Academic literature on the topic 'विष्णु पुराण'

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Journal articles on the topic "विष्णु पुराण"

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रेखा, धीमान. "मुगल कालीन रंग निर्माण -प्रक्रिया (जहाँगीर काल क े संदर्भ म ें)". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.890563.

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Abstract:
म् ुागल चित्रकला सम्प ूर्ण एषिया में स्वतंत्र आ ैर महत्वपूर्ण पहचान बनाये हुए है। तैमूर वंष की पांचवी पीढ़ी क े बाबर ने सन् 1527 में भारत के कुछ हिस्सा ें पर अपना आधिपत्य कर मुगल संस्कृति का े स्थापित किया। जिसे ह ुमा ंयू , अकबर, जहाँगीर, षाहजहँा आ ैर आ ैरंगज ेब आदि षासकों ने विस्तार दिया। इस समय सभी कलाआ ें का समुचित विकास हुआ। षाहजहँा के षासन काल तक म्ुागल कालीन चित्रकला चरम - व ैभव को प ्राप्त थी। इस पर्र इ रानी, चीनी आ ैर पष्चिमी कला ष ैली का प ्रभाव पडा। इस समय चित्रकला लघ ु आ ैर स्फ ुट चित्रा ें क े रुप प ्रभावषाली रही। ’जहाँगीर काल (1605 स े 162र्7 इ . तक) चित्रकला लघ ुचित्रा ें क े रुप
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श्रीमती, सुधा शाक्य. "र ंग दृष्टि दा ेष: र ंग अ ंधता". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.889298.

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Abstract:
्रस्तावना:- मानव में र्कइ प्रकार की संव ेदनाएं होती हैं जैसे दृष्टि, श्रवण, स्पर्श , गंध, स्वाद आदि। इनकी उत्पत्ति उद्दीपका ें से होती ह ै, जिसे व्यक्ति अपने बाह ्य पर्यावरण से ग्रहण करता ह ै, यह उद्दीपक ज्ञानेन्द्रिया ें अर्था त आंख, कान, त्वचा, नाक आ ैर जिव्हा को उद्दीप्त करते ह ैं, आ ैर विभिन्न संव ेदना को उत्पन्न करते ह ै ं। आइजनेक (1972) क े अनुसार ‘‘ संव ेदना एक मानसिक प ्रक्रम ह ै जा े आगे विभाजन या ेग्य नहीं होता। यह ज्ञानेन्द्रिया ें को प ्रभावित करने वाली बाह ्य उत्तेजना द्वारा उत्पादित हा ेता ह ै, तथा इसकी तीव ्रता उत्तेजना पर निर्भ र करती ह ै, आ ैर इसके गुण ज्ञानेन्द्रिय की प ्रकृत
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द्विजेश, उपाध् याय, та मकुेश चन्‍द र. पन डॉ0. "तबला एवंकथक नृत्य क अन् तर्सम्‍ बन् धों का ववकार्स : एक ववश् ल षणात् मक अ्‍ ययन (तबला एवंकथक नृत्य क चननांंक ववे ष र्सन् र्भम म)". International Journal of Research - Granthaalayah 5, № 4 (2017): 339–51. https://doi.org/10.5281/zenodo.573006.

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Abstract:
तबला एवांकथक नृत्य ोनन ताल ्रधाान ैं, इस कारण इनमेंसामांजस्य ्रधततत ैनता ै। ूरवव मेंनृत्य क साथ मृो ां की स ां त ैनतत थत ककन्तुबाो म नृत्य मेंजब ्ृां ािरकता ममत्कािरकता, रांजकता आको ूैलुओांका समाव श ैुआ तन ूखावज की ांभतर, खुलत व जनरोार स ां त इन ूैलुओांस सामांजस्य नै ब।ाा ूा। सस मेंकथक नृत्य क साथ स ां कत क कलए तबला वाद्य का ्रधयन ककया या कजस मृो ां (ूखावज) का ैत ूिरष्कृत एवां कवककसत प ू माना जाता ै। तबला वाद्य की स ां त, नृत्य क ल भ सभत ूैलुओांकन सैत प ू में्रधस्तुत करन मेंस ल साकबत ैु। कथक नृत्य की स ां कत में ूररब बाज, मुख्यत लखन व बनारस ररान का मैत् वूरणव यन ोान रैा ै। कथक नृत्य की स ां कत
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श्रीमती, प. ूनम शर्मा. "विकलांग चित्रकारा ें के चित्रा े ं म ें र ंगा ें की भ ूमिका". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1. https://doi.org/10.5281/zenodo.890535.

