Academic literature on the topic 'स्थिति'

Create a spot-on reference in APA, MLA, Chicago, Harvard, and other styles

Select a source type:

Consult the lists of relevant articles, books, theses, conference reports, and other scholarly sources on the topic 'स्थिति.'

Next to every source in the list of references, there is an 'Add to bibliography' button. Press on it, and we will generate automatically the bibliographic reference to the chosen work in the citation style you need: APA, MLA, Harvard, Chicago, Vancouver, etc.

You can also download the full text of the academic publication as pdf and read online its abstract whenever available in the metadata.

Journal articles on the topic "स्थिति"

1

खड्का, बोमबहादुर. "'उकास' कथामा आञ्चलिकता". DMC Journal 8, № 7 (2023): 22–33. http://dx.doi.org/10.3126/dmcj.v8i7.62421.

Full text
Abstract:
प्रस्तुत अनुसन्धानात्मक लेख सनत रेग्मीद्वारा लेखिएको ‘उकास’ कथा आञ्चलिकता शीर्षकमा केन्द्रित छ । आञ्चलिकता शब्दको अर्थ अञ्चलसँग सम्बन्धित रहेको हुन्छ । त्यहीँ कथाञ्चलमा देखिएका प्राकृतिक एवं मानव निर्मित मौलिक विशेषतालाई नै आञ्चलिकता भनिन्छ । कुनै निश्चित कथाञ्चलमा आधारित रहेर त्यस भेगमा देखिएका सिद्धान्त, मूल्यमान्यता, वेशभूषा, सभ्यता, भूगोल तथा प्रकृति, सामाजिक सांस्कृतिक स्थिति, आर्थिक स्थिति, शिक्षाको स्थिति, भाषिक स्थिाति, चालचलन, लोकतत्व, राजनीतिक चेतना, चाडपर्व आदि विशेषताको समष्टि रूप नै आञ्चलिकता हो । यस विवेच्य कथाको कथाञ्चल बाँके जिल्लाको रापती नदी पारि दक्षिणी तराई क्षेत्र रहेको छ
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
2

Singh, Shivangi. "Geographical and Strategic Significance of the Indian Ocean: General Analysis in the Context of India." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 9, no. 1 (2022): 61–64. http://dx.doi.org/10.53573/rhimrj.2022.v09i01.012.

Full text
Abstract:
A.T. Mahan has mentioned some important facts for the growth of the nine powers, which include geographical location, physical shape, territorial expansion, population, national character and government institutions which also have scientific and industrial potential, no nation without benefits. If we put India on this criterion, then India's location is definitely going to make India strong. Undoubtedly, India's position is ideal for naval power. Due to its peninsular position, it affects the vast ocean. Several ports are located on its coastline. However, apart from the Gulf of Kutch, it lac
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
3

Sao, Pragya, and Dr Arun Kumar Sao. "Mental health from the perspective of Maharishi Patanjali." International Journal of Multidisciplinary Research Configuration 4, no. 1 (2024): 14–26. http://dx.doi.org/10.52984/ijomrc4102.

Full text
Abstract:
वर्तमान युग में मानव जीवन मानव तनाव से भरा है। वह अपने दिनचर्या में इतना व्यस्त है कि स्वयं की मानसिक शांति के लिए वह समय नही निकाल पाता। इतनी व्यस्तता के कारण वह हमेशा परेशान रहता है। उसके अन्दर चिड़चिड़ापन, थकान, नींद में कमी, एकाग्रता में कमी, वजन का कम होना या बढ़ना, आत्मसम्मान में कमी महसूस करना आदि लक्षण परिलक्षित होने लगते है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति का सहारा लेने पर हमें भी अच्छा लाभ नहीं मिलता जिससे मानव हताश और निराश होने लगता है। मानसिक स्वास्थ्य का आधार मन जो चित्त का एक भाग है और मानसिक स्वास्थ्य को बनाये रखने में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति में उतनी क्षमत
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
4

पायल, सिंह, та पारूल कुमार डाॅ. "प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के शारीरिक स्वस्थ्ता सम्बन्धित दक्षता कारकों पर हठयोग प्रदीपिका में वर्णित आसनों का संक्षिप्त विश्लेषण". International Journal of Trends in Emerging Research and Development 2, № 4 (2024): 08–11. https://doi.org/10.5281/zenodo.12788530.

