Academic literature on the topic 'अधिवास'

Create a spot-on reference in APA, MLA, Chicago, Harvard, and other styles

Select a source type:

Consult the lists of relevant articles, books, theses, conference reports, and other scholarly sources on the topic 'अधिवास.'

Next to every source in the list of references, there is an 'Add to bibliography' button. Press on it, and we will generate automatically the bibliographic reference to the chosen work in the citation style you need: APA, MLA, Harvard, Chicago, Vancouver, etc.

You can also download the full text of the academic publication as pdf and read online its abstract whenever available in the metadata.

Journal articles on the topic "अधिवास"

1

Kumar, Satayendra, L. B. Rawal, and Saudan Singh. "GEOGRAPHICAL ANALYSIS OF SIZE AND PATTERN OF VILLAGES IN RAMPUR DISTRICT." International Journal of Research -GRANTHAALAYAH 8, no. 7 (2020): 46–49. http://dx.doi.org/10.29121/granthaalayah.v8.i7.2020.577.

Full text
Abstract:
Habitat geography is the new sprout branch of human geography. Both rural domicile and urban domicile are the two main strands of geography. Habitat geography studies the effect of physical and cultural considerations on man-made habitats, just as human geography describes the environment and human interactions. Human occupancy is the focal center within and around which man builds his culture. Human occupancy refers to all the natural elements and man-made structures that the process of habitat establishes, habitat boundaries that separate them from each other, spatial relationships that link
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
2

पाठेकर, रवि आर. "सारस – एक चिकित्सक अभ्यास". Journal of Research & Development 17, № 3 (2025): 147–53. https://doi.org/10.5281/zenodo.15294698.

Full text
Abstract:
<strong><em>गोषवारा:-</em></strong> <em>जगातील हवेत उडणारा सर्वात उंच पक्षी म्हणून गौरविल्या जाणार्या सारस पक्ष्याचा महाराष्ट्रातील अधिवास हा धोक्यात आलेला आहे. महाराष्ट्राच्या पूर्व टोकास असलेल्या गोंदिया जिल्ह्यात ३० तर भंडारा जिल्ह्यात २ सारस पक्षी उरलेले आहेत. व्यग्र संवर्धन व वन उपज उत्पन्नावर लक्ष केंद्रित असलेल्या वनविभागाचे सारस पक्ष्याकडे दुर्लक्ष होणारी ओरड नेहमीच होते. याची मुंबई उच्च न्यायालयाच्या नागपूर खंडपीठाने दाखल घेत सरकारला जाब विचारला. या नंतर विविध सरकारी यंत्रणा कामाला लागल्या. आता सारस पक्षी व त्याचा अधिवास वाचविण्यासाठी मोठे प्रयत्न सुरु झालेले आहेत. पण सारस पक्षी वाचवि
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
3

माने, पार्वती विनायक. "हैदराबाद विद्यापीठातील ४०० एकर जंगलतोड: वन्यजीव संरक्षण आणि अधिवास नाशाच्या संदर्भातील संघर्ष". Journal of Research & Development 17, № 4 (2025): 157–60. https://doi.org/10.5281/zenodo.15545141.

Full text
Abstract:
<strong><em>सारांश</em></strong> <em>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; &nbsp;हैदराबाद विद्यापीठातील ४०० एकर जंगलतोड हा भौगोलिक दृष्ट्या योग्य नाही. यामुळे जंगलतोड झाल्याने अनेक वन्यजीव बेघर होणार होते. तसेच शहरातील वातावरण देखील स्वच्छ हवे अभावी दुषित होणार होते. त्यामुळे असे औद्योगिक प्रकल्प जेणेकरून जंगल नसलेल्या ठिकाणी जर उभे केले तर त्याचा फायदा पर्यावरण संरक्षणासाठी होणार आहे. या ठिकाणी जर प्राध्यापक व विद्यार्थी, तसेच सामाजिक संघटना यांनी एकत्रित येवून आंदोलन केले नसते तर संपूर्ण जंगल नष्ट होवून अनेक प्राणी व पक्षी यांचे भवितव्य धोक्यात आले असते. प्
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
4

माने, पार्वती विनायक. "हैदराबाद विद्यापीठातील ४०० एकर जंगलतोड: वन्यजीव संरक्षण आणि अधिवास नाशाच्या संदर्भातील संघर्ष". Journal of Research & Development 17, № 4 (2025): 147–51. https://doi.org/10.5281/zenodo.15561366.