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Abstract:
रंगा ें के बिना जीवन अपूर्ण ह ै। विकलांग चित्रकारों के चित्रों में रंगा ें का विश ेष महत्व ह ै नीरस जीवन जीने को मजबूर ये कलाकार शारीरिक अक्षमताओं के उपरांत भी अपनें चित्रा े ं में रंगा ें के विशिष्ट संया ेजन कर, उन्ह ें जीवित रुप प ्रदान कर , प ्राण डाल देते ह ै ं ,चित्रा े ं द्वारा मूक अभिव्यक्ति इतनी सशक्त होती ह ै कि देखने वाला स्वप्न में भी यह नहीं सा ेच पाता कि इस चित्र का े बनाने वाला विकला ंग ह ै। ए ेसे विशेष कलाकारों के रंगा ें का चयन अति विलक्षण होता है। वर्णों की विभिन्न रंगता ें के कारण ही हम वर्ण विशेष का नाम ज्ञात कर पाते ह ै ं। इन कलाकारा ें के चित्रा ें में रंगा ें के मान का वि
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सुरभि, त्रिपाठी. "''चित्रकला म ें र ंग'' (प्रागैतिहासिक काल स े वर्तमान काल तक के परिपेक्ष्य में)". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–3. https://doi.org/10.5281/zenodo.890519.

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Abstract:
सुख-दुःख, उत्तेजना, भय, विश्राम, उल्लास आदि का पर्या य ही रंग ह ै। रंग प्रकृति के कण-कण में व्याप्त ह ै। घरा क े प ्रत्येक रंग का अपना एक सौदंर्य व नैसर्गिक गुण होता ह ै, परन्तु उसे किस प ्रकार प ्रयुक्त किया जाय यह कलाकार की क ुशलता एवं दक्षता पर निर्भर करता ह ै, एक प ्रकार से रंग ही मनुष्य की प ्रव ृत्ति की अभिव्यक्ति हैं, जिसे कलाकार अपने अनुभव के साथ प ्रस्तुत करता है। रंगा ें क े प ्रति मनुष्य का आकर्ष ण स्वाभाविक ही नहीं वरन् जन्मजात ह ै, इस प ्रकार रंग व्यक्ति विशेष की कलाक ृति का सबसे महत्वपूर्ण व सार्थ क तत्व ह ै। रंग व्यक्ति विश ेष की अभिव्यक्ति भी ह ै। हिन्दू धर्म में वर्ण (रंग) का
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क, ंचन क. ुमारी. "मधुवनी चित्रकला म ें र ंगा ें का समाव ेष". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.889288.

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Abstract:
भारत एक प ्राचीन सा ंस्कृतिक देश ह ै। यहाँ की कला एवं संस्कृति में लोककला का अनूठा समन्वय दिर्खाइ देता ह ै। अनेक विद्वानों ने समय-समय पर लोककला क े महत्त्व को बताया ह ै। लोककलाऐं हमारे देश में लोक परम्पराओं संस्कृति का दर्प ण ह ै। जो विभिन्न रीति रिवाज उत्सव में देख े जा सकते ह ै। भारत जैसे ं देश में विभिन्न प्रान्तों में विविध रूपों में लोककला देखी जा सकती ह ै। जा े विभिन्न नामों से जानी जाती ह ै। जा े विश्वभर में ख्याति प ्राप्त ह ै-मधुवनी की लोक चित्रकला उन्हीं में से एक है। मधुवनी का नाम शायद इसलिए हुआ क्या ेंकि इस नाम का अपना एक महत्व ह ै। जा े यहा की लोक चित्रों में मधु जैसी मिठास है। दर
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आस्था, त्रिपाठी. "गायन विभिन्न सांगितिक विद्याआ ें म ें नवाचार ध्रुवपद षैली म े नवाचार". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.887027.

