेशक, लोग आनंद के लिए खेलों में भागीदारी का चयन करते हैं, लेकिन युवा एथलीटों के लिए खेलों के बहुत सारे सकारात्मक लाभ हैं। छोटे बच्चों के लिए खेल अक्सर अधिक मनोरंजक होते हैं जब वे बिना प्रतिस्पर्धा या सफल होने के दबाव से अधिक सुखद माहौल में खेले जाते हैं। एक प्रामाणिक हथियार के रूप में महिलाओं और राष्ट्रों के बीच एक निश्चित मात्रा में सशक्तिकरण हासिल करने के लिए खेल सामाजिक परिवर्तन के लिए का उपयोग किया जा सकता है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सशक्तिकरण और भागीदारी जैसे कई सामाजिक क्षेत्रों में म
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प्रा., डॉ. शैलेश विश्वनाथ त्रिभुवन. "विधवापुनर्विवाह आणि भारतरत्न धोंडो केशव कर्वे यांचे कार्य". 29 червня 2022. https://doi.org/10.5281/zenodo.6990742.

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Abstract:
<em>प्रस्तुत शोधनिबंधात प्राचीन </em><em>,मध्ययुगीन ,शिवशाही व पेशवाई कालखंड, ब्रिटीशांचा कालखंड,आणि स्वात्तत्र्यांनंतरचा कालखंड आणि आता आताचा आधुनिक ,जागतिकीकरणाचा ,संगणक युगाचा या कालखंडातील विधवा विवाह संबंधी चर्चा केली आहे .जो प्रश्न भृणहत्या,विवाह वय, बालविवाहाच्या समस्येपासून सुरु झाला तो पुढे&nbsp; बाला &ndash; जरठ विवाह ,सतीप्रथा, विधवापुनर्विवाह , विवाह संमती कायदा आणि विधवा विवाह अशा वेगवेगळ्या स्थित्यंतरे घेत सोडवला गेला आहे आणि आजही पूर्णत: सुटलेला आहे असे नाही.&nbsp; या सर्व स्थित्यतरात भारतरत्न महर्षी धोंडो कर्वे यांचे स्त्री उद्धरांसंबधीचे तसेच प्रतिकूल परिस्थितीत त्या काळातील&n
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-, AMIT MAINI. "हरिशंकर परसाई के व्यंग्य साहित्य में सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य का अनावरण: एक सामाजिक राजनीतिक विश्लेषण". International Journal For Multidisciplinary Research 6, № 2 (2024). http://dx.doi.org/10.36948/ijfmr.2024.v06i02.14965.

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Abstract:
हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक हरिशंकर परसाई ने अपने व्यंग्यात्मक लेखों के माध्यम से एक अलग पहचान बनाई और स्वतंत्रता के बाद के भारत में हुई सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं को उजागर किया। यह सारांश एक शोध अभियान को समेटता है जिसका लक्ष्य परसाई के व्यंग्य साहित्य में व्याप्त सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करना है। शोध का लक्ष्य परसाई द्वारा नियोजित अंतर्निहित विषयों, रूपांकनों और अलंकारिक उपकरणों को समझना है, जो वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिवेश की आलोचना करते हैं। शोध भारतीय समाज और राजनीति पर परसाई के व्यंग्य की स्थायी प्रासंगिकता और प्रभाव का पता लगाने के लिए पाठ्य विश्लेषण और ऐतिहासिक संदर
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रीनू, वर्मा. "स्वतंत्रता काल : सौराष्ट्र की रियासतों के राजघरानों की महिलाओं का योगदान". 31 грудня 2022. https://doi.org/10.5281/zenodo.7509753.