Full text
Abstract:
<strong><em>सारांश</em></strong> <em>&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; हैदराबाद विद्यापीठातील ४०० एकर जंगलतोड हा भौगोलिक दृष्ट्या योग्य नाही. यामुळे जंगलतोड झाल्याने अनेक वन्यजीव बेघर होणार होते. तसेच शहरातील वातावरण देखील स्वच्छ हवे अभावी दुषित होणार होते. त्यामुळे असे औद्योगिक प्रकल्प जेणेकरून जंगल नसलेल्या ठिकाणी जर उभे केले तर त्याचा फायदा पर्यावरण संरक्षणासाठी होणार आहे. या ठिकाणी जर प्राध्यापक व विद्यार्थी, तसेच सामाजिक संघटना यांनी एकत्रित येवून आंदोलन केले नसते तर संपूर्ण जंगल नष्ट होवून अनेक प्राणी व पक्षी यांचे भवितव्य धोक्यात आले असते. प्
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
5

राजेश, यादव, та केशव प्रसाद यादव प्रो०. "कैमूर जिला के दुर्गावती प्रखण्‍ड का ग्रामीण विकास की सामाजिक-आर्थिक सुविधाएँ". International Journal of Advance and Applied Research 10, № 2 (2022): 136–45. https://doi.org/10.5281/zenodo.7476689.

Full text
Abstract:
किसी भी क्षेत्र के ग्रामीण विकास में समेकित ग्रमीण विकास प्रक्रिया को तेज गति देने हेतु सामाजिक एवं आर्थिक सेवाओं की नियोजन एक प्राथमिक आवश्यकता है। ह्वाइट महोदय के अनुसार &lsquo;&lsquo;मानव द्वारा प्राकृतिक एवं जैविक संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग हेतु अपनी ऐतिहासिक परम्पराओं के अनुरूप सदियों से विकसित अधिवास एवं भूमि उपयोग प्रारूप अधिवासों की पदानुक्रमिक व्यवस्था तथा उसके अनुरूप सेवाओं एवं सुविधाओं का वितरण इत्यादि का अध्ययन करता है तथा ग्राम्य जीवन में कई तरह के दशाओं में सुधार करता है जो सामाजिक परिवेश से जुड़े होते हैं। समेकित ग्राम्य विकास के अन्तर्गत समुदायिक विकास एक गत्यात्मक प्रक्रिया है
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
6

गुप्ता, विशाल कुमार, та सुशील कुमार गुप्ता. "जौनपुर जिले के स्नातकोत्तर स्तर कला वर्ग के छात्रों एवं छात्राओं का अधिवास (ग्रामीण एवं नगरीय) के आधार पर आधुनिकता के प्रति अभिवृत्ति का तुलनात्मक अध्ययन". International Journal of Science and Social Science Research 2, № 3 (2024): 157–64. https://doi.org/10.5281/zenodo.14227497.

Full text
Abstract:
आधुनिक समाज में शिक्षित छात्र एवं छात्राओं की भूमिका पिछड़ी जाति का प्रश्न अब स्पष्ट हो जाता है क्योंकि देश के विकास कार्यक्रमों का भार अब इन पर ही है। राष्ट्र के युवक और युवतियों को शिक्षित करके ही हम राष्ट्र के कल्याणकारी, प्रजातांत्रिक, समाजवादी मूल्य का विकास कर सकते हैं क्योंकि यही युवक और युवतियाँ बच्चों में अच्छी आदतों का निर्माण, स्वस्थ मानसिक विकास तथा उनमें लोकतांत्रिक नागरिक गुणों का विकास कर सकते हैं। इन्हीं गुणों से ही बालक का सर्वांगीण विकास होगा। परम्परागत समाज में पिछड़ापन, रूढ़िवादिता, प्राचीन मूल्य तथा जीवन शैलियों का प्रचलन रहा है। भारत जैसे विशालकाय विकासशील राष्ट्र में परम
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
7

मुक, ुन्द कुमार. "वस्त्र अलंकरण म ें र ंगा ें की पुरातन भ ूमिका". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH Composition of Colours, December,2014 (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.888816.

Full text
Abstract:
रंग वस्त्र आकल्पन (अलंकरण) का मूलाधार है। वस्त्र्ा के अनुरूप रंग द्रव्य¨ ं ;कलमेद्ध का चयन आ ैर उनक े प्रय¨ग की तकनीक, कलाकार अथवा रंगरेज के निजी दृष्टिक¨ण एवं उनक े अनुभव पर आधारित ह¨ती है। रंग¨ ं का, व्यक्ति की मन¨भावनाअ¨ ं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इन्हीं पहल ुअ¨ं का अध्ययन करके वस्त्र्ा¨ं क े विविध प्रकार क े अनुसार रंगद्रव्य का सफलताप ूर्वक प्रय¨ग किया जाता ह ै। वस्त्र्ा रंर्गाइ की कला अतिप्राचीन ह ै। भारतवर्ष में र्कइ ऐसे प्रमाण मिलते ह ैं जिनमें वस्त्र्ा ब ुर्नाइ एवं वस्त्र्ा-रंर्गाइ के विषय र्में इ सा प ूर्व एवं उत्तरार्ध में मनुष्य¨ ं क¨ ज्ञान था। वस्त्र्ा ब ुनाई अ©र रंर्गाइ के इतिहास
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
8

