Academic literature on the topic 'परंपरा'

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Journal articles on the topic "परंपरा"

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पोखरेल Pokharel, निर्मला Nirmala. "दशमहाविद्या एक परिचय Dashamhabiddhya Ek Parichaya". Nepalese Culture 13 (2 грудня 2019): 43–56. http://dx.doi.org/10.3126/nc.v13i0.27500.

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Abstract:
नेपाली समाजको धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक परंपरामा वैदिक मूल्य, मान्यता र आदर्शको जति नै प्रभाव तान्त्रिक मूल्य मान्यता र आदर्शको पनि रहेको छ । यहाँ नैगमिक(वैदिक) र आगमिक(तान्त्रिक) दुवै परंपराको समन्वय भेटिन्छ । सुक्ष्मरुपमा विचार गर्दा नेपाली समाजमा तन्त्र एवं तन्त्रवादको अझ वढि प्रभाव रहेको पाईन्छ । यहाँका धार्मिक एवं सामाजिक परंपरा र रीतिरिवाजहरु आगम वा तन्त्रबाट नै बढि निर्देशित रहेका छन् । यसै परिप्रेक्षमा शाक्ततन्त्र परंपरा यहाँको प्रमुख तन्त्र परंपरामा पर्दछ । सम्पूर्ण विश्वब्रह्माण्डको परमकारणका रुपमा शक्ति अर्थात मातृदेवीलाई मानी तदनुरुप उपासना पद्धतिहरु प्रतिपादन गरिएका तन्त्रहर
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पोखरेल Pokharel, निर्मला Nirmala. "दशमहाविद्या एक परिचय Dashamhabiddhya Ek Parichaya". Nepalese Culture 8 (2 грудня 2019): 43–56. http://dx.doi.org/10.3126/nc.v8i0.27500.

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Abstract:
नेपाली समाजको धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक परंपरामा वैदिक मूल्य, मान्यता र आदर्शको जति नै प्रभाव तान्त्रिक मूल्य मान्यता र आदर्शको पनि रहेको छ । यहाँ नैगमिक(वैदिक) र आगमिक(तान्त्रिक) दुवै परंपराको समन्वय भेटिन्छ । सुक्ष्मरुपमा विचार गर्दा नेपाली समाजमा तन्त्र एवं तन्त्रवादको अझ वढि प्रभाव रहेको पाईन्छ । यहाँका धार्मिक एवं सामाजिक परंपरा र रीतिरिवाजहरु आगम वा तन्त्रबाट नै बढि निर्देशित रहेका छन् । यसै परिप्रेक्षमा शाक्ततन्त्र परंपरा यहाँको प्रमुख तन्त्र परंपरामा पर्दछ । सम्पूर्ण विश्वब्रह्माण्डको परमकारणका रुपमा शक्ति अर्थात मातृदेवीलाई मानी तदनुरुप उपासना पद्धतिहरु प्रतिपादन गरिएका तन्त्रहर
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Kumar, Ashok, та Arun Vaghela. "नक्की झील : गरासिया हरिद्वार". VIDYA - A JOURNAL OF GUJARAT UNIVERSITY 2, № 1 (2023): 224–29. http://dx.doi.org/10.47413/vidya.v2i1.174.

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Abstract:
हमारा देश भारत सांस्कृतिक विविधताओं एवं विशेषताओं का देश है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में रंग बिरंगी सभ्यता एवं संस्कृति की विशिष्टता का दर्शन होता है। यहां का प्रत्येक स्थान स्वंय की विशिष्ट संस्कृति, तीज त्यौहार एवं रीति-रिवाजों तथा परंपरा आदि को लेकर अपनी एक अलग ही पहचान रखते हैं। ऐसे ही राजस्थान राज्य भी अपनी सांस्कृतिक विविधता एवं विशेषताओं की मंत्रमुग्ध तथा जिज्ञासा उत्पन्न करने वाली इंद्रधनुषी छटा चारों ओर बिखरता है। राजस्थान राज्य का माउंट आबू क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य के साथ कई प्रकार की संस्कृतिक विविधताओं एवं परंपराओं को संजोए हुए हैं। इनमें से एक सांस्कृतिक परंपरा इस क्षेत्र की सर्
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सिंह, गीता. "भारतीय ज्ञान परंपरा एवं स्वदेशी ज्ञान की वैश्विक परिदृश्य में प्रासंगिकता एवं महत्व". SCHOLARLY RESEARCH JOURNAL FOR INTERDISCIPLINARY STUDIES 9, № 68 (2021): 16312–19. http://dx.doi.org/10.21922/srjis.v9i68.10029.

