Academic literature on the topic 'संरक्षक'

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Journal articles on the topic "संरक्षक"

1

पांचाळ, नारायण हणमंतराव. "आकाशगंगाचे संरक्षक: ओझोन अशी मोजणारी आणि त्याच्या परिणामांची समज". 'Journal of Research & Development' 15, № 16 (2023): 181–86. https://doi.org/10.5281/zenodo.8362701.

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Abstract:
<strong>संक्षिप्त</strong> ओझोन अशी मोजणारी ही पृथ्वीच्या स्त्रातोस्फेरमधील संरक्षक ओझोन परताची धीरगीर अळीव होणे आहे, प्रमुखपणे क्लोरोफ्लुओरोकार्बन (सीएफसी) आणि हॅलॉन्स इत्यादी मानवनिर्मित रसायनांच्या मुक्तपणाच्या कारणांमुळे. ही मोजणारी आपल्या आणि दुष्ट अल्ट्राव्हायलेट (यूव्ही) किरणाच्या पृथ्वीच्या परतवर्ती तळाशी वाढते. ओझोन अशी मोजणारीच्या परिणाम सुत्रधार आहेत आणि त्यामध्ये आरोग्यावरील परिणाम, पारिस्थितिकी विघटने आणि सामग्रीची क्षयस्थिती समाविष्ट आहे. उच्च यूव्ही किरणे माणसांमध्ये त्वचा कॅन्सर, मोत्यांच्या वातांच्या अशा आरोग्यिक परिणामांची वाढी देतात. जीवोपयोगी प्रणाली, विशेषतः जलीय प्रणाली,
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प्रहलाद-सिंह, "अहलूवालिया". "वैश्विक परिदृश्य में पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं का योगदान". Siddhanta's International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities 1, № 6 (2024): 107–23. https://doi.org/10.5281/zenodo.13291451.

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Abstract:
महिलाएं दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, अक्सर वे प्राकृतिक संसाधनों की प्राथमिक संरक्षक और स्थिरता की चैंपियन के रूप में कार्य करती हैं। उनका योगदान जमीनी स्तर की सक्रियता और सामुदायिक नेतृत्व से लेकर नीति-निर्माण और वैज्ञानिक अनुसंधान में प्रभावशाली भूमिकाओं तक है। यह पत्र उन बहुमुखी तरीकों की पड़ताल करता है जिनसे महिलाएं पर्यावरण संरक्षण में योगदान देती हैं, विविध क्षेत्रों के केस स्टडीज पर प्रकाश डालती हैं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों की जांच करती हैं। यह पर्यावरण नीतियों और पहलों में लिंग-समावेशी दृष्टिकोण के महत्व को भी रेखांकित करता है। महिलाओं के प्र
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3

सिंह, सुमन लता. "मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के अनन्य सखा: वानरराज सुग्रीव". SCHOLARLY RESEARCH JOURNAL FOR INTERDISCIPLINARY STUDIES 9, № 67 (2021): 15701–7. http://dx.doi.org/10.21922/srjis.v9i67.8218.

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Abstract:
आदि कवि वाल्मीकि रचित ‘रामायण’ श्री रामचरित पर आधारित विश्व का प्रथम महाकाव्य है। त्रैलोक्य पीड़क रावण के संरक्षण में पल्लवित फलित राक्षसी वृत्तियों का समूल नाशकर मानवीय मूल्यों की स्थापना, लोकरञ्जक श्री राम व्रत धारण कर चुके राघवेन्द्र, सानुज लक्ष्मण सहित श्रीराम का समुद्र से चतुर्दिक घिरी लंकानगरी पर आक्रमण का तात्कालिक कारण रावण द्वारा महादेवी सीता का हरण था। बिना वानरराज सुग्रीव की सहायता के न तो सीता-अनुसंधान सम्भव था, न ही समुद्र पर सेतु बाँध वानरों की विशाल सहित रावण की पूरी तरह सुरक्षित लंकापुरी पर आक्रमण ही। मानवीय मूल्यों के संरक्षक तथा सम्वाहक श्री राम ने रावणोन्मूलन में वानरराज के स
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देवकोटा, गोकर्ण. "गैँडा संरक्षणका लागि सुरक्षा प्रबन्धः चुनौती र अवसर". Unity Journal 5, № 1 (2024): 367–78. http://dx.doi.org/10.3126/unityj.v5i1.63214.

