Academic literature on the topic 'स्वतंत्रता'

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Journal articles on the topic "स्वतंत्रता"

1

Yadav, Indu. "A Study on the Freedom of the Press in the Indian Constitution." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 10, no. 2 (2023): 19–23. http://dx.doi.org/10.53573/rhimrj.2023.v10n02.005.

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Abstract:
We get the introduction of the freedoms provided in the Indian Constitution in the preamble itself. Five types of freedoms have been provided in the preamble, freedom of thought, expression, belief, religion and worship. In these also the main part of our study is the freedom of the press. Which is freedom of expression in the constitution i.e. Anu. contained in Part 1 of 19 itself. The press is considered as the fourth pillar of the constitution because the freedom of the press is especially important in the strengthening of democracy. For this reason, the press and its freedom have a history
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2

मीणा, आशुतोष. "भारतीय न्यायपालिका पर मीडिया ट्रायल का प्रभावः आलोचनात्मक विश्लेषण". Lokprashasan 16, № 1 (2024): 34–44. http://dx.doi.org/10.32381/lp.2024.16.01.3.

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Abstract:
निष्पक्ष न्याय के लिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता आवश्यक है। भारतीय संविधान में स्वतंत्र न्यायपालिका का प्रावधान है। न्यायपालिका की कार्यवाही में विधायिका व कार्यपालिका का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए ताकि न्यायपालिका निष्पक्ष निर्णय कर सके। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत नागरिकों को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। इस स्वतंत्रता के आधार पर मीडिया समाचारों की रिपोर्टिंग करता है। मीडिया द्वारा अदालतों में विचाराधीन मामलों की सनसनीखेज रिर्पोटिंग कर दी जाती है जिससे न्यायपालिका के पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने व न्यायिक निर्णय प्रभावित होने की संभावना रहती है। हाई प्रोफाइल मामलों में मीडिय
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3

मौर्य, रामयज्ञ, та नितिन कुमार. "सोशल मीडिया: स्वतंत्रता बनाम स्वच्छन्दता". SCHOLARLY RESEARCH JOURNAL FOR HUMANITY SCIENCE AND ENGLISH LANGUAGE 9, № 48 (2021): 11902–6. http://dx.doi.org/10.21922/srjhsel.v9i48.8257.

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Abstract:
सोशल मीडिया आज एक बडा सामाजिक मंच है जहाँ हर कोई व्यक्ति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिये स्वतंत्र है और विशेष यह कि बिना किसी नियंत्रण और हस्तक्षेप के। सोशल मीडिया पर लिखना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण अधिकार से जुड़ गया है। सोशल मीडिया ने प्रत्येक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है लेकिन भारतीय संविधान में यह स्वतंत्रता देश के प्रत्येक नागरिक को पूर्व में ही प्राप्त है। किंतु इससे पहले अभिव्यक्ति के पर्याप्त मंच और सुलभ साधन नहीं थे, पर्याप्त अवसर न मिलने तथा जानकारी के अभाव के कारण आम आदमी अपनी आवाज या तो उठा नहीं पाता था या उसे दबा दिया जाता था। आम तौर पर समाचार
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डॉ., अर्चना चंद्रकांत पत्की. "स्वाधीनता आंदोलन और दुष्यंतकुमार का काव्य". 'Journal of Research & Development' 15, № 4 (2023): 34–36. https://doi.org/10.5281/zenodo.7695458.

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Abstract:
‘आजादी, स्वतंत्रता’ हमारा जन्मसिद्ध अधिकार हैl चाहे मनुष्य हो या पशुपक्षी उसे छिन ने का किसी को भी अधिकार नहीl हमारे देश को स्वतंत्र करने के लिए कईयौ का बलिदान रहा हैl ब्रिटिश साम्राज्य से 1947 तक की बात करेंगे तो हम देखते है कि हमारा देश गुलामी से जुझता रहा हैl आजादी को लेकर देश मे व्याप्त उथल-पुथल को हिंदी कवियों ने अपनी कविता का विषय बनाकर  साहित्य के क्षेत्र में दोहरे दायित्व का निर्वाहन कर साहित्य को नई दिशा दी हैl हिंदी कवियों ने अपने कविता के माध्यम से स्वदेश व स्वधर्म की रक्षा के लिये  राष्ट्रीय चेतना का आधार बनायाl स्वतंत्रता आंदोलन के आरंभ से लेकर स्वतंत्रता &nb
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शिल्पी, मंडल. "स्वतंत्रता सेनानी नंदलाल भकत". 'Journal of Research & Development' 15, № 1 (2023): 5–10. https://doi.org/10.5281/zenodo.7575728.

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Abstract:
15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिली। इस स्वतंत्रता की उपलब्धि के पीछे अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों का आत्म-बलिदान था। राम मोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर, बंकिमचंद्र चटर्जी, विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, नजरुल इस्लाम, शरतचंद्र चटर्जी, खुदीराम बोस, मातंगिनी हाजरा, विनॉय-बादल-दिनेश और अन्य इस मिट्टी पर पैदा हुए थे। इन सभी महापुरुषों और कुलीनों ने बंगाल और भारत के निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाई। कामदाकिंगकर मुखोपाध्याय (दिवंगत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पिता), ताराशंकर बंद्योपाध्याय, दुखरीबाला देवी (उन्हें मासिमा के नाम से जाना जाता था), ननीबाला देवी, उमा दत्ता, दिनकर कौशिक, सुमित्रानंद
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6

शर्मा, वन्दना. "भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका का मूल्यांकन". Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education 21, № 5 (2024): 271–79. http://dx.doi.org/10.29070/a9bn2t22.