Full text
Abstract:
हठयोग प्रदीपिका यौगिक ग्रन्थ है। महर्षि के योग सूत्र को राजयोग भी कहा जाता है। यह छोटा और आसानी से याद हो जाता है। स्वात्माराम रचित हठयोग प्रदीपिका राजयोग रचना है। जोकि शारीरिक क्रियाओं से शुरू हाती है। हठयोग साधना का द्वितीय साधन आसन है। मन और शरीर को पुष्ट, दृढ़ और आरोग्य प्रदान करने की विशेष शारीरिक स्थितियाॅं आसन कहलाती है। गोरक्षनाथ जी ने आसन को स्वरूप चेतन आत्मा में स्थित हो जाना कहा है। मत्सयेन्द्रनाथ जी ने संतोष को आसन कहा है। इसका अर्थ यह है कि शरीर को जो स्थिति साधना के लिए साधक को सन्तुष्ट करती हो वही आसन है। महर्षि पंतजलि आसन को स्थित एवं सुख की स्थिर मानते हैं। महर्षि घेरण्ड आसनों
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
5

गोपालबहादुर श्रेष्ठ. "नेपालका विद्यालयमामातृभाषामा सिकाइको स्थिति". Interdisciplinary Research in Education 6, № 2 (2021): 117–32. http://dx.doi.org/10.3126/ire.v6i2.43544.

Full text
Abstract:
प्रस्तुत लेख नेपालमा मातृभाषामा सिकाइको स्थितिको विश्लेषणमा केन्द्रित रहेको छ ।यस लेखको प्रमुख उद्देश्य नेपालका विद्यालयमा माध्यम वा विषयका रूपमा मातृभाषा अध्ययन अध्यापन हुने अवस्थाकोअध्ययन गर्नु रहेको छ । मातृभाषालाई बहुसंस्कृति र भाषा, मातृभाषामा शिक्षा र बहुभाषिक शिक्षा, बहुभाषिकता र संज्ञानात्मक विकासकोे कोणबाट हेरिएको छ । विश्वमा भाषाको स्थिति र शिक्षा, नेपालको जनगणनामा मातृभाषाको सङ्ख्या र वक्ता सङ्ख्या, नेपालमा मातृभाषा मानिएका विदेशी भाषा र त्यसको वैधता निर्माणको आधार, नेपालमा मातृभाषामा शिक्षा सञ्चालनको लागि भएका प्रयास र वर्नमान अवस्था जस्ता शीर्षकमा रहेर खोजमूलक सामग्री प्रस्तुत गरि
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
6

देवांगन, अशोक कुमार, फलेन्द्र कुमार साहु та डॉ एल एस गजपाल. "वैश्विक महामारी कोविड-19 का प्रवासी महिला श्रमिकों के सामाजिक-आर्थिक स्थित पर प्रभाव-एक समाजशास्त्रीय अध्ययन (छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले के विशेष संदर्भ में)". Journal of Ravishankar University (PART-A) 28, № 1 (2022): 80–92. http://dx.doi.org/10.52228/jrua.2022-28-1-10.

Full text
Abstract:
विश्व अर्थतंत्र के महत्वपूर्ण इकाई होने के बाद भी श्रमिकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। खासकर श्रम-प्रवास में प्रवासी महिला श्रमिकों के लिए यह स्थिति बेहद दयनीय है। विकासशील देश भारत में प्रवासी श्रमिकों के संबंध में विभिन्न समस्याएं एवं संकट मौजूद हैं। अनेक शोध अध्ययन यह दर्शाते है कि श्रम प्रवास में महिलाओं की स्थिति सकारात्मक कम बल्कि नकारात्मक अधिक परिणीत हुए हैं। विशेषकर वैश्विक महामारी कोविड-19 से प्रवासी श्रमिक महिलाएं अधिक प्रभावित हुई हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर जिले के प्रभावित 80 महिला प्रवासी श्रमिकों से अर्द्ध संरिचत साक्षात्कार अनुसूची उप
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
7

Pooja, Pokhariya. "पर्वतीय क्षेत्र की ग्रामीण गर्भवती महिलाओं की दृष्टि में परिवार में महिलाओं की स्थिति का अध्ययन - नैनीताल जिले के". International Journal of Scientific Development and Research 8, № 8 (2023): 751–56. https://doi.org/10.5281/zenodo.8373965.