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Abstract:
भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में अनेकों विचारधाराएं और वर्गों जैसें - उदारवादी, क्रांतिकारी, गाँधीवादी, महिलायें, बुद्दिजीवी, किसान, मजदूर, साथ ही रियासतों के रजवाड़ें आदि ने भारत के स्वतंत्रता हेतु महान योगदान दिया । परिणामतः हमारे देश को १५ अगस्त १९४७ को स्वतंत्रता मिली । इस स्वतंत्रता संघर्ष में जो वैश्विक तथा राजनीतिक पटल पर रहें उनके विषय व उनके योगदान की जानकारी हमें भली- भांति है। जिनमे महिलायें भी सम्मलित थी, जिनमे कस्तूरबा गाँधी, सरोजिनी नायडू, मैडम भीकाजी कामा, रानी गौडइल्यू, सुचेता कृपलानी आदि जैसी महान स्वतंत्रता सेनानी थी उसी समय काल मे मंद गति से धीरे-धीरे अप्रत्यक्ष रूप में सामाजिक
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श्रेष्ठ Shrestha, मञ्जु Manju. "अन्त्येष्टि संस्कार उद्भवकोे सन्दर्भमा नेवार अन्त्येष्टि संस्कार {The Origin of Death Rites in The Context of Newar Death Rites}". Voice of Culture, 28 листопада 2022, 1–12. http://dx.doi.org/10.3126/voc.v9i1.49844.

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Abstract:
नेवार काठमाडौं उपत्यकाको प्राचीन एवम् प्रमुख निवासी हुन् । धार्मिक दृष्टिकोणले नेवार समुदाय हिन्दू र बौद्ध दुई सम्प्रदायमा आवद्ध छन् । हिन्दूमार्गीमा ब्राह्मण, क्षेत्री, वैश्य र शुद्र चार वर्ण एवम् त्यसअन्तर्गत विभिन्न जातहरु रहेका छन् भने बौद्धमार्गीमा हिन्दूहरुको जस्तो तहयुक्त वर्ण व्यवस्था रहेको छैन तर पेशा अनुसार जाति व्यवस्था कायम भएको छ । हिन्दूमार्गीमा पुरोहितको कार्य ब्राह्मणवर्गको राजोपाध्याय र द्यःबम्र्हूद्वारा गर्दछ भने बौद्धमार्गीमा गुभाजु (वज्राचार्य) ले गर्दछ । मानव जीवनमा जन्मदेखि मरणसम्म विभिन्न संस्कारहरु सम्पन्न गरिन्छन् । जीवनको अन्त्यमा गरिने संस्कार अन्त्येष्टि संस्कार हो
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संगीता, पॉल. "जयशंकर प्रसाद की तुमुल-कोलाहलपूर्ण जीवन-गाथा". Poshampa, № 23 December 2021 (24 жовтня 2022). https://doi.org/10.5281/zenodo.7243306.

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Abstract:
<strong>संगीता पॉल</strong> हिंदी की साहित्यिक दुनिया से वास्ता रखने वाला हर व्यक्ति&nbsp; जयशंकर प्रसाद के साहित्य से परिचित है, लेकिन उनकी तुमुल कोलाहल भरी&nbsp; जीवन-कथा से हम अब तक अपरिचित रहे हैं।&nbsp; इस कमी को हाल में प्रकाशित श्यामबिहारी श्यामल का उपन्यास &lsquo;कंथा&rsquo; पूरा करता है। प्रसाद के महाप्रयाण के आठ दशक बाद&nbsp; श्यामबिहारी श्यामल की इस &#39;कंथा&#39; में प्रसाद का जीवन ही नहीं उनका पूरा युग साकार हो उठा है। छायावाद के युग प्रवर्तकों से एक जयंशकर प्रसाद अनेक विषयों एवं भाषाओं के विद्वान और प्रतिभा सम्पन्न कवि रहे हैं। वह एक कुशल कहानीकार, निबंधकार, नाटककार एवं उपन्यासका
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Uma Devi, Khuraijam. "कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याएँ". ShodhKosh: Journal of Visual and Performing Arts 3, № 2 (2022). https://doi.org/10.29121/shodhkosh.v3.i2.2022.5153.