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Abstract:
किसी भी देश की ज्ञान प्रणाली का मूल घटक उसका स्वदेशी ज्ञान होता है। यह शोध पत्र भारतीय ज्ञान परंपरा एवं स्वदेशी ज्ञान की वैश्विक परिदृश्य में प्रासंगिकता एवं महत्व को परिभाषित करके एक सिंहावलोकन प्रस्तुत करता है जो किसी संस्कृति या समाज के लिए अद्वितीय है और स्थानीय स्तर के निर्णय के लिए आधार बनाता है। भारतीय ज्ञान परंपरा एवं स्वदेशी ज्ञान की विशेषताएं और प्रकार अन्य देशों में सफल स्वदेशी ज्ञान के पहलुओं के साथ सामाजिक विकास पर इसका प्रभाव डालता है। यह ज्ञान एक सांस्कृतिक परिसर का अभिन्न अंग है जिसमें भाषाए सामाजिक प्रणाली का वर्गीकरणए संसाधनों का उपयोगए प्रथाओंए सामाजिक संपर्कए अनुष्ठान और आध
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मित्र, धीरज प्रताप. "वज्रयान तंत्र साधना तथा सिद्ध परंपरा: भारतीय तांत्रिक परंपरा में योगदान". International Journal of Advanced Academic Studies 7, № 4 (2025): 11–14. https://doi.org/10.33545/27068919.2025.v7.i4a.1411.

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सुरेश, चंद पचौरी, та शर्मा विशाल. "वर्तमान भारतीय समाज में परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन". RECENT EDUCATIONAL & PSYCHOLOGICAL RESEARCHES 14, № 1 (2025): 42–46. https://doi.org/10.5281/zenodo.15283081.

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Abstract:
भारतीय समाज अपनी प्राचीन परंपराओं और तेजी से विकसित हो रही आधुनिकता से बुना हुआ एक समृद्ध चित्रपट है। यह शोधपत्र समकालीन भारत में परंपरा और आधुनिकता के बीच गतिशील अंतर्संबंध की खोज करता है, जिसमें सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक आयामों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह जांचता है कि इन शक्तियों का सह-अस्तित्व राष्ट्र की पहचान और प्रगति को कैसे आकार देता है। शोधपत्र चुनौतियों और अवसरों पर भी चर्चा करता है, सामंजस्यपूर्ण संश्लेषण के मार्गों पर प्रकाश डालता है। भारत, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध परंपराओं का देश है, जो एक ऐसे चौराहे पर है जहाँ प्राचीन प्रथाएँ सह-अस्तित्व में हैं और कभी-कभी आधुनि
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AWASTHI, SUDHIR KUMAR. "भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन में महायोगी गोरक्षनाथ का अवदान". शोध धारा SPECIAL (1 квітня 2024): 90–94. https://doi.org/10.5281/zenodo.15347497.

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Abstract:
भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम् संस्कृति है और उतना ही पुराना है भारतीय ज्ञान-परंपरा का इतिहास। कल्याणकारी होने के कारण सदियों तक संघर्षों से जूझते हुए भी प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान की गौरवमयी परंपरा समस्त जगत् को आज भी आलोकित कर रही है। हमारी भारतीय चिंतन परंपरा विश्व की एकमात्र ऐसी चिंतन परंपरा है जिसके मूल्य आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं। आध्यात्मिक मूल्यों से सुसज्जित भारतीय ज्ञान-परंपरा के विकास में ऐसे विभिन्न उन्नायकों का योगदान निहित है जिन्होंने विपरीत समय में इसकी मूल चेतना को अक्षुण्ण बनाये रखने के स्तुत्य प्रयास किये है। इतिहास में महायोगी गोरक्षनाथ ऐसे ही महाउन्नायक हुए जिन्हो
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डॉ., राजू शिवाजी कोंडेकर. "मराठवाड्यातील भक्तीपंथ आणि सूफी परंपरा". उदयगिरी - बहुभाषिक इतिहास संशोधन पत्रिका (Udayagiri Bahubhashik Itihas Sanshodhan Patrika - A Bimonthly, Refereed, & Peer Reviewed Journal of History) 01, № 04 (2023): 07–14. https://doi.org/10.5281/zenodo.8328901.

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Abstract:
<strong>मराठवाड्यातील भक्तीपंथ आणि सूफी परंपरा</strong> डॉ. राजू शिवाजी कोंडेकर संशोधन मार्गदर्शक व विभाग प्रमुख, इतिहास विभाग, राजीव गांधी महाविद्यालय, मुदखेड, जि. नांदेड ४३१८०६ महाराष्ट्र, भारत <em>Corresponding author E-mail:</em> drkondekar9@yahoo.com Received: 06 September, 2023 | Accepted: 09 September, 2023 | Published: 11 September, 2023 ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- <strong>प्रस्तावना</strong> आतापर्यंत हिंदू आणि मुस्लिम धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक आणि सांस्कृतिक बाजूने बराच अभ्य
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उमाकािंत, आनेप्पा त्रिरादार. "भक्तिकालीन हिन्दी साहित्य: ज्ञान परंपरा". AAKHAR HINDI JOURNAL 5, № 1 (2025): 8–12. https://doi.org/10.5281/zenodo.15081349.

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VARSHA, RANI. "ऋषि परंपरा में स्त्री शिक्षा". वेदवाणी 70, № 11 (2025): 15–18. https://doi.org/10.5281/zenodo.15267654.

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