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Abstract:
गैँडा लगायत दुर्लभ वन्यजन्तुको संरक्षणका लागि वि.सं. २०३० मा चितवन राष्ट्रिय निकुञ्जको स्थापना भएपछि संरक्षण सुरक्षामा वि.सं. २०३२ सालबाट खटिरहेका नेपाली सेनाका हाल १५ वटा युनिट, १ शिक्षालय र निर्देशनालयका गरी ८१३६ कुल फौजहरू रहेका छन् । नेपाल सरकारको ब्यावहारिक संरक्षण नीति र नेपाली सेनाको उचित सुरक्षा प्रबन्धका कारण सन् १९६० को दशकमा करिब १०० को हाराहारीमा पुगेको गैँडाको संख्या सन् २०२१ मा ७५२ पुगेको छ । गैँडाको दैनिकी, जीवनचक्र र आनिबानी अत्यन्त संवेदनशील भएको र चोरी शिकार नियन्त्रण तथा अनुकूल वासस्थान गैंडा संरक्षणको पहिलो खुड्किलो भएकाले अनुकुल बासस्थानको उपलब्धता, पर्याप्त पानी तथा घाँसे
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5

Kumar, Sanjaya. "Origin and Development of Hindi Dalit Literature." RESEARCH REVIEW International Journal of Multidisciplinary 9, no. 5 (2024): 306–8. http://dx.doi.org/10.31305/rrijm.2024.v09.n05.037.

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Abstract:
Literature is not only a mirror of the society but also a motivator of change and reform. It presents social problems before the people and also suggests ways to solve them. Apart from the real and beautiful form of the society, it also describes its distorted anomaly and inequality with neutrality. Dalit literature is neither a protector of the caste system nor a supporter of hedonism; its main objective is to establish an egalitarian society. Abstract in Hindi Language: साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं अपितु परिवर्तन और सुधारक का प्रेरक भी है। यह सामाजिक समस्याओं को लोगों के सामने प्रस्तुत करने
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मौ0, शुऐव, та त्यागी सुकृति. "भारत में डाटा संरक्षण सम्बन्धी विधियाँः एक विधिक विश्लेषण". RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES 12, № 1 (2025): 83–86. https://doi.org/10.5281/zenodo.15289364.

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Abstract:
जब विज्ञान और प्रौद्योगिकी में तेजी से विकास और उन्नति होने लगी तो सभी देषों को सम्बन्धित कानून बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम ऐसे कानूनों में से एक है। यह व्यक्ति के निजता के अधिकार की संरक्षता हेतु लाया गया। निजता के अधिकार में व्यक्ति के व्यक्तिगत डाटा का संरक्षण का अधिकार भी शामिल हैं। व्यक्ति की डाटा सुरक्षा वर्तमान में महत्वपूर्ण चिंता का विषय बना हुआ है। डाटा सुरक्षातन्त्र डाटा के अनाधिकृत पहुंच तथा दुर्भावनापूर्ण लोगों से बचाने की बात करता है। भारतीय संविधान अन्य संविधानों के मुकाबले कर्तव्यों से ज्यादा मूलाधिकार की बात करता है। संविधान के अनुच्छेद 19, 21,
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Gadhavi, Manaliben H. "प्राचीन भारत में महिला उद्यमिता : एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य". Journal of Research & Development 17, № 4 (2025): 173–75. https://doi.org/10.5281/zenodo.15553283.

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Abstract:
<strong><em>Abstract:</em></strong> <em>प्राचीन भारत में इस घटना की जड़ों का पता लगाना आवश्यक है। लोकप्रिय धारणा के विपरीत, प्राचीन भारत में महिलाएँ केवल घरेलू कामों तक ही सीमित नहीं थीं, उन्होंने व्यापार, शिल्प और व्यवसाय सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। यह लेख प्राचीन भारत में महिला उद्यमिता के इतिहास पर प्रकाश डालता है, उनके योगदान, चुनौतियों और सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश डालता है, जो ऐतिहासिक ग्रंथों और विद्वानों के शोध के संदर्भों द्वारा समर्थित है। </em>
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त्रिपाठी Tripathi, गीता थपलिया Geeta Thapaliya. "संरक्षण कविता यात्रा (२०५३) मा पर्यावरण [Environment in Conservation Poetry Journey (2053)]". SIRJANĀ – A Journal on Arts and Art Education 7, № 1 (2021): 75–83. http://dx.doi.org/10.3126/sirjana.v7i1.39885.