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Abstract:
भारतीय साहित्य के परिदृश्य पर हिन्दी की सुविख्यात कथाकार कृष्णा सोबतीजी के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याओं पर प्रकाश डालने पर ज्ञात होता है। कृष्णाजी ने अपने उपन्यासों में उन तमाम परम्पराओं और निष्ठाओं की समीक्षा की है। लेखिका ने अपने उपन्यासों में ज्यादातर मध्यवगीर्य परिवार, अपनी नैतिक अवस्थाओं का चित्रण प्रस्तुत किया है। जैसे, बड़ों का सम्मान करना, लाज लिहाज रखना, सेवा सत्कार करना, अपने सतीत्व की रक्षा के लिए अपनी शक्ति भर कोशिश करना इत्यादि। यह उपन्यास की मुख्य समस्या पाशो की है। इसमें परम्पराओं और रूढ़ियों से जकड़ी ‘पाशो’ के फिसल जाने पर उसके भटकने की कहानी है। ‘पाशो’ एक बार डार से बिछुड़
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Pawar, Rajesh Barange, Pranay Chopde та (म. प्र.) मॉं ताप्ती शोध संस्थान मुलताई जिला बैतूल (म. प्र.) बैतूल. "36 गोत्र और 72 गोत्र पंवार में ऐतिहासिक तथ्य, राजेश पवार". Pawari sahitya Sarita 2023 पवारी साहित्य सरिता 2023 04 (25 листопада 2023). https://doi.org/10.5281/zenodo.13823611.

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Abstract:
<strong>मॉं ताप्ती शोध संस्थान मुलताई जिला - बैतूल (म. प्र.) </strong> दि. २५-११- २०२३ &nbsp;शुभ संदेश &nbsp;परमार कालीन संस्कृत ग्रंथ (भविष्य पुराण, भागवत पुराण, स्कंध पुराण, परसुराम संहिता, नवसहसांक, तिलक मंजिरी आदि) तथा शिलालेख (उदयपुर, कालवन, मांधाता आदि : अमरचंद मित्तल, १९७९ - "परमार अभिलेख") जो भी प्राप्त हुएं हैं उन में प्रमर, प्रमार, परमार, पवाम, पवार आदि अग्निकुंड से प्रकट शूरवीर एवं उसके वंश के नाम मिलते हैं। कहीं भी पंवार या पोवार नामक शूरवीर अग्निकुंड से उत्पन्न हुआ, ऐसा लिखा हुआ नही मिलता। जब मालवदेश में संस्कृत की जगह प्राकृत से उत्पन्न अनेक लोक भाषाओं ने ली, राजस्थानी, मारवाड़ी
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Barange, Pawar Rajesh, та Pranay Chopde. "Strong evidence of matrimonial alliances among the Pawar groups residing along the banks of the Bain Ganga and Wardha rivers. बैनगंगा तथा वर्धा तटीय पवार समुहों में वैवाहिक सम्बन्धो के पुख्ता प्रमाण Rajesh Pawar Pawari sahitya Sarita 2023 पवारी साहित्य सरिता". पवारी शोध पत्रिका,, माँ ताप्ती शोध संस्थान, मुलताई 01 (4 травня 2025). https://doi.org/10.5281/zenodo.15335904.

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Abstract:
मॉं ताप्ती शोध संस्थान मुलताई जिला - बैतूल (म. प्र.) दि. २५-११- २०२३ शुभ संदेश परमार कालीन संस्कृत ग्रंथ (भविष्य पुराण, भागवत पुराण, स्कंध पुराण, परसुराम संहिता, नवसहसांक, तिलक मंजिरी आदि) तथा शिलालेख (उदयपुर, कालवन, मांधाता आदि : अमरचंद मित्तल, १९७९ - "परमार अभिलेख") जो भी प्राप्त हुएं हैं उन में प्रमर, प्रमार, परमार, पवाम, पवार आदि अग्निकुंड से प्रकट शूरवीर एवं उसके वंश के नाम मिलते हैं। कहीं भी पंवार या पोवार नामक शूरवीर अग्निकुंड से उत्पन्न हुआ, ऐसा लिखा हुआ नही मिलता। जब मालवदेश में संस्कृत की जगह प्राकृत से उत्पन्न अनेक लोक भाषाओं ने ली, राजस्थानी, मारवाड़ी तथा स्थानीय बोलियों का प्रचार
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