Full text
Abstract:
सारांश - नारी हमेशा से ही सामाजिक रचना और व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। किसी भी क्षेत्र की प्रगति में पुरूषों के साथ-साथ महिलाओं की भूमिका अहम् रहती है। इसीलिए पर्वतीय क्षेत्रों में भी महिलाओं के विकास के बिना परिवार, क्षेत्र की उन्नति सम्भव नहीं है। उत्तराखण्ड में रोजगार के सीमित संसाधन होने के कारण पर्वतीय क्षेत्र के पुरूष वर्ग धनोपार्जन के लिए अपने क्षेत्र और परिवार को छोड़कर बाहरी क्षेत्रों मे जाने के लिए विवश है। इस स्थिति मे महिलाओं को दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। ऐसी स्थिति में पर्वतीय क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पूर्ण रूप से महिलाओं पर ही निर्भर हो जाती है। उसे प्रा
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
8

राजेन्द्र, कुमार, та उपासना. "शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण". Recent Researches in Social Sciences & Humanities (ISSN: 2348 – 3318) 10, № 01 (Jan.-Feb.Mar.) (2023): 43–45. https://doi.org/10.5281/zenodo.7944517.

Full text
Abstract:
महिलाएं अपने प्रति होने वाले सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, सांस्कृतिक अन्याय, लिंग भेद व समानता, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा राजनीतिक शक्तियों के नकारात्मक प्रभाव के विरुद्ध जागरूक हो जाएं तो यह समझा जा सकता है कि उनका सशक्तिकरण हो रहा है। उसके महत्व को स्वीकार किया जा सके तथा उसे समान नागरिक एवं समान अधिकार की स्थिति तक ला सके। शिक्षित महिलाएं ही अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती हैं जिससे वह सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में अपना सहयोग दे सकती हैं। वर्तमान समाज में शिक्षा ही वह हथियार है जिसके द्वारा महिलाएं अपनी स्थिति को सुदृढ़ बना सकती हैं। आज महिलाओं की स्थिति में जो परिवर्तन हुए है
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
9

सोमबीर, सोमबीर, та विभूति नारायण सिंह. "आधुनिक भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति: ऐतिहासिक विकास और वर्तमान परिप्रेक्ष्य". Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 22, № 01 (2025): 484–92. https://doi.org/10.29070/x41qme95.

Full text
Abstract:
भारतीय समाज में महिलाओं की ऐतिहासिक स्थिति को समझना और उनके सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों का विश्लेषण इस शोध का मुख्य उद्देश्य है। प्राचीन काल में महिलाओं की स्थिति सम्मानजनक थी, लेकिन समय के साथ पितृसत्तात्मक संरचनाओं और सामाजिक रूढ़ियों के कारण उनकी स्थिति में गिरावट आई। औपनिवेशिक काल ने महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए कई नीतिगत प्रयास किए। सती प्रथा उन्मूलन, विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, और महिला शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना उन सुधारों में शामिल था। हालांकि, ये सुधार मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों और उच्च वर्ग तक सीमित रहे। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महिलाओं ने सामाजिक और राजनीतिक रूप
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
10

यादव, हरी शंकर, та नूतन कुमारी. "विभिन्न युगों में स्त्रियों की स्थिति". SCHOLARLY RESEARCH JOURNAL FOR HUMANITY SCIENCE AND ENGLISH LANGUAGE 10, № 49 (2021): 12144–47. http://dx.doi.org/10.21922/srjhsel.v10i49.9756.

Full text
Abstract:
प्राचीन काल से आधुनिक काल यानि वर्तमान समय तक भारत में स्त्रियों की स्थिति परिवर्तनशील रही है। हमारा समाज प्राचीन काल से आज तक पुरुष प्रधान ही रहा है। ऐसा नहीं है कि स्त्रियों का शोषण सिर्फ पुरुष वर्ग ने ही किया, पुरुष से ज्यादा तो एक स्त्री ने दूसरी स्त्री पर या स्त्री ने खुद अपने ऊपर अत्याचार किया है। पुरुष की उदंडता, उच्छृंखलता और अहम् के कारण या स्त्री की अशिक्षा, विनम्रता और स्त्री सुलभ उदारता के कारण उसे प्रताड़ित, अपमानित और उपेक्षित होना पड़ा। पहले हम इतिहास में भारतीय स्त्रियों की स्थिति पे नजर डाल लें फिर वर्तमान स्थिति का आंकलन करेंगे।
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
More sources

Book chapters on the topic "स्थिति"

1

"Hindi Bhasha Scientific and Technological Development." In Educational Transformation in Digital ERA, edited by Suman Devi. NIILM University, 2024. https://doi.org/10.70388/niilmub/241204.