Rimal, C. P. "सिंहदरबारको अधिकार गाउँगाउँमा". Intellectual Journal of Academic Research (IJAR) 2, № 1 (2024): 111–25. https://doi.org/10.5281/zenodo.13513140.

Full text
Abstract:
नेपालको राजनैतिक इतिहास, राणाकाल , पंचायती शासन व्यवस्था, बहुदलीय ब्यवस्था र गणतन्त्र प्राप्त पछि नयाँ संबिधान २०७२ प्राप्त भएपछि &nbsp;तीन तहको राज्यको पुर्न संरचनाले गाउँलाई स्थानीय निकायबाट स्थानीयतहमा परिवर्तन गरीदिएको छ । ७ सय ५३ स्थानीय तहमा तत्काल विभिन्न तहका गरी ३६ हजार कर्मचारी आवश्यक भए पनि ती निकायमा मुस्किलले करिव २२ हजार कर्मचारी मात्रै कार्यरत छन् । निर्वाचन मार्फत स्थानीय तहमा जनप्रतिनीधि &nbsp;दोश्रो पटक समेत आइसके पनि स्थानीय तहले प्रभावकारी ढंगले काम गर्न नसक्दा सिंहदरबारको अधिकार गाउँगाउँमा पुगेको जनताले महसुस गर्न पाएका छैनन् । अझै केन्द्रीकृत शासन प्रणाली कायमै रहेको सरका
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
9

Rimal, C. P. "सिंहदरबारको अधिकार गाउँगाउँमा". Intellectual Journal of Academic Research (IJAR) 2, № 1 (2024): 111–25. https://doi.org/10.5281/zenodo.13513140.

Full text
Abstract:
नेपालको राजनैतिक इतिहास, राणाकाल , पंचायती शासन व्यवस्था, बहुदलीय ब्यवस्था र गणतन्त्र प्राप्त पछि नयाँ संबिधान २०७२ प्राप्त भएपछि &nbsp;तीन तहको राज्यको पुर्न संरचनाले गाउँलाई स्थानीय निकायबाट स्थानीयतहमा परिवर्तन गरीदिएको छ । ७ सय ५३ स्थानीय तहमा तत्काल विभिन्न तहका गरी ३६ हजार कर्मचारी आवश्यक भए पनि ती निकायमा मुस्किलले करिव २२ हजार कर्मचारी मात्रै कार्यरत छन् । निर्वाचन मार्फत स्थानीय तहमा जनप्रतिनीधि &nbsp;दोश्रो पटक समेत आइसके पनि स्थानीय तहले प्रभावकारी ढंगले काम गर्न नसक्दा सिंहदरबारको अधिकार गाउँगाउँमा पुगेको जनताले महसुस गर्न पाएका छैनन् । अझै केन्द्रीकृत शासन प्रणाली कायमै रहेको सरका
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
10

बबली, प्रदीप पण्ड़ाग्रे. "बौद्विक संपदा अधिकार". International Journal of Advance and Applied Research S6, № 12B (2025): 176–79. https://doi.org/10.5281/zenodo.14909940.

Full text
Abstract:
<em>विशिष्ट कानूनी अधिकार उस व्यक्ति को दिया जाता है जो किसी विशेष क्षेत्र में रचनात्मक कार्य या आविष्कार करता है। ये कानूनी अधिकार लेखक को अपनी रचना या आविष्कार का दुरुपयोग होने से रोकता है। ये अधिकार लेखक की रचना का दोहराव या वितरण करने से भी रोकता है। इन अधिकारो के मिलने से लेखक को अपने उत्पादन के फलस्वरुप प्रोत्साहन मिलता है। ये अधिकार न मिलने से आविष्कार का दुरुपयोग संभव है। हमारे समाज में कुछ असामाजिक तत्व है</em><em>, जो इन आविष्कारों का गलत उपयोग करते है। इनसे बचाव के लिए ही ये अधिकार मिलना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। इन अधिकारो के रहते कोई इन्हे चुरा नहीं सकता और ना ही अपने नाम से प्र
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
More sources
We offer discounts on all premium plans for authors whose works are included in thematic literature selections. Contact us to get a unique promo code!