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Abstract:
भारत को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता एक लंबे और कठिन संघर्ष के बाद मिली। इस संघर्ष में अनगिनत भारतीयों ने अपने प्राणों की आहुति दी और देश में व्यापक स्तर पर संपत्ति का विनाश हुआ। स्वतंत्रता प्राप्ति के सात दशकों से अधिक समय बाद भी, स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को केवल स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, और गांधी जयंती जैसे अवसरों पर ही याद किया जाता है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं और पत्रकारिता ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस शोध पत्र में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और जनसंचार माध्यमों के योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। विदेशी सरकार द्वार
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कुमारी, काजल. "गोखले और गांधी: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बैचारिकी के दो ध्रुव का समन्वय". INTERNATIONAL JOURNAL OF SCIENTIFIC RESEARCH IN ENGINEERING AND MANAGEMENT 09, № 07 (2025): 1–9. https://doi.org/10.55041/ijsrem51503.

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Abstract:
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम अनेक विचारधाराओं, प्रवृत्तियों और रणनीतियों का संगम था। इस संग्राम में दो प्रमुख वैचारिक धाराएँ विशेष रूप से उभरकर सामने आती हैं—गोपाल कृष्ण गोखले का सुधारवादी दृष्टिकोण और महात्मा गांधी का सत्याग्रही दृष्टिकोण। यद्यपि दोनों नेताओं का अंतिम उद्देश्य भारत की स्वतंत्रता था, किन्तु दोनों की रणनीति, साधन और दृष्टिकोण भिन्न थे। यह शोध आलेख इन दोनों विचारधाराओं की तुलनात्मक विवेचना करता है और उनके प्रभावों की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करता है। गोपाल कृष्ण गोखले एक उदारवादी नेता थे, जिन्होंने संवैधानिक सुधार, विधायी परिषदों में भागीदारी, ब्रिटिश सरकार से संवाद और शांतिपूर्
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Rathore, Shipra, and Rupam Soni. "Freedom of Expression in Various Political Systems in today’s Digital Age: A Comparative Case Study." RESEARCH HUB International Multidisciplinary Research Journal 12, no. 4 (2025): 17–23. https://doi.org/10.53573/rhimrj.2025.v12n4.003.

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Abstract:
This research paper is an attempt to conduct a comparative analysis of the status of freedom of expression in the current global scenario, focusing on the governance systems of India, the United States of America, Russia, and China. Freedom of expression is a fundamental pillar of democracy, empowering citizens to express their views freely and ensure governmental accountability. This study employs the theoretical frameworks of liberalism, authoritarianism, and deliberative democracy to understand how different political systems and cultural heritages influence this right. The comparative anal
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9

प्रीति, भारती. "बिहार की महिलाओं के संघर्ष: स्वतंत्रता संग्राम में उनका प्रभाव और योगदान". Chitransh Academic & Research 01, № 02 (2025): 162–72. https://doi.org/10.5281/zenodo.15305331.

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Abstract:
यह शोध पत्र "बिहार की महिलाओं के संघर्ष: स्वतंत्रता संग्राम में उनका प्रभाव और योगदान" पर आधारित है, जिसमें बिहार की महिलाओं की स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका का विश्लेषण किया गया है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बिहार की महिलाओं ने न केवल प्रमुख आंदोलनों में भाग लिया, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक बदलावों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। गांधीजी के नेतृत्व में महिलाओं ने सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे आंदोलनों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। इस शोध में प्रमुख महिला नेताओं जैसे सरला देवी, इंदु देवी और बासंती देवी के योगदान को विशेष रूप से उजागर किया गया है, जिन्होंने न केवल राजनीत
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Bhole, R.V. "भारतीय संत और स्वतंत्रता आंदोलन". Journal of Research & Development 16, № 6 (2024): 17–19. https://doi.org/10.5281/zenodo.12263438.

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Abstract:
भूमिका :भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रेरक अध्याय है जिसमें हिंदू सन्यासी व मुस्लिम फकीरों ने हथियार उठाएं और दोनों ने मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी इसे भारत में सन्यासी फकीर विद्रोह के रूप में जाना जाता है स्वतंत्रता संग्राम में जिन लाखों साधुओं ने अपने लोकगीतों एवं लोक कथाओं के माध्यम से आजादी की लग जागी राखी भारतीय इतिहास के पाठ्यक्रमों से हुए विलुप्त हैं भारतीय इतिहास का नॉरेटिव बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया गया हैl  1947 में किसी नए देश ने जन्म नहीं लिया क्योंकि भारतवर्ष की परिकल्पना प्राचीन काल से ही रही है भारतीय संतों में सबसे प्रमुख स्वामी विवेकानंद हैं जो एक प्रखर चि
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Books on the topic "स्वतंत्रता"

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पवार, जयसिंगराव. भारतीय स्वतंत्र्य ... Nirali Prakashan, 2020.

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