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Abstract:
‘संरक्षण कविता यात्रा (२०५३)’ सङ्ग्रहभित्र दस जना कविहरू हरिदेवी कोइराला, जे. अस्मिता, भूपिन व्याकुल, धनप्रसाद तामाङ, नवराज अधिकारी, सरस्वती श्रेष्ठ ‘सरू’, सुकुम शर्मा, रमेश श्रेष्ठ, पुष्प आचार्य तथा सरूभक्तका कविताहरू सङ्कलित छन् । यसभित्र पाँच जना स्थानीय सहभागीका प्रकृतिमुखी लयात्मक सिर्जनालाई पनि समावेश गरिएको छ । प्रकृति संरक्षणको मुख्य ध्येय बनाएरआरम्भ गरिएको यस अभियानका मुख्य परिकल्पनाकार कवि सरूभक्त हुन् । प्रस्तुत अध्ययन संरक्षणकविता यात्रा (२०५३) का कवितामा प्रयुक्त पर्यावरणीय चेतनाको खोजीसँग सम्बद्ध रहेको छ । यसकानिम्ति संरक्षण कविता यात्रा (२०५३) मा सङ्कलित कविताहरूबाट प्रतिनिधि सा
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गौतम Gautam, बद्रीनारायण Badri Narayan. "बहुआयामिक व्यक्तित्व तुलसीराम वैद्य". HISAN: Journal of History Association of Nepal 10, № 1 (2024): 158–73. https://doi.org/10.3126/hisan.v10i1.74917.

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Abstract:
काठमाडौँको सम्भ्रान्त भारदारी परिवारमा जन्मिएर शिक्षादिक्षाको उचित अवसर पाई आकर्षक प्रशासनिक पदमा जान ठिक्क परेका बेला पिताको वचन र मार्गदर्शनलाई शिरोधार्य गरी धेरैको रोजाइमा नपर्ने प्राध्यापन पेशामा प्रवेश गरेका तुलसीराम वैद्य आफ्नो मेहनत र कर्मबाट गुरुहरूका गुरु भन्दै स्मरण गरिने व्यक्तित्व बन्न सफल भएका व्यक्ति हुन् । आफ्ना कर्महरूले गर्दा नेपालका प्रख्यात इतिहासकार, ऐतिहासिक अध्ययन अनुसन्धानलाई अन्वेषणात्मक दृष्टिकोणबाट अगाडि बढाएर राष्ट्रिय इतिहास निर्माणको आधार तयार पार्न लागि पर्ने प्राज्ञ, आफ्ना घरायसी विषयवस्तु आवश्यकतालाई भन्दा शोधार्थी एवं ज्ञानात्मक भोक लिएर आउनेहरूलाई प्राथमिकता द
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आशा, सक्सेना स. ुनीता चैहान. "ज ैव विविधता और उसका संस्थितिक एवं असंस्थितिक स ंरक्षण". International Journal of Research - GRANTHAALAYAH 3, № 9 (Special Edition) (2017): 1–2. https://doi.org/10.5281/zenodo.838910.

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Abstract:
सामान्य शब्दों में जैव विविधता से तात्पर्य सजीवों (वनस्पति और प्राणी) म ें पाए जान े वाले जातीय भेद से ह ै। व्हेल मछली से लेकर सूक्ष्मदर्षी जीवाणु तक मन ुष्य से लेकर फफंूद तक ज ैव विविधता का विस्तार पाया जाता है। पर्या वरणीय ह्रास क े कारण जैव विविधता का क्षय हुआ है। मानव के अनियंत्रित क्रियाकलापा ें, बिजली, लालच और राजनीतिक कारणांे से जैव विविधता का विनाष बहुत त ेजी स े हो रहा ह ै। लगातार बढ ़ती जनसंख्याा, नगरीय क्ष ेत्रों की वृद्धि बाॅधों, भवनो ं तथा सड ़कांे का निर्मा ण, कृषि के लिए वना ें का कटाव, खदाना ें की खुदाई आदि ए ेसे कुछ उदाहरण है जिनसे प ्राक ृतिक संसाधनों में कमी आई है। जैव विविध
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