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Abstract:
भारत मे मुस्लिम सत्ता स्थापित होने क े पहले एक ही संगीत पदधति प ्रचार में थी । पूरे भारत वर्ष में प्रबन्धगान ही था, भारतीय सामाजिक जीवन, सांस्कृतिक पहचान दैनिक क्रियाकलाप आदि प ्रब ंधो क े इर्द गिर्द ही बने रह े, प ्रायःसभी लोकजीवन का े अपने में आत्मसात कर लेने क े कारण भारतीय संगीत ने बाहरी संस्कृतिया े का े भी अपना लिया तथा उनक े लिये आकर्ष ण का केन्द्र भी बना रहा । जिस ष ैली ने सम्पूर्ण कला जगत का े एक सांगितिक सा ैंदर्य, सा ंगितिक कल्पना, सांगितिक भाषा व आकर्षण में षताब्दिया ें तक बांध े रखा उसी देषी प ्रबन्ध का बदला हुआ रूप ही ध्रुवपद है । ध्र ुवपद गायकी के लिये बनाये गये नियम व उसका अनुष
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अ, ंशुली श. ुक्ला शा ेध छात्रा. "र ंगा ें का चित्रकला म ें महत्वपूर्ण योगदान". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1. https://doi.org/10.5281/zenodo.891986.

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Abstract:
प्रागैतिहासिक काल से ही चित्रकला में रंगा ें का मुख्य स्थान रहा है। चित्रकला में रंगा ें की भूमिका आकर्ष ण एवं सुन्दरता का े प्रकट करती ह ै। सामान्यतः प्रकृति रंगा ें की खान ह ै। व ैज्ञानिकों के अनुसार, रंगा ें की उत्पत्ति सूर्य के प्रकाश से ह ुयी ह ै जिसमें रंगा ें का समावेश मिलता ह ै। रंगा ें का संया ेजन भारतीय कला क े अन्तर्गत र्कइ श ैलिया ें जैसे-अजन्ता श ैली, पाल श ैली, अपभ ्रंश शैली, राजस्थानी श ैली, मुगल श ैली, दक्खन शैली, पहाड़ी श ैली आदि में दृष्टव्य ह ै। इसी प्रकार दक्षिण भारतीय राज्यों की चित्रकला रंगा ें के परिप्रेक्ष्य म ें केरल की चित्रकला भी विश ेष भूमिका रखती ह ै। जिसमें सर्व प
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डा, ॅ0 नाजिमा इरफान. "भारतीय चित्रकला में र ंगा ें का या ेगदान (अब्दुर्रहमान चुगताई के विष ेष संदर्भ में)". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.889177.

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Abstract:
मानव जीवन में वर्ण का महत्वप ूर्ण स्थान ह ै। प्रत्येक वस्तु का ेई न कोई रंग लिये हुए ह ै। रंगा ें क े प ्रति मानव का आकर्ष ण कभी घटा नही ह ै। इसीलिये आदि मानव से लेकर आधुनिक मानव तक ने सा ैन्दर्य क े विकास में वर्ण का सहारा लिया ह ै। कमरे की रंग व्यवस्था से लेकर बाग बगीचा ें में फ ूल पौधों की रंगया ेजना तक में कलाकार ने अपना हस्तक्ष ेप किया ह ै क्योंकि रंगा ें का अपना एक प्रभाव हा ेता ह ै जो मानव की मानसिक भावनाओं का े उद्वेलित करने की शक्ति रखता ह ै। वर्ण सार्वभौमिक ह ै तथा चित्रकला में सबसे अधिक महत्व रंग का े दिया जाता है। रंगा ें क े विविध रुपों मे ं मन की भावनायें जुड़ी ह ै ं जैसे बसन्त क
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डा, ॅ. नर ेन्द्र कुमार ओझा. "भारत में स ंगीत क े बढ़ते ह ुए कदम". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Innovation in Music & Dance, January,2015 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.886970.

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Abstract:
भारत की सभ्यता आ ैर संस्कृति ए ेतिहासिक ह ै। भारत में संगीत विषयक ज्ञान कोई आज का नहीं ह ै, यह बहुत पुराना ह ै। इतिहास में आज भी कई उच्च श्र ेणी क े कलाकार अपना स्थान बना चुके ह ै जैसे- भास्कर बुवा, मियाॅं जान, अब्दुल करीम खाॅ, फ ैयाज खाॅ, ह ैदर खाॅ, वजीर खाॅ, हफीज खाॅ, ओंकारनाथ ठाक ुर आदि। भारतीय कला के विकास में क ेन्द्र आ ैर राज्य सरकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, केन्द्रीय सरकार षिक्षा पात्र विद्यार्थियों का े छात्रव ृत्ति दे रही ह ै। इस प ्रकार से विद्यार्थि यों को प्रोत्साहन मिल रहा ह ै। यह स्पष्ट करते ह ुए कि आजादी की लड़ाई में भारतीय संग्रीत का अपना विषिष्ट स्थान रहा है, संगीत ने ही
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