Full text
Abstract:
आज हिंदी विश्व पटेल पर प्रथम भाषा बनने का दवा रखती है जिसका प्रमुख कारण तकनीकी विकास सूचना प्रौद्योगिकी की पत्राचार मीडिया अनुवाद वह जनसंपर्क के कारण हिंदी भाषा का बढ़ता प्रचार एवं प्रसार आज हिंदी के प्रसार व प्रचार का प्रमुख कारण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की सामर्थ व शक्तिशाली भाषा के रूप में हिंदी का विकास होता स्वरूप है आदि जननी संस्कृत भाषा निरोध श्रीत हिंदी भाषा की राजभाषा संपर्क भाषा तथा अनेक बोलियां वह अप बलियो के मध्य अंतर संबंधों के कारण समन्वय आत्मक भाषा है हिंदी साहित्य में हृदय की भाषा है कुछ वर्षों पूर्व हिंदी भाषा में परिभाषित शब्दावली वह संस्कृत के साहित्य का अभाव था परंतु कुछ स्
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles

Reports on the topic "स्थिति"

1

Revi, Aromar. लॉकडाउन कहाँ और कब हटाना है, सामान्य स्थिति की ओर संक्रमण (ट्रांजिशन) को सक्षम करने के लिए क्या करें? Indian Institute for Human Settlements, 2020. http://dx.doi.org/10.24943/wwletn.hv.2020.

Full text
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
2

Chand, Obindra, Katie Moore та Stephen Thompson. प्रमुख विचार: दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया आदि में विकलांगता-समावेशी मानवतावादी कार्रवाई और आपातकालीन गतिविधियाँ. Institute of Development Studies, 2023. http://dx.doi.org/10.19088/sshap.2023.027.

Full text
Abstract:
विकलांग लोगों को पर्यावरणीय, सामाजिक और संरचनात्मक दिक्कतों और समस्याओं का विभिन्न जटिल संदर्भों और विविध रूपों में सामना करना पड़ता है। मानवीय और अन्य आपातकालीन प्रतिक्रियाओं के दौरान इन बाधाओं के कारण उन्हें अत्यधिक नुकसान भी उठाना पड़ता है तथा उन्हें उपेक्षित और बहिष्कृत भी किया जाता है।1–3 यह स्थिति विशेष रूप से नेपाल और अन्य दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों सहित निम्न और मध्यम आय वाले देशों (low- and middle-income countries) में सामने आई है।4 विकलांग लोगों की जरूरतों, सामाजिक सोच और दुर्गम बुनियादी ढाँचे के बारे में सीमित जागरूकता आपातकालीन स्थितियों में उनके सामने आने वाली चुनौतियों म
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
3

Gupte, Jaideep, Sarath MG Babu, Debjani Ghosh, Eric Kasper, Priyanka Mehra та Asif Raza. स्मार्ट शहर एवं कोविड-19: भारत से ज्ञात तथ्यों के आधार पर डेटा ईकोसिस्टमों के लिए निहितार्थ. SSHAP, 2022. http://dx.doi.org/10.19088/sshap.2022.003.

Full text
Abstract:
सीमित संसाधन वाले नगरीय परिवेशों में किसी संकट स्थिति या आपात्कालीन प्रतिक्रिया के दौरान सर्विलांस में प्रौद्योगिकी का उपयोग, तथ्यों की जाँच और समन्वित नियंत्रण के जैसे विषयों में शामिल मूल मुद्दों पर विचार करने के उपरांत यह संक्षिप्त विवरण श्रेष्ठ डेटा प्रैक्टिस संबंधी अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करता है। शहरों में कोविड-19 प्रतिक्रिया के दौरान डेटा सक्षम प्रौद्योगिकियों का किस प्रकार से उपयोग किया गया था, और साथ ही मानक कार्यांवयन की पद्धतियाँ किस प्रकार से महामारी द्वारा प्रभावित हुई थीं, इन सभी विषयों से हमने सीख हासिल की है। स्मार्ट शहरों के बुनियादी ढांचों का निर्माण करने में रोग का नियंत्रण
APA, Harvard, Vancouver, ISO, and other styles
We offer discounts on all premium plans for authors whose works are included in thematic literature selections. Contact us to get a